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	<title>Government &#8211; Rahasyalok | रहस्यलोक</title>
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	<description>Hindi News &#38; Views</description>
	<lastBuildDate>Tue, 12 May 2026 17:28:28 +0000</lastBuildDate>
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	<title>Government &#8211; Rahasyalok | रहस्यलोक</title>
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		<title>राज्यपाल की अध्यक्षता में जनभवन में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ समीक्षा बैठक हुई संपन्न।</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 17:28:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Government]]></category>
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					<description><![CDATA[पत्र सूचना शाखा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0 (राज्यपाल सूचना परिसर) राज्यपाल की अध्यक्षता में जनभवन में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ समीक्षा बैठक हुई संपन्न। &#8212;&#8212; राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के 1 जुलाई 2026 को शताब्दी वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शताब्दी वर्ष लोगो, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा</p>



<p class="wp-block-paragraph">सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0</p>



<p class="wp-block-paragraph">(राज्यपाल सूचना परिसर)</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्यपाल की अध्यक्षता में जनभवन में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ समीक्षा बैठक हुई संपन्न।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के 1 जुलाई 2026 को शताब्दी वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शताब्दी वर्ष लोगो, स्मारक सिक्का, विशेष डाक टिकट एवं “वाणी” पुस्तिका का विमोचन किया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रस्तुतिकरण में गतिविधि आधारित एवं कैप्शन सहित फोटोग्राफ सम्मिलित किए जाए</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;-</p>



<p class="wp-block-paragraph">विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों द्वारा आयोजित गतिविधियों में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;-</p>



<p class="wp-block-paragraph">पॉक्सो एक्ट से प्रभावित बालिकाओं के लिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में स्मार्ट क्लासेस, कंप्यूटर प्रशिक्षण, जूडो, सिलाई एवं अन्य कौशल विकास कार्यक्रम का हो संचालन</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;-</p>



<p class="wp-block-paragraph">महाविद्यालयों में समूह ग एवं घ की रिक्त पदों पर मेरिट के आधार पर समयबद्ध भर्ती सुनिश्चित किये जायें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">-राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊः 12 मई, 2026प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में जनभवन में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से संबद्ध शासकीय एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों के साथ समीक्षा बैठक संपन्न हुई।<br>बैठक में प्रस्तुतिकरण के दौरान महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, आधारभूत संरचना, नामांकन वृद्धि, शोध एवं विभिन्न गतिविधियां, संचालित पाठ्यक्रमों, छात्र-छात्राओं की संख्या, विषयवार नामांकन, शिक्षकों की उपलब्धता, रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती, स्मार्ट क्लासेस, अकादमिक एवं गैर अकादमिक गतिविधियों, नैक एवं अन्य रैंकिंग में महाविद्यालयों की स्थिति तथा गुणवत्ता सुधार के प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की गई।<br>इस अवसर पर विश्वविद्यालय के 1 जुलाई 2026 को शताब्दी वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शताब्दी वर्ष लोगो का विमोचन राज्यपाल जी द्वारा किया गया। साथ ही स्मारक सिक्का, विशेष डाक टिकट एवं “वाणी” पुस्तिका का भी विमोचन किया गया।<br>बैठक में राज्यपाल जी ने प्रस्तुतिकरण की गुणवत्ता में सुधार हेतु आवश्यक निर्देश देते हुए कहा कि गतिविधि आधारित एवं कैप्शन सहित फोटोग्राफ सम्मिलित किए जाएं। पुस्तकालयों में दुर्लभ पुस्तकों की डिस्प्ले, स्वच्छ एवं हरित परिसर, सोलर पैनल तथा विभिन्न नवाचारों को भी प्रस्तुतीकरण में प्रदर्शित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने समर्थ पोर्टल के प्रभावी क्रियान्वयन एवं उच्च रैंकिंग प्राप्त करने हेतु निरंतर प्रयास किए जाने पर बल दिया।<br>राज्यपाल महोदया ने महाविद्यालयों में समूह ‘ग’ एवं ‘घ’ के रिक्त पदों पर चिंता व्यक्त करते हुए मेरिट के आधार पर समयबद्ध भर्ती सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय आपसी समन्वय के साथ बैठकर समस्याओं एवं सुधार की संभावनाओं पर चर्चा करें तथा लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करें।<br>उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों द्वारा आयोजित गतिविधियों में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। “मां के नाम पर पेड़” अभियान को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने पौधरोपण के माध्यम से मातृ सम्मान का संदेश प्रसारित करने का आह्वान किया।<br>राज्यपाल जी ने&nbsp;&nbsp;पॉक्सो&nbsp; एक्ट से प्रभावित बालिकाओं के लिए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में स्मार्ट क्लासेस, कंप्यूटर प्रशिक्षण, जूडो, सिलाई एवं अन्य कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जाने की अपील की।<br>इस अवसर पर राज्यपाल जी ने सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अवसर पर देश भर में वर्ष भर आयोजित होने वाले स्मरण उत्सव कार्यक्रमों को सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में आयोजित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री जी की अपील का उल्लेख करते हुए ईंधन की खपत कम करने, अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने, खाद्य तेल के उपयोग में कमी लाने, एक वर्ष तक सोना न खरीदने, स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने तथा प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया।<br>राज्यपाल जी ने कहा कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को निरंतर संवाद एवं समीक्षा की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता सुधार एवं नैक तथा एनआईआरएफ रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन के लिए लगातार मैराथन बैठकें एवं विस्तृत प्रस्तुतिकरण आयोजित किए गए, जिसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।<br>प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेंद्र उपाध्याय ने समीक्षा बैठक को “मिनी कार्यशाला” की संज्ञा देते हुए कहा कि प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के नेतृत्व एवं सतत मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय गुणवत्ता प्राप्त की है।<br>उन्होंने कहा कि राज्यपाल जी द्वारा विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के साथ निरंतर आयोजित मैराथन बैठकों, विस्तृत समीक्षा एवं गुणवत्ता उन्मुख मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप शिक्षा के क्षेत्र में कभी पिछड़ा माना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज सर्वाधिक ग्रेड प्राप्त करने वाले विश्वविद्यालयों वाला राज्य बनकर उभरा है।<br>इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी, श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में मियावाकी पद्धति पर आधारित सघन वृक्षारोपण अभियान चलाए जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण एवं हरित परिसर निर्माण की दिशा में यह एक प्रभावी पहल सिद्ध होगी।<br>डॉ. बोबडे ने बैठक के उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता, आधारभूत संरचना, नवाचार, शोध, छात्र सहभागिता तथा नैक एवं एनआईआरएफ रैंकिंग में सुधार हेतु निरंतर समीक्षा एवं संवाद आवश्यक है। उन्होंने संस्थानों को गुणवत्ता उन्मुख कार्य संस्कृति विकसित करने पर बल दिया।<br>इस अवसर पर डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने राज्यपाल जी के कुशल मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि माननीय राज्यपाल जी का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय परिवार में नई ऊर्जा एवं नवीन ज्ञान का संचार करता है तथा उनके निर्देशन में विश्वविद्यालय सतत प्रगति एवं गुणवत्ता सुधार की दिशा में कार्य कर रहा है।<br>इस अवसर पर विश्वविद्यालय व उससे सम्बद्ध राजकीय तथा वित्त पोषित महाविद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रतिनिधि गण उपस्थित रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;&nbsp; &nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">संपर्क सूत्रः<br>श्री कृष्ण कुमार, सूचना अधिकारी/जन भवन<br>मो0-9454468250</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>राज्यपाल की अध्यक्षता में जन भवन में बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा की समीक्षा बैठक सम्पन्न</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 17:27:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Government]]></category>
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					<description><![CDATA[पत्र सूचना शाखा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0 (राज्यपाल सूचना परिसर) &#8212;&#8212; राज्यपाल की अध्यक्षता में जन भवन में बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा की समीक्षा बैठक सम्पन्न &#8212;&#8212; राज्यपाल ने कृषि नवाचार, ऑर्गेनिक खेती एवं कृषक आय वृद्धि पर दिया बल &#8212;&#8212; कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के लिए लघु उपकरणों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा</p>



<p class="wp-block-paragraph">सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0</p>



<p class="wp-block-paragraph">(राज्यपाल सूचना परिसर)</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्यपाल की अध्यक्षता में जन भवन में बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, बांदा की समीक्षा बैठक सम्पन्न</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्यपाल ने कृषि नवाचार, ऑर्गेनिक खेती एवं कृषक आय वृद्धि पर दिया बल</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के लिए लघु उपकरणों एवं तकनीकों के विकास पर बल</p>



<p class="wp-block-paragraph">-राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊः 12 मई, 2026प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आज जन भवन में बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की समीक्षा बैठक एवं प्रस्तुतीकरण संपन्न हुआ।<br>बैठक में राज्यपाल जी ने प्रस्तुतीकरण हेतु लगाए गए फोटोग्राफ्स को उचित कैप्शन सहित प्रदर्शित किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों, केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं तथा प्राप्त बजट के सदुपयोग के निर्देश दिये। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा बीज उत्पादन एवं किसानों में उसके वितरण की व्यवस्था की भी समीक्षा की।<br>उन्होंने स्थानीय स्तर पर निर्मित कृषि उत्पादों एवं तकनीकों को स्थानीय किसानों के लिए सुलभ बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बजट एवं आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन की कार्यसंस्कृति विकसित किए जाने की आवश्यकता है।<br>राज्यपाल जी ने विशेष रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की वास्तविक समस्याओं एवं आवश्यकताओं की पहचान कर उसी के अनुरूप योजनाओं का निर्माण किया जाए तथा उन्हें समयबद्ध सरकारी सहायता एवं वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जाए।<br>बैठक में केंद्र सरकार की धन-धान्य योजना एवं दलहन-तिलहन योजना पर भी चर्चा की गई। राज्यपाल जी ने कृषि उत्पादन एवं कृषि सहायता हेतु छोटे-छोटे यंत्रों के निर्माण, उनके उपयोग तथा उत्पादन वृद्धि में उनकी भूमिका की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के लिए लघु उपकरणों एवं तकनीकों के विकास पर बल दिया।<br>राज्यपाल जी ने ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताते हुए विद्यार्थियों एवं कृषकों को इससे जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत ऐसे विद्यार्थी जिनके पास कृषि भूमि उपलब्ध है, वे ऑर्गेनिक खेती के माध्यम से नवाचार एवं आय सृजन के मॉडल विकसित करें।<br>उन्होंने कहा कि परिवर्तन एक क्रमिक प्रक्रिया है तथा उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए आय सृजन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों द्वारा अनेक नवाचार किए जा रहे हैं, किंतु उनकी प्रभावी ब्रांडिंग एवं प्रचार-प्रसार आवश्यक है। राज्यपाल जी ने कृषि यंत्र निर्माण करने वाली कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर तकनीकी नवाचारों को व्यापक स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।<br>बैठक में कृषि विकास, किसानों के मार्गदर्शन, अनुसंधान तथा नवाचार को बढ़ावा देने के विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।<br>बैठक में राज्यपाल जी ने कुछ पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों के न्यूनतम नामांकन पर चिंता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय प्रशासन को नामांकन बढ़ाने हेतु प्रभावी प्रयास किए जाने के निर्देश दिए। राज्यपाल जी ने अनुसंधान गतिविधियों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में किए जा रहे शोध कार्यों के सकारात्मक परिणाम समाज एवं कृषकों तक पहुंचने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन अनुसंधानों से उपयोगी एवं प्रभावी परिणाम प्राप्त हो रहे हैं, उन्हें आगे बढ़ाते हुए व्यवहारिक स्तर पर लागू किया जाए।<br>उन्होंने कहा कि राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, भारत सरकार एवं नीति आयोग की सहभागिता से एक कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें विश्वविद्यालयों की समस्याओं, चुनौतियों एवं उनके समाधान पर विस्तार से विचार-विमर्श किया जाएगा।<br>बैठक में राज्यपाल जी ने माननीय प्रधानमंत्री जी की अपील के प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख करते हुए उपस्थित विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय प्रतिनिधियों से पेट्रोल एवं डीजल की खपत कम करने, एक वर्ष तक सोना न खरीदने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने, वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्साहित करने, खाद्य तेल की खपत कम करने तथा स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की।<br>इस अवसर पर प्रदेश के कृषि राज्य मंत्री श्री बलदेव सिंह औलख ने कहा कि प्रदेश की जलवायु के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण बीज विकसित करने की दिशा में कार्य करें। &nbsp;<br>इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर)&nbsp; डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने बैठक के उद्देश्यों को रेखांकित किया।<br>इस अवसर पर बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एस.वी.एस. राजू सहित विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य, अध्यापक एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">संपर्क सूत्रः<br>श्री कृष्ण कुमार, सूचना अधिकारी/जन भवन<br>मो0-9454468250</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर की जन भवन में नैक तैयारी से संबंधित समीक्षा बैठक सम्पन्न</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 17:26:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Government]]></category>
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					<description><![CDATA[पत्र सूचना शाखा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0 (राज्यपाल सूचना परिसर) &#8212;&#8212;- सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर की जन भवन में नैक तैयारी से संबंधित समीक्षा बैठक सम्पन्न &#8212;&#8212; विश्वविद्यालय में वोकेशनल कोर्स एवं मेंटरिंग व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश &#8212;&#8211; प्रस्तुतीकरण में सभी आवश्यक बिंदुओं को साक्ष्य एवं प्रामाणिक दस्तावेजों सहित सुव्यवस्थित रूप में सम्मिलित &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा</p>



<p class="wp-block-paragraph">सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0</p>



<p class="wp-block-paragraph">(राज्यपाल सूचना परिसर)</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;-</p>



<p class="wp-block-paragraph">सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर की जन भवन में नैक तैयारी से संबंधित समीक्षा बैठक सम्पन्न</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">विश्वविद्यालय में वोकेशनल कोर्स एवं मेंटरिंग व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8211;</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रस्तुतीकरण में सभी आवश्यक बिंदुओं को साक्ष्य एवं प्रामाणिक दस्तावेजों सहित सुव्यवस्थित रूप में सम्मिलित किया जाए</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8211; विशेष कार्याधिकारी, श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर)</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8211;</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 12 मई, 2026<br>उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की प्रेरणा से आज जन भवन में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर की नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) मूल्यांकन की तैयारी के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विशेष कार्याधिकारी, श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ० सुधीर महादेव बोबडे ने की।<br>बैठक में विश्वविद्यालय द्वारा नैक के विभिन्न मापदण्डों एवं प्रत्येक एट्रीब्यूट के अंतर्गत मैट्रिक्सवार की गई तैयारियों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण में विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध विभिन्न शैक्षणिक, सहशैक्षणिक एवं प्रशासनिक सुविधाओं के साथ-साथ संचालित अन्य गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया गया।<br>विशेष कार्याधिकारी, श्री राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की नैक तैयारियों की गहन समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि प्रस्तुतीकरण में सभी आवश्यक बिंदुओं को साक्ष्य एवं प्रामाणिक दस्तावेजों सहित सुव्यवस्थित रूप में सम्मिलित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गतिविधि से संबंधित जियो टैग फोटोग्राफ्स उचित कैप्शन सहित प्रदर्शित किए जाएं।<br>उन्होंने निर्देशित किया कि विश्वविद्यालय में वोकेशनल कोर्सेज संचालित किए जाएं तथा ऐसे कोर्सेज भी, जो विशेष रूप से छात्राओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान करते हों, उन्हें भी प्रस्तुतीकरण में शामिल किया जाए, साथ ही ऐसे पाठ्यक्रमों के प्रमाणपत्र, रोजगार सृजन एवं विद्यार्थियों को प्राप्त लाभ का विवरण भी प्रदर्शित किया जाए।<br>बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि पोटेंशियल इम्प्लॉयर, अभिभावकों एवं संबद्ध महाविद्यालयों से प्राप्त फीडबैक को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुतीकरण में सम्मिलित किया जाए। ऑनलाइन कक्षाओं से लाभान्वित विद्यार्थियों की संख्या एवं उनसे संबंधित विवरण भी शामिल किए जाएं।<br>विशेष कार्याधिकारी, श्री राज्यपाल ने कहा कि सीनियर विद्यार्थियों द्वारा जूनियर विद्यार्थियों को अध्ययन सहयोग, प्रॉब्लम सॉल्विंग सेशन, स्लो लर्नर्स हेतु विशेष कक्षाएं एवं उनके समयबद्ध कार्यक्रम को भी नैक प्रस्तुतीकरण में शामिल किया जाए। साथ ही सेल्फ असेसमेंट, पीयर असेसमेंट एवं वोकेशनल असेसमेंट से संबंधित गतिविधियों को भी प्रदर्शित करने के निर्देश दिए।<br>उन्होंने विश्वविद्यालय में कार्यरत काउंसलर्स एवं मेंटर्स की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु प्रभावी मेंटरिंग व्यवस्था विकसित की जाए। प्रस्तुतीकरण में छोटी-छोटी कमियों एवं त्रुटियों को दूर करने के भी निर्देश दिए गए।<br>बैठक में यह भी निर्देशित किया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा नेपाल, भूटान एवं अन्य पड़ोसी देशों के शिक्षण संस्थानों के साथ खेल प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सेमिनार एवं एमओयू जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए चाहिए तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों के अंतर्गत प्रस्तुतीकरण में सम्मिलित किया जाए।<br>उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित सामाजिक गतिविधियों की एक्टिविटी-वाइज रिपोर्ट, प्रशिक्षण कार्यक्रमों की रिपोर्ट, उच्च शिक्षा में प्रवेश प्राप्त विद्यार्थियों का विवरण तथा पुरा छात्र संबंधी जानकारी को भी प्रस्तुतीकरण में समाहित करने के निर्देश दिए।<br>डॉ० सुधीर महादेव बोबडे ने विश्वविद्यालय परिसर में मियावाकी वन विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि जन भवन में राज्यपाल जी की प्रेरणा से स्थापित मियावाकी वन अत्यंत तीव्र गति से विकसित हो रहा है तथा यहां पक्षियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।<br>इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी (शिक्षा) डॉ० पंकज एल0 जानी, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो० कविता शाह, नैक तैयारी हेतु विश्वविद्यालय की गठित टीम के सभी सदस्य एवं जन भवन के अधिकारी उपस्थित रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;-सम्पर्क सूत्र<br>दिलशाद अहमद-सूचना अधिकारी/जन भवन<br>9696795957</p>
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		<title>PN 12-05-2026</title>
		<link>https://rahasyalok.com/pn-12-05-2026/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 12 May 2026 17:26:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Government]]></category>
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					<description><![CDATA[पत्र सूचना शाखासूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 में 06 जनपदों में स्थित रामलीला मैदानों का विकास, विस्तार, सौन्दर्यीकरण तथा जीर्णोद्धार किया जायेगा-जयवीर सिंह &#160;लखनऊ: 12 मई, 2026 संस्कृति विभाग उ0प्र0 द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 06 जनपदों में वृहद परियोजनाएं प्रस्तावित की गयी है। इसके अंतर्गत सार्वजनिक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 में 06 जनपदों में स्थित रामलीला मैदानों का विकास, विस्तार, सौन्दर्यीकरण तथा जीर्णोद्धार किया जायेगा-जयवीर सिंह</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">संस्कृति विभाग उ0प्र0 द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 06 जनपदों में वृहद परियोजनाएं प्रस्तावित की गयी है। इसके अंतर्गत सार्वजनिक रामलीला मैदानों स्थलों का विकास और विस्तार, जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यीकरण कार्य आदि कराया जायेगा।<br>यह जानकारी आज यहां प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि जनपद शाहजहांपुर के अंतर्गत टाउन एरिया कोट में रामलीला मैदान का विकास, विस्तार, जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यीकरण के कार्य कराये जायेगे। इसी प्रकार जनपद गोरखपुर के नगर क्षेत्र बड़हलगंज में रामलीला मैदान का विकास, विस्तार, जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यीकरण आदि कार्य कराया जायेगा।<br>पर्यटन मंत्री ने बताया कि जनपद फिरोजाबाद की विधानसभा जसराना के कस्बा खैरगढ़ स्थित रामलीला स्थल का विकास, विस्तार, जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यीकरण का कार्य कराया जायेगा। इसी प्रकार जनपद फर्रूखाबाद की नगर पंचायत कमालगंज में रामलीला मैदान का विकास, विस्तार, जीर्णोद्धार एवं सौन्दर्यीकरण आदि कार्य कराये जायेगे। इसी तरह जनपद लखीमपुर खीरी में ग्राम कुकुरा विकास खण्ड बाकेगंज विधानसभा पलिया लखीमपुर खीरी के रामलीला मैदान की बाउण्ड्रीवाल एवं सुविधाओं का विकास किया जायेगा।<br>पर्यटन मंत्री ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में रामलीला मैदान की स्थिति ठीक नहीं है। इसको दृष्टिगत रखते हुए इन्हें वित्तीय वर्ष 2026-27 में बड़ी परियोजनाओं में शामिल करके सुरक्षा, विकास आदि के कार्य कराये जायेगे। रामलीला मैदानों की दीवारों पर रामायण के प्रसंग से संबंधित चित्रलेखन आदि भी किया जायेगा। रामलीला का मंचन भारतीय संस्कृति से जुड़ा हुआ है। श्रद्धालु मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को रामलीला के माध्यम से देखते हैं। युवा पीढ़ी के लिए यह एक सांस्कृतिक चेतना है। इसी दृष्टिकोण से रामलीला मैदानों को संरक्षित एवं पुनरोद्धार का कार्य किया जायेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- केवल</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/02ः40 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">कृषि मंत्री ने रबी फसलों के खरीद केंद्रों की सुस्त कार्यप्रणाली पर जताई कड़ी नाराजगी</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता और खरीफ बीज वितरण स्थिति की गहन समीक्षा की</p>



<p class="wp-block-paragraph">पी.एम. कुसुम और खेत तालाब योजना के माध्यम से सिंचाई क्षमता बढ़ाने के निर्देश</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने आज कृषि भवन के सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत रबी फसलों की खरीद, उर्वरक उपलब्धता, खरीफ बीज वितरण और सिंचाई योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मंत्री जी ने रबी सीजन में क्रय एजेंसियों द्वारा खरीद की धीमी और लचर प्रगति पर खरीद एजेंसियो को कड़ी फटकार लगाई और खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए।<br>मूल्य समर्थन योजना (2026-27) की समीक्षा करते हुए कृषि मंत्री जी ने बताया कि वर्तमान में 280 क्रय केंद्र संचालित हैं, जिनसे अब तक 2,759 किसान लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने नैफेड, एनसीसीएफ सहित राज्य की खरीद एजेंसियों (यूपीपीसीएफ, यूपीपीसीयू आदि) को निर्देशित किया कि वे निर्धारित लक्ष्यों (मसूर 6.77 लाख मी.टन, सरसों 5.30 लाख मी.टन, चना 2.24 लाख मी.टन और अरहर 1.13 लाख मी.टन) की प्राप्ति के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य करें।<br>सिंचाई योजनाओं की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सोलर पम्प योजना (पीएम कुसुम) के तहत वर्ष 2013 से 2026 तक कुल 1,01,255 सोलर पम्पों की स्थापना की गई है, जिसमें से रिकॉर्ड 91,104 पम्पों की स्थापना वर्तमान सरकार (2017-2026) के कार्यकाल में हुई है। वर्ष 2024-25 में सर्वाधिक 28,804 पम्पों का लक्ष्य पूर्ण किया गया। किसानों को 2 एचपी से 10 एचपी तक के पम्पों पर 60 प्रतिशत अनुदान (30 प्रतिशत केंद्र तथा 30 प्रतिशत राज्य) प्रदान किया जा रहा है, जिससे कृषि लागत में कमी आ रही है।<br>इसके अतिरिक्त, वर्षा जल संचयन हेतु खेत तालाब योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए 2,905 तालाबों और 270 पम्पसेटों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के अंतर्गत तालाब निर्माण पर रू0 52,500 का अनुदान डी.बी.टी. के माध्यम से दो किस्तों में दिया जा रहा है। इसके साथ ही पम्पसेट पर 50 प्रतिशत या अधिकतम रू0 15 हजार का अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने अधिकारियों को उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने हेतु निगरानी बढ़ाने और खरीफ सीजन के लिए उन्नत बीजों का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए।<br>उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे खरीद सीजन के लिए बीजों की मांग का आवेदन ंहतपबनसजनतमण्नचण्हवअण्पद पोर्टल पर करें। इसके लिए वे अपने मोबाइल से, नजदीकी जनसेवा केन्द्र (सीएससी) अथवा कृषि विभाग के नजदीकी कार्यालय से आवेदन कर सकते हैं।<br>समीक्षा बैठक के दौरान प्रमुख सचिव कृषि श्री रवीन्द्र, सचिव कृषि श्री इन्द्र विक्रम सिंह, सचिव नेडा श्री पंकज सिंह, निदेशक कृषि श्री पंकज त्रिपाठी, निदेशक कृषि सांख्यिकी श्रीमती सुमिता सिंह तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- डा0 मनोज चन्द्रा</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/05ः20 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद</p>



<p class="wp-block-paragraph"> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">ओडीओपी सीएफसी को जनभागीदारी से जोड़ने पर योगी सरकार का जोर</p>



<p class="wp-block-paragraph">90 प्रतिशत सरकारी सहायता से संचालित परियोजनाओं को<br>अधिक प्रभावी बनाने पर जोर</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश में संचालित 16 सीएफसी परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा में व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश</p>



<p class="wp-block-paragraph">सीएफसी परियोजनाओं में 90 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान और<br>10 प्रतिशत उद्यमियों का योगदान</p>



<p class="wp-block-paragraph">छोटे उद्यमियों को आधुनिक मशीनरी, डिजाइन, परीक्षण, स्किल ट्रेनिंग और कॉमन टूल्स जैसी सुविधाएं सुलभ कराना उद्देश्य</p>



<p class="wp-block-paragraph">सभी सीएफसी में “सिटीजन चार्टर” प्रदर्शित करने के निर्देश, लोगों को उपलब्ध सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी मिलना होगा आसान</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश में पारंपरिक उद्योगों, हस्तशिल्प, बुनकरी और सूक्ष्म उद्यमों को नई मजबूती देने के लिए योगी सरकार लगातार प्रयासरत है। सरकार की मंशा है कि ओडीओपी योजना के तहत स्थापित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) केवल सीमित लोगों तक न रहकर अधिक से अधिक कारीगरों, बुनकरों और सूक्ष्म उद्यमियों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाओं से जोड़ें। इसी उद्देश्य से मंगलवार को प्रदेश में संचालित 16 सीएफसी परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई सीएफसी में सीमित लाभार्थियों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया है कि योजनाओं का लाभ केवल कुछ सदस्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसी उद्देश्य से सीएफसी परियोजनाओं में 90 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान और 10 प्रतिशत उद्यमियों का योगदान रखा गया है, ताकि छोटे उद्यमियों को आधुनिक मशीनरी, डिजाइन, परीक्षण, स्किल ट्रेनिंग और कॉमन टूल्स जैसी सुविधाएं सुलभ हो सकें।<br>सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएफसी को जनहित से जोड़ते हुए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाया जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इन सुविधाओं का लाभ उठा सकें। इसके लिए मोबाइल संदेश, पम्पलेट, उद्योग बंधु बैठकों और मीडिया माध्यमों का उपयोग करने को कहा गया। साथ ही सभी सीएफसी में “सिटीजन चार्टर” प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए, जिससे लोगों को उपलब्ध सुविधाओं की स्पष्ट जानकारी मिल सके।<br>बैठक में अंबेडकर नगर, मुरादाबाद, संभल, वाराणसी, खुर्जा, आगरा, मेरठ, सहारनपुर, बरेली, अयोध्या और गाजियाबाद सहित विभिन्न जिलों की परियोजनाओं की समीक्षा की गई। अंबेडकर नगर बुनकर सीएफसी में लगभग 4 करोड़ रुपये की सहायता से स्थापित परियोजना में लाभार्थियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया, ताकि अधिक बुनकर आधुनिक सुविधाओं से जुड़ सकें। वहीं बनारस के सिल्क उत्पाद सीएफसी में लगभग 9 करोड़ रुपये की सहायता से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं को व्यापक स्तर पर कारीगरों तक पहुंचाने की रणनीति पर चर्चा हुई।<br>बैठक में बुनकरों और कारीगरों ने बिजली, धागे की लागत, बाजार प्रतिस्पर्धा और तकनीकी उन्नयन से जुड़े मुद्दे भी रखे। समीक्षा के दौरान बताया गया कि योगी सरकार ने बुनकरों को राहत देने के लिए वर्षों तक फ्लैट रेट विद्युत योजना लागू रखी, जिसके तहत 2006 से 31 मार्च 2023 तक लगभग 44 करोड़ रुपये का विद्युत व्यय सरकार द्वारा वहन किया गया। सरकार की प्राथमिकता है कि पारंपरिक कला और हस्तशिल्प से जुड़े लोग आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ें और आत्मनिर्भर बनें।<br>गाजियाबाद के इंजीनियरिंग एवं टूल रूम आधारित सीएफसी की समीक्षा के दौरान बताया गया कि वहां सीएनसी मशीन, 3डी प्रिंटिंग, मटेरियल टेस्टिंग और स्किल ट्रेनिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अब तक 500 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और रक्षा क्षेत्र के लिए कंपोनेंट निर्माण की संभावनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है।<br>मुरादाबाद के फिजिकल वेपर डिपोजिशन (पीवीडी) प्लांट को पर्यावरण अनुकूल तकनीक का उदाहरण बताते हुए उसकी कार्यक्षमता को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। वहीं संभल के बटन उद्योग सीएफसी में 70 प्रतिशत से अधिक क्षमता उपयोग को सकारात्मक संकेत बताते हुए कच्चे माल और बिजली उपलब्धता को और बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।<br>खुर्जा ब्लैक पॉटरी सीएफसी को बैठक में सफलता की मिसाल बताया गया। इस परियोजना से 1253 से अधिक लाभार्थी जुड़े हैं और कारोबार 15-20 लाख रुपये से बढ़कर 90-95 लाख रुपये तक पहुंचा है। इसे पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने का उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया। कारीगरों द्वारा मिट्टी भंडारण के लिए अतिरिक्त भूमि की मांग भी बैठक में रखी गई।<br>सहारनपुर वुड क्राफ्ट, आगरा लेदर क्लस्टर, बरेली और मेरठ के गुड़ प्रसंस्करण सीएफसी की भी समीक्षा की गई। मेरठ परियोजना में 1800 किसानों को जोड़कर मूल्य संवर्धन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई। साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि उद्योग बंधु बैठकों का आयोजन सीएफसी परिसरों में किया जाए और बड़ी उद्योग इकाइयों के साथ समन्वय स्थापित कर छोटे उद्यमों को बड़े बाजार और सप्लाई चेन से जोड़ा जाए।<br>सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार<br>राघवेन्द्र/05ः30 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्किलिंग से रोजगार तक, आधुनिक तकनीकों के सहारे यूपी बनेगा देश का सबसे बड़ा स्किल हब</p>



<p class="wp-block-paragraph">युवाओं को हुनर, तकनीक और रोजगार से जोड़ने की बड़ी पहल,<br>गोरखपुर में ‘संवाद’</p>



<p class="wp-block-paragraph">न्च्ैक्ड की ओर से गोरखपुर में ‘संवाद’, कौशल विकास को लेकर सरकार, उद्योग और संस्थानों का मंथन</p>



<p class="wp-block-paragraph">कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने की कार्यक्रम की अध्यक्षता, आधुनिक तकनीक और रोजगार आधारित प्रशिक्षण पर दिया जोर</p>



<p class="wp-block-paragraph">कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रशिक्षार्थियों और प्रशिक्षकों को किया गया सम्मानित</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश को देश की “स्किल कैपिटल” बनाने की दिशा में सरकार कौशल विकास को आधुनिक तकनीक, उद्योगों की जरूरतों और डिजिटल नवाचार से जोड़ते हुए लगातार नए कदम उठा रही है. इसी क्रम में गोरखपुर के होटल रमाडा में मंगलवार को ‘संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया. उत्तर प्रदेश कौशल विकास की ओर से आयोजित कार्यक्रम में सरकार, उद्योग जगत, निजी आईटीआई संचालकों और प्रशिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधियों ने युवाओं को रोजगारोन्मुखी एवं भविष्य आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने को लेकर व्यापक मंथन किया।<br>कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल जी ने की। इस दौरान &nbsp;विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरि ओम, मिशन निदेशक पुलकित खरे एवं संयुक्त निदेशक &nbsp;मयंक गंगवार सहित गोरखपुर, बस्ती एवं अयोध्या मंडल के निजी आईटीआई संचालक, प्रशिक्षण प्रदाता और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।<br>कार्यक्रम को संबोधित करते हुए &nbsp;मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत आधारशिला कौशल विकास संस्थान हैं और आज के समय में युवाओं को केवल डिग्री नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला हुनर उपलब्ध कराना सबसे बड़ी आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को आधुनिक तकनीक आधारित प्रशिक्षण देकर उन्हें भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने टाटा टेक्नोलॉजीज के साथ एमओयू कर 150 सरकारी आईटीआई को आधुनिक तकनीकों से अपग्रेड किया है, जहाँ एआई, ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स, एडवांस डिजाइनिंग और अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग जैसे कोर्स संचालित किए जा रहे हैं. इन संस्थानों में आधुनिक लैब और विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की गई हैं, ताकि युवाओं को उद्योगों के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके। उन्होंने कहा कि जल्द ही 62 और आईटीआई को भी इस परियोजना से जोड़ा जाएगा, जिससे प्रदेश का तकनीकी शिक्षा ढांचा और अधिक मजबूत होगा।<br>मंत्री अग्रवाल ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों को केवल प्रमाण पत्र देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि युवाओं को ऐसा कौशल देना चाहिए जिससे वे उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप दक्ष बन सकें और आसानी से रोजगार प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि सरकार का फोकस अब “स्किल टू एम्प्लॉयमेंट” मॉडल पर है, जहाँ प्रशिक्षण के साथ रोजगार सुनिश्चित करना भी प्राथमिकता है।<br>उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 300 से अधिक सरकारी एवं 3000 से अधिक निजी आईटीआई संचालित हो रहे हैं, जो लाखों युवाओं को तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। साथ ही पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में एक लाख से अधिक युवाओं को अप्रेंटिसशिप से जोड़ा गया, जो पूरे देश में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश तेजी से देश की “स्किल कैपिटल” के रूप में उभर रहा है।<br>प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने कहा कि वर्तमान समय में कौशल विकास को केवल एक पाठ्यक्रम या प्रशिक्षण कार्यक्रम के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह युवाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव बन चुका है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती तकनीक और उद्योगों की आवश्यकताओं को देखते हुए अब पारंपरिक शिक्षा के साथ कौशल आधारित शिक्षा को जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।<br>उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल युवाओं को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें ऐसा हुनर प्रदान करना है जिससे वे अपने जीवन में स्थायी रोजगार प्राप्त कर सकें और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें, इसके लिए प्रशिक्षण संस्थानों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है, ताकि प्रशिक्षण पूरी तरह बाजार की मांग और आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप हो।<br>डॉ. हरिओम ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि युवाओं को अपने ही जनपद और आसपास के क्षेत्रों में सम्मानजनक रोजगार के अवसर उपलब्ध हों, जिससे उन्हें रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। उन्होंने कहा कि यदि प्रशिक्षण, तकनीक और उद्योगों का सही तालमेल स्थापित हो जाए तो उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा स्किल हब बन सकता है और यहां का युवा देश ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकता है।<br>मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप अब स्कूली स्तर पर भी व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत माध्यमिक एवं एडेड स्कूलों के विद्यार्थियों को स्कूल के बाद एक घंटे का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें बच्चे अपनी रुचि के अनुसार क्षेत्र का चयन स्वयं करते हैं।<br>उन्होंने बताया कि प्रदेश के ढाई हजार से अधिक स्कूल इस परियोजना से जुड़ चुके हैं और लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों का नामांकन किया गया है। प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों का आकलन एवं प्रमाणन भी कराया जाता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अधिक से अधिक स्कूलों को इस पहल से जोड़ा जाएगा।<br>पुलकित खरे ने बताया कि प्रदेश में 900 से अधिक जॉब रोल्स में प्रशिक्षण उपलब्ध है, जिससे युवाओं को उनकी रुचि और उद्योगों की मांग के अनुरूप अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1000 से अधिक प्रशिक्षण साझेदार प्रदेश के सभी 75 जनपदों में कार्य कर रहे हैं।<br>उन्होंने बताया कि न्च्ैक्ड की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से “कौशल दोस्त” ।प् चैटबॉट युवाओं और प्रशिक्षण संस्थानों की जिज्ञासाओं का समाधान कर रहा है। वहीं “कौशल दर्पण” प्लेटफॉर्म के जरिए प्दअमेज न्च् के आंकड़ों के आधार पर भविष्य के रोजगार अवसरों का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि जिलों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।<br>इसके साथ ही “कौशल दिशा” ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवा घर बैठे प्रशिक्षण लेकर प्रमाणपत्र प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के साथ प्लेसमेंट सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षण साझेदारों को चरणबद्ध भुगतान प्रणाली से जोड़ा गया है, ताकि रोजगार आधारित प्रशिक्षण को बढ़ावा मिल सके।<br>उन्होंने यह भी बताया कि दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (क्क्न्-ळज्ञल्) के अंतर्गत युवाओं को पूर्णतः निशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें रहने, खाने और प्रशिक्षण की संपूर्ण व्यवस्था सरकार द्वारा की जाती है।<br>कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण की गुणवत्ता, आधुनिक तकनीकों और रोजगारपरक शिक्षा को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। अंत में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षार्थियों एवं प्रशिक्षकों को मंत्री कपिल देव अग्रवाल द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/05ः30 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">तकनीकी शिक्षा को उद्योगों से जोड़कर युवाओं को बनाया जाएगा आत्मनिर्भर-मंत्री आशीष पटेल</p>



<p class="wp-block-paragraph">हर छात्र के लिए दो इंडस्ट्रियल विजिट अनिवार्य करने की तैयारी, प्राविधिक शिक्षा मंत्री ने दिए निर्देश</p>



<p class="wp-block-paragraph">एआई इंटीग्रेशन और प्लेसमेंट पर फोकस, तकनीकी संस्थानों की रैंकिंग सुधारने की कवायद तेज</p>



<p class="wp-block-paragraph">वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य में तकनीकी संस्थानों की होगी बड़ी भूमिका-आशीष पटेल</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में तकनीकी शिक्षा संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। तकनीकी संस्थानों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करते हुए छात्रों को व्यवहारिक एवं रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि युवा सीधे उद्योगों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें।<br>मंत्री पटेल मंगलवार को विधानसभा स्थित कार्यालय कक्ष संख्या-87 में डिलाइट के प्रतिनिधियों एवं विभागीय अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक &nbsp;कर रहे थे। बैठक में तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्लेसमेंट पोर्टल, एआई इंटीग्रेशन, नैक एवं एनआईआरएफ रैंकिंग, इंडस्ट्रियल विजिट, इंडस्ट्री पार्टनरशिप तथा विभिन्न एमओयू की प्रगति की समीक्षा की गई।<br>मंत्री पटेल ने तकनीकी संस्थानों में इंडस्ट्रियल विजिट और इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग को अनिवार्य बनाए जाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग के छात्रों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता। सिविल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को एक्सप्रेसवे, टनल एवं डैम निर्माण स्थलों का भ्रमण कराया जाए, जबकि मैकेनिकल एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्रों को ईवी निर्माण इकाइयों एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों का व्यावहारिक अनुभव दिया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक छात्र के लिए कम से कम दो इंडस्ट्रियल विजिट अनिवार्य करने का प्रस्ताव तैयार किया जाए।<br>बैठक में बताया गया कि विभाग द्वारा विकसित प्लेसमेंट पोर्टल पर 8 हजार से अधिक छात्र ऑनबोर्ड किए जा चुके हैं। साथ ही दंनातपण्बवउ के सहयोग से उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए विशेष लैंडिंग पेज तैयार किया जा रहा है, जिससे प्रदेश के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अधिक अवसर मिल सकेंगे। नैक, एनआईआरएफ एवं एसआईआरएफ रैंकिंग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी संस्थानों में फैकल्टी भर्ती एवं छात्रों के प्लेसमेंट पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। सभी आरएससी एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों को रैंकिंग एवं गुणवत्ता सुधार के लिए तैयारियां तेज करने के निर्देश दिए गए।<br>बैठक में एआई आधारित पाठ्यक्रमों के समावेशन पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि इंफोसिस सहित विभिन्न संस्थानों के सहयोग से नई तकनीकों एवं एआई इंटीग्रेशन आधारित पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं, ताकि छात्रों को न्यू एज टेक्नोलॉजी के अनुरूप दक्ष बनाया जा सके।<br>बैठक में प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा, विभागीय अधिकारी एवं संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/06ः00 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">मोबाइल छुपाकर परीक्षा में नकल का प्रयास करने वाला परीक्षार्थी गिरफ्तार, प्रवक्ता परीक्षा से किया गया डिबार</p>



<p class="wp-block-paragraph">एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम की सतर्क निगरानी से पकड़ी गई संदिग्ध गतिविधि</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया &nbsp;कि आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या-02/2022 प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा दिनांक 10 मई 2026 को प्रदेशभर में सफलतापूर्वक आयोजित कराई गई। परीक्षा के दौरान आयोग द्वारा स्थापित एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से एक परीक्षार्थी की संदिग्ध गतिविधि चिन्हित की गई, जिसके बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए नकल के प्रयास का खुलासा हुआ।<br>&nbsp;10 मई 2026 की द्वितीय पाली में मेरठ स्थित इस्माईल नेशनल महिला पीजी कॉलेज में रसायन विज्ञान विषय की परीक्षा दे रहे परीक्षार्थी कृष्ण पाल पुत्र श्री हुकुम सिंह, जो दिव्यांग श्रेणी का अभ्यर्थी है, बैसाखी के सहारे परीक्षा कक्ष में उपस्थित हुआ था। एआई आधारित निगरानी के दौरान उसकी गतिविधियां संदिग्ध पाए जाने पर आयोग द्वारा तत्काल केन्द्राध्यक्ष को सूचना दी गई। तलाशी लेने पर परीक्षार्थी की बैसाखी के ऊपरी कवर में छुपाया गया मोबाइल फोन बरामद हुआ, जिसका स्विच ऑन था तथा उसका उपयोग करने का प्रयास किया जा रहा था।<br>केन्द्राध्यक्ष द्वारा तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद थाना कोतवाली, मेरठ पुलिस ने परीक्षार्थी कृष्ण पाल को हिरासत में लेकर उसके विरुद्ध उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा में अनुचित साधनों के प्रयोग के निवारण अधिनियम-2024 की धारा 3, 4 एवं 13 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की। प्रकरण की जांच मेरठ पुलिस तथा एसटीएफ द्वारा की जा रही है।<br>आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने हेतु आयोग द्वारा तत्काल प्रभाव से परीक्षार्थी कृष्ण पाल, निवासी 34 भकरपुर कवट्टा, मेरठ, अनुक्रमांक-0302016680, प्रवक्ता रसायन विज्ञान को वर्तमान प्रवक्ता संवर्ग परीक्षा-2022 से डिबार कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आगामी परीक्षाओं में भी उन्नत तकनीक एवं एआई आधारित कंट्रोल रूम के माध्यम से सघन निगरानी जारी रखी जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार के अनुचित साधनों के प्रयोग को पूर्ण रूप से रोका जा सके और पारदर्शी एवं निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित हो।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/07ः25 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद</p>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रवक्ता परीक्षा 2026 की प्रोविजनल उत्तरकुंजी जारी, 18 मई तक ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे आपत्तियां</p>



<p class="wp-block-paragraph">आयोग की वेबसाइट पर सभी विषयों की मास्टर सेट उत्तरकुंजी अपलोड</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया &nbsp;है कि आयोग द्वारा विज्ञापन संख्या-02/2022 के अंतर्गत आयोजित प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा, जो &nbsp;09 एवं 10 मई 2026 को सम्पन्न हुई थी, उसके सभी विषयों की मास्टर सेट की प्रोविजनल उत्तरकुंजी अभ्यर्थियों के अवलोकनार्थ 12 मई 2026 को आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ीजजचेरूध्ध्नचमेेबण्नचण्हवअण्पद पर प्रकाशित कर दी गई है।<br>भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, शिक्षा, अंग्रेजी, कृषि, वाणिज्य, समाजशास्त्र, नागरिक शास्त्र, गृह विज्ञान, अर्थशास्त्र, संस्कृत, मनोविज्ञान, रसायन विज्ञान, भूगोल, हिन्दी एवं कला सहित सभी विषयों की प्रोविजनल उत्तरकुंजी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई है।<br>अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि अभ्यर्थी आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए ऑनलाइन लिंक प्रोविजनल उत्तरकुंजी आपत्ति पोर्टल के माध्यम से अपने अनुक्रमांक एवं जन्मतिथि अंकित कर लॉगिन करने के उपरान्त मास्टर सेट की प्रोविजनल उत्तरकुंजी का मिलान कर सकते हैं। यदि किसी अभ्यर्थी को उत्तरकुंजी के संबंध में कोई आपत्ति हो तो वह &nbsp;12 मई 2026 से 18 मई 2026 की रात्रि 12 बजे तक ऑनलाइन माध्यम से अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। उन्होंने बताया कि आपत्तियां केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार की जाएंगी। अन्य किसी माध्यम से प्राप्त आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। आयोग द्वारा आपत्ति दर्ज करने संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश भी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/07ः25 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">पीएम मोदी की अपील पर मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने मेट्रो और नमो भारत ट्रेन से किया सफर</p>



<p class="wp-block-paragraph">पेट्रोल-डीजल बचाने का संदेश देते हुए मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने अपनाया पब्लिक ट्रांसपोर्ट</p>



<p class="wp-block-paragraph">मेट्रो और रैपिड रेल से मेरठ पहुंचे मंत्री कपिल देव अग्रवाल, जनता से की सार्वजनिक परिवहन अपनाने की अपील</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने, सार्वजनिक परिवहन का अधिकाधिक उपयोग करने, अनावश्यक यात्राओं से बचने तथा पर्यावरण संरक्षण में सहभागिता निभाने की अपील का प्रभाव अब जनप्रतिनिधियों के व्यवहार में भी दिखाई देने लगा है।<br>&nbsp;इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने मंगलवार को नई दिल्ली से मेरठ तक की यात्रा मेट्रो एवं नमो भारत ट्रेन (रैपिड रेल) से कर आमजन को ऊर्जा संरक्षण और सार्वजनिक परिवहन अपनाने का संदेश दिया।<br>जारी भ्रमण कार्यक्रम के अनुसार मंत्री अग्रवाल सायं में इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, टर्मिनल-3, नई दिल्ली पहुंचे। एयरपोर्ट से बाहर निकलने के बाद उन्होंने निजी वाहन का उपयोग न करते हुए सीधे टर्मिनल-3 मेट्रो स्टेशन का रुख किया और मेट्रो के माध्यम से सराय काले खां रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां से उन्होंने नमो भारत ट्रेन द्वारा मेरठ के लिए प्रस्थान किया तथा रात्रि में मोदीपुरम स्टेशन, मेरठ पहुंचे।<br>मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोच केवल ईंधन बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, आर्थिक बचत और भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखने का व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि स्वयं सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे, तभी समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और लोग भी इसके लिए प्रेरित होंगे।<br>उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को अपनाने से न केवल पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी, बल्कि सड़कों पर वाहनों का दबाव घटने से प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने युवाओं, कर्मचारियों, छात्रों एवं आम नागरिकों से अपील की कि वे छोटी एवं नियमित यात्राओं में मेट्रो, बस और रैपिड रेल जैसी सुविधाओं का अधिक उपयोग करें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे<br>राघवेन्द्र/07ः25 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारतीय भाषाओं के संरक्षण और रचनात्मक शिक्षा को बढ़ावा देगा ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026’-मंत्री संदीप सिंह</p>



<p class="wp-block-paragraph">13 से 19 मई तक परिषदीय एवं केजीबीवी विद्यालयों में आयोजित होंगे<br>सांस्कृतिक एवं भाषाई कार्यक्रम</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश के परिषदीय एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बुधवार से ‘भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026’ का आयोजन प्रारंभ हो रहा है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के क्रम में आयोजित यह विशेष शिविर 13 मई से 19 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। शिविर का शुभारंभ केंद्रीय शिक्षा मंत्री द्वारा किया जाएगा।<br>प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संदीप सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बच्चों को भारतीय भाषाओं, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा ग्रीष्मकालीन शिविर-2026 बच्चों में भाषाई दक्षता, रचनात्मकता और आत्मविश्वास विकसित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। इस शिविर के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा एवं भारतीय भाषाओं की समृद्ध विरासत को समझने और अपनाने का अवसर मिलेगा।<br>महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने समस्त डायट प्राचार्यों, बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं जिला समन्वयकों को शिविर का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि शिविर के दौरान विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं, लोक संस्कृति, कहानी, कविता, संवाद, गीत, नाटक एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष बल दिया जाएगा।<br>विभाग द्वारा शिविर में आयोजित की जाने वाली गतिविधियों की सुझावात्मक सूची भी सभी जनपदों को उपलब्ध करा दी गई है। साथ ही स्थानीय स्तर पर कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी एवं आकर्षक बनाने के निर्देश दिए गए हैं। शिविर के आयोजन पर होने वाला व्यय विद्यालयों की कंपोजिट ग्रांट से वहन किया जाएगा।<br>बेसिक शिक्षा विभाग का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं की समृद्ध परंपरा से जोड़ते हुए उनके भाषाई कौशल का विकास करना तथा रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने की प्रक्रिया को आनंददायक बनाना है। विभाग द्वारा सभी जनपदों को शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इस अभियान से जुड़ सकें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/07ः40 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद</p>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुष मंत्री ने 09 मण्डलों की समीक्षा बैठक की</p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुष अस्पतालों में चिकित्सकों की उपस्थिति प्रत्येक दशा में सुनिश्चित की जाय</p>



<p class="wp-block-paragraph">अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता बनी रहे<br>-डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश के आयुष राज्यमुत्री (स्वतंत्र प्रभार), खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एमओएस) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ आज राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी एवं औषधि निर्माणशाला राजाजीपुरम लखनऊ के सभागार में प्रदेश के 09 मण्डल लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, अयोध्या, आजमगढ़, मिर्जापुर, बस्ती, गोरखपुर एवं प्रयागराज के अंतर्गत जिलों के क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी एवं जिला होम्योपैथिक अधिकारी के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि आयुष अस्पतालों में चिकित्सकों की कार्यस्थल पर उपस्थिति प्रत्येक दशा में सुनिश्चित की जाय।<br>डॉ. दयालु ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता बनी रहे जहां पर दवाओं की कमी हो उनकी सूचना प्राथमिकता के आधार पर दें। ताकि दवाओं को तत्काल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में आवश्यकता के अनुसार दवाइयां खरीदें, जिन दवाइयों, कामन हैं एवं उनकी मांग है उनकों प्राथमिकता के आधार पर खरीदें ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न होने पाए।<br>आयुष मंत्री ने निर्देश दिए कि सभी चिकित्सक ओपीडी में आए मरीजों को बाहर की दवा न लिखें। उन्होंने प्रदेश के सभी आयुष चिकित्सालय (आयुर्वेद, यूनानी एवं होम्योपैथ) में निरीक्षण करें, ताकि चिकित्सक बाहर की दवा न लिखने पाएं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में ओपीडी संख्या बढ़ाने का हरसम्भव प्रयास करें। जिससे कि गरीबों एवं जरूरतमंद लोगों का उपचार सुचारू ढंग से किया जा सके। आयुष चिकित्सालयों में कैम्प लगाकर आमजनमानस को जागरूक कर मरीजों का उपचार करें।<br>डॉ. दयालु ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिलों में जनप्रतिनिधियों के माध्यम से अस्पतालों के निर्माण हेतु जमीन उपलब्ध करायें। जिससे कि अस्पतालों को निर्माण कराया जा सके, ताकि आमजनमानस को इसका लाभ मिल सके।<br>प्रमुख सचिव आयुष श्री रंजन कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्पतालों को पेंट कराकर ब्राण्डिग करायें। अस्पतालों में पंचकर्मा भी कराएं। उन्होंने अस्पतालों में साफ-सफाई, स्वच्छ पेयजल तथा शौचालय आदि की व्यवस्था भी सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।<br>महानिदेशक आयुष श्रीमती चैत्रा वी. ने मा. मंत्री जी को विभाग के विषय में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने मा. मंत्री जी आश्वस्त किया कि उनके द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन कराया जायेगा।<br>बैठक में निदेशक आयुर्वेद डॉ. नारायण दास, निदेशक होम्योपैथ डॉ. पी.के. सिंह, यूनानी निदेशक प्रो. जमाल अख्तर सहित 09 मण्डलों के आयुष चिकित्साधिकारी उपस्थित रहे।<br>सम्पर्क सूत्र- अजय कुमार द्विवेदी</p>



<p class="wp-block-paragraph">राम यतन/04ः35 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">सर्वाेच्च न्यायालय में लम्बित वादों के निस्तारण हेतु 21 से 23 अगस्त तक विशेष लोक अदालत का आयोजन</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्य न्यायाधीश, सर्वाेच्च न्यायालय, नई दिल्ली के निर्देशन में सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित वादों के सुलह एवं आपसी सहमति से निस्तारण के उद्देश्य से “समाधान समारोह 2026” के अंतर्गत 21 अगस्त, 2026, 22 अगस्त, 2026 एवं 23 अगस्त, 2026 को विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन न्याय को सरल एवं सुलभ तरीके से आमजन तक पहुंचाने तथा आपसी सहभागिता के माध्यम से विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की भावना को साकार करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।<br>“समाधान समारोह 2026” का शुभारम्भ 21 अप्रैल, 2026 से किया जा चुका है। इस अभियान के अंतर्गत माननीय सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित उपयुक्त मामलों को चिन्हित कर उनका सुलह के माध्यम से निस्तारण कराया जाएगा। विशेष लोक अदालत का आयोजन माननीय सर्वाेच्च न्यायालय परिसर, नई दिल्ली में किया जाएगा।<br>विशेष लोक अदालत से पूर्व सुलह बैठकों का आयोजन राज्य, जिला, तालुका एवं उच्च न्यायालय विधिक सेवा प्राधिकरणों तथा मध्यस्थता केन्द्रों में लगातार किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक मामलों का आपसी सहमति से समाधान कराया जा सके।<br>सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ कुँवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने आमजन से अपील करते हुए कहा है कि जिन व्यक्तियों के मामले &nbsp;सर्वाेच्च न्यायालय में लंबित हैं, वे अपने मामलों को “समाधान समारोह” में शामिल कराने हेतु निर्धारित गूगल फॉर्म 31 मई, 2026 तक भर सकते हैं। यह फॉर्म सर्वाेच्च न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इस अभियान से संबंधित विस्तृत जानकारी हेतु हेल्पलाइन नंबर 011-23115652 एवं 011-23116464 अथवा ईमेल ेचमबपंससवांकंसंज2026/ेबपण्दपबण्पद पर संपर्क किया जा सकता है।<br>सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे</p>



<p class="wp-block-paragraph">राम यतन/04ः45 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्टेट हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर की नवगठित संचालन समिति की प्रथम बैठक का आयोजन</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्टेट ट्रांसफॉरमेशन कमीशन, उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, &nbsp; &nbsp; श्री मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में बीते सोमवार को स्टेट हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर, उ0प्र0 (एसएचएसआरसी-यूपी) की नवगठित संचालन समिति की प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रमुख एजेंडा बिंदुओं में मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर एवं नवजात मृत्यु दर में सुधार हेतु कार्ययोजना तैयार करना शामिल रहा। इसके साथ ही अस्पतालों की निगरानी हेतु डिजिटल डैशबोर्ड की स्थापना, न्यूनतम लागत पर गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करना तथा अस्पताल अभिलेखों के डिजिटलीकरण पर भी विचार-विमर्श किया गया।<br>बैठक में अगले पांच वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र का विस्तृत रोडमैप तैयार करने पर भी चर्चा हुई, जिसमें स्वास्थ्य जनशक्ति, सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों तथा राज्य स्तरीय केंद्रीकृत डैशबोर्ड को विशेष प्राथमिकता दिए जाने पर बल दिया गया। इसके अतिरिक्त एसएचएसआरसी-यूपी के बोर्ड ऑफ गर्वेनेंस, संचालन समिति, वेबसाइट निर्माण, स्टाफ संरचना एवं भर्ती प्रक्रिया से संबंधित विषयों पर भी विस्तृत चर्चा के उपरांत आवश्यक निर्णय लिए गए। बैठक में यह विश्वास व्यक्त किया गया कि एसएचएसआरसी-यूपी के माध्यम से उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच एवं प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार होगा तथा राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक मजबूत एवं जन-केंद्रित बनाने में सहायता मिलेगी।<br>बैठक में एसएचएसआरसी-यूपी की ओर से डॉ. राजेश हर्षवर्धन, चिकित्सा अधीक्षक, एसजीपीजीआईएमएस उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त एसजीपीजीआईएमएस के डॉ. नारायण प्रसाद, डॉ. आर.के. सिंह, डॉ. कीर्ति एवं वित्त अधिकारी सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैठक में सहभागिता की। चिकित्सा शिक्षा विभाग से विशेष सचिव श्रीमती &nbsp; &nbsp;कृतिका शर्मा, स्वास्थ्य विभाग से विशेष सचिव श्री रवि, आईआईएम लखनऊ से प्रो. वेंकट, लखनऊ विश्वविद्यालय से डीन प्रो. अरविंद मोहन तथा आईएमए एवं एफओजीएसआई के प्रतिनिधि भी बैठक में उपस्थित रहे।<br>उल्लेखनीय है कि एसएचएसआरसी-यूपी का गठन एसजीपीजीआईएमएस (संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान), लखनऊ के हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन विभाग के अंतर्गत किया गया है। यह केंद्र राज्य में स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक सुदृढ़, आधुनिक एवं प्रभावी बनाने हेतु तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।<br>सम्पर्क सूत्र-आशिया खातून<br>वैशाली माथुर/04ः45 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br> </p>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">नलकूप निर्माण खंड वाराणसी के उपखण्ड प्रथम में भण्डारण एवं सुरक्षा हेतु शेड बाउंड्रीवॉल एवं आन्तरिक रोड निर्माण की कार्य परियोजना के लिए 42 लाख 90 हजार रुपए की अवशेष धनराशि की गयी अवमुक्त’</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश सरकार ने नलकूप निर्माण खंड वाराणसी के उपखण्ड प्रथम में भण्डारण एवं सुरक्षा हेतु शेड बाउंड्रीवॉल एवं आन्तरिक रोड निर्माण की परियोजना कार्य के लिए &nbsp;42 लाख 90 हजार रुपए की अवशेष धनराशि अवमुक्त की गयी हैं। इस सम्बन्ध में आवश्यक शासनादेश सिंचाई एवं जलसंसाधन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है।<br>जारी शासनादेश में निर्देश दिया गया है कि उक्त परियोजना में कराए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता एवं समय से पूर्ण कराया जाना संबंधित मुख्य अभियंता द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।<br>सम्पर्क सूत्र-इंजेश सिंह</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैशाली माथुर/12ः45 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">जनपद फतेहपुर के अन्तर्गत कोड़ा निरीक्षण भवन के निर्माण कार्य परियोजना के लिए 77 लाख रुपए की अवशेष धनराशि की गयी अवमुक्त’</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 12 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश सरकार ने जनपद फतेहपुर के अन्तर्गत कोड़ा निरीक्षण भवन के निर्माण कार्य परियोजना के लिए 77 लाख रुपए की अवशेष धनराशि अवमुक्त की गयी हैं। इस सम्बन्ध में आवश्यक शासनादेश सिंचाई एवं जलसंसाधन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है।<br>जारी शासनादेश में निर्देश दिया गया है कि उक्त परियोजना में कराए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता एवं समय से पूर्ण कराया जाना संबंधित मुख्य अभियंता द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।<br>सम्पर्क सूत्र-इंजेश सिंह</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैशाली माथुर/04ः45 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद</p>



<p class="wp-block-paragraph"> <br>पत्र सूचना शाखा &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;<br>सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश<br>लेख<br>दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग</p>



<p class="wp-block-paragraph">दिव्यांगजन के लिए वरदान साबित हो रहे हैं, कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 12 मई, 2026<br>समाज के सर्वांगीण विकास की अवधारणा तभी साकार होती है जब समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर और सुविधाएँ प्राप्त हों। विशेष रूप से दिव्यांगजन (च्मतेवदे ूपजी क्पेंइपसपजपमे) के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि उन्हें ऐसी योजनाओं से जोड़ा जाए, जो उनके जीवन को सरल, सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बना सकें। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक एवं आर्थिक पुनर्वासन की महत्वपूर्ण और प्रभावशाली योजनाएं संचालित की हैं।<br>इस योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग (।तजपपिबपंस स्पउइे) और सहायक उपकरण (।ेेपेजपअम क्मअपबमे) उपलब्ध कराना है, जिससे वे अपने दैनिक जीवन के कार्यों को सहजता से कर सकें और समाज की मुख्यधारा में सक्रिय रूप से भाग ले सकें। यह योजना न केवल शारीरिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता भी बढ़ाती है। दिव्यांगजन के जीवन को सुगम बनाने के लिए सहायक उपकरण केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि उनके स्वावलंबन का आधार होते हैं। राज्य सरकार ने इस संवेदनशीलता को समझते हुए कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना में क्रांतिकारी सुधार किए हैं।<br>इस योजना के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के सहायक उपकरण वितरित किए जाते हैं, जैसे कृत्रिम हाथ और पैर, ट्राइसाइकिल (हैंड/बैटरी संचालित), व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र (भ्मंतपदह ।पक), बैसाखी (ब्तनजबीमे), दृष्टिबाधितों के लिए विशेष उपकरण आदि। इन उपकरणों के माध्यम से दिव्यांगजन अपनी शारीरिक सीमाओं को पार करते हुए एक सामान्य जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।<br>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए न केवल बजट में वृद्धि की है, बल्कि योजनाओं के स्वरूप को भी आधुनिक बनाया है। विशेष रूप से ‘कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना’ के माध्यम से दिव्यांग व्यक्ति न केवल आत्मनिर्भर बनें बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था में भी अपना योगदान दे सकें।<br>सरकार ने दिव्यांगजनों की बढ़ती जरूरतों और उपकरणों की लागत को ध्यान में रखते हुए अनुदान की सीमा में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। 28 अगस्त, 2024 से, दिव्यांगजनों को मिलने वाली अधिकतम अनुदान राशि को ₹10,000/- से बढ़ाकर ₹15,000/- कर दिया है। प्रदेश सरकार द्वारा &nbsp;बढ़ोत्तरी की गई इस धनराशि से लाभार्थी बेहतर गुणवत्ता वाले आधुनिक उपकरण प्राप्त कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017 से लेकर 2026 तक इस योजना के माध्यम से उल्लेखनीय कार्य किया है। वर्ष 2017-18 में 63,049 लाभार्थियों को, 2018-19 में 63,744 को, 2019-20 में 27,905 लाभार्थी, 2020-21 में 59,283 दिव्यांगजनों को, 2021-22 में 42,184 लाभार्थियों को, 2022-23 में 49,111 लाभार्थियों को, &nbsp;2023-24 में 33,043 लोगों को, 2024-25 में 35,136 लाभार्थियों को, 2025-26 (आंशिक) में 17,454 लाभार्थियों को कृत्रिम अंग व सहायक उपकरण दे कर सहायता प्रदान की है।<br>उत्तर प्रदेश सरकार लगातार इस योजना को सुदृढ़ करने और अधिक से अधिक दिव्यांगजनों तक पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। इस योजना का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि यह दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करती है। उदाहरण के तौर पर, जिन लोगों को पहले चलने-फिरने में कठिनाई होती थी, वे अब कृत्रिम अंग या ट्राइसाइकिल के माध्यम से स्वतंत्र रूप से अपने कार्य कर पा रहे हैं। किसी भी सरकारी नीति की सफलता उसके क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक उसकी पहुँच से मापी जाती है। वर्ष 2017 से 2026 तक के आंकड़े राज्य सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 से अब तक प्रदेश में कुल 3,90,909 विभिन्न प्रकार के कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरणों का वितरण किया जा चुका है। सरकार ने मिशन मोड में काम करते हुए लगभग 4 लाख दिव्यांगजनों के जीवन को सुगम बनाया है। छात्र अब विद्यालय और कॉलेज जाने में सक्षम हो रहे हैं। नौकरी करने वाले लोग अपने कार्यस्थल तक आसानी से पहुंच रहे हैं। छोटे व्यवसाय करने वाले लोग अपनी जीविका स्वयं चला रहे हैं।<br>इस प्रकार यह योजना केवल सहायता प्रदान नहीं करती, बल्कि जीवन को नया आयाम देती है। दिव्यांगजनों के प्रति समाज में संवेदनशीलता और समावेशिता बढ़ाना भी इस योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। जब दिव्यांगजन आत्मनिर्भर बनते हैं, तो वे समाज में सक्रिय भागीदारी करते हैं और एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस योजना के माध्यम से यह संदेश दिया है कि दिव्यांगजन समाज का अभिन्न अंग हैं और उनके अधिकारों की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। सरकार द्वारा वितरित किए जाने वाले उपकरणों में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। जैसे बैटरी से चलने वाली ट्राइसाइकिल, डिजिटल श्रवण यंत्र, हल्के और टिकाऊ कृत्रिम अंग आदि। दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है, और दिव्यांगजन इस दौड़ में पीछे न रहें, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी नीतियों में दूरदर्शिता दिखाई है।<br>14 अक्टूबर, 2024 से भारत सरकार की ‘एडिप’ (।क्प्च्) योजना की तर्ज पर राज्य सरकार ने भी अपनी योजना के अंतर्गत आधुनिक उपकरणों को शामिल करने की व्यवस्था की है। अब दिव्यांगजनों को केवल बैसाखी या व्हीलचेयर ही नहीं, बल्कि स्मार्ट फोन, टैबलेट और डेजी प्लेयर जैसे डिजिटल उपकरण भी प्रदान किए जा रहे हैं। &nbsp;यह पहल विशेष रूप से दिव्यांग छात्रों के लिए क्रांतिकारी है, जिससे वे ऑनलाइन शिक्षा और सूचना के वैश्विक भंडार से जुड़ सकेंगे। इन नवाचारों के कारण उपकरण अधिक उपयोगी और टिकाऊ बन गए हैं, जिससे लाभार्थियों को दीर्घकालिक लाभ मिलता है। इस योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, सत्यापन प्रणाली और वितरण की निगरानी की व्यवस्था की गई है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक ही पहुंचे। उत्तर प्रदेश सरकार की इन योजनाओं ने केवल शारीरिक सहायता ही प्रदान नहीं की है, बल्कि इसके व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिणाम भी सामने आए हैं। कृत्रिम अंगों की गुणवत्ता में सुधार और अनुदान राशि में वृद्धि ने दिव्यांगों की गतिशीलता (डवइपसपजल) को बढ़ाया है। अब वे अपने दैनिक कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं सक्षम बन रहे हैं।<br>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में, राज्य सरकार ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति, विशेषकर दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में लाने के लिए ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को चरितार्थ किया है। पिछले 09 वर्षों में चिकित्सा और भौतिक पुनर्वास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने जो मानक स्थापित किए हैं, वे अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। “कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना” उत्तर प्रदेश सरकार की एक दूरदर्शी और संवेदनशील पहल है, जिसने हजारों दिव्यांगजनों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। यह योजना न केवल शारीरिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना को भी मजबूत करती है। उत्तर प्रदेश सरकार की सही नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से दिव्यंागजनों &nbsp;को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।<br>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;<br>&#8211; मो0 इकबाल खान, सूचना अधिकारी<br><br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश<br>लेख<br>जनपद मैनपुरी</p>



<p class="wp-block-paragraph">मैनपुरी में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से संवरता मातृत्व</p>



<p class="wp-block-paragraph">दिनांकः 12 मई, 2026<br>उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जनपद में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना केवल एक सरकारी पहल मात्र नहीं, बल्कि उन हजारों माताओं के लिए एक सुरक्षित कवच बनकर उभरी है, जो आर्थिक तंगी के कारण गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य और पोषण से समझौता करके असुरक्षित प्रसव की स्थितियों का सामना करती थीं। प्रदेश सरकार ने इस दूरदर्शी योजना से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के बीच स्वास्थ्य के प्रति एक नई चेतना जागृत की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था, प्रसव और स्तनपान के दौरान महिलाओं को पर्याप्त विश्राम और पौष्टिक आहार सुनिश्चित करने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करना है।<br>मैनपुरी के विभिन्न गांवों जैसे बेरियाहार, जगतपुर, आलीपुर पट्टी और डगऊ नगरिया की सफल कहानियाँ इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि कैसे सही समय पर मिली सहायता मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है। योजना की संरचना इस प्रकार की गई है कि यह न केवल आर्थिक मदद देती है, बल्कि महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण के प्रति भी प्रोत्साहित करती है। पहली संतान के जन्म पर प्रदान की जाने वाली 5,000 रुपये की राशि दो किश्तों में सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित की जाती है, जिससे बिचौलियों की गुंजाइश खत्म हो जाती है और सहायता सीधे पात्र के हाथ में पहुँचती है। पहली किश्त के 3,000 रुपये गर्भावस्था के प्रारंभिक पंजीकरण पर मिलते हैं, जो गर्भवती महिला को शुरुआती दौर में जरूरी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं। दूसरी किश्त के 2,000 रुपये प्रसव के बाद शिशु के टीकाकरण चक्र के आधार पर दिए जाते हैं, जो यह सुनिश्चित करता है कि शिशु को जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीके लगें। इसके अतिरिक्त, बालिका जन्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा दूसरी संतान बालिका होने की स्थिति में 6,000 रुपये की एकमुश्त सहायता का विशेष प्रावधान किया गया है, जो समाज में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा कदम है।<br>जिला प्रशासन द्वारा मैनपुरी में इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर विशेष सक्रियता दिखाई गई है, जिसका परिणाम पिछले तीन वित्तीय वर्षों के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से झलकता है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में जहाँ 1,132 लाभार्थियों को 30 लाख 11 हजार रुपये की सहायता दी गई, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 1,666 लाभार्थियों तक पहुँच गई, जिन्हें 43 लाख 76 हजार रुपये वितरित किए गए। विकास की यह गति वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में भी जारी है, जहाँ अब तक 1,383 लाभार्थियों को 38 लाख 53 हजार रुपये की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। पिछले तीन वर्षों के सामूहिक प्रयास से कुल 4,181 माताओं के खातों में 1 करोड़ 12 लाख 40 हजार रुपये की धनराशि पहुँचाई गई है।<br>यह आंकड़ा केवल धन का वितरण नहीं है, बल्कि उन 4,181 परिवारों की खुशहाली और सुरक्षित भविष्य का निवेश है। जिला प्रशासन की प्रभावी निगरानी और निचले स्तर पर कार्य कर रही आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों व आशा कार्यकर्ताओं के समर्पण ने इस योजना को घर-घर तक पहुँचाया है। सरकारी सेवा में कार्यरत महिलाओं को छोड़कर, समाज के अन्य सभी वर्गों की पात्र महिलाएं अपने नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र पर पंजीकरण करा सकती हैं। इसके लिए माता-पिता के पहचान पत्र, बैंक पासबुक और एमसीपी (मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन) कार्ड जैसे अनिवार्य दस्तावेजों के माध्यम से पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।<br>यह योजना धरातल पर कितनी प्रभावशाली है, ये बताने के लिए मैनपुरी की उन तमाम महिलाओं के अनुभव हमारे सामने है, जिन्होंने इसका लाभ उठाते हुए सुरक्षित प्रसव और अपने मातृत्व को भी संबल दिया है। बेरियाहार की 30 वर्षीय प्रियंका यादव की कहानी एक ऐसी महिला की है, जो गर्भावस्था के दौरान अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण पर्याप्त पोषण नहीं ले पा रही थीं। ऐसे समय में जब उन्हें चिकित्सा परामर्श और फल-दूध जैसे आहार की सबसे अधिक आवश्यकता थी, तब इस योजना की किश्तों ने उन्हें वह संबल प्रदान किया जिससे वह सुरक्षित प्रसव तक पहुँच सकीं। प्रियंका का कहना है कि यह सहायता उनके और उनके बच्चे के लिए किसी बड़े सहारे से कम नहीं थी। इसी प्रकार जगतपुर की अनुपम चौहान ने अपनी आर्थिक तंगी के बावजूद इस योजना के माध्यम से समय पर स्वास्थ्य जांच और पौष्टिक आहार सुनिश्चित किया, जिससे आज वे और उनका शिशु पूरी तरह स्वस्थ हैं। अनुपम के अनुसार, सरकार की इस पहल ने उनके जीवन में तब बदलाव लाया जब उनके परिवार की आय सीमित थी और नियमित जांच का खर्च उठाना कठिन हो रहा था। आलीपुर पट्टी की गौरी बाथम का अनुभव भी यही बताता है कि कैसे इस योजना ने उन्हें अपनी सेहत के प्रति सजग बनाया और डॉक्टरों के निर्देशों का पालन करने में सहायता की। वहीं डगऊ नगरिया की कुमारी सोनी, जिन्हें पहले सरकारी योजनाओं की अधिक जानकारी नहीं थी, आज इस योजना को अपने जैसे गरीब परिवारों के लिए वरदान मानती हैं। उनका मानना है कि यदि यह आर्थिक मदद न मिलती, तो शायद वे अपनी और अपने बच्चे की सेहत का इतना ध्यान नहीं रख पातीं।<br>प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ने मैनपुरी में न केवल स्वास्थ्य मानकों में सुधार किया है, बल्कि महिलाओं को सशक्त और जागरूक भी बनाया है। यह योजना अब केवल एक वित्तीय सहायता कार्यक्रम न रहकर एक सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है, जहाँ ग्रामीण महिलाएं स्वयं आगे आकर अपने अधिकारों और स्वास्थ्य के प्रति चर्चा करती हैं। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित इस योजना ने गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के कंधों से आर्थिक बोझ को कम किया है, जिससे परिवार के अन्य सदस्य भी गर्भवती महिला की देखभाल में अधिक रुचि लेने लगे हैं।<br>जिला प्रशासन की निरंतर समीक्षा और पारदर्शी प्रक्रिया ने लाभार्थियों का विश्वास सरकारी तंत्र पर और सुदृढ़ किया है। इस योजना का व्यापक प्रभाव भविष्य में स्वस्थ नई पीढ़ी के रूप में सामने आएगा, जो एक समृद्ध राष्ट्र की नींव रखेगा। मैनपुरी के गांव-गांव में गूंजती स्वस्थ शिशुओं की किलकारियां और माताओं के चेहरे की मुस्कान इस योजना की वास्तविक सफलता को परिभाषित करती है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिला को जब इस प्रकार का सरकारी संरक्षण मिलता है, तो वह न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के उत्थान में योगदान देती है।<br>मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की यह मुहिम निरंतर जारी है, जो मैनपुरी को एक स्वस्थ और सुरक्षित मातृत्व वाले जनपद के रूप में नई पहचान दिला रही है। सरकार और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों से संवर्धित यह योजना आज जनपदों में सुखद मातृत्व का बड़ा आधार बन चुकी है। माह फरवरी 2026 तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार प्रदेश भर में लगभग 60 लाख माताएं इस योजना से लाभान्वित हो चुकी हैं। आने वाले समय में ये योजना जिले के स्वास्थ्य सूचकांकों में और भी क्रांतिकारी बदलाव लाने के आधार बनेगी।<br>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;<br>जनपद मैनपुरी</p>
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		<title>लेख पत्र सूचना शाखा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 15:31:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Government]]></category>
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					<description><![CDATA[पत्र सूचना शाखासूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेशलेखग्राम्य विकासबी0सी0 सखी कार्यक्रम से बदलता उत्तर प्रदेश का सामाजिक आर्थिक परिदृश्यदिनांक 11 मई, 2026उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में अनेक नवाचार किए जा रहे हैं, जिनमें “बीसी सखी कार्यक्रम” एक अत्यंत प्रभावशाली और दूरगामी पहल के रूप में उभरा है। उत्तर प्रदेश &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश<br>लेख<br>ग्राम्य विकास<br>बी0सी0 सखी कार्यक्रम से बदलता उत्तर प्रदेश का सामाजिक आर्थिक परिदृश्य<br>दिनांक 11 मई, 2026<br>उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में अनेक नवाचार किए जा रहे हैं, जिनमें “बीसी सखी कार्यक्रम” एक अत्यंत प्रभावशाली और दूरगामी पहल के रूप में उभरा है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन &nbsp;द्वारा संचालित यह कार्यक्रम न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुँच को भी अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ कर रहा है। “एक ग्राम पंचायत-एक बीसी सखी” के सिद्धांत पर आधारित यह योजना आज लाखों ग्रामीण परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बी.सी. सखी कार्यक्रम: अवधारणा और उद्देश्य: &#8211;<br>बी.सी. सखी (ठनेपदमेे ब्वततमेचवदकमदज ैंाीप) कार्यक्रम का मूल उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय सेवाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इसके तहत स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को प्रशिक्षित कर उनके ही गांव में बैंकिंग प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया जाता है। ये सखियाँ ग्रामीण समुदाय को उनके घर के निकट ही बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराती हैं, जिससे लोगों को बैंक शाखाओं तक जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाती है।इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं देता, बल्कि उन्हें डिजिटल और वित्तीय साक्षरता से भी सशक्त बनाता है। इससे महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करती हैं, बल्कि समाज में अपनी एक अलग पहचान भी स्थापित करती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वित्तीय समावेशन की दिशा में क्रांतिकारी कदम: &#8211;<br>बीसी सखी कार्यक्रम ने उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को नई गति प्रदान की है। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 40,000 बीसी सखियाँ सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं, जो गांवों में घर-घर जाकर बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इनके माध्यम से अब तक 44,000 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेन-देन किए जा चुके हैं, जो इस योजना की सफलता का स्पष्ट प्रमाण है।ये सखियाँ नकद जमा और निकासी, आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (।मच्ै) के माध्यम से लेन-देन, बैलेंस जांच, बीमा, पेंशन, और ऋण पुनर्भुगतान जैसी सेवाएं प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा, वे विभिन्न सरकारी योजनाओं में नामांकन भी सुनिश्चित करती हैं, जिससे ग्रामीणों को सरकारी लाभ समय पर मिल सके।<br>इस पहल ने विशेष रूप से उन क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाया है, जहां बैंकिंग सुविधाएं पहले बहुत सीमित थीं। अब ग्रामीणों को छोटी-छोटी बैंकिंग आवश्यकताओं के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती, जिससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">महिला सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम: &#8211;<br>बीसी सखी कार्यक्रम ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। इस योजना के तहत कार्य कर रही महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि सामाजिक रूप से भी उनका सम्मान बढ़ा है।<br>उदाहरण के तौर पर, सुल्तानपुर की प्रियंका मौर्य और लखनऊ की अनीता पाल जैसी बीसी सखियाँ प्रतिमाह औसतन 45,000 रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित कर रही हैं। यह आय उनके परिवार के जीवन स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। साथ ही, ये महिलाएं अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन रही हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से अब तक बीसी सखियों ने 121 करोड़ रुपये से अधिक का कमीशन अर्जित किया है, जो यह दर्शाता है कि यह योजना महिलाओं के लिए एक स्थायी और सम्मानजनक आजीविका का माध्यम बन चुकी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बैंकिंग सेवाओं का विस्तार और तकनीकी सशक्तिकरण: &#8211;<br>बीसी सखी कार्यक्रम के तहत कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (च्ैन् ठंदो) साझेदार के रूप में जुड़े हुए हैं। इन बैंकों के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है। भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा सहित अन्य बैंक इस पहल में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।<br>इसके साथ ही, बीसी सखियों को डिजिटल उपकरणों जैसे माइक्रो एटीएम, लैपटॉप और स्मार्टफोन से लैस करने पर विचार चल रहा है। बैकों के सी एस आर फंड के माध्यम से इन उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना है, जिससे वे अपने कार्य को और अधिक कुशलता से कर सकें।डिजिटल माध्यमों के उपयोग से न केवल सेवाओं की गति बढ़ी है, बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है। इससे ग्रामीणों में बैंकिंग प्रणाली के प्रति विश्वास भी बढ़ा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सेवाओं का विस्तार और नई संभावनाएं: &#8211;<br>बीसी सखी कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए इसके कार्यक्षेत्र का लगातार विस्तार किया जा रहा है। अब बीसी सखियों को जन सुविधा केंद्रों के संचालन, बीमा सेवाओं, आरडी खाता खुलवाने, ऋण वितरण, ऋण वसूली, और पोस्ट ऑफिस की योजनाओं से जोड़ने जैसे कार्यों में &nbsp;योगदान लेने का मसौदा बन रहा है।<br>इसके अतिरिक्त, भविष्य में बीसी सखियों को आधार अपडेट जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी शामिल करने &nbsp;पर विभाग मे विचार मंथन चल रहा है। इससे उनकी भूमिका और अधिक व्यापक हो जाएगी और उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर भी प्राप्त होंगे।बड़ी ग्राम पंचायतों में एक से अधिक बीसी सखियों की नियुक्ति पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को और बेहतर बनाया जा सके।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जनपदों की उपलब्धियां और प्रतिस्पर्धा: &#8211;<br>बीसी सखी कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन में विभिन्न जनपदों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी देखने को मिल रही है। वर्तमान में प्रयागराज इस कार्यक्रम में प्रथम स्थान पर है, जबकि बरेली और शाहजहांपुर क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। यह प्रतिस्पर्धा न केवल कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन को प्रेरित करती है, बल्कि अन्य जनपदों को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल: &#8211;<br>बीसी सखी कार्यक्रम केवल एक रोजगार योजना नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में समावेशी विकास का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। यह पहल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सुदृढ़ कर रही है।इस कार्यक्रम के माध्यम से जहां एक ओर महिलाओं को सम्मानजनक आजीविका मिल रही है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को उनके द्वार पर ही आवश्यक वित्तीय सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को कम करने में भी मदद मिल रही है।<br>उत्तर प्रदेश में बीसी सखियां सही दिशा और प्रभावी रणनीति के साथ कार्य करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े बदलाव ला रही हैं। यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन और ग्रामीण विकास का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उ0प्र0 राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का लक्ष्य है कि सभी ग्राम पंचायतों में सक्रिय बीसी सखी की नियुक्ति हो जाए, जिससे “आत्मनिर्भर ग्रामीण महिला-आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश” के संकल्प को साकार किया जा सके।<br>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;-<br>-बी0एल0 यादव, से0नि0 सहायक निदेशक<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0<br>लेख<br>पर्यटन विभाग<br><strong>आस्था, अध्यात्म और ईको टूरिज्म के साथ पर्यटन के मानचित्र पर उभरता आजमगढ़</strong><br>दिनांक 11 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में स्थित जनपद आजमगढ़ वर्तमान में अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहरों के संरक्षण और आधुनिक पर्यटन विकास के युग की ओर अग्रसर है। प्रदेश सरकार की दूरदर्शी नीतियों और जिला प्रशासन के कुशल प्रबंधन के फलस्वरूप यह क्षेत्र अब वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। प्रदेश सरकार जनपद के पौराणिक, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को पुनर्जीवित कर रही है, साथ ही उन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस कर एक सुव्यवस्थित पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने की दिशा में पुख्ता प्रयास भी शुरू हो चुके हैं। यह पहल न केवल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने का एक माध्यम है, बल्कि यह ग्रामीण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी भी साबित होने वाली है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतर्गत राज्य योजना के माध्यम से आजमगढ़ के पर्यटन ढांचे को मजबूती देने के लिए कुल 11 महत्वपूर्ण परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है, जिनके लिए 13 करोड़ 19 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई है। इसमें से लगभग 5 करोड़ 95 लाख रुपये की प्रथम किश्त जारी कर दी गई है, जिससे विकास कार्यों ने धरातल पर गति पकड़ ली है।<br>प्रदेश सरकार का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि आस्था के केंद्रों को पर्यटन के आधुनिक मानकों के अनुरूप ढाला जाए ताकि दूर-दराज से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके अंतर्गत जनपद के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में स्थित प्राचीन और पौराणिक स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है। सगड़ी क्षेत्र के साल्हेपुर स्थित कैवल्य धाम शिव मंदिर के विकास के लिए स्वीकृत राशि का एक बड़ा हिस्सा जारी किया जा चुका है, जिससे यहाँ आने वाले भक्तों के लिए आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा। इसी प्रकार, मुबारकपुर के ग्राम सभा डिलिया में प्राचीन हनुमान मंदिर और लालगंज के ग्राम ढेकवा स्थित ब्रह्मबाबा स्थल का विकास कार्य जिला प्रशासन की देखरेख में प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जा रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य मात्र सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके माध्यम से उस स्थानीय संस्कृति और लोक विश्वास को संरक्षित करना है, जो सदियों से इस माटी की पहचान रहा है। नगर पंचायत अजमतगढ़ का प्राचीन हनुमान मंदिर हो या फूलपुर-पवई क्षेत्र का पौराणिक दुर्वासा ऋषि आश्रम, प्रत्येक स्थल के लिए योजनाबद्ध तरीके से निवेश किया जा रहा है ताकि यहाँ की ऐतिहासिक महत्ता को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किया जा सके।<br>आजमगढ़ के इस समग्र विकास अभियान में ईको-टूरिज्म को एक नई और अभिनव दिशा दी गई है। सदर क्षेत्र के अंतर्गत सिलनी स्थित चन्द्रमा ऋषि आश्रम के समग्र विकास के लिए 5 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। यह परियोजना आजमगढ़ को एक शांत, प्राकृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। ईको-टूरिज्म के इस मॉडल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक पर्यटन के बीच एक अनूठा संतुलन बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि प्रकृति के सानिध्य में स्थित इन ऋषि आश्रमों का विकास न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक भी करेगा। इसी क्रम में सदर क्षेत्र के एकलव्य स्थल एवं भगवान शंकर जी के स्थान और निजामाबाद के प्रसिद्ध दत्तात्रेय आश्रम के लिए भी धनराशि आवंटित कर निर्माण कार्यों को तेज कर दिया गया है। इन स्थलों के विकास से आजमगढ़ के ऐतिहासिक गौरव में वृद्धि होगी और यह प्रदेश के चुनिंदा पर्यटन स्थलों की श्रेणी में खड़ा हो सकेगा।<br>जनपद के फूलपुर-पवई क्षेत्र के गढ़वा हनुमान मंदिर जैसी बड़ी परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहाँ 135.63 लाख रुपये की लागत से बुनियादी ढांचे को सुधारा जा रहा है। इसके साथ ही दीदारगंज के बंधवा महादेव पातालपुरी मंदिर और गोपालपुर के तेजबर बाबा मंदिर का विकास भी इसी विस्तृत कार्ययोजना का हिस्सा है। इन सभी कार्यों के संपादन की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम को सौंपी गई है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि निर्माण कार्यों में उच्च स्तर की गुणवत्ता बनी रहे। जिला प्रशासन इन परियोजनाओं की समयबद्धता और गुणवत्ता की निरंतर समीक्षा कर रहा है ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर इन स्थलों को जनता को समर्पित किया जा सके। सरकार का मानना है कि ‘आस्था के साथ विकास‘ की इस अवधारणा से न केवल सांस्कृतिक गौरव वापस लौटेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।<br>पर्यटन के इस विस्तार का सीधा और सकारात्मक प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ना सुनिश्चित है। जैसे-जैसे इन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, वैसे-वैसे होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। आजमगढ़ की पारंपरिक कलाओं और यहाँ के स्थानीय उत्पादों को पर्यटन केंद्रों के माध्यम से एक बड़ा बाजार उपलब्ध होगा, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। प्रदेश सरकार की यह नीति पर्यटन को केवल मनोरंजन का साधन न मानकर उसे आर्थिक सशक्तिकरण का एक सशक्त माध्यम बनाने की है। आधारभूत ढांचे जैसे सड़क, प्रकाश और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार होने से पर्यटकों को अपने प्रवास के दौरान सुविधाओं का अहसास होगा। क्षेत्र में निजी निवेश की संभावनाएं भी प्रबल होंगी। आजमगढ़ का यह बदलता स्वरूप आने वाले समय में नवीन आकर्षणों के साथ नए पर्यटकीय क्षेत्र का केन्द्र बनेगा।<br>धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का यह एकीकृत ढांचा आजमगढ़ को उसकी नई पहचान दिलाने के लिए तैयार है। सरकार की योजनाओं का कुशल क्रियान्वयन और जिला प्रशासन की सक्रियता ने उन प्राचीन धरोहरों को मुख्यधारा में ला खड़ा किया है, जो लंबे समय से उपेक्षित थीं। अब आजमगढ़ केवल अपनी प्राचीन गाथाओं के लिए नहीं, बल्कि अपने आधुनिक पर्यटन, बुनियादी ढांचे और सुव्यवस्थित तीर्थ स्थलों के लिए भी जाना जाएगा। आने वाले वर्षों में जब ये सभी ग्यारह परियोजनाएं और ईको-टूरिज्म का विशेष प्रोजेक्ट पूर्णता की ओर बढ़ेगा, तब आजमगढ़ का पर्यटन मानचित्र पूरी तरह से बदल चुका होगा। आस्था, अध्यात्म और प्रकृति के अद्भुत संगम के रूप में यह जनपद अब एक नए और समृद्ध भविष्य की ओर अग्रसर है, जहाँ विकास की रोशनी प्राचीनतम मंदिर की दीवारों और आधुनिक पर्यटक सुविधाओं, दोनों पर समान रूप से चमक रही है। यह समूची प्रक्रिया आजमगढ़ को उत्तर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के संकल्प की सिद्धि है।<br>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8211;<br>जनपद आजमगढ़</p>
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			</item>
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		<title>PN 11-05-2026</title>
		<link>https://rahasyalok.com/pn-11-05-2026/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 15:30:39 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Government]]></category>
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					<description><![CDATA[पत्र सूचना शाखासूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश भूसा संग्रहण अभियान में तेजी लाई जाए लापरवाही या लक्ष्य पूरा न करने वाले अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई भूसा संग्रहण, पशु आहार एवं गौआश्रय प्रबंधन को मिशन मोडमें संचालित किया जाए गौशालाओं में कोई भी गौवंश भूखा प्यासा न रहे भूसा संग्रहण का कुल लक्ष्य &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">भूसा संग्रहण अभियान में तेजी लाई जाए</p>



<p class="wp-block-paragraph">लापरवाही या लक्ष्य पूरा न करने वाले अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई</p>



<p class="wp-block-paragraph">भूसा संग्रहण, पशु आहार एवं गौआश्रय प्रबंधन को मिशन मोड<br>में संचालित किया जाए</p>



<p class="wp-block-paragraph">गौशालाओं में कोई भी गौवंश भूखा प्यासा न रहे</p>



<p class="wp-block-paragraph">भूसा संग्रहण का कुल लक्ष्य 1.37 करोड़ कुन्तल</p>



<p class="wp-block-paragraph">अब तक 1.11 करोड़ कुन्तल भूसा का संग्रहण किया गया<br>-पशुधन मंत्री श्री धर्मपाल सिंह</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 11 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री श्री धर्मपाल सिंह ने आज यहां विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में प्रदेश में 15 अप्रैल से संचालित “भूसा संग्रहण अभियान” की विस्तृत समीक्षा करते हुए भूसा संग्रहण में न्यूनतम प्रदर्शन करने वाले जनपद हमीरपुर, वाराणसी, प्रतापगढ़, औरैया तथा अयोध्या को कड़ी चेतावनी देते हुए कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में संचालित गौआश्रय स्थलों में पशु आहार एवं भूसे की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए और भूसा संग्रह, पशु आहार प्रबंधन एवं गौआश्रय स्थलों के संचालन को मिशन मोड में संचालित किया जाए, ताकि निराश्रित गोवंशों के संरक्षण में किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो। गोशालाओं में कोई भी गोवंश भूखा, प्यासा न रहे।<br>श्री सिंह ने भूसा संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित अवधि में पूरा करने, भूसा एवं साइलेज टेंडर की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने तथा गोचर भूमि को कब्जामुक्त कराकर हरा चारा बोने के सख्त निर्देश देते हुए कहा कि जिन अधिकारियों द्वारा निर्धारित लक्ष्य समय से पूरे नहीं किए जाएंगे अथवा लापरवाही बरती जाएगी, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें किसी प्रकार की उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भूसा संग्रहण अभियान में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए तथा भूसा संग्रहण कार्य में और तेजी लाई जाए। वर्तमान समय गेहूं कटाई का मौसम होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भूसे की पर्याप्त उपलब्धता है, इसलिए इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाते हुए लक्ष्य के अनुरूप भूसा संग्रहित किया जाए।<br>श्री सिंह ने कहा कि प्रदेश के सभी गौआश्रय स्थलों पर गोवंशों के लिए भूसा, हरा चारा, स्वच्छ पेयजल, छायादार व्यवस्था, चिकित्सा एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशों के अनुरूप गौ संरक्षण को सर्वाेच्च प्राथमिकता पर रखा जाए और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाए। पशुओं हेतु दवाइयों एवं वैक्सीन हेतु गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए। पशुओं की संक्रामक रोग से सुरक्षा हेतु समयानुसार टीकारण कार्यक्रम चलाये जाए।<br>पशुधन मंत्री ने गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट स्थापित करने पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि गोबर गैस प्लांट स्थापना की कार्यवाही को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए, जिससे गोबर का समुचित प्रबंधन हो सके तथा गौआश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिले। उन्होंने कहा कि गोबर गैस एवं जैविक खाद के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।<br>बैठक में अपर मुख्य सचिव, पशुधन एवं दुग्ध विकास श्री मुकेश कुमार मेश्राम ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि सभी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी एनजीओ द्वारा संचालित गोआश्रय स्थलों का वेरिफिकेशन करें और उसकी रिपोर्ट प्राप्त करें। सीवीओ सुनिश्चित करें कि एनजीओ द्वारा गौशालाओं का प्रबंधन सुनियोजित एवं व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने मंत्री जी को बताया कि गौवंश संरक्षण एवं संवर्धन के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं समाजसेवियों के सहयोग से गौआश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है, ताकि निराश्रित गोवंशों को सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।<br>बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 7386 गोआश्रय स्थलांे में 1237694 गोवंश संरक्षित हैं। मा0 मुख्यमंत्री सहभागिता योजनान्तर्गत 114481 लाभार्थियों को कुल सुपुर्द गोवंश की संख्या 184227 है। भूसा संग्रहण का कुल लक्ष्य 1.37 करोड़ कुन्तल है। अब तक 1.11 करोड़ कुन्तल भूसा संग्रहित किया जा चुका है। अभियान के अंतर्गत 1905 अस्थाई भूसा बैंक (खोप/कूप) एवं 7285 स्थाई भूसा बैंक की स्थापना की गयी है। भूसा संग्रहण में क्षेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जनपदों में जालौन, मुजफ्फरनगर, नोयडा, मिर्जापुर तथा महोबा है।<br>बैठक में विशेष सचिव पशुधन श्री देवेन्द्र पाण्डेय, पीसीडीएफ के प्रबंध निदेशक श्री वैभव श्रीवास्तव, दुग्ध विकास विभाग के विशेष सचिव श्री राम सहाय यादव, डॉ. मेमपाल सिंह, निदेशक प्रशासन एवं विकास, पशुपालन, संयुक्त निदेशक डा0 पी0के0 सिंह तथा अपर निदेशक डॉ. संगीता तिवारी सहित अन्य योजनाधिकारी उपस्थित रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- निधि वर्मा</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/03ः40 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअ<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">हर पीड़ित को न्याय और हर पात्र को योजनाओं का लाभ दिलाना सरकार की प्राथमिकता”-श्री केशव प्रसाद मौर्य</p>



<p class="wp-block-paragraph">जनता दर्शन में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सुनी जन समस्याएं, अधिकारियों को दिए त्वरित समाधान के निर्देश</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 11 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को अपने कैंप कार्यालय, 7-कालिदास मार्ग, लखनऊ में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं और उनके त्वरित, प्रभावी एवं संतोषजनक निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।<br>जनता दर्शन में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग, दिव्यांगजन एवं युवा उपस्थित रहे। लोगों ने भूमि विवाद, राजस्व प्रकरण, चिकित्सा सहायता, पेंशन, आवास, सड़क, बिजली-पानी, पुलिस कार्रवाई, शिक्षा एवं रोजगार से जुड़ी समस्याएं उप मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं।<br>उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जनसमस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि आवश्यकतानुसार अधिकारी मौके पर जाकर निरीक्षण करें तथा पीड़ितों को समयबद्ध राहत उपलब्ध कराएं।<br>उन्होंने कहा कि ‘जनता दर्शन’ सरकार और आमजन के बीच सीधे संवाद का प्रभावी माध्यम है, जिससे वास्तविक समस्याओं की जानकारी मिलती है और उनका त्वरित समाधान संभव हो पाता है।<br>श्री मौर्य ने कहा कि प्रदेश सरकार जनहित और सुशासन के संकल्प के साथ कार्य कर रही है तथा हर पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोई भी फरियादी निराश नहीं लौटेगा और प्रत्येक समस्या का हरसंभव समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।<br>उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि ऐसा समाधान किया जाए, जिससे पीड़ित व्यक्ति पूरी तरह संतुष्ट हो तथा उसे बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों एवं कमजोर वर्गों से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने के निर्देश दिए।<br>भूमि विवाद एवं अवैध कब्जों से संबंधित मामलों को गंभीरता से लेते हुए श्री मौर्य ने संबंधित जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम मौके पर भेजकर निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि उत्पीड़न एवं अवैध कब्जों के मामलों में आवश्यकता पड़ने पर कठोर कार्रवाई भी की जाए।<br>उप मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसमस्याओं का समाधान समयबद्ध, पारदर्शी एवं जवाबदेही के साथ होना चाहिए, ताकि आमजन का शासन और प्रशासन पर विश्वास और अधिक मजबूत हो सके।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- बी0एल0 यादव</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/03ः40 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअ<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">संपदा कार्यक्रम के अंतर्गत विलुप्त हो रहे अलगोजा वादन का अभिलेखीकरण</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 11 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश की समृद्ध लोक संगीत परंपराओं एवं विलुप्तप्राय लोक वाद्यों के संरक्षण एवं अभिलेखीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान एवं उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में “संपदा” कार्यक्रम के अंतर्गत विलुप्त हो रहे अलगोज़ा वादन का अभिलेखीकरण कार्यक्रम का आयोजन उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी स्टूडियो, विपिन खंड, गोमती नगर, लखनऊ में किया गया।<br>यह जानकारी उ0प्र0 लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान के निदेशक श्री अतुल द्विवेदी ने दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में मथुरा के प्रसिद्ध लोक कलाकार सुखवीर एवं हरप्रसाद द्वारा अलगोजा एवं चंग वादन की पारंपरिक शैली का प्रभावशाली प्रदर्शन प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अपने लोक वादन के माध्यम से ब्रज क्षेत्र की सांगीतिक विरासत, लोक संवेदनाओं एवं पारंपरिक धुनों को जीवंत रूप में प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।<br>उन्होंने बताया कि अलगोज़ा वादन एवं लोक संगीत परंपरा पर केंद्रित एक विशेष साक्षात्कार भी आयोजित किया गया। कलाकारों का साक्षात्कार डॉ. शोभित नाहर, &nbsp;निदेशक, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा लिया गया। साक्षात्कार के दौरान अलगोज़ा वादन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इसकी तकनीकी विशेषताओं, वर्तमान चुनौतियों तथा नई पीढ़ी तक इस लोक परंपरा को पहुंचाने की आवश्यकता पर विस्तृत चर्चा की गई।<br>कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तर प्रदेश एवं देश की विलुप्त होती लोक कलाओं एवं वाद्य परंपराओं का दस्तावेजीकरण कर उन्हें संरक्षित करना तथा लोक कलाकारों को प्रोत्साहित करना है। उपस्थित कला प्रेमियों, शोधार्थियों एवं संगीत अनुरागियों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे लोक संस्कृति संरक्षण की दिशा में एक सार्थक एवं प्रेरणादायी पहल बताया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- केवल</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/05ः55 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअ<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश को ‘स्किल हब’ बनाने की दिशा में गोरखपुर में संवाद कार्यक्रम, मंत्री कपिल देव अग्रवाल करेंगे कार्यक्रम की अध्यक्षता</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तत्वावधान में आयोजित होगा कार्यक्रम, आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं को दक्ष बनाने पर रहेगा फोकस</p>



<p class="wp-block-paragraph">गोरखपुर, बस्ती और अयोध्या मंडल के 12 जनपदों के राजकीय एवं निजी आईटीआई संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ होगा मंथन</p>



<p class="wp-block-paragraph">‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ और ैैक्थ् योजनाओं पर होगी विशेष चर्चाए ैैक्थ् के तहत 4 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य</p>



<p class="wp-block-paragraph">आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में दिया जाएगा प्रशिक्षण, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, तकनीकी संसाधन और सेवायोजन पर होगी विस्तृत चर्चा</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्कृष्ट प्रशिक्षार्थियों और प्रशिक्षकों को किया जाएगा सम्मानित, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वालों को मिलेंगे प्रशस्ति पत्र</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 11 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश के युवाओं को आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुरूप दक्ष बनाकर आत्मनिर्भर बनाने तथा उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी ‘स्किल हब’ के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से मंगलवार, 12 मई 2026 को गोरखपुर में एक महत्वपूर्ण ‘संवाद कार्यक्रम’ आयोजित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में गोरखपुर, बस्ती एवं अयोध्या मंडल के निजी आईटीआई संचालक, प्रशिक्षण प्रदाता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा विभागीय अधिकारी सहभागिता करेंगे।<br>गोरखनाथ रोड स्थित रमाडा होटल गोरखपुर में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग कपिल देव अग्रवाल करेंगे। कार्यक्रम में विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, मिशन निदेशक पुलकित खरे सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।<br>संवाद कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की दो प्रमुख योजनाओं ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ और ‘एसएसडीएफ (स्टेट स्किल डेवलपमेंट फंड)’ पर विशेष चर्चा की जाएगी। एसएसडीएफ योजना के अंतर्गत प्रदेश के चार लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वहीं ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ के तहत वर्ष 2022 से अब तक प्रदेश के 1700 से अधिक विद्यालयों के ढाई लाख से अधिक विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा प्रदान की जा चुकी है।<br>कार्यक्रम में यह भी साझा किया जाएगा कि हाल ही में कक्षा 9 से 12 तक ।प् वित ।सस को अनिवार्य किया गया है, जिससे विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नई तकनीकों से जोड़कर भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके। इसके साथ ही प्रदेश के 18 अटल आवासीय विद्यालयों में भी ‘प्रोजेक्ट प्रवीण’ की शुरुआत की गई है, जहां लगभग साढ़े तीन हजार प्रतिभावान विद्यार्थियों को आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स और हेल्थकेयर जैसे आधुनिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।<br>कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कौशल प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाते हुए उसे उद्योगों की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है। संवाद कार्यक्रम के दौरान अयोध्या, बस्ती और गोरखपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी 12 जनपदों के राजकीय एवं निजी आईटीआई संस्थानों के प्रधानाचार्यों, प्रबंधकों तथा प्रशिक्षण प्रदाताओं के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। इसमें प्रशिक्षण की गुणवत्ता, संस्थानों के आधारभूत ढांचे, तकनीकी संसाधनों, रोजगारपरक प्रशिक्षण तथा युवाओं के बेहतर सेवायोजन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।<br>कार्यक्रम में उन प्रशिक्षार्थियों और प्रशिक्षकों को भी सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। माननीय मंत्री द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।<br>कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11 बजे दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ होगा। इसके पश्चात मिशन की उपलब्धियों पर आधारित विभागीय फिल्म का प्रदर्शन किया जाएगा। दोपहर 1 बजे प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम विभागीय योजनाओं और कौशल विकास के रोडमैप पर अपने विचार रखेंगे, जबकि दोपहर 1ः20 बजे माननीय मंत्री श्री कपिल देव अग्रवाल युवाओं के कौशल विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के विजन पर संबोधन देंगे।<br>उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का यह संवाद कार्यक्रम उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विभाग का उद्देश्य है कि प्रदेश का प्रत्येक युवा आधुनिक कौशल से लैस होकर रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सके तथा उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करने में सहभागी बने।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/06ः55 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअ<br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">खरीफ 2026 की तैयारी तेज, किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर मिलेंगे बीज और मिनी किट-सूर्य प्रताप शाही</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश में पर्याप्त खाद उपलब्ध, किसान बिल्कुल न घबराएं, 15 मई से शुरू होगा धान बीज का वितरण</p>



<p class="wp-block-paragraph">यूरिया की कालाबाजी और तस्करी पर सरकार सख्त, दोषियों पर रासुका के तहत होगी कार्रवाई</p>



<p class="wp-block-paragraph">बुलन्दशहर में 1575 बैग अवैध यूरिया बरामद, पीसीएफ अधिकारियों समेत 08 लोगों पर एफआईआर दर्ज</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp;लखनऊ: 11 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">खरीफ 2026 के सफल संचालन हेतु कृषि विभाग ने बीज और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर ली है। किसानों को समय से गुणवत्तापूर्ण कृषि निवेश उपलब्ध कराने के लिए प्रदेशभर में पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि खरीफ सीजन में खेती-किसानी में कोई बाधा न आए। यह बात आज प्रदेश के कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने कृषि भवन के सभागार में विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान कही।<br>उन्होंने बताया कि इस खरीफ सीजन में किसानों को धान, उड़द, मूंग, तिल और मोटे अनाजों के कुल 1,96,117 क्विंटल बीज 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे। विभाग द्वारा दलहन और तिलहन फसलों के मिनी किट भी वितरित किए जाएंगे। वर्तमान में 15 मई से 80,000 क्विंटल धान के बीजों का वितरण शुरू कर दिया जाएगा, जिसकी आपूर्ति जनपदों में सुनिश्चित की जा रही है। इस वर्ष राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत 49,129 क्विंटल दलहन बीज (उर्द, मूंग और अरहर) तथा मूंगफली उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 57,446 क्विंटल बीज अनुदान पर दिए जाएंगे। मूंग के लिए 3,946 क्विंटल, उर्द के लिए 23,958 क्विंटल तथा अरहर के लिए 21,225 क्विंटल का वितरण लक्ष्य निर्धारित किया गया है। त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम के तहत हाइब्रिड मक्का बीज भी उपलब्ध कराए जाएंगे।<br>कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए 15 मई को कानपुर में पहली मंडलीय किसान गोष्ठी आयोजित होगी, जिसमें चित्रकूट, झांसी और कानपुर मंडल के किसान व वैज्ञानिक शामिल होंगे। इसके बाद 21 मई को लखनऊ में राज्य स्तरीय गोष्ठी होगी।<br>उर्वरकों की स्थिति पर स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश में 27.54 लाख मीट्रिक टन खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिसमें 12 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 4.79 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 3.66 लाख मीट्रिक टन एसएसपी और 91 हजार मीट्रिक टन पोटाश शामिल है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए यूरिया का संतुलित प्रयोग करें। उर्वरकों की कालाबारी रोकने हेतु 10 जनपदों में विशेष जांच टीमें भेजी जा रही हैं।<br>हाल ही में बुलन्दशहर के अनूपशहर क्षेत्र में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस और कृषि विभाग ने अवैध रूप से ले जाए जा रहे तीन ट्रकों से 1575 बैग इफको यूरिया बरामद किया है। इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मोहम्मद हारून, ट्रक चालकों और पीसीएफ के कर्मचारियों के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। जांच में सामने आया कि यह उर्वरक पीसीएफ बफर गोदाम से अवैध तरीके से निकाला गया था। कृषि मंत्री ने चेतावनी दी है कि खाद की तस्करी में शामिल दोषियों के खिलाफ रासुका (एनएसए) के तहत भी कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सम्पर्क सूत्र- डा0 मनोज चन्द्रा</p>



<p class="wp-block-paragraph">राघवेन्द्र/07ः00 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअ<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत रू. 04 अरब 42 करोड़ से अधिक की धनराशि की स्वीकृति की गयी प्रदान</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 11 मई, 2026<br>उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशो के क्रम मे उत्तर प्रदेश शासन, ग्राम्य विकास विभाग द्वारा &nbsp;वित्तीय वर्ष 2026-27 में एन०आर०एल०एम० योजनान्तर्गत एस०एन०ए० स्पर्श माडयूल के अंतर्गत भारत सरकार के पत्र दिनांक 28-04-2026 द्वारा स्वीकृत मदर सैक्शन के सापेक्ष अनुदान सं0-83 (अनु०जाति मद) लेखाशीर्षक 2501-04-789-01-02 मानक मद-27 सब्सिडी के अंतर्गत केन्द्रांश की धनराशि रू० 28928.92 लाख के सापेक्ष राज्यांश की धनराशि रू0 19285.947 लाख,इस प्रकार कुल धनराशि रू0 48214.867 लाख (रू० चार अरब बयासी करोड चौदह लाख छियासी हजार सात सौ मात्र) को अवमुक्त कर आयुक्त, ग्राम्य विकास के निवर्तन पर रखे जाने &nbsp;की स्वीकृति प्रदान की गयी है। इस सम्बन्ध मे आवश्यक शासनादेश उत्तर प्रदेश शासन ग्राम्य विकास विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है<br>जारी शासनादेश मे निर्देश दिये गये है कि धनराशि का आहरण एवं व्यय योजना विषयक गाइड लाइन/दिशा निर्देश तथा इस संबंध में समय-समय पर निर्गत दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए किया जाए। स्वीकृत की गयी धनराशि के विरुद्ध निर्धारित लक्ष्यों के प्राप्त होने व उसके परीक्षण/सत्यापन सुनिश्चित किये जाने का दायित्य आयुक्त, ग्राम्य विकास/मिशन निदेशक, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का होगा। स्वीकृत धनराशि के नियम संगत व्यय व स्वीकृत धनराशियों के निर्धारित प्रारूप पर उपयोगिता प्रमाण पत्र प्राप्त किये जाने का दायित्व आयुक्त, ग्राम्य विकास/मिशन निदेशक, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का होगा। उप मुख्यमंत्री श्री मौर्य ने सम्बन्धित अधिकारियो को निर्देशित किया गया है कि धनराशि के आहरण एवं व्यय के संबंध में मितव्ययिता संबंधी समय-समय पर निर्गत शासनादेश एवं वित्तीय नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।<br>सम्पर्क सूत्र- बी0एल0 यादव</p>



<p class="wp-block-paragraph">राम यतन/07ः35 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद</p>



<p class="wp-block-paragraph"> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">योगी सरकार में उच्च शिक्षा को नई उड़ान, यूनिवर्सिटीज की तर्ज पर अब डिग्री कॉलेजों को भी मिलेगी राष्ट्रीय रैंकिंग</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश के विश्वविद्यालयों ने बदली पहचान, अब कॉलेजों को उत्कृष्ट बनाने की तैयारी</p>



<p class="wp-block-paragraph">डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल्स की कार्यशाला आयोजित कर उन्हें रैंकिंग प्राप्त करने के लिए किया जा रहा प्रोत्साहित</p>



<p class="wp-block-paragraph">संस्थानों में गुणवत्ता सुधार, रिसर्च कल्चर, डिजिटल एजुकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्र सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 11 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में योगी सरकार लगातार नए मानक स्थापित कर रही है। कभी नैक (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रिडिटेशन काउंसिल) की रैंकिंग में बी और बी-प्लस ग्रेड तक सीमित रहने वाले प्रदेश के विश्वविद्यालय आज ए$$, ए$ और ए ग्रेड हासिल कर देशभर में अपनी नई पहचान बना रहे हैं। अब योगी सरकार का अगला लक्ष्य प्रदेश के डिग्री कॉलेजों को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग दिलाना है। इसके लिए डिग्री कॉलेज के प्रिंसिपल्स की कार्यशाला का आयोजन कर उन्हें रैंकिंग प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।<br>उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विधानसभा में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अब सरकार का फोकस केवल विश्वविद्यालयों तक सीमित नहीं रहेगा। अगले चरण में प्रदेश के डिग्री कॉलेजों को भी नैक और अन्य राष्ट्रीय रैंकिंग दिलाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए कॉलेजों के प्राचार्यों और शिक्षकों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें उन्हें बताया जा रहा है कि संस्थानों में गुणवत्ता सुधार, रिसर्च कल्चर, डिजिटल एजुकेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्र सुविधाओं को बेहतर बनाकर किस प्रकार रैंकिंग हासिल की जा सकती है।<br>उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि कॉलेजों में छात्र संख्या बढ़ाने, नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने और रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। योगी सरकार का उद्देश्य प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है। उन्होंने &nbsp;कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल सबसे अधिक विश्वविद्यालयों वाला राज्य नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का भी अग्रणी केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।<br>उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन हुए हैं। उन्होंने कहा कि योगी सरकार आने से पहले उत्तर प्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालय नैक रैंकिंग में बी या बी-प्लस ग्रेड तक ही सीमित थे और प्रदेश का कोई भी विश्वविद्यालय ए या उससे ऊपर की श्रेणी में नहीं था। उन्होंने बताया कि राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के नेतृत्व में विश्वविद्यालयों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इन कार्यशालाओं में विश्वविद्यालयों को गुणवत्ता सुधार, शोध, डिजिटल संसाधनों, शिक्षण व्यवस्था और अकादमिक वातावरण को बेहतर बनाने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए। इसका परिणाम यह हुआ कि आज उत्तर प्रदेश के सात विश्वविद्यालय नैक की ए$$ रैंकिंग प्राप्त कर चुके हैं, जबकि चार विश्वविद्यालय ए$ और दो विश्वविद्यालय ए ग्रेड में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि पहले जहां बी ग्रेड को उपलब्धि माना जाता था, आज प्रदेश के विश्वविद्यालय उत्कृष्टता की नई श्रेणियों में स्थान बना रहे हैं।<br>उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि यही नहीं, उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालय अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। पहले प्रदेश में क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग का नाम तक सुनाई नहीं देता था, लेकिन अब प्रदेश के दो विश्वविद्यालय क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में शामिल हो चुके हैं, जबकि छह विश्वविद्यालय क्यूएस एशिया रैंकिंग में स्थान प्राप्त कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त तीन विश्वविद्यालय यूजीसी ग्रेड-1 श्रेणी में भी पहुंच चुके हैं।<br>सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे</p>



<p class="wp-block-paragraph">राम यतन/06ः35 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br> </p>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">जनपद मथुरा, बरेली और शाहजहांपुर में पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक की स्थापना हेतु 05 करोड़ रूपये की धनराशि स्वीकृत</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 11 मई, 2026<br>उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में पशु चिकित्सा सेवायें तथा पशु स्वास्थ्य के तहत 03 &nbsp;पशु चिकित्सा पॉलीक्लीनिक की स्थापना हेतु वर्तमान वित्तीय वर्ष में 05 करोड़ रूपये की धनराशि स्वीकृत की है। स्वीकृत धनराशि से जनपद मथुरा के तहसील छाता के ग्र्राम नन्दगांव के लिए 235.37 लाख रूपये, जनपद बरेली के तहसील आंवला के गुरूगांवा मुस्तकिल हेतु 150 लाख रूपये तथा जनपद शाहजहांपुर के परगना एवं तहसील सदर के ग्राम साल्लियां हेतु 114.63 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।<br>इस संबंध में पशुधन विभाग द्वारा शासनाादेश जारी करते हुए जनपद मथुरा, बरेली एवं शाहजहांपुर के मुख्य पशु चिकित्साधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे दिए गए है। शासनादेश में कहा गया है कि स्वीकृत की जा रही धनराशि का व्यय उसी प्रयोजन हेतु किया जाएगा जिसके लिए धनराशि स्वीकृत की जा रही है। स्वीकृत की जा रही धनराशि का व्यय निर्माण संबंधी संगत शासनादेशों में निहित व्यवस्थानुसार/निर्धारित मानकों के अधीन किया जाएगा।<br>सम्पर्क सूत्र-निधि वर्मा<br>वैशाली माथुर/12ः25 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br> </p>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">जनपद फिरोजाबाद में औद्योगिक कॉरिडोर के विकास हेतु 51.41 करोड़ रुपये स्वीकृत</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 11 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनपद फिरोजाबाद में एक्सप्रेस-वे परियोजना के समीप पूंजी निवेश के लिए औद्योगिक विकास को गति देने के लिए औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जाने हेतु अवस्थापना एवं आधारभूत सुविधाओं के निर्माण कार्यों के लिए कुल 51 करोड़ 41 लाख 03 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है।<br>यह परियोजना प्रदेश में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई दिशा प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी। एक्सप्रेस-वे के निकट विकसित होने वाला यह औद्योगिक कॉरिडोर निवेशकों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक आकर्षक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। स्वीकृत धनराशि से सड़क, विद्युत, जलापूर्ति, ड्रेनेज तथा अन्य आवश्यक अवस्थापना सुविधाओं का निर्माण कराया जाना प्रस्तावित है, जिससे उद्योगों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो सकेगा।<br>औद्योगिक विकास विभाग द्वारा इस संबंध में आवश्यक आदेश जारी कर दिए गए हैं।<br>सम्पर्क सूत्र-सरिता वर्मा<br>वैशाली माथुर/01ः45 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br> <br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व के 40 स्मारकों/पुरास्थलों को संरक्षित करने का निर्णय</p>



<p class="wp-block-paragraph">जीर्ण-शीर्ण एवं खंडहर में &nbsp;बदलते स्मारकों को संरक्षित कर बुनियादी सुविधाएं सुलभ करायी जाएगी-जयवीर सिंह</p>



<p class="wp-block-paragraph">अनूठी शैली में बने इन स्मारकों को नया स्वरूप देकर पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 11 मई, 2026<br>उत्तर प्रदेश पुरातत्व विभाग द्वारा प्रदेश में स्थित 40 स्मारकों, पुरास्थलों को संरक्षित किए जाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा 03 स्मारक, पुरास्थलों और असंरक्षित घोषित किया गया है। संरक्षित किए जाने वाले स्मारक पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण है। इसमें से कुछ ढाई हजार से लेकर तीन हजार वर्ष पुराने है। कुछ स्मारक कुषाण काल के प्रतीत होते है।<br>यह जानकारी आज यहां उ0प्र0 के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने दी। उन्होनंे बताया कि प्रदेश में प्राचीन एवं अति प्राचीन स्मारक, स्थापत्य कला के अनूठे धरोहर है। यह स्मारक अपने आप में तत्कालीन समय की सांस्कृतिक भव्यता एवं इतिहास समेटे हुए है। मौजूदा समय में जीर्ण-शीर्ण तथा खंडहर में परिवर्तित हो चुके है। राज्य सरकार इन स्मारकों को संरक्षित कर नया स्वरूप देने का निर्णय लिया है। साथ ही इन स्मारकों के आस-पास अवस्थापना सुविधाएं विकसित कर पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को आकर्षित करना है। इसके अलावा प्राचीन स्थलों को बचाना भी है।<br>पर्यटन मंत्री ने बताया कि जिन स्मारकों को संरक्षित करने का निर्णय लिया गया है। उनमें सीतापुर के 02, उन्नाव के 03, हरदोई एवं बाराबंकी के 01-01, कानपुर नगर के 02, रायबरेली का 01, लखनऊ के 02, प्रतापगढ़ का 01, फतेहपुर के 02 तथा सिद्धार्थनगर महाराजगंज, देवरिया के 01-01, जालौन के 05, ललितपुर का 01, झांसी के 05, महोबा के 04, गाजीपुर के 01, वाराणसी के 02, आगरा, मैनपुरी, सहारनुपर तथा रामपुर के 01-01 शामिल है। जिन स्मारकों को असंक्षित घोषित किया गया है, उनमें कंसकिला तहसील सदर मथुरा, गोण्डवानी मंदिर ग्राम पिपरई, तहसील तालबेहट, जनपद ललितपुर तथा अमरगढ़ का शिवमंदिर ग्राम उदई शाहपुरं तहसील पट्टी जनपद प्रतापगढ़ शामिल है।<br>संरक्षित स्थलों में शिवमंदिर, वकुंड तहसील लहरपुर, जनपद सीतापुर परेवा जाल का टीला तहसील सिधौली, सीतापुर, माहे पासी का टीला तहसील सदर जनपद उन्नाव, प्राचीन टीला, मोहान, तहसील हसनगंज उन्नाव, शिव मंदिर औरास, उन्नाव, नागेश्वर महादेव मंदिर तहसील संडीला जनपद हरदोई, राजा कंुंवर गिरधारी सिंह की समाधि तहसील नवाबगंज, बाराबंकी, पंचमुखी शिव मंदिर तहसील घाटमपुर, कानपुर नगर, प्राचीन शिव मंदिर बिठूर कानुपर नगर, गंगकुण्ड, तहसील डलमऊ, रायबरेली, शामिल है। इसके अलावा लखनऊ के प्राचीन भवन मूसाबाग, तहसील सदर, कालाकांकर भवन मोहल्ला हैदराबाद तहसील सदर लखनऊ शामिल है।<br>इसके अलावा प्राचीन शिव मंदिर व तालाब रामपुर बेला, तहसील पट्टी प्रतापगढ़, राधाकृष्ण मंदिर, तहसील बिंदकी, फतेहपुर, पासी बाबा मंदिर, तहसील बिंदकी, फतेहपुर, डब्लू0सी0 पेप्पे से संबंधित भवन सिद्धार्थनगर, खड़खौला टीला तह0 फरेदा महराजगंज, खुदिया बजुर्ग टीला तह0 बरहज, देवरिया, रामजानकी व हनुमान जी का मंदिर तह0 कोंच, जालौन, लटक बिहारी मंदिर उरई, जालौन, सराफी मंदिर उरई, जालौन, मदरघाट शिवालय उरई, जालौन तथा प्राचीन स्थल सूर्य मंदिर तह0 कालपी जालौन प्राचीन बावली, तह0 मडावरा, ललितपुर, गढ़वई दुर्ग तह0 गरौठा, झांसी, दो प्रस्तर शिवमंदिर तह0 बड़ागांव, झांसी तथा हजारिया महादेव मंदिर के सम्मुख स्थित शिवालय ग्राम0 डिमरौनी, बड़ागांव , झांसी शामिल है।<br>इसी प्रकार यज्ञशाला, बरूआसागर, तह0 बड़ागांव, झांसी, शिवमंदिर तह0 सदर, झांसी, मगलगढ़ का किला, ग्राम चरखारी, तह0 चरखारी, महोबा, गुमान बिहारी मंदिर, ग्राम रायनपुर, तह0 चरखारी, महोबा, श्री वासुदेव जी मंदिर महोबा, तालकोठी ग्राम चरखारी, महोबा, पंच मंदिर, तह0 कासिमाबाद, गाजीपुर, शिव मंदिर, ग्राम असवारी, राजाबा तालाब, वाराणसी, एलटी कॉलेज स्थित गोपाल लाल विला, तह0 सदर, वाराणसी, हतकठ का किला, तह0 बाह, आगरा, किरथुवा खेड़ा का किला, तह0 करहल, मैनपुरी, मिर्जा देहलवी का मकबरा, तह0 सदर, सहारनपुर तथा तूती का मकबरा, तह0 सदर, जनपद रामपुर शामिल है।<br>जयवीर सिंह ने बताया कि इन स्मारकों को संरक्षित एवं अतिक्रमण से बचाने के लिए बाउण्ड्रीवाल आदि का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। अधिकांश स्मारक स्थापत्य कला के दुलर्भ नमूने है जो जीर्ण-शीर्ण हो गए है। यह स्मारक हमारे प्राचीन विरासत है एवं प्राचीन इतिहास को समेटे हुए है। पर्यटन मंत्री ने बताया कि यह स्मारक हमारे गौरवशाली इतिहास और समृद्धि संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते है। नई पीढ़ी को अपने अतीत का स्मरण कराने तथा संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए इन स्मारकों को संरक्षित घोषित किया गया है।<br>सम्पर्क सूत्र-केवल</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैशाली माथुर/04ः45 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br> </p>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">जनपद सीतापुर में बिजवार खुर्द स्थित शारदा सहायक की भूमि पर कॉलोनी की क्षतिग्रस्त बाउंड्री वॉल के निर्माण के कार्य परियोजना के लिए 20 लाख रुपए की अवशेष धनराशि की गयी अवमुक्त’</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 11 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश सरकार ने जनपद सीतापुर में बिजवार खुर्द स्थित शारदा सहायक की भूमि पर कॉलोनी की क्षतिग्रस्त बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य के परियोजना के लिए 20 लाख रुपए की अवशेष धनराशि अवमुक्त की गयी हैं। इस सम्बन्ध में आवश्यक शासनादेश सिंचाई एवं जलसंसाधन विभाग द्वारा जारी कर दिया गया है।<br>जारी शासनादेश में निर्देश दिया गया है कि उक्त परियोजना में कराए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता एवं समय से पूर्ण कराया जाना संबंधित मुख्य अभियंता द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।<br>सम्पर्क सूत्र-इंजेश सिंह</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैशाली माथुर/04ः45 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद</p>
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		<title>पत्र सूचना शाखा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0 (राज्यपाल सूचना परिसर)</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 15:29:18 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Government]]></category>
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					<description><![CDATA[राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने फिल्म ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ की स्पेशल स्क्रीनिंग का अवलोकन किया मुख्यमंत्री ने उ0प्र0 में ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा की परिणाम लाने के लिए परिश्रम आवश्यक होता है, इस फिल्म की शूटिंग के दौरान पात्रों ने काफी परिश्रम किया। ऐसी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने फिल्म ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ की स्पेशल स्क्रीनिंग का अवलोकन किया</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री ने उ0प्र0 में ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा की</p>



<p class="wp-block-paragraph">परिणाम लाने के लिए परिश्रम आवश्यक होता है, इस फिल्म की शूटिंग के दौरान पात्रों ने काफी परिश्रम किया। ऐसी फिल्में आगे भी बननी चाहिए, जो हमारी संस्कृति एवं परम्पराओं को प्रदर्शित करती हैं : राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल</p>



<p class="wp-block-paragraph">‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ भारत के इतिहास, परम्परा और संस्कृति से जुड़ी फिल्म है। यह भारतीय इतिहास की उन घटनाओं की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करती है, जो आज से 5,000 वर्ष पहले इस धरा धाम पर घटित हुई थीं</p>



<p class="wp-block-paragraph">आधुनिकता आवश्यक है, लेकिन अपनी परम्परा को विस्मृत करके नहीं। अपनी परम्परा को साथ लेकर ही हमें आगे बढ़ना होगा</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">कला ईश्वरीय प्रेरणा है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण हैं। हमें कला को सम्मान देना चाहिए</p>



<p class="wp-block-paragraph">सूचना विभाग हर जनपद में ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग की व्यवस्था करे, जिससे बच्चे अपनी परम्परा और सनातन संस्कृति के बारे में जान सकें : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ : 11 मई, 2026<br>उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिनांक 10 मई 2026 को लोक भवन के सभागार में भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य माहात्म्य पर आधारित फिल्म ‘कृष्णावतारम् (भाग-1, हृदयम)’ की स्पेशल स्क्रीनिंग का अवलोकन किया।<br>फिल्म ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और व्यक्तित्व को संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया गया है। फिल्म में द्वापर युग की सांस्कृतिक विरासत, भारतीय सभ्यता तथा सनातन परम्पराओं के विविध पक्षों को अत्यंत भव्य और प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है। विशेष रूप से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े विभिन्न संबंधों एवं भावनात्मक पक्षों को आकर्षक शैली में चित्रित किया गया है। फिल्म में श्री राधा, श्री रुक्मिणी एवं श्री सत्यभामा के साथ उनके संबंधों और प्रेम के विभिन्न स्वरूपों को भी प्रभावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया गया है, जो दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक भावनाओं से जोड़ने का कार्य करता है।<br>राज्यपाल जी ने इस अवसर पर सभी को अंतरराष्ट्रीय मातृ दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि बेटियाँ हैं, तो घर में खुशहाली है। मुख्यमंत्री जी कृष्ण भक्ति एवं राम भक्ति से जुड़े हैं। उन्हें पूरा भरोसा था कि आज यह फिल्म टैक्स फ्री हो जाएगी। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल के सदस्यगण तथा बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों ने फिल्म का अवलोकन किया।<br>राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ से जुड़े कलाकारों एवं तकनीकी दल को सम्मानित किया। उन्होंने कलाकारों के अभिनय, परिश्रम एवं भारतीय संस्कृति के प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दीं।<br>इस अवसर पर अपने उद्बोधन में राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को फिल्म को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री किए जाने हेतु धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह फिल्म भारत की समृद्ध पौराणिक परम्परा एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। कलाकारों ने अत्यंत मेहनत और समर्पण के साथ अपने पात्रों का निर्वहन किया है तथा ऐसी प्रेरणादायी फिल्मों का निर्माण होना चाहिए, जिससे नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और परम्पराओं से परिचित हो सके।<br>राज्यपाल जी ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति, महापुरुषों तथा पौराणिक चरित्रों के बारे में जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। विद्यालयों के पाठ्यक्रम में भारतीय पौराणिक संस्कृति और महान व्यक्तित्वों का समुचित उल्लेख होना चाहिए, जिससे बच्चों में संस्कार और &nbsp;नैतिकता &nbsp;की भावना विकसित हो सके।<br>उन्होंने फिल्म में आधुनिक तकनीक के उत्कृष्ट प्रयोग की भी सराहना करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र के विभिन्न आयामों को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जो युवा पीढ़ी को प्रेरणा प्रदान करेगा। उन्होंने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों एवं तकनीकी दल को बधाई देते हुए उनके कार्य की प्रशंसा की।<br>राज्यपाल जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है। यहाँ अनेक विविधताएँ पायी जाती हैं। यहाँ के जल संसाधनों का समुचित उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किए गए छह नए मंत्रियों को भी शुभकामनाएँ दीं तथा उन्हें प्रदेशहित में पूर्ण समर्पण और ऊर्जा के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों को अपनी संपूर्ण क्षमता प्रदेश के विकास और जनकल्याण के कार्यों में लगानी चाहिए।<br>अपने उद्बोधन में राज्यपाल जी ने श्रीमती अनारबेन पटेल के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे हस्तशिल्प एवं क्राफ्ट के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं तथा बड़ी संख्या में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगदान दे रही हैं। राज्यपाल जी ने कहा कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए, जिससे वे सम्मान और आत्मविश्वास के साथ समाज एवं राष्ट्र के विकास में सहभागिता कर सकें।<br>इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ भारत के इतिहास, परम्परा और संस्कृति से जुड़ी फिल्म है। इस फिल्म ने भारतीय संस्कृति व सनातन परम्परा के गूढ़ रहस्यों को अपने बेहतरीन संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया है। ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ फिल्म के सभी कलाकारों तथा पूरी टीम का अभिनन्दन करते हुए मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश में इस फिल्म को टैक्स फ्री करने की घोषणा की।<br>मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े हर प्रसंग के बारे में सभी लोग जानते हैं। बरसाना-वृन्दावन में हम ‘राधे-राधे’ का सम्बोधन सुनते हैं। श्रीकृष्ण के जीवन की एक प्रमुख पात्र सत्यभामा थीं। ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ फिल्म भारतीय इतिहास की उन घटनाओं की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करती है, जो आज से 5,000 वर्ष पहले इस धरा धाम पर घटित हुई थीं। इसने पूरे समाज को एक नई दिशा दी थी। श्रीकृष्ण साक्षात अवतार हैं। श्रीकृष्ण की पूरी कथा को जिस रूप में फिल्म में प्रस्तुत किया गया है, यह अत्यंत अभिनन्दनीय तथा सराहनीय है।<br>मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हर व्यक्ति के लिए भारत की शाश्वत परम्परा के बारे में जानने, सीखने तथा इससे प्रेरणा प्राप्त करने का एक अद्भुत अवसर इस ढाई घंटे की फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। सूचना विभाग हर जनपद में इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग की व्यवस्था करे, जिससे सभी बच्चे अपनी परम्परा और सनातन संस्कृति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें। आधुनिकता आवश्यक है, लेकिन अपनी परम्परा को विस्मृत करके नहीं। अपनी परम्परा को साथ लेकर ही हमें आगे बढ़ना होगा।<br>मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह फिल्म बहुत अच्छी है। इसमें कलाकारों का अभिनय अत्यंत सराहनीय है। आज के समय में जब लोग पाश्चात्य संस्कृति की ओर उन्मुख होते दिखाई देते हैं, तब अपनी पुरातन परम्परा को आज की पीढ़ी की मांग के अनुरूप आधुनिक डिजिटल स्वरूप तथा आधुनिक परिवेश में प्रस्तुत करना एक अभिनन्दनीय कार्य है। इसके लिए फिल्म के सभी कलाकार तथा पूरी टीम बधाई के पात्र हैं। मुख्यमंत्री जी ने फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग के लिए अपना बहुमूल्य समय देने हेतु राज्यपाल जी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।<br>मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्यपाल जी के पास शिक्षक, प्रधानाचार्य, मंत्री, मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के रूप में सार्वजनिक जीवन का लंबा अनुभव है। यह एक सुखद संयोग है कि इस फिल्म में सत्यभामा का मुख्य किरदार निभाने वाली अभिनेत्री संस्कृति जयना हैं। संस्कृति जयना राज्यपाल जी की नातिन भी हैं। यह राज्यपाल जी के लिए भी एक अद्भुत क्षण है कि जिस बच्ची का उन्होंने पालन-पोषण कर उसे आगे बढ़ाया, उसने अपने अभिनय के माध्यम से प्रभावशाली प्रस्तुति दी है। कला ईश्वरीय प्रेरणा है, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण हैं। हमें कला को सम्मान देना चाहिए।<br>मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह अद्भुत संयोग है कि आज हमने अपनी सरकार के द्वितीय कार्यकाल के मंत्रिमंडल विस्तार कार्यक्रम को सम्पन्न किया है। आज प्रदेश सरकार में आठ नए मंत्री श्री भूपेन्द्र चौधरी, श्री मनोज पाण्डेय, श्री सोमेन्द्र तोमर, श्री अजीत सिंह पाल, श्रीमती कृष्णा पासवान, श्री कैलाश सिंह राजपूत, श्री सुरेन्द्र दिलेर एवं श्री हंस राज विश्वकर्मा शामिल हुए हैं। श्री सोमेन्द्र तोमर और श्री अजीत सिंह पाल पहले राज्य मंत्री थे, आज उन्हें राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। इन मंत्रिगण ने आज जन भवन में शपथ ली है। इस अवसर पर फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग भी एक अद्भुत क्षण है।<br>फिल्म ‘कृष्णावतारम् पार्ट-1 : द हार्ट (हृदयम)’ की मुख्य पात्र संस्कृति जयना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का विशेष धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इतने बड़े प्रदेश की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बावजूद उन्होंने कलाकारों और इस फिल्म के लिए अपना बहुमूल्य समय दिया, जिसके लिए वह हृदय से आभारी हैं। उन्होंने फिल्म को मिले समर्थन एवं प्रोत्साहन के लिए मुख्यमंत्री जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उन्हें राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से निरंतर आगे बढ़ने की शक्ति मिलती रही है। उन्होंने कहा कि परिश्रम, अनुशासन और समर्पण के संस्कारों ने उनके अभिनय जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा</p>



<p class="wp-block-paragraph">सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, उ0प्र0</p>



<p class="wp-block-paragraph">(राज्यपाल सूचना परिसर)</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;-</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्यपाल तथा मुख्यमंत्री श्री काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अन्तर्गत ज्योतिर्लिंग एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ में सम्मिलत हुए</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;&#8212;-</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री ने सोमनाथ मन्दिर, गुजरात में आयोजित सोमनाथ</p>



<p class="wp-block-paragraph">अमृत महोत्सव के अन्तर्गत प्रधानमंत्री द्वारा किये गये दर्शन-पूजन, कुम्भाभिषेक, ध्वजारोहण तथा सम्बोधन के सजीव प्रसारण का अवलोकन किया</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;-</p>



<p class="wp-block-paragraph">वर्तमान युवा पीढ़ी को देश के सांस्कृतिक एवं धार्मिक इतिहास की जानकारी होना आवश्यक</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8211;</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोमनाथ भारत की सांस्कृतिक चेतना और स्वाभिमान का अमर प्रतीक</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8211;</p>



<p class="wp-block-paragraph">“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का महायज्ञ</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोमनाथ से काशी तक भारत की आध्यात्मिक एकात्मता का आलोक प्रसारित हो रहा है &#8212;&#8211;</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत की संस्कृति को कोई शक्ति समाप्त नहीं कर सकती</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">आस्था, विरासत और सांस्कृतिक चेतना ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8211;</p>



<p class="wp-block-paragraph">-राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8211;</p>



<p class="wp-block-paragraph">जिस राष्ट्र की जड़ें अपनी संस्कृति में गहरी होती, उसकी उड़ान भी</p>



<p class="wp-block-paragraph">उतनी ही ऊँची होती, आज भारत उसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आयोजन हमंे भारत की जड़ों से जोड़ने का</p>



<p class="wp-block-paragraph">अभिनव प्रयास, आज का यह कार्यक्रम भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक</p>



<p class="wp-block-paragraph">परम्परा तथा राष्ट्रीय आत्मगौरव के पुनर्जागरण का शंखनाद</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8211;</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत के देव स्थल, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक</p>



<p class="wp-block-paragraph">केन्द्र भारत की अजर, अमर और शाश्वत आत्मा के प्रतीक</p>



<p class="wp-block-paragraph">-मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;<br>लखनऊ: 11 मई, 2026<br>उत्तर प्रदेश की मा0 राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी तथा मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आज श्री काशी विश्वनाथ धाम, वाराणसी में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अन्तर्गत ज्योतिर्लिंग एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम ‘सोमनाथ संकल्प महोत्सव’ में सम्मिलत हुए। आयोजन में विभिन्न कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति की गई। इसके पूर्व, राज्यपाल जी एवं मुख्यमंत्री जी ने श्री काशी विश्वनाथ मन्दिर में दर्शन-पूजन तथा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।<br>&nbsp; &nbsp; राज्यपाल जी एवं मुख्यमंत्री जी ने पुनर्निर्मित सोमनाथ मन्दिर के 75 वर्ष पूरे होने पर सोमनाथ मन्दिर, गुजरात में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव के अन्तर्गत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा किये गये दर्शन-पूजन, कुम्भाभिषेक, ध्वजारोहण तथा सम्बोधन के सजीव प्रसारण का अवलोकन किया।<br>राज्यपाल जी ने आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि अपने जीवनकाल में उन्होंने इस प्रकार का कार्यक्रम बहुत कम देखा है। उन्होंने कहा कि आज सोमनाथ में व्यापक विकास कार्य हुए हैं। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में विकास के माध्यम से हजारों लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है। वहां विद्यालयों की स्थापना हुई है तथा संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना हुई है। आज विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं परंपरा का अध्ययन करने का अवसर मिल रहा है।<br>उन्होंने कहा कि जब देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने भगवान श्री सोमनाथ मंदिर के समग्र विकास की कल्पना की थी। उसी संकल्प के अनुरूप धीरे-धीरे कार्य प्रारंभ हुआ और निरंतर वर्षों तक विकास कार्य चलता रहा। उन्होंने कहा कि विकास का यह क्रम आज भी जारी है और यह समाज की आस्था एवं जनसहयोग का परिणाम है।<br>राज्यपाल जी ने कहा कि सोमनाथ क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने सदैव मंदिर की रक्षा एवं संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विकास कार्यों में भी जनता ने सहयोग और त्याग की भावना का परिचय दिया है। &nbsp;उन्होंने कहा कि वर्तमान युवा पीढ़ी को देश के सांस्कृतिक एवं धार्मिक इतिहास की जानकारी होना आवश्यक है। इसी क्रम में काशी विश्वनाथ धाम के पुनर्विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिलकर काशी धाम के पुनरुद्धार एवं उसके मूल स्वरूप को संरक्षित रखने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। राज्यपाल जी ने कहा कि हम सभी को इन कार्यों से प्रेरणा लेते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन समर्पण, दूरदृष्टि एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की भावना के साथ करना चाहिए<br>राज्यपाल जी ने कहा कि “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” हमें उस दिव्य सोमनाथ मंदिर की हजार वर्षों की अविचलित यात्रा का स्मरण कराता है, जिसने अनेक आक्रमणों, संघर्षों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपनी आस्था, ऊर्जा और अस्तित्व को अक्षुण्ण बनाए रखा।<br>राज्यपाल जी ने कहा कि सोमनाथ राष्ट्र के स्वाभिमान का ज्योति-स्तंभ है तथा बाबा काशी विश्वनाथ धाम की पावन भूमि पर आयोजित यह कार्यक्रम सनातन संस्कृति की आध्यात्मिक एकात्मता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पश्चिम के सागर तट पर स्थित सोमनाथ और पूर्व की आध्यात्मिक राजधानी काशी, दोनों मिलकर भारत की अनंत सांस्कृतिक चेतना का आलोक प्रसारित कर रहे हैं।<br>उन्होंने कहा कि काशी और सोमनाथ भारतीय सभ्यता के दो अमर स्वर हैं। एक ने समुद्र की लहरों के मध्य आस्था का दीप जलाए रखा, जबकि दूसरे ने गंगा की अविरल धारा के साथ ज्ञान, मोक्ष और अध्यात्म का संदेश सम्पूर्ण विश्व को प्रदान किया। जब सोमनाथ की घंटियाँ और काशी की आरती एक साथ गूंजती हैं, तब सम्पूर्ण भारत अपनी सनातन आत्मा का उद्घोष करता हुआ प्रतीत होता है।<br>राज्यपाल जी ने कहा कि गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर भारत की आत्मा का अमर स्वर है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रतिष्ठित यह पावन धाम युगों से भारतीय आस्था, संस्कृति और स्वाभिमान का दिव्य प्रतीक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इतिहास में अनेक बार इस मंदिर को ध्वस्त करने का प्रयास किया गया, किंतु प्रत्येक बार सोमनाथ उसी तेज, दिव्यता और अदम्य आत्मविश्वास के साथ पुनः स्थापित हुआ। उन्होंने कहा कि यह मंदिर हमें यह संदेश देता है कि विनाश क्षणभंगुर होता है, जबकि सृजन सनातन है। आक्रमणकारी समय के साथ विलीन हो जाते हैं, किंतु संस्कृति की चेतना शाश्वत बनी रहती है।<br>राज्यपाल जी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व-अटूट आस्था के हजार वर्ष” के अंतर्गत 11 जनवरी 2026 से 11 जनवरी 2027 तक वर्षभर देशभर में विविध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यह आयोजन भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक गौरव और सनातन परंपरा के पुनर्जागरण का महायज्ञ है।<br>उन्होंने कहा कि लगभग एक हजार वर्ष पूर्व सन 1026 में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया गया, किंतु वह करोड़ों भारतीयों की आस्था को पराजित नहीं कर सका। इसके पश्चात विभिन्न कालखंडों में राजा कुमारपाल, जूनागढ़ के राजाओं तथा महारानी अहिल्याबाई होल्कर सहित अनेक महान विभूतियों ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण एवं पुनर्स्थापना का कार्य किया।<br>राज्यपाल जी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास पराजय का नहीं, बल्कि पुनर्जन्म, पुनर्निर्माण और अदम्य संकल्प का इतिहास है। यह भारत की उस सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है, जिसे किसी भी परिस्थिति में समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति केवल उसकी आर्थिक समृद्धि या तकनीकी प्रगति में नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक चेतना, ऐतिहासिक स्मृति और आत्मिक आधार में निहित होती है। जब समाज अपनी आस्था, परंपराओं और विरासत से जुड़ा रहता है, तभी उसकी सभ्यता दीर्घकाल तक जीवंत एवं सशक्त बनी रहती है।<br>राज्यपाल जी ने कहा कि भारत की सभ्यता इसका श्रेष्ठ उदाहरण है। हजारों वर्षों के इतिहास में अनेक चुनौतियों और आक्रमणों के बावजूद भारत की सांस्कृतिक धारा कभी अवरुद्ध नहीं हुई। हमारे मंदिर, पर्व, साहित्य, आश्रम और आध्यात्मिक परंपराएँ केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य को दिशा देने वाली जीवंत शक्तियाँ हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और परंपरा परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। जो समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहता है, वही स्थायी विकास और नैतिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है।<br>राज्यपाल जी ने कहा कि आज भारत आत्मगौरव के साथ आगे बढ़ रहा है। सोमनाथ से लेकर काशी, केदारनाथ से लेकर महाकाल तक देश अपनी आध्यात्मिक धरोहरों को आधुनिक विकास से जोड़ते हुए विश्व के समक्ष नए भारत की तस्वीर प्रस्तुत कर रहा है।<br>उन्होंने कहा कि भारत की सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उसने शक्ति को कभी अहंकार का माध्यम नहीं बनाया। भारत ने सदैव करुणा, सह-अस्तित्व, संवाद और “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को अपनाया है। भारत ने विश्व को यह संदेश दिया है कि विजय का अर्थ विनाश नहीं, बल्कि विश्वास और मानवता का संवर्धन है।<br>राज्यपाल जी ने उपस्थित जनसमूह का आह्वान करते हुए कहा कि इस पर्व से प्रेरणा लेकर सभी नागरिक एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें, जो विकास के साथ-साथ संवेदना, सांस्कृतिक चेतना और आध्यात्मिक मूल्यों से भी समृद्ध हो। उन्होंने संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश, सभी आयोजकों, कलाकारों एवं सहयोगियों को इस भव्य एवं दिव्य आयोजन के सफल आयोजन हेतु हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रदान कीं।<br>कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज द्वादश ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव मन्दिर की पुनस्र्थापना के अमृत पर्व तथा स्वाभिमान पर्व पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन सम्पूर्ण देश को प्राप्त हो रहा है। हम सभी एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना को साकार होते हुए देख रहे हैं। सौराष्ट्र में श्री सोमनाथ महादेव मन्दिर की पुनप्र्रतिष्ठा व सुन्दरीकरण के कार्यक्रम के साथ ही काशी में श्री काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल में महालोक की स्थापना का कार्यक्रम, अयोध्याधाम में भगवान श्रीराम जन्मभूमि में राम मन्दिर निर्माण का कार्यक्रम सहित सनातन परम्परा से जुड़े हुए अनेक तीर्थस्थल अपने वैभव के साथ विकास की नई यात्रा के मार्ग पर बढ़ रहे हैं।<br>मुख्यमंत्री जी ने कहा कि श्री काशी विश्वनाथ और श्री सोमनाथ भारत की सभ्यतागत चेतना के दो ज्योति स्तम्भ हैं। एक उत्तर में पवित्र माँ गंगा के तट पर बाबा विश्वनाथ धाम और दूसरा पश्चिमी भारत में सागर के तट पर स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ महादेव हैं। एक ओर गंगा तट पर स्थित काशी ने भारत की सनातन धारा को अक्षुण्ण रखा है, वहीं दूसरी सोमनाथ ने समुद्र तट पर भारत के स्वाभिमान और पुनर्जागरण की लौ को हजारों वर्षाें तक प्रज्ज्वलित रखा है। सोमनाथ मन्दिर भारत की सभ्यता के उस अमर आदर्श का प्रतीक है, जहां धर्म, संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय अस्मिता एकात्म भाव से अभिव्यक्त होते हैं।<br>मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री जी के यशस्वी मार्गदर्शन व नेतृत्व के परिणामस्वरूप सोमनाथ महादेव के स्वाभिमान पर्व के साथ ही मन्दिर की पुनप्र्रतिष्ठा के अमृत पर्व के साथ जुड़े हैं। श्री काशी विश्वनाथ धाम में हम सब इस कार्यक्रम के साक्षात दर्शन कर रहे हैं।<br>इस अवसर पर श्रम एवं सेवायोजन मंत्री श्री अनिल राजभर, आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, नवनियुक्त राज्यमंत्री श्री हंसराज विश्वकर्मा सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।<br>&#8212;&#8212;&#8211;<br>सम्पर्क सूत्र<br>दिलशाद अहमद-सूचना अधिकारी/राजभवन<br>9696795957</p>
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		<title>पत्र सूचना शाखा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 11 May 2026 04:56:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[पत्र सूचना शाखासूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय लोक अदालत में राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों में 426 मामलों का हुआ निस्तारणलखनऊ: 09 मई, 2026 राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग उत्तर प्रदेश एवं प्रदेश के समस्त जिला उपभोक्ता आयोगों में दिनांक 09 मई 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय लोक &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रीय लोक अदालत में राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों में 426 मामलों का हुआ निस्तारण<br>लखनऊ: 09 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग उत्तर प्रदेश एवं प्रदेश के समस्त जिला उपभोक्ता आयोगों में दिनांक 09 मई 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से उपभोक्ताओं से संबंधित मामलों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई।<br>आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य उपभोक्ता आयोग में कुल 27 मामले सूचीबद्ध किए गए, जिनमें से 16 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 1,43,04,702 रुपये की धनराशि का समाधान (ैमजजसमउमदज) कराया गया।<br>इसी प्रकार प्रदेश के समस्त जिला उपभोक्ता आयोगों में कुल 803 मामले सूचीबद्ध हुए, जिनके सापेक्ष 410 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 12,64,09,209.3 रुपये की धनराशि का समाधान (ैमजजसमउमदज) कराया गया।<br>राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जिला उपभोक्ता आयोग बस्ती द्वारा सर्वाधिक 39 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि जिला उपभोक्ता आयोग गौतम बुद्ध नगर द्वारा सर्वाधिक 2,92,96,712 रुपये की धनराशि का समाधान (ैमजजसमउमदज) कराया गया।<br>सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार</p>



<p class="wp-block-paragraph">राम यतन/06ः35 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद</p>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">पारदर्शी एवं नकलविहीन वातावरण में सम्पन्न हुई प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा:<br>डॉ. प्रशांत कुमार</p>



<p class="wp-block-paragraph">17 मण्डल मुख्यालयों में आयोजित हुई प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा</p>



<p class="wp-block-paragraph">एआई एकीकृत नियंत्रण कमांड कक्ष से सभी परीक्षा केन्द्रों की सघन निगरानी हुई</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 09 मई, 2026<br>उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि आयोग द्वारा आयोजित विज्ञापन सं० 02/2022 प्रवक्ता संवर्ग के अंतर्गत कुल 18 विषयों की लिखित परीक्षा के क्रम में शनिवार को प्रथम पाली एवं द्वितीय पाली में कुल 09 विषयों की परीक्षा प्रदेश के 17 जनपदों (मण्डल मुख्यालयों) में निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर सफलतापूर्वक सम्पन्न कराई गई।<br>उन्होंने बताया कि प्रथम पाली में पूर्वान्ह 09ः30 बजे से 11ः30 बजे तक 278 परीक्षा केन्द्रों पर भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गृह विज्ञान, इतिहास एवं शिक्षाशास्त्र विषयों की परीक्षा आयोजित की गई, जबकि द्वितीय पाली में अपरान्ह 02ः30 बजे से 04ः30 बजे तक 269 परीक्षा केन्द्रों पर अंग्रेजी, कृषि, वाणिज्य एवं समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा सम्पन्न हुई।<br>आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि परीक्षा की पारदर्शिता एवं सुचिता सुनिश्चित करने हेतु आयोग मुख्यालय में स्थापित एआई एकीकृत नियंत्रण कमांड कक्ष से सभी परीक्षा केन्द्रों की सघन निगरानी की गई। इस दौरान आयोग के सदस्यगण, सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उपसचिव की उपस्थिति में परीक्षा केन्द्रों पर लगाए गए ए.आई. कैमरों के माध्यम से परीक्षार्थियों की गतिविधियों पर सतत दृष्टि रखी गई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षा पूर्णतः पारदर्शी, नकलविहीन, सुचितापूर्ण, निर्विघ्न एवं समयबद्ध तरीके से सम्पन्न हुई।<br>डॉ. प्रशांत कुमार ने परीक्षा के सफल संचालन में जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिए गए सक्रिय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि &nbsp;09 मई 2026 की लिखित परीक्षा में कुल 89,766 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए, जिनमें महिला परीक्षार्थियों की उपस्थिति 34.89 प्रतिशत तथा पुरुष परीक्षार्थियों की उपस्थिति 42.26 प्रतिशत रही।<br>सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे</p>



<p class="wp-block-paragraph">राम यतन/06ः35 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद</p>



<p class="wp-block-paragraph">पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश</p>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रीय लोक अदालत में 53 वादों का निस्तारण, तीन करोड़ से अधिक का मुआवजा दिलाया गया</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 09 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ खंडपीठ में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह आयोजन माननीय वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजन रॉय, अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा उपसमिति, लखनऊ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।<br>उच्च न्यायालय विधिक सेवा उपसमिति के सचिव एवं निबंधक (जे.) (स्टेशनरी) श्री भगीरथ वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 53 वादों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इन मामलों में पक्षकारों के बीच सहमति बनने पर कुल 3 करोड़ 49 लाख 3 हजार 251 रुपये 60 पैसे की धनराशि मुआवजे के रूप में दिलाई गई।<br>सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार</p>



<p class="wp-block-paragraph">राम यतन/06ः45 च्ड<br>फोन नम्बर क्पतमबज रू 0522-2239023 ई0पी0बी0एक्स0: 0522-2239132,33,34,35 एक्सटेंशन रू 223 224 225<br>फैक्स नं0 रू 0522-2237230 0522-2239586 ई-मेल रू नचेववबीदं/हउंपसण्बवउए<br>वेबसाइट :ूूूण्पदवितउंजपवदण्नचण्हवअण्पद<br><br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उत्तर प्रदेश<br>लेख<br>यूपीडा<br>गंगा एक्सप्रेस-वे: विकास, समृद्धि और विरासत का भव्य संगम<br>&nbsp;लखनऊ: 09 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश, जो कभी अपनी विशाल जनसंख्या, सीमित संसाधनों और विकास की चुनौतियों के कारण चर्चा में रहता था, आज तेजी से बदलते भारत की विकासगाथा का एक सशक्त अध्याय बन चुका है। बीते कुछ वर्षों में राज्य ने आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के क्षेत्र में जिस गति और दृष्टि के साथ कार्य किया है, उससे न केवल प्रदेश की तस्वीर बदली है, बल्कि देश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसी परिवर्तनकारी यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव है गंगा एक्सप्रेस-वे, जो विकास, समृद्धि और विरासत का अद्भुत संगम बनकर उभरा है।<br>29 अप्रैल 2026 का दिन उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका है, जब हरदोई जनपद की धरती से देश के मा0 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 36,230 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे (मेरठ से प्रयागराज) का लोकार्पण किया। यह केवल एक सड़क परियोजना का उद्घाटन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य की नई दिशा और दशा का उद्घोष है। यह परियोजना प्रदेश की विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित होने जा रही है।<br>गंगा एक्सप्रेस-वे को केवल एक परिवहन परियोजना के रूप में देखना इसकी महत्ता को सीमित करना होगा। यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिस्सों को एक मजबूत आर्थिक और सामाजिक सूत्र में पिरोने का कार्य करेगा। मेरठ से शुरू होकर यह एक्सप्रेस-वे हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक पहुंचा है। इस प्रकार यह एक्सप्रेस-वे 12 प्रमुख जनपदों को जोड़ते हुए एक सशक्त विकास कॉरिडोर का निर्माण करता है।<br>इस एक्सप्रेस-वे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल दूरी को कम नहीं करता, बल्कि समय और अवसरों के अंतराल को भी घटाता है। पहले जहां मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा में लंबा समय लगता था, वही 11 घंटे की यात्रा अब केवल 6 घंटे में पूरी हो सकेगी, इससे लगभग 30 फीसदी तक ईंधन भी बचेगा। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण से व्यापार, उद्योग और आम नागरिकों के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन आएगा। तेज और सुरक्षित आवागमन से आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। एक्सप्रेसवे के साथ 11 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, जो इन जिलों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे।<br>गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक हब उत्तर प्रदेश को औद्योगिक क्रांति की ओर अग्रसर कर रहे हैं। फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, एमएसएमई, हैंडलूम और लेदर उद्योग जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास होगा, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। यह परियोजना “लोकल से ग्लोबल” की अवधारणा को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।<br>उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादित वस्तुएं, जो अब तक सीमित बाजारों तक ही पहुंच पाती थीं, अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगी। मेरठ के खेल उत्पाद, उन्नाव का लेदर उद्योग, प्रतापगढ़ का आंवला और हरदोई का हैंडलूम इस एक्सप्रेस-वे के माध्यम से नई ऊंचाइयों को छू सकेंगे। इससे न केवल स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को लाभ होगा, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।<br>कृषि के क्षेत्र में भी गंगा एक्सप्रेस-वे एक क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रहा है। गंगा के मैदानी क्षेत्रों की उपजाऊ भूमि से जुड़े किसान इस परियोजना के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक होंगे। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण किसान अपने उत्पादों को कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। इसके साथ ही, कृषि आधारित उद्योगों के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।<br>एक समय था जब उत्तर प्रदेश की पहचान पिछड़ेपन और पलायन से जुड़ी होती थी, लेकिन आज वही प्रदेश देश में सबसे अधिक एक्सप्रेस-वे नेटवर्क वाला राज्य बनकर उभरा है। सड़कों का विस्तृत जाल, मेट्रो रेल, रैपिड रेल और आधुनिक हवाई अड्डों का विकास सभी मिलकर प्रदेश को कनेक्टिविटी की एक नई पहचान दे रहे हैं। यह परिवर्तन केवल भौतिक ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक बदलाव का भी प्रतीक है।<br>गंगा एक्सप्रेस-वे, उत्तर प्रदेश के “वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” बनने के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जैसी योजनाओं ने राज्य के युवाओं और उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है। बढ़ते निवेश, औद्योगिक विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण प्रदेश तेजी से आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।<br>इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू इसकी सामरिक उपयोगिता भी है। उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा डिफेंस कॉरिडोर देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बना रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे इस कॉरिडोर को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिससे रक्षा उत्पादन और सैन्य आपूर्ति में तेजी आएगी। इस प्रकार यह परियोजना न केवल आर्थिक, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।<br>प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने गंगा एक्सप्रेस-वे को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की “रीढ़” बताया है। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास की जो गति पकड़ी है, वह इस परियोजना में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह एक्सप्रेस-वे “स्पष्ट नीति और साफ नीयत” के साथ समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया गया है, जो सुशासन और पारदर्शिता का प्रतीक है।<br>गंगा एक्सप्रेस-वे केवल कंक्रीट और डामर से बनी एक सड़क नहीं है, बल्कि यह उम्मीदों, संभावनाओं और समृद्धि का मार्ग है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करती है। गंगा नदी, जो सदियों से इस प्रदेश की जीवनरेखा रही है, उसी के नाम पर बना यह एक्सप्रेस-वे विकास की एक नई धारा का प्रतीक बन गया है।<br>पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अनाज, आलू, गन्ना और मध्य उत्तर प्रदेश का धान व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग अब सीधे बड़े बाजारों और प्रसंस्करण केंद्रों से जुड़ सकेगा और किसानों को उनके उत्पादों के लिए बेहतर मूल्य मिलेगा। गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेला देवी से लेकर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तक पहुंचना आसान होगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी।<br>आने वाले वर्षों में गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना न केवल प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगी, बल्कि पूरे भारत के विकास मॉडल के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बनेगी। यह “नए भारत के नए उत्तर प्रदेश” की वह तस्वीर प्रस्तुत करता है, जिसमें विकास की रफ्तार ही पहचान बन चुकी है।<br>&nbsp;गंगा एक्सप्रेस-वे केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी पहल है, जो उत्तर प्रदेश को प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर रही है। यह विकास और विश्वास का ऐसा संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और समृद्ध भविष्य की नींव रखेगा। गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास की नई पहचान बनकर उभरा है। यह न केवल एक सड़क परियोजना है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास, आर्थिक समृद्धि और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी है। आने वाले वर्षों में यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp; &nbsp;-सरिता वर्मा, सूचना अधिकारी<br><br>पत्र सूचना शाखा<br>सूचना एवं जनसंपर्क विभाग उत्तर प्रदेश<br>लेख<br>उद्यान विभाग<br>‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ से लहलहाये बस्ती के किसानों के खेत, आधुनिक कृषि से आया नया सवेरा<br>लखनऊ: 09 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारतीय कृषि का हृदय कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश में खेती-किसानी आज अपने सबसे सुनहरे और परिवर्तनकारी दौर से गुजर रही है। दशकों से जिस खेती को मौसम की दया और अंधाधुंध सिंचाई के भरोसे छोड़ दिया गया था, उसे अब आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों का मजबूत संबल मिल रहा है। राज्य का उद्यान विभाग ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (च्मत क्तवच डवतम ब्तवच) के तहत सूक्ष्म सिंचाई को घर-घर पहुँचाकर जल संरक्षण और बेहतर उत्पादन का एक अनूठा कीर्तिमान रच रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का यह अहम घटक इस मूल मंत्र पर काम करता है कि पानी की हर एक बूंद का सटीक और अधिकतम उपयोग हो। इस तकनीक ने खेती के उस पुराने और भ्रामक मिथक को जड़ से समाप्त कर दिया है जिसमें माना जाता था कि खेतों को लबालब पानी से भरने पर ही अच्छी फसल प्राप्त होती है। आज उत्तर प्रदेश में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों की बदौलत गन्ने और बागवानी जैसी नकदी फसलों में 25 से 50 प्रतिशत तक पानी की भारी बचत हो रही है। योजना की व्यापकता और सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि प्रदेश के 82 हजार से अधिक किसान ड्रिप तकनीक को पूरी आत्मीयता के साथ अपना चुके हैं। सरकार इस दिशा में लघु और सीमांत किसानों (2 हेक्टेयर तक की भूमि वाले) को ड्रिप सिस्टम लगाने पर 90 प्रतिशत तक का भारी-भरकम अनुदान दे रही है, जिससे यह महंगी तकनीक आम किसान की पहुँच में आ गई है। इस योजना का एक और क्रांतिकारी पहलू ‘फर्टीगेशन’ है, जिसमें पानी के साथ ही खाद सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचती है। इससे उर्वरक की बर्बादी रुकती है और उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक की शानदार वृद्धि होती है। गन्ना विभाग इसी तकनीक से 73,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में सिंचाई कर रहा है और ऊबड़-खाबड़, रेतीली या क्षारीय जमीनों पर भी आम और अमरूद के बाग लहलहा रहे हैं।<br>सरकारी योजनाओं की इसी संजीवनी ने जमीनी स्तर पर कैसा चमत्कार किया है, इसकी सबसे जीवंत मिसाल उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के विकासखण्ड हरैया के ग्राम कसैला में देखने को मिलती है। यहाँ के निवासी श्री विजय प्रकाश शुक्ला आज महज एक किसान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आधुनिक कृषि के एक सशक्त हस्ताक्षर बन चुके हैं। श्री राम फेर के पुत्र विजय प्रकाश एक बेहद साधारण और सीमित संसाधनों वाले कृषक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका जीवन उन लाखों भारतीय किसानों का प्रतिबिंब था जो पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक खेती के चक्रव्यूह में फंसे हुए थे। विजय प्रकाश जी दिन-रात अपने खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत करते थे, लेकिन पारंपरिक तरीके से खेत में पानी भरने में न केवल भारी मात्रा में भूजल बर्बाद होता था, बल्कि ट्यूबवेल चलाने के लिए डीजल और बिजली का खर्च उनकी कमर तोड़ देता था। इसके अलावा, खुले पानी के साथ डाली गई महंगी खाद या तो बह जाती थी या जमीन के बहुत नीचे चली जाती थी, जिससे पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता था। मौसम की अनिश्चितता, खरपतवार की भरमार और हर साल बढ़ती कृषि लागत के कारण उनकी आमदनी नगण्य रह जाती थी। अक्सर उनके मन में यह निराशा घर कर जाती थी कि क्या कभी किसानी के पेशे से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर सकती है।<br>इसी घोर निराशा के बीच उद्यान विभाग की एक पहल उनके जीवन में आशा की नई किरण बनकर आई। विभाग के अधिकारियों और उद्यान निरीक्षकों ने ग्राम स्तर पर संपर्क करते हुए विजय प्रकाश शुक्ला को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) प्रणाली के बारे में विस्तार से जागरूक किया। शुरुआत में किसी भी आम किसान की तरह उनके मन में भी इस नई तकनीक को लेकर कई आशंकाएं थीं। उन्हें लगता था कि पाइपों से बूंद-बूंद पानी गिरने से भला खेत कैसे सींचे जाएंगे। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने पूरी संवेदनशीलता के साथ उन्हें ड्रिप सिंचाई के वैज्ञानिक पहलू समझाए। उन्हें बताया गया कि कैसे यह तकनीक केवल पौधों की जड़ों को नमी देती है, अनावश्यक घास-फूस को पनपने से रोकती है और सबसे बड़ी बात, इस पूरी प्रणाली को उनके खेत में स्थापित करने के लिए सरकार 90 प्रतिशत का अनुदान देगी। सरकारी सहायता के इस भरोसे ने विजय प्रकाश जी की सारी झिझक खत्म कर दी।<br>तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन से लैस होकर श्री शुक्ला ने अपने 0.80 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले खेत में एक बड़ा जोखिम उठाते हुए पारंपरिक फसलों की जगह शिमला मिर्च की खेती करने का साहसिक निर्णय लिया। उनके खेत में जब ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित हुई, तो बदलाव के बीज उसी दिन बो दिए गए। 90 प्रतिशत की भारी सब्सिडी मिलने के कारण इस आधुनिक संयंत्र का आर्थिक बोझ उनके कंधों पर बिल्कुल नहीं पड़ा। ड्रिप प्रणाली चालू होते ही उन्होंने महसूस किया कि उनके खेत में पानी की खपत में 40 प्रतिशत तक की भारी कमी आ गई है। जहां पहले सिंचाई करने में कई दिन और रातें ट्यूबवेल के पानी को क्यारियों में मोड़ने में गुजर जाती थीं, वहीं अब वाल्व खोलते ही पूरे खेत के हर एक पौधे को एक समान पानी मिलने लगा। फर्टीगेशन के माध्यम से खाद सीधे जड़ों तक पहुंचने लगी, जिससे श्रम की भारी बचत हुई और फसल पूरी तरह से निरोगी और पुष्ट होकर बड़ी होने लगी।<br>इस आधुनिक प्रयोग ने श्री शुक्ला की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। पारंपरिक खेती में जहां प्रति एकड़ लागत लगभग 30,000 रुपये तक पहुंच जाती थी और मुनाफा अनिश्चित रहता था, वहीं ड्रिप सिंचाई ने लागत को काफी हद तक सिकोड़ दिया। शिमला मिर्च की फसल जब तैयार हुई, तो उत्पादन और गुणवत्ता देखकर हर कोई दंग रह गया। उत्पादन में सीधे तौर पर 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने अपने इसी छोटे से खेत से लगभग 32 कुंतल उच्च गुणवत्ता वाली शिमला मिर्च का उत्पादन किया। बाजार में इस शानदार फसल को हाथों-हाथ लिया गया और उन्हें 35 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम का बेहतरीन भाव मिला। फसल का चक्र आगे भी लाभ देता रहा और बाद में भी उन्होंने लगभग 10 कुंतल शिमला मिर्च 20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची। इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें प्रति एकड़ लगभग 60,000 रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हुई। इस आय ने उनके परिवार को एक नया आर्थिक संबल दिया, पुरानी देनदारियों से मुक्त किया और उनके जीवन स्तर को पूरी तरह से ऊंचा उठा दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज विजय प्रकाश शुक्ला का खेत आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों के लिए एक ‘ओपन एयर लेबोरेटरी’ (खुली प्रयोगशाला) बन गया है। जो किसान कल तक खेती को घाटे का सौदा मानकर पलायन की सोच रहे थे, वे आज श्री शुक्ला के लहलहाते खेतों और उनके आर्थिक उत्थान को देखकर प्रेरित हो रहे हैं। श्री शुक्ला भी अपने अनुभव सीमित नहीं रखते, बल्कि उद्यान विभाग के एक अनौपचारिक ब्रांड एंबेसडर की तरह हर किसान को ड्रिप सिंचाई और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की राह दिखाते हैं। उद्यान विभाग के निरंतर मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता ने उन्हें यह विश्वास दिला दिया है कि यदि सरकार और किसान कदम से कदम मिलाकर चलें, तो मिट्टी से सोना उगाया जा सकता है।<br>प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ का विजन खेतों की प्यास बुझाने के साथ-साथ कृषक समाज की आर्थिक समृद्धि का एक बेहद सफल और दूरगामी मॉडल बन चुका है। बूंद-बूंद जल के सदुपयोग से लिखी जा रही यह विकास गाथा भारतीय कृषि व्यवस्था के उस सुखद भविष्य का दस्तावेज है, जहाँ किसान अभावों में नहीं जीता, बल्कि अपनी मेहनत, सरकारी योजनाओं के साथ और आधुनिक तकनीक के बल पर विकास के नए शिखर तय करता है। खेत की माटी में नवाचार के जो बीज आज बोए जा रहे हैं, वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक मजबूत, स्वावलंबी और उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाने का सबसे प्रामाणिक मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।<br>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;<br>जनपद बस्ती</p>
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		<title>लेख</title>
		<link>https://rahasyalok.com/%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%96/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 15:25:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Government]]></category>
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					<description><![CDATA[लेखयूपीडागंगा एक्सप्रेस-वे: विकास, समृद्धि और विरासत का भव्य संगम लखनऊ: 09 मई, 2026 उत्तर प्रदेश, जो कभी अपनी विशाल जनसंख्या, सीमित संसाधनों और विकास की चुनौतियों के कारण चर्चा में रहता था, आज तेजी से बदलते भारत की विकासगाथा का एक सशक्त अध्याय बन चुका है। बीते कुछ वर्षों में राज्य ने आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>लेख<br>यूपीडा<br>गंगा एक्सप्रेस-वे: विकास, समृद्धि और विरासत का भव्य संगम<br> लखनऊ: 09 मई, 2026</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश, जो कभी अपनी विशाल जनसंख्या, सीमित संसाधनों और विकास की चुनौतियों के कारण चर्चा में रहता था, आज तेजी से बदलते भारत की विकासगाथा का एक सशक्त अध्याय बन चुका है। बीते कुछ वर्षों में राज्य ने आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के क्षेत्र में जिस गति और दृष्टि के साथ कार्य किया है, उससे न केवल प्रदेश की तस्वीर बदली है, बल्कि देश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसी परिवर्तनकारी यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव है गंगा एक्सप्रेस-वे, जो विकास, समृद्धि और विरासत का अद्भुत संगम बनकर उभरा है।<br>29 अप्रैल 2026 का दिन उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका है, जब हरदोई जनपद की धरती से देश के मा0 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 36,230 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे (मेरठ से प्रयागराज) का लोकार्पण किया। यह केवल एक सड़क परियोजना का उद्घाटन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य की नई दिशा और दशा का उद्घोष है। यह परियोजना प्रदेश की विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित होने जा रही है।<br>गंगा एक्सप्रेस-वे को केवल एक परिवहन परियोजना के रूप में देखना इसकी महत्ता को सीमित करना होगा। यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिस्सों को एक मजबूत आर्थिक और सामाजिक सूत्र में पिरोने का कार्य करेगा। मेरठ से शुरू होकर यह एक्सप्रेस-वे हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक पहुंचा है। इस प्रकार यह एक्सप्रेस-वे 12 प्रमुख जनपदों को जोड़ते हुए एक सशक्त विकास कॉरिडोर का निर्माण करता है।<br>इस एक्सप्रेस-वे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल दूरी को कम नहीं करता, बल्कि समय और अवसरों के अंतराल को भी घटाता है। पहले जहां मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा में लंबा समय लगता था, वही 11 घंटे की यात्रा अब केवल 6 घंटे में पूरी हो सकेगी, इससे लगभग 30 फीसदी तक ईंधन भी बचेगा। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण से व्यापार, उद्योग और आम नागरिकों के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन आएगा। तेज और सुरक्षित आवागमन से आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। एक्सप्रेसवे के साथ 11 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, जो इन जिलों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे।<br>गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक हब उत्तर प्रदेश को औद्योगिक क्रांति की ओर अग्रसर कर रहे हैं। फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, एमएसएमई, हैंडलूम और लेदर उद्योग जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास होगा, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। यह परियोजना “लोकल से ग्लोबल” की अवधारणा को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।<br>उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादित वस्तुएं, जो अब तक सीमित बाजारों तक ही पहुंच पाती थीं, अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगी। मेरठ के खेल उत्पाद, उन्नाव का लेदर उद्योग, प्रतापगढ़ का आंवला और हरदोई का हैंडलूम इस एक्सप्रेस-वे के माध्यम से नई ऊंचाइयों को छू सकेंगे। इससे न केवल स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को लाभ होगा, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।<br>कृषि के क्षेत्र में भी गंगा एक्सप्रेस-वे एक क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रहा है। गंगा के मैदानी क्षेत्रों की उपजाऊ भूमि से जुड़े किसान इस परियोजना के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक होंगे। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण किसान अपने उत्पादों को कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। इसके साथ ही, कृषि आधारित उद्योगों के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।<br>एक समय था जब उत्तर प्रदेश की पहचान पिछड़ेपन और पलायन से जुड़ी होती थी, लेकिन आज वही प्रदेश देश में सबसे अधिक एक्सप्रेस-वे नेटवर्क वाला राज्य बनकर उभरा है। सड़कों का विस्तृत जाल, मेट्रो रेल, रैपिड रेल और आधुनिक हवाई अड्डों का विकास सभी मिलकर प्रदेश को कनेक्टिविटी की एक नई पहचान दे रहे हैं। यह परिवर्तन केवल भौतिक ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक बदलाव का भी प्रतीक है।<br>गंगा एक्सप्रेस-वे, उत्तर प्रदेश के “वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” बनने के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जैसी योजनाओं ने राज्य के युवाओं और उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है। बढ़ते निवेश, औद्योगिक विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण प्रदेश तेजी से आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।<br>इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू इसकी सामरिक उपयोगिता भी है। उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा डिफेंस कॉरिडोर देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बना रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे इस कॉरिडोर को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिससे रक्षा उत्पादन और सैन्य आपूर्ति में तेजी आएगी। इस प्रकार यह परियोजना न केवल आर्थिक, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।<br>प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने गंगा एक्सप्रेस-वे को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की “रीढ़” बताया है। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास की जो गति पकड़ी है, वह इस परियोजना में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह एक्सप्रेस-वे “स्पष्ट नीति और साफ नीयत” के साथ समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया गया है, जो सुशासन और पारदर्शिता का प्रतीक है।<br>गंगा एक्सप्रेस-वे केवल कंक्रीट और डामर से बनी एक सड़क नहीं है, बल्कि यह उम्मीदों, संभावनाओं और समृद्धि का मार्ग है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करती है। गंगा नदी, जो सदियों से इस प्रदेश की जीवनरेखा रही है, उसी के नाम पर बना यह एक्सप्रेस-वे विकास की एक नई धारा का प्रतीक बन गया है।<br>पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अनाज, आलू, गन्ना और मध्य उत्तर प्रदेश का धान व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग अब सीधे बड़े बाजारों और प्रसंस्करण केंद्रों से जुड़ सकेगा और किसानों को उनके उत्पादों के लिए बेहतर मूल्य मिलेगा। गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेला देवी से लेकर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तक पहुंचना आसान होगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी।<br>आने वाले वर्षों में गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना न केवल प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगी, बल्कि पूरे भारत के विकास मॉडल के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बनेगी। यह “नए भारत के नए उत्तर प्रदेश” की वह तस्वीर प्रस्तुत करता है, जिसमें विकास की रफ्तार ही पहचान बन चुकी है।<br>&nbsp;गंगा एक्सप्रेस-वे केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी पहल है, जो उत्तर प्रदेश को प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर रही है। यह विकास और विश्वास का ऐसा संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और समृद्ध भविष्य की नींव रखेगा। गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास की नई पहचान बनकर उभरा है। यह न केवल एक सड़क परियोजना है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास, आर्थिक समृद्धि और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी है। आने वाले वर्षों में यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">                                           -सरिता वर्मा, सूचना अधिकारी<br><br><br><strong>लेख<br>उद्यान विभाग<br>‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ से लहलहाये बस्ती के किसानों के खेत, आधुनिक कृषि से आया नया सवेरा</strong><br><strong>लखनऊ: 09 मई, 2026</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">भारतीय कृषि का हृदय कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश में खेती-किसानी आज अपने सबसे सुनहरे और परिवर्तनकारी दौर से गुजर रही है। दशकों से जिस खेती को मौसम की दया और अंधाधुंध सिंचाई के भरोसे छोड़ दिया गया था, उसे अब आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों का मजबूत संबल मिल रहा है। राज्य का उद्यान विभाग ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (च्मत क्तवच डवतम ब्तवच) के तहत सूक्ष्म सिंचाई को घर-घर पहुँचाकर जल संरक्षण और बेहतर उत्पादन का एक अनूठा कीर्तिमान रच रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का यह अहम घटक इस मूल मंत्र पर काम करता है कि पानी की हर एक बूंद का सटीक और अधिकतम उपयोग हो। इस तकनीक ने खेती के उस पुराने और भ्रामक मिथक को जड़ से समाप्त कर दिया है जिसमें माना जाता था कि खेतों को लबालब पानी से भरने पर ही अच्छी फसल प्राप्त होती है। आज उत्तर प्रदेश में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों की बदौलत गन्ने और बागवानी जैसी नकदी फसलों में 25 से 50 प्रतिशत तक पानी की भारी बचत हो रही है। योजना की व्यापकता और सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि प्रदेश के 82 हजार से अधिक किसान ड्रिप तकनीक को पूरी आत्मीयता के साथ अपना चुके हैं। सरकार इस दिशा में लघु और सीमांत किसानों (2 हेक्टेयर तक की भूमि वाले) को ड्रिप सिस्टम लगाने पर 90 प्रतिशत तक का भारी-भरकम अनुदान दे रही है, जिससे यह महंगी तकनीक आम किसान की पहुँच में आ गई है। इस योजना का एक और क्रांतिकारी पहलू ‘फर्टीगेशन’ है, जिसमें पानी के साथ ही खाद सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचती है। इससे उर्वरक की बर्बादी रुकती है और उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक की शानदार वृद्धि होती है। गन्ना विभाग इसी तकनीक से 73,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में सिंचाई कर रहा है और ऊबड़-खाबड़, रेतीली या क्षारीय जमीनों पर भी आम और अमरूद के बाग लहलहा रहे हैं।<br>सरकारी योजनाओं की इसी संजीवनी ने जमीनी स्तर पर कैसा चमत्कार किया है, इसकी सबसे जीवंत मिसाल उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के विकासखण्ड हरैया के ग्राम कसैला में देखने को मिलती है। यहाँ के निवासी श्री विजय प्रकाश शुक्ला आज महज एक किसान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आधुनिक कृषि के एक सशक्त हस्ताक्षर बन चुके हैं। श्री राम फेर के पुत्र विजय प्रकाश एक बेहद साधारण और सीमित संसाधनों वाले कृषक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका जीवन उन लाखों भारतीय किसानों का प्रतिबिंब था जो पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक खेती के चक्रव्यूह में फंसे हुए थे। विजय प्रकाश जी दिन-रात अपने खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत करते थे, लेकिन पारंपरिक तरीके से खेत में पानी भरने में न केवल भारी मात्रा में भूजल बर्बाद होता था, बल्कि ट्यूबवेल चलाने के लिए डीजल और बिजली का खर्च उनकी कमर तोड़ देता था। इसके अलावा, खुले पानी के साथ डाली गई महंगी खाद या तो बह जाती थी या जमीन के बहुत नीचे चली जाती थी, जिससे पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता था। मौसम की अनिश्चितता, खरपतवार की भरमार और हर साल बढ़ती कृषि लागत के कारण उनकी आमदनी नगण्य रह जाती थी। अक्सर उनके मन में यह निराशा घर कर जाती थी कि क्या कभी किसानी के पेशे से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर सकती है।<br>इसी घोर निराशा के बीच उद्यान विभाग की एक पहल उनके जीवन में आशा की नई किरण बनकर आई। विभाग के अधिकारियों और उद्यान निरीक्षकों ने ग्राम स्तर पर संपर्क करते हुए विजय प्रकाश शुक्ला को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) प्रणाली के बारे में विस्तार से जागरूक किया। शुरुआत में किसी भी आम किसान की तरह उनके मन में भी इस नई तकनीक को लेकर कई आशंकाएं थीं। उन्हें लगता था कि पाइपों से बूंद-बूंद पानी गिरने से भला खेत कैसे सींचे जाएंगे। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने पूरी संवेदनशीलता के साथ उन्हें ड्रिप सिंचाई के वैज्ञानिक पहलू समझाए। उन्हें बताया गया कि कैसे यह तकनीक केवल पौधों की जड़ों को नमी देती है, अनावश्यक घास-फूस को पनपने से रोकती है और सबसे बड़ी बात, इस पूरी प्रणाली को उनके खेत में स्थापित करने के लिए सरकार 90 प्रतिशत का अनुदान देगी। सरकारी सहायता के इस भरोसे ने विजय प्रकाश जी की सारी झिझक खत्म कर दी।<br>तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन से लैस होकर श्री शुक्ला ने अपने 0.80 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले खेत में एक बड़ा जोखिम उठाते हुए पारंपरिक फसलों की जगह शिमला मिर्च की खेती करने का साहसिक निर्णय लिया। उनके खेत में जब ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित हुई, तो बदलाव के बीज उसी दिन बो दिए गए। 90 प्रतिशत की भारी सब्सिडी मिलने के कारण इस आधुनिक संयंत्र का आर्थिक बोझ उनके कंधों पर बिल्कुल नहीं पड़ा। ड्रिप प्रणाली चालू होते ही उन्होंने महसूस किया कि उनके खेत में पानी की खपत में 40 प्रतिशत तक की भारी कमी आ गई है। जहां पहले सिंचाई करने में कई दिन और रातें ट्यूबवेल के पानी को क्यारियों में मोड़ने में गुजर जाती थीं, वहीं अब वाल्व खोलते ही पूरे खेत के हर एक पौधे को एक समान पानी मिलने लगा। फर्टीगेशन के माध्यम से खाद सीधे जड़ों तक पहुंचने लगी, जिससे श्रम की भारी बचत हुई और फसल पूरी तरह से निरोगी और पुष्ट होकर बड़ी होने लगी।<br>इस आधुनिक प्रयोग ने श्री शुक्ला की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। पारंपरिक खेती में जहां प्रति एकड़ लागत लगभग 30,000 रुपये तक पहुंच जाती थी और मुनाफा अनिश्चित रहता था, वहीं ड्रिप सिंचाई ने लागत को काफी हद तक सिकोड़ दिया। शिमला मिर्च की फसल जब तैयार हुई, तो उत्पादन और गुणवत्ता देखकर हर कोई दंग रह गया। उत्पादन में सीधे तौर पर 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने अपने इसी छोटे से खेत से लगभग 32 कुंतल उच्च गुणवत्ता वाली शिमला मिर्च का उत्पादन किया। बाजार में इस शानदार फसल को हाथों-हाथ लिया गया और उन्हें 35 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम का बेहतरीन भाव मिला। फसल का चक्र आगे भी लाभ देता रहा और बाद में भी उन्होंने लगभग 10 कुंतल शिमला मिर्च 20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची। इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें प्रति एकड़ लगभग 60,000 रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हुई। इस आय ने उनके परिवार को एक नया आर्थिक संबल दिया, पुरानी देनदारियों से मुक्त किया और उनके जीवन स्तर को पूरी तरह से ऊंचा उठा दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज विजय प्रकाश शुक्ला का खेत आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों के लिए एक ‘ओपन एयर लेबोरेटरी’ (खुली प्रयोगशाला) बन गया है। जो किसान कल तक खेती को घाटे का सौदा मानकर पलायन की सोच रहे थे, वे आज श्री शुक्ला के लहलहाते खेतों और उनके आर्थिक उत्थान को देखकर प्रेरित हो रहे हैं। श्री शुक्ला भी अपने अनुभव सीमित नहीं रखते, बल्कि उद्यान विभाग के एक अनौपचारिक ब्रांड एंबेसडर की तरह हर किसान को ड्रिप सिंचाई और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की राह दिखाते हैं। उद्यान विभाग के निरंतर मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता ने उन्हें यह विश्वास दिला दिया है कि यदि सरकार और किसान कदम से कदम मिलाकर चलें, तो मिट्टी से सोना उगाया जा सकता है।<br>प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ का विजन खेतों की प्यास बुझाने के साथ-साथ कृषक समाज की आर्थिक समृद्धि का एक बेहद सफल और दूरगामी मॉडल बन चुका है। बूंद-बूंद जल के सदुपयोग से लिखी जा रही यह विकास गाथा भारतीय कृषि व्यवस्था के उस सुखद भविष्य का दस्तावेज है, जहाँ किसान अभावों में नहीं जीता, बल्कि अपनी मेहनत, सरकारी योजनाओं के साथ और आधुनिक तकनीक के बल पर विकास के नए शिखर तय करता है। खेत की माटी में नवाचार के जो बीज आज बोए जा रहे हैं, वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक मजबूत, स्वावलंबी और उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाने का सबसे प्रामाणिक मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।<br>&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;&#8212;<br>जनपद बस्ती</p>
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		<title>राज्यपाल की अध्यक्षता में आधुनिक रेल कोच फैक्ट्री, रायबरेली में चिंतन शिविर का हुआ आयोजन</title>
		<link>https://rahasyalok.com/2824-2/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 15:09:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Government]]></category>
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					<description><![CDATA[राज्यपाल की अध्यक्षता में आधुनिक रेल कोच फैक्ट्री, रायबरेली में चिंतन शिविर का हुआ आयोजन राज्यपाल की अध्यक्षता में आधुनिक रेल कोच फैक्ट्री, रायबरेली में चिंतन शिविर का हुआ आयोजन &#8212;&#8212; चिंतन शिविर में कार्य दक्षता, समन्वय एवं टीमवर्क पर विशेष बल &#8212;&#8212; राज्यपाल ने आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना में नई व्हील मशीनों का लोकार्पण, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>राज्यपाल की अध्यक्षता में आधुनिक रेल कोच फैक्ट्री, रायबरेली में चिंतन शिविर का हुआ आयोजन</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>राज्यपाल की अध्यक्षता में आधुनिक रेल कोच फैक्ट्री, रायबरेली में</strong> <strong>चिंतन शिविर का हुआ आयोजन</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>चिंतन शिविर में कार्य दक्षता, समन्वय एवं टीमवर्क पर विशेष बल</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8212;&#8212;</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्यपाल ने आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना में नई व्हील मशीनों का लोकार्पण, फैक्ट्री का किया अवलोकन</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="965" height="1024" src="https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-10-at-12.39.34-2-965x1024.jpeg" alt="" class="wp-image-2825" srcset="https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-10-at-12.39.34-2-965x1024.jpeg 965w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-10-at-12.39.34-2-283x300.jpeg 283w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-10-at-12.39.34-2-768x815.jpeg 768w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-10-at-12.39.34-2.jpeg 1206w" sizes="(max-width: 965px) 100vw, 965px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊः 10 मई, 2026  </strong>        प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में दिनांक 09 मई, 2026 को जनपद रायबरेली स्थित आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना में जन भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों हेतु चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपनी कार्य दक्षता, कार्य प्रणाली, कार्यों में आने वाली समस्याओं, आपसी समन्वय तथा टीमवर्क से संबंधित विषयों पर खुलकर विचार-विमर्श किया।<br>           विभिन्न सत्रों में आयोजित इस चिंतन शिविर को संबोधित करते हुए राज्यपाल जी ने कहा कि हमें अपने अनुभवों का उपयोग समाज कल्याण के लिए करना चाहिए। उन्होंने गुजरात में आयोजित चिंतन शिविरों के अनुभव साझा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन व्यवहारिक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिसका सकारात्मक प्रभाव कार्य संस्कृति एवं कार्य निष्पादन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।<br>            राज्यपाल जी ने अन्न की बर्बादी रोकने पर विशेष बल देते हुए कहा कि सभी को उतना ही भोजन ग्रहण करना चाहिए जितनी आवश्यकता हो तथा बच्चों को भी इस संबंध में संस्कारित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में समानता एवं समरसता की भावना को मजबूत करने के लिए सभी को समान दृष्टि से देखने की आवश्यकता है।<br>             उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति में कोई न कोई क्षमता एवं कौशल अवश्य होता है। छोटी-छोटी बातों एवं त्रुटियों पर भी ध्यान देना चाहिए तथा यदि कोई गलती हो जाए तो उसे स्वीकार कर भविष्य में दोबारा न होने देने का प्रयास करना चाहिए। राज्यपाल जी ने कहा कि यह चिंतन शिविर सहयोग, समन्वय एवं आपसी विश्वास की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।<br>             इस अवसर पर राज्यपाल जी ने जन भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कार्य दक्षता बढ़ाने, टीमवर्क एवं बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा आपसी संवाद को सुदृढ़ बनाने हेतु आवश्यक मार्गदर्शन एवं निर्देश दिए।<br>              इस अवसर पर कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्यों पर विशेष कार्याधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ0 सुधीर महादेव बोबडे ने प्रकाश डाला।<br>              कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल जी द्वारा आधुनिक रेल कोच फैक्ट्री परिसर स्थित व्हील शॉप में स्थापित नई व्हील मशीनों का लोकार्पण किया गया तथा फैक्ट्री का अवलोकन भी किया गया।<br>               इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी शिक्षा डॉ0 पंकज एल0 जानी, विशेष कार्याधिकारी श्री अशोक देसाई, व जनभवन के समस्त अधिकारी गण उपस्थित रहे।<br>चिंतन शिविर के पश्चात जन भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने आधुनिक रेल डिब्बा कारखाना का भ्रमण भी किया तथा वहां संचालित विभिन्न तकनीकी एवं उत्पादन इकाइयों का अवलोकन किया। प्रतिभागियों ने कारखाने की आधुनिक कार्यप्रणाली, मशीनों एवं उत्पादन प्रक्रिया के संबंध में जानकारी प्राप्त की।<br>&#8212;&#8212;<br><strong>सम्पर्क सूत्र<br>कृष्ण कुमार-सूचना अधिकारी/जन भवन</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने ‘कैंसर फ्री वूमेन भारत यात्रा – आनंदी मां एक जीवन बचाओ अभियान’ का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>लखनऊः 10 मई, 2026</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="826" src="https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-10-at-13.31.26-1024x826.jpeg" alt="" class="wp-image-2826" srcset="https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-10-at-13.31.26-1024x826.jpeg 1024w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-10-at-13.31.26-300x242.jpeg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-10-at-13.31.26-768x619.jpeg 768w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-10-at-13.31.26-1536x1238.jpeg 1536w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-10-at-13.31.26-2048x1651.jpeg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong><br></strong>           उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज मदर्स डे के अवसर पर जन भवन से स्त्री वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा आयोजित “कैंसर फ्री वूमेन भारत यात्रा – आनंदी मां एक जीवन बचाओ अभियान” का हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया।<br>            रैली जन भवन पोर्टिको से शुरू होकर महात्मा गांधी मार्ग से होते हुए अटल चौक, पार्क रोड, डॉ0 भीमराव अम्बेडकर मार्ग, सिविल चौराहा तथा भानुमति रोड से गुजरते हुए सरोजिनी नायडू मार्ग चौराहे पर सम्पन्न हुई।<br>             रैली के माध्यम से महिलाओं के स्वास्थ्य, कैंसर जागरूकता एवं स्वस्थ भारत के संकल्प को लेकर समाज को जागरूक करने का संदेश दिया गया।<br>            इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल महोदया ने अभियान की सराहना करते हुए संस्था के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की तथा समाजहित में किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं का स्वास्थ्य केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज की मजबूती का आधार है तथा समय पर जांच एवं जागरूकता से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की रोकथाम संभव है।<br>            रैली में 130 से अधिक लोगों ने सहभागिता कर “स्वस्थ मां – सुरक्षित भविष्य” का संदेश जन-जन तक पहुंचाया। कार्यक्रम में महिलाओं, युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।<br>               महामहिम ने संस्था को भविष्य में और व्यापक स्तर पर कार्य करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि ऐसे अभियान समाज में नई चेतना एवं सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनते हैं।<br>कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने यह संकल्प लिया कि—<br>“हर मां सुरक्षित हो,<br>हर बहन जागरूक हो,<br>हर बेटी स्वस्थ और सशक्त हो।”<br>             यह अभियान केवल एक रैली नहीं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य, जागरूकता एवं मानवीय संवेदनाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।<br>             रैली के शुभारंभ के अवसर पर विशेष कार्याधिकारी, श्री राज्यपाल (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ0 सुधीर महादेव बोबडे सहित अन्य महानुभाव उपस्थित थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश सरकार के 06 नवनियुक्त मंत्रियों एवं 02 राज्य मंत्रियों को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8212;&#8211;लखनऊ 10 मई, 2026</strong></p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="754" src="https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/Photo-2026-05-10-2-1024x754.jpeg" alt="" class="wp-image-2827" srcset="https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/Photo-2026-05-10-2-1024x754.jpeg 1024w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/Photo-2026-05-10-2-300x221.jpeg 300w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/Photo-2026-05-10-2-768x565.jpeg 768w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/Photo-2026-05-10-2-1536x1130.jpeg 1536w, https://rahasyalok.com/wp-content/uploads/2026/05/Photo-2026-05-10-2-2048x1507.jpeg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><br>उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज जन भवन में आयोजित  शपथ ग्रहण समारोह में उत्तर प्रदेश सरकार के 06 नवनियुक्त मंत्रियों एवं 02 राज्य मंत्रियों को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधिगण तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।<br>शपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों में कैबिनेट मंत्री के रूप में श्री भूपेंद्र चौधरी एवं श्री मनोज कुमार पांडेय शामिल रहे। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में श्री अजीत सिंह पाल तथा श्री सोमेंद्र तोमर ने शपथ ग्रहण की। वहीं राज्य मंत्री के रूप में श्रीमती कृष्णा पासवान, श्री कैलाश सिंह राजपूत, श्री सुरेंद्र दिलेर एवं श्री हंसराज विश्वकर्मा ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली।<br>समारोह के उपरांत राज्यपाल जी एवं मुख्यमंत्री जी ने सभी नवशपथ ग्रहण करने वाले मंत्रियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर शुभकामनाएं दीं।</p>
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			</item>
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		<title>PN-09-05-2026</title>
		<link>https://rahasyalok.com/pn-09-05-2026/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 14:58:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Government]]></category>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रीय लोक अदालत में राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों में 426 मामलों का हुआ निस्तारणलखनऊ: 09 मई, 2026 राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग उत्तर प्रदेश एवं प्रदेश के समस्त जिला उपभोक्ता आयोगों में दिनांक 09 मई 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से उपभोक्ताओं से संबंधित मामलों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रीय लोक अदालत में राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों में 426 मामलों का हुआ निस्तारण<br>लखनऊ: 09 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग उत्तर प्रदेश एवं प्रदेश के समस्त जिला उपभोक्ता आयोगों में दिनांक 09 मई 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से उपभोक्ताओं से संबंधित मामलों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निस्तारण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई।<br>आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य उपभोक्ता आयोग में कुल 27 मामले सूचीबद्ध किए गए, जिनमें से 16 मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 1,43,04,702 रुपये की धनराशि का समाधान (ैमजजसमउमदज) कराया गया।<br>इसी प्रकार प्रदेश के समस्त जिला उपभोक्ता आयोगों में कुल 803 मामले सूचीबद्ध हुए, जिनके सापेक्ष 410 मामलों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 12,64,09,209.3 रुपये की धनराशि का समाधान (ैमजजसमउमदज) कराया गया।<br>राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जिला उपभोक्ता आयोग बस्ती द्वारा सर्वाधिक 39 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि जिला उपभोक्ता आयोग गौतम बुद्ध नगर द्वारा सर्वाधिक 2,92,96,712 रुपये की धनराशि का समाधान (ैमजजसमउमदज) कराया गया।<br>सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph">पारदर्शी एवं नकलविहीन वातावरण में सम्पन्न हुई प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा:<br>डॉ. प्रशांत कुमार</p>



<p class="wp-block-paragraph">17 मण्डल मुख्यालयों में आयोजित हुई प्रवक्ता संवर्ग की लिखित परीक्षा</p>



<p class="wp-block-paragraph">एआई एकीकृत नियंत्रण कमांड कक्ष से सभी परीक्षा केन्द्रों की सघन निगरानी हुई</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 09 मई, 2026<br>उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि आयोग द्वारा आयोजित विज्ञापन सं० 02/2022 प्रवक्ता संवर्ग के अंतर्गत कुल 18 विषयों की लिखित परीक्षा के क्रम में शनिवार को प्रथम पाली एवं द्वितीय पाली में कुल 09 विषयों की परीक्षा प्रदेश के 17 जनपदों (मण्डल मुख्यालयों) में निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर सफलतापूर्वक सम्पन्न कराई गई।<br>उन्होंने बताया कि प्रथम पाली में पूर्वान्ह 09ः30 बजे से 11ः30 बजे तक 278 परीक्षा केन्द्रों पर भौतिक विज्ञान, जीव विज्ञान, गृह विज्ञान, इतिहास एवं शिक्षाशास्त्र विषयों की परीक्षा आयोजित की गई, जबकि द्वितीय पाली में अपरान्ह 02ः30 बजे से 04ः30 बजे तक 269 परीक्षा केन्द्रों पर अंग्रेजी, कृषि, वाणिज्य एवं समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा सम्पन्न हुई।<br>आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि परीक्षा की पारदर्शिता एवं सुचिता सुनिश्चित करने हेतु आयोग मुख्यालय में स्थापित एआई एकीकृत नियंत्रण कमांड कक्ष से सभी परीक्षा केन्द्रों की सघन निगरानी की गई। इस दौरान आयोग के सदस्यगण, सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उपसचिव की उपस्थिति में परीक्षा केन्द्रों पर लगाए गए ए.आई. कैमरों के माध्यम से परीक्षार्थियों की गतिविधियों पर सतत दृष्टि रखी गई। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर परीक्षा पूर्णतः पारदर्शी, नकलविहीन, सुचितापूर्ण, निर्विघ्न एवं समयबद्ध तरीके से सम्पन्न हुई।<br>डॉ. प्रशांत कुमार ने परीक्षा के सफल संचालन में जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिए गए सक्रिय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि &nbsp;09 मई 2026 की लिखित परीक्षा में कुल 89,766 परीक्षार्थी सम्मिलित हुए, जिनमें महिला परीक्षार्थियों की उपस्थिति 34.89 प्रतिशत तथा पुरुष परीक्षार्थियों की उपस्थिति 42.26 प्रतिशत रही।<br>सम्पर्क सूत्र- धर्मवीर खरे</p>



<p class="wp-block-paragraph"></p>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रीय लोक अदालत में 53 वादों का निस्तारण, तीन करोड़ से अधिक का मुआवजा दिलाया गया</p>



<p class="wp-block-paragraph">लखनऊ: 09 मई, 2026</p>



<p class="wp-block-paragraph">माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ खंडपीठ में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह आयोजन माननीय वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजन रॉय, अध्यक्ष, उच्च न्यायालय विधिक सेवा उपसमिति, लखनऊ की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।<br>उच्च न्यायालय विधिक सेवा उपसमिति के सचिव एवं निबंधक (जे.) (स्टेशनरी) श्री भगीरथ वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 53 वादों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया। इन मामलों में पक्षकारों के बीच सहमति बनने पर कुल 3 करोड़ 49 लाख 3 हजार 251 रुपये 60 पैसे की धनराशि मुआवजे के रूप में दिलाई गई।<br>सम्पर्क सूत्र- अमरेश कुमार</p>
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