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	<title>लेख &#8211; Rahasyalok | रहस्यलोक</title>
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	<title>लेख &#8211; Rahasyalok | रहस्यलोक</title>
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		<title>घर बैठे मिलि जाई खतौनी की प्रमाणित नकल: डिजिटल इण्डिया की ओर उत्तर प्रदेश के मजबूत कदम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 14:49:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[आज पूरा भारत डिजिटल बदलाव की लहर मा बहुत तेजी से आगे बढ़ि रहा है। अब सरकारी कामकाज का जउन पुराना अउर थकावे वाला तरीका रहा, ओका नई तकनीक की मदद से आसान, पारदर्शी अउर आम आदमी की पहुँच मा बनावा जा रहा है। इसी दिशा मा उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बहुत बड़ कदम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज पूरा भारत डिजिटल बदलाव की लहर मा बहुत तेजी से आगे बढ़ि रहा है। अब सरकारी कामकाज का जउन पुराना अउर थकावे वाला तरीका रहा, ओका नई तकनीक की मदद से आसान, पारदर्शी अउर आम आदमी की पहुँच मा बनावा जा रहा है। इसी दिशा मा उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बहुत बड़ कदम उठावा है—अब खतौनी की प्रमाणित नकल (Certified Copy) घर बैठे ही मिलि जाई।</p>
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		<title>घर बइठे खतौनी के प्रमाणित नकल: डिजिटल इण्डिया के दिशा मा उत्तर प्रदेश के मजबूत कदम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 May 2026 12:05:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत आज बहुत तेजी से डिजिटल बदलाव के दौर से गुज़र रहा अअइ। अब सरकारी कामकाज के पुरान अउर थकावै वाले तरीकन का नई तकनीक से आसान, साफ-सुथरा अउर सबके पहुँच मा बनावा जाइ रहा अअइ। एही कड़ी मा उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठावा अअइ—खतौनी के प्रमाणित नकल का पूरी तना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">भारत आज बहुत तेजी से डिजिटल बदलाव के दौर से गुज़र रहा अअइ। अब सरकारी कामकाज के पुरान अउर थकावै वाले तरीकन का नई तकनीक से आसान, साफ-सुथरा अउर सबके पहुँच मा बनावा जाइ रहा अअइ। एही कड़ी मा उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठावा अअइ—खतौनी के प्रमाणित नकल का पूरी तना ऑनलाइन कइ देब। ई योजना न खाली आम जनता बरे बड़ी राहत लइके आई अअइ, बल्कि सरकारी सिस्टम का भी अउर फुर्तीला अउर पारदर्शी बनावै मा मदद कइ रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पहिले जब कउनो मनई का अपनी जमीन के खतौनी के प्रमाणित नकल चाही होत रहा, तौ ओका तहसील या कचहरी के कइयौ चक्कर लगावै का पड़त रहा। लम्बी लाइन मा खड़ा होब, बखत के बर्बादी, दलालन के दखल अउर फालतू के खरचा जइसन समस्यन से लोग परेशान रहत रहे। पर अब ई सब बीती बातें बनि चुकी अहैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिया अब कउनो भी मनई अपने घर बइठे, कतहुँ भी अउर कबहूँ भी, खाली अपनी जमीन के जानकारी भरिके एक क्लिक मा प्रमाणित खतौनी पाइ सकत अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कइसन मिली खतौनी?</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">एही नई व्यवस्था मा लोग राजस्व विभाग के सरकारी पोर्टल पर जाइके लॉगिन करत अहैं। ओकरे बाद ‘खतौनी की नकल’ वाला विकल्प चुनि के अपना जिला, तहसील अउर गाँव के नाम भरइ का पड़त है। फिर अपनी गाटा संख्या चुनइ के बाद जइसन ही तय कीन गई फीस के ऑनलाइन पइसा जमा कीन जात है, प्रमाणित नकल तुरंतै डाउनलोड बरे मिलि जात अअइ। ई पूरा काम इतना आसान अअइ कि कउनो भी आम मनई जेका बहुत ज्यादा मोबाइल या कम्प्यूटर नाहीं आवत, ऊ भी एका आसानी से कइ सकत अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>24 घण्टा सेवा अउर भ्रष्टाचार पर लगाम</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">एही सुविधा के सबसे बड़ी खूबी ई अअइ कि ई 24 घण्टा चालू रहत है। पहिले सरकारी दफ्तर खुले के इन्तजार करइ का पड़त रहा, पर अब दिन होय या रात, कबहूँ भी खतौनी निकाली जाइ सकत अअइ। यूपीआई (UPI) जइसन डिजिटल पेमेंट से पइसा जमा करब भी बहुत सुरक्षित अउर आसान होई गवा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डिजिटल खतौनी से बेईमानी अउर भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगी अअइ। पहिले कागजन मा हेरा-फेरी या देरी के बहुत शिकायत आवत रही, पर अब सब काम ऑनलाइन अअइ अउर ओकर एक-एक रिकॉर्ड सिस्टम मा दर्ज रहत है। एसे जनता के भरोसा भी सरकार पर बढ़ि रहा अअइ। लोगन के बखत अउर पइसा दोनों बचि रहा है, अब दफ्तर जाइ बरे छुट्टी लेइ के या लम्बी दूरी तय करइ के जरूरत नाहीं अअइ। कागज के कम इस्तेमाल से पर्यावरण का भी फायदा पहुँचि रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>गाँव-गिरावं बरे वरदान</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">गाँव मा रहइ वाले लोगन बरे ई सेवा कउनो वरदान से कम नाहीं अअइ। पहिले गाँव से सहर दफ्तर तक जाब बहुत कठिन होत रहा, पर अब इंटरनेट के फइलाव से गाँव के लोग भी एही सुविधा के फायदा उठाय रहे अहैं। एसे सहर अउर गाँव के बीच के दूरी कम होई रही अअइ। उत्तर प्रदेश सरकार के ई कोशिश ‘डिजिटल इण्डिया’ के सपन का सच कइ रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डिजिटल व्यवस्था मा कुछ चुनौतियाँ भी अहैं, जइसे कि सब लोगन के लगे इंटरनेट नाहीं अअइ या बुजुर्ग लोग एका समझि नाहीं पावत। पर सरकार ने एकरे बरे &#8216;कॉमन सर्विस सेंटर&#8217; (CSC) जइसन विकल्प अउर डिजिटल पढ़ाई-लिखाई के इन्तजाम कीन अअइ, जेहसे ई दिक्कतें कम होई रही अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आने वाले बखत मा मोबाइल ऐप अउर अउर आसान तरीकन से एका अउर बढ़िया बनावै के तैयारी अअइ। कुल मिलाइके देखा जाय तौ प्रमाणित खतौनी का ऑनलाइन करब एक बहुत बड़ा बदलाव अअइ। एसे न खाली लोगन के जिंदगी आसान भई अअइ, बल्कि सरकारी सिस्टम मा भी ईमानदारी अउर फुर्ती आई अअइ।</p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211; जनपद-लखनऊ</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"> <br></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>मुख्यमंत्री युवा विकास अभियान से बदल रही उन्नाव की तस्वीर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 06 May 2026 12:05:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के पावन धरती पर नौजवानन के ऊर्जा अउर उनके हुनर का नया आसमान देइ बरे योगी सरकार द्वारा चलाई जाइ रही ‘मुख्यमंत्री युवा विकास अभियान‘ आज एक मील के पत्थर साबित होय रही अअइ। ई योजना खाली सरकारी आँकड़ा भर नाहीं अअइ, बल्कि उन हजारन लरिकन के सपन का पूरा करइ के जरिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के पावन धरती पर नौजवानन के ऊर्जा अउर उनके हुनर का नया आसमान देइ बरे योगी सरकार द्वारा चलाई जाइ रही <strong>‘मुख्यमंत्री युवा विकास अभियान‘</strong> आज एक मील के पत्थर साबित होय रही अअइ। ई योजना खाली सरकारी आँकड़ा भर नाहीं अअइ, बल्कि उन हजारन लरिकन के सपन का पूरा करइ के जरिया अअइ, जउन पइसा के तंगी के बाद भी अपना काम-धंधा शुरू करइ के जज्बा रखत रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">खास कइके उन्नाव जिला के बात करी, तौ इहाँ के माटी के लालन ने एही योजना के फायदा उठाय के न खाली अपने गोड़ पर खड़ा भए अहैं, बल्कि दूसर लोगन बरे भी काम के दरवाजा खोलि दिहिन अअइ। मुख्यमंत्री युवा विकास अभियान के असली मंतर अअइ नौजवानन का पइसा के मदद दइके आत्मनिर्भर बनाउब, ताकि ऊ नौकरी ढूँढइ वाले नाहीं, बल्कि नौकरी देइ वाले बनि सकें।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>उन्नाव के नौजवानन के कामयाबी के कहानी:</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>सोलर पैनल से संतोष के तरक्की:</strong> शिव नगर, उन्नाव के रहइ वाले <strong>संतोष कुमार</strong> के कहानी बहुत हिम्मत बढ़ावै वाली अअइ। संतोष ने अपना काम बढ़ावै बरे एही योजना से &#8216;बैंक ऑफ इण्डिया&#8217; से करजा लीनिस अउर सोलर पैनल के मरम्मत व बिक्री के काम शुरू कीनिस। आज ऊ अपने परिवार का नीक से पालत अहैं अउर साथे <strong>पाँच अउर लरिकन</strong> का भी काम दिहिन अअइ।</li>



<li><strong>नितेश के कोचिंग अउर मनी के स्टूडियो:</strong> उन्नाव के ही <strong>नितेश वर्मा</strong> ने कोचिंग सेंटर चलावै बरे ₹5 लाख के करजा लीनिस अउर अब समाज का पढ़ावै के पुनीत काम कइ रहे अहैं। वहीं <strong>मनी सभाकानी</strong> ने बैंक से करजा लइके एक आधुनिक फोटो स्टूडियो अउर प्रिंटिंग के काम शुरू कीनिस, जहाँ ऊ <strong>चार अउर लोगन</strong> का रोजगार दइ रहे अहैं।</li>



<li><strong>सेहत अउर सेवा मा भी आगे:</strong> आदर्श गंज के <strong>कुलदीप कुमार</strong> ने जिम अउर फिटनेस सेंटर खोलइ बरे ₹5 लाख के मदद लीनिस। आज उनके जिम मा चार लोग काम कइ रहे अहैं। शिव नगर के <strong>अरुण वर्मा</strong> ने जन सेवा केंद्र (CSC) खोलइ बरे करजा लीनिस, जेहसे ऊ गाँव के लोगन का डिजिटल सुविधायन दइ रहे अहैं अउर खुद भी पइसा कमाय रहे अहैं।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ब्याज मुक्त करजा: सबसे बड़ी खूबी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">एही योजना के सबसे बड़ी खास बात ई अअइ कि ई पूरी तना <strong>&#8216;ब्याज मुक्त&#8217; (बिना ब्याज के)</strong> अअइ। एही नाते नौजवान बिना कउनो दिमागी बोझ के अपना धंधा बढ़ा पावत अहैं। उन्नाव जिला प्रशासन भी एही योजना का गाँव-गाँव पहुँचावै मा पूरी ताकत झोंकि दिहिस अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश सरकार के ई सोच प्रदेश का ‘उत्तम प्रदेश‘ से ‘आत्मनिर्भर प्रदेश‘ बनावै के दिशा मा एक क्रांतिकारी कदम अअइ। जब एक नौजवान अपने गोड़ पर खड़ा होत है, तौ ऊ खाली अपना भविष्य नाहीं सँवारत, बल्कि पूरे समाज के आर्थिक स्थिति बदल देत है। उन्नाव के इन लरिकन के कामयाबी ई साबित कइ रही अअइ कि अगर सही बखत पर सही सलाह अउर पइसा के मदद मिलै, तौ हमार उत्तर प्रदेश के युवा दुनिया मा अपना डंका बजाइ सकत अहैं।</p>



<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रदेश मा उन्नत तकनीक के साथ औद्यानिक क्रांति से शाहजहाँपुर मा अमीर होत किसान</title>
		<link>https://rahasyalok.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%89%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%a4%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 May 2026 16:44:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के किसानन के कमाई बढ़ावै अउर उनका आत्मनिर्भर बनावै के संकल्प के साथे लगातार काम कइ रही अअइ। प्रदेश के खेती-किसानी मा नयापन ल्यावै अउर पुरान खेती के साथे-साथे नई तकनीक का जोड़इ बरे सरकार द्वारा कइयौ औद्यानिक विकास योजना चलाई जाइ रही अहैं। मा0 मुख्यमन्तरी जी के अगुवाई मा राज्य &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के किसानन के कमाई बढ़ावै अउर उनका आत्मनिर्भर बनावै के संकल्प के साथे लगातार काम कइ रही अअइ। प्रदेश के खेती-किसानी मा नयापन ल्यावै अउर पुरान खेती के साथे-साथे नई तकनीक का जोड़इ बरे सरकार द्वारा कइयौ औद्यानिक विकास योजना चलाई जाइ रही अहैं। मा0 मुख्यमन्तरी जी के अगुवाई मा राज्य के उद्यान विभाग इन योजनन का जमीन पर उतारइ बरे पूरी तना लाग अअइ, जेकर मकसद ई अअइ कि प्रदेश के किसान अपनी मेहनत अउर नई खेती के तरीका से आर्थिक रूप से मजबूत होय सकइँ। फल, सब्जी अउर फूलन के खेती का बढ़ावा देइ बरे सरकार द्वारा पइसा के मदद (सब्सिडी), ट्रेनिंग अउर बाजार दिलवावै जइसन कड़े कदम उठाए गइन अहैं। इन कोशिश के बहुत बड़ा असर गाँव के अर्थव्यवस्था पर दिखाई दइ रहा अअइ अउर किसान अब पुरान फसलन के जगह नगदी फसलन के ओर खिंचे चले आवत अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रशासनिक स्तर पर इन योजनन का काम जिला प्रशासन के देख-रेख मा बहुत बढ़िया तरीका से कीन जाइ रहा अअइ। जिला प्रशासन द्वारा चलाई जाइ रही &#8216;एकीकृत बागवानी विकास मिशन&#8217; (MIDH) जइसन जरूरी योजना किसानन के जिंदगी पूरी तना बदलि रही अअइ। जिला शाहजहाँपुर मा एही मिशन के तहत कीन गइन कोशिश एक मिसाल बनि चुकी अहैं। प्रदेश सरकार के मंशा के मुताबिक, प्रशासन किसानन का नई खेती बरे तैयार कीनिस अअइ अउर उनका तकनीकी जानकारी भी दिहिस अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एही कड़ी मा शाहजहाँपुर के ग्राम गंगसरा पुवायाँ के एक प्रगतिशील किसान <strong>श्री गोविन्द सिंह</strong> के कामयाबी के कहानी बहुत काबिल-ए-तारीफ अअइ। पहिले ऊ खाली पुरान तरीका से खेती करत रहे, जेहसे बढ़ता खरचा अउर घटती कमाई उनके बरे एक बहुत बड़ी चुनौती रही। जब उनका सरकार के औद्यानिक विकास योजनन अउर एकीकृत बागवानी विकास मिशन के बारे मा पता चला, त ऊ जिला प्रशासन के सलाह पर अपनी खेती के तरीका बदलि दिहिन। ऊ पुरान फसलन के जगह 2.00 हेक्टेयर जमीन पर अमरूद के बागवानी शुरू कीनिन। सरकार द्वारा मिली रुपियन के मदद अउर तकनीकी सलाह उनके एही फैसले का कामयाब बनावै मा बहुत काम आई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत अमरूद के बढ़िया क्वालिटी के पेड़ सरकारी नियमन के हिसाब से लगाए गइन। एही प्रोजेक्ट मा प्रति हेक्टेयर लगभग ₹1.50 लाख के खरचा आवा, जेहमा सरकार से मिली मदद ने किसान के हिम्मत बढ़ाई। जब फसल तैयार भई, त ओका बेचइ के समस्या का दूर करइ बरे भी प्रदेश सरकार अउर जिला प्रशासन के टीम ने पूरा सहयोग कीनिस। उद्यान विभाग अउर मण्डी समितियन के तालमेल से फसल का सीधे खेत से ही व्यापारियन ने खरीद लीन, जेहसे किसान का बिचौलियन से छुटकारा मिला अउर फसल के बढ़िया दाम भी मिला। श्री गोविन्द सिंह का सब खरचा काटइ के बाद लगभग ₹2.00 से ₹2.25 लाख प्रति हेक्टेयर के शुद्ध मुनाफा भवा। उनके ई कामयाबी न खाली उनके खुद के कमाई मा बढ़ोत्तरी अअइ, बल्कि ई बात के पक्का सबूत अअइ कि कैसे सरकारी योजनन के सही इस्तेमाल से खेती एक फायदेमन्द धंधा बनि सकत अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एही तना, प्रदेश सरकार द्वारा सुरक्षित खेती का बढ़ावा देइ बरे &#8216;पॉलीहाउस&#8217; अउर &#8216;शेडनेट हाउस&#8217; जइसन आधुनिक सुविधायन बरे बहुत ज्यादा सब्सिडी दीन जाइ रही अअइ। शाहजहाँपुर के ही एक दूसर किसान <strong>श्री अमरीक सिंह</strong> एही तकनीक के फायदा उठावत भए अपने खेत पर पॉलीहाउस बनवाए अहैं। जिला प्रशासन के जरिया उनका न खाली रुपियन के मदद मिली, बल्कि नई खेती के तरीका भी सिखाए गइन। पॉलीहाउस तकनीक से अब बेमौसमी सब्जियन अउर महँगी फसलन का पैदा करब मुमकिन भवा अअइ, जेहसे किसान का साल भर पक्का मुनाफा होत है। सरकार के इन नीतियन ने खेती मा नयापन ल्यावै के साथे-साथे नौजवानन का भी खेती के ओर मोड़ दिहिस अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज इलाका के दूसर किसान भी पुरान खेती छोड़िके बागवानी अउर नगदी फसलन के ओर खिंच रहे अहैं, जेहसे प्रदेश मा एक नई आर्थिक क्रांति शुरू होय गई अअइ। प्रदेश सरकार अउर जिला प्रशासन के मिलि-जुली कोशिश से &#8216;आत्मनिर्भर किसान, समृद्ध प्रदेश&#8217; के सपन सच होत दिखाई दइ रहा अअइ, जहाँ सही योजना, लगन अउर सरकारी मदद से किसान अपनी तकदीर खुदै लिखि रहे अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जनपद-शाहजहाँपुर</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वैश्विक रोजगार के ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश—योगी सरकार के कोशिश से नौजवानन का मिले अंतर्राष्ट्रीय मौके</title>
		<link>https://rahasyalok.com/%e0%a4%b5%e0%a5%88%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%9c%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%93%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a2%e0%a4%bc%e0%a4%a4/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 May 2026 16:41:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश मा काम-धंधा अउर रोजगार बढ़ावै का एक नई दिशा देवत भए मुख्यमन्तरी योगी आदित्यनाथ जी के बढ़िया अगुवाई मा अब एका पूरी दुनिया के स्तर पर फइलावइ के एक मजबूत योजना अपनाई गई अअइ। सरकार द्वारा प्रदेश के नौजवानन का अब खाली अपने देस मा नाहीं, बल्कि विदेशन मा भी नौकरी दिवावै के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश मा काम-धंधा अउर रोजगार बढ़ावै का एक नई दिशा देवत भए मुख्यमन्तरी योगी आदित्यनाथ जी के बढ़िया अगुवाई मा अब एका पूरी दुनिया के स्तर पर फइलावइ के एक मजबूत योजना अपनाई गई अअइ। सरकार द्वारा प्रदेश के नौजवानन का अब खाली अपने देस मा नाहीं, बल्कि विदेशन मा भी नौकरी दिवावै के दिशा मा बहुत बड़े काम कीन जाइ रहे अहैं। सेवायोजन निदेशालय के देख-रेख मा चलि रहा &#8216;उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन&#8217; एही दिशा मा एक बहुत बड़ी कड़ी बनके उभरा अअइ, जेहने राज्य के नौजवानन बरे पूरी दुनिया मा तरक्की के दुआर खोलि दिहिस अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के माध्यम से प्रदेश के नौजवानन का विदेशन मा नौकरी दिवावै के काम अब बहुत बढ़िया अउर कानूनी तरीका से कीन जाइ रहा अअइ। एही काम बरे मिशन द्वारा विदेश मन्त्रालय, भारत सरकार से बाकायदा &#8216;आधिकारिक रिक्रूटिंग एजेंसी&#8217; के लाइसेंस लिया गवा अअइ, जेहसे ई पक्का होय सके कि विदेशन मा नौकरी मिलइ के ई पूरा काम सुरक्षित, साफ-सुथरा अउर भरोसेमंद तरीका से होय।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश के हजारन नौजवानन का <strong>इसराइल</strong> जइसन देसन मा मकान अउर बिल्डिंग बनावै (निर्माण क्षेत्र) मा नौकरी के मौके उपलब्ध कराय गइन अहैं। लगभग 9000 मज़दूरन का चुना गवा रहा, जेहमा से 6004 मज़दूर विदेश जाइ चुके अहैं। एसे प्रदेश का हर साल लगभग ₹1400 करोड़ के विदेशी रुपिया (रेमिटेंस) मिली, जउन राज्य के अर्थव्यवस्था का अउर मजबूत करी। एकरे अलावा, 1336 मज़दूरन का इसराइल भेजइ के काम चलि रहा अअइ अउर फरवरी 2026 मा भी 245 मज़दूरन का चुना गवा अअइ। इन मज़दूरन का पुलिस वेरिफिकेशन अउर डाक्टरी जाँच जइसन सब काम पूरा करइ के बाद विदेश भेजा जाई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रोजगार मिशन के ई पहल खाली मकान बनावै के काम तक सीमित नाहीं अअइ। आज के बखत मा 5000 केयरगिवर्स (देख-रेख करइ वाले) का <strong>इसराइल अउर जापान</strong> मा तथा 1000 नर्सन का <strong>जर्मनी</strong> भेजइ के काम चलि रहा अअइ। प्रदेश सरकार के एही कोशिश से उत्तर प्रदेश के नौजवानन का स्वास्थ्य सेवा जइसन बड़े क्षेत्रन मा भी विदेश जाइ के मौके मिलि रहे अहैं। एकरे अलावा प्रदेश के हुनरमंद, थोड़े पढ़े-लिखे अउर तकनीकी कारीगरन का <strong>दुबई अउर ओमान</strong> जइसन देसन मा लगभग 2000 नौजवानन का अलग-अलग कम्पनियन द्वारा नौकरी पर रखा गवा अअइ। ई विविधता ए बात के साफ निसान अअइ कि प्रदेश के नौजवानन के मांग अब पूरी दुनिया मा बढ़ि रही अअइ अउर ऊ अलग-अलग क्षेत्रन मा अपनी पहिचान बनाय रहे अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश मा रोजगार बढ़ावै बरे &#8216;रोजगार मेलन&#8217; के भूमिका भी बहुत बड़ी रही अअइ। सेवायोजन निदेशालय द्वारा लगाए गए इन मेलन के जरिया प्राइवेट कम्पनियन मा बहुत भारी संख्या मा नौजवानन का नौकरी मिली अअइ। आज के सरकार के बखत मा 01 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2026 तक <strong>13,698 रोजगार मेलन</strong> अउर कैम्पस प्लेसमेण्ट के जरिया <strong>17,26,163 नौजवानन</strong> का नौकरी के मौके दइ दीन गइन। प्रदेश सरकार द्वारा लगाए गए इन रोजगार मेलन नौजवानन अउर नौकरी देइ वाली कम्पनियन के बीच एक बहुत बढ़िया पुल के काम कीनिन अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नौकरी के साथे-साथे सही रास्ता देखाउब भी उतना ही जरूरी होत है। एही मकसद से प्रदेश के सेवायोजन दफ्तरन द्वारा बहुत बड़े स्तर पर करियर काउन्सिलिंग (सलाह-मशविरा) के कार्यक्रम चलाए जाइ रहे अहैं। 01 अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2026 तक <strong>29,172 काउन्सिलिंग कार्यक्रमान मा 33,11,737 नौजवान</strong> हिस्सा लीनिन। इन कार्यक्रमान के जरिया नौजवानन का पढ़ाई, ट्रेनिंग अउर नौकरी के अलग-अलग मौकन के बारे मा बतावा गवा, जेहसे ऊ अपने करियर का सही दिशा मा आगे बढ़ाय सकइँ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रोजगार मिशन के तहत &#8216;इंडस्ट्री कनेक्ट&#8217; कार्यक्रम कइके कम्पनियन अउर नौजवानन के बीच सीधे बातचीत करवाई जाइ रही अअइ। 22 अगस्त 2025 का ग्रेटर नोएडा मा आयोजित कार्यक्रम मा कइयौ कम्पनियन, स्कूल-कॉलेजों अउर विभाग के अधिकारिन हिस्सा लीनिन। अइसन कार्यक्रमान से कम्पनियन के जरूरत अउर नौजवानन के हुनर के बीच तालमेल बनत है, जेहसे नौकरी के मौके बढ़त अहैं अउर स्किल गैप (हुनर के कमी) का कम करइ मा मदद मिलत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश मा आयोजित &#8216;रोजगार महाकुम्भ&#8217; कार्यक्रमान भी रोजगार बढ़ावै मा बहुत बड़ी भूमिका निभाइन अअइ। अगस्त 2025 मा लखनऊ मा आयोजित रोजगार महाकुम्भ मा <strong>16,212 नौजवानन</strong> का चुना गवा, जेहमा से <strong>1612 नौजवानन का यू0ए0ई0 अउर ओमान</strong> जइसन देसन मा नौकरी मिली अअइ। एही तना गोरखपुर मा आयोजित इंटरनेशनल प्लेसमेण्ट इवेण्ट अउर वाराणसी मा आयोजित काशी सांसद रोजगार महाकुम्भ मा भी हजारन नौजवानन का काम मिला। प्रदेश मा अब रोजगार के मौकन के दायरा लगातार बढ़ि रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वाराणसी मा आयोजित इंटरनेशनल मोबिलिटी कॉन्क्लेव मा दुनिया के कइयौ संगठनन, रिक्रूटिंग एजेंसियन अउर सरकारी अधिकारिन हिस्सा लीनिन। एही मंच पर सुरक्षित अउर सही तरीका से विदेश जाइ (Ethical Migration) पर खास बातचीत कीन गई। एकरे अलावा यूरोपियन यूनियन के साथे मिलिके कार्यशाला (वर्कशॉप) के आयोजन कइके अंतरराष्ट्रीय तालमेल का अउर मजबूत कीन गवा। अइसन कोशिश ई पक्का करत अहैं कि प्रदेश के नौजवानन का विदेशन मा सुरक्षित अउर आदर के साथे नौकरी मिले।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मेहरारुन का रोजगार के क्षेत्र मा आगे बढ़ावै बरे <strong>&#8216;पिंक रोजगार महाकुम्भ&#8217;</strong> के आयोजन कीन गवा रहा। एही कार्यक्रम मा <strong>2765 मेहरारुन का नौकरी बरे चुना गवा</strong>, जेहमा से <strong>79 मेहरारुन का विदेशन मा काम करइ के मौका मिला</strong>। ई पहल देखावत है कि योगी सरकार मेहरारुन का भी वैश्विक रोजगार के मौकन से जोड़इ बरे पूरी तना तैयार अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश के अधिकारिन के टीम द्वारा मुम्बई अउर पुणे मा आयोजित कार्यक्रमान के जरिया देस के बड़े-बड़े कारखाना अउर रिक्रूटिंग एजेंसियन से बातचीत कीन गई। &#8216;टाटा ऑटोकॉम्प सिस्टम्स&#8217; अउर दूसर कम्पनियन के साथे बइठक कइके नौजवानन बरे नौकरी के मौकन पर चर्चा कीन गई। साथै ट्रेनिंग स्कूलन के मॉडल का देखिके उनका उत्तर प्रदेश मा चालू करइ के सम्भावना पर भी विचार कीन गवा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश मा रोजगार के सोच अब खाली गाँव-सहर तक सीमित नाहीं रही अअइ, बल्कि ई पूरी दुनिया मा फइलि चुकी अअइ। योगी सरकार के अगुवाई मा रोजगार मिशन नौजवानन का एक नई दिशा अउर नवा मौका दिहिस अअइ। विदेशन मा नौकरी, रोजगार मेला, करियर काउन्सिलिंग अउर कम्पनियन से सीधे बातचीत—ई सब मिलिके एक बहुत मजबूत रोजगार के माहौल (Ecosystem) तैयार कइ रहे अहैं। एही रफ्तार से काम होत रहा त आवइ वाले बखत मा उत्तर प्रदेश न खाली अपने देस मा, बल्कि पूरी दुनिया मा हुनरमंद कारीगरन के सबसे बड़ा केंद्र बनि जाई। ई पहल न खाली नौजवानन के जिंदगी बदली, बल्कि राज्य के अर्थव्यवस्था का भी नई ऊंचाइयों तक पहुँचावै मा बहुत बड़ी भूमिका निभाई।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211; सोनी सिंह, सूचना अधिकारी</strong></p>
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		<title>चित्रकूट मा प्रदेश सरकार के जनहित योजनन से आ रहा बहुत बड़ा बदलाव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 03 May 2026 17:00:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के आज के सरकार के सोच समाज के आखिरी छोर पर बइठे मनई तक तरक्की के मुख्यधारा का बढ़िया तरीका से पहुँचाउब अअइ। एही संकल्प का सच करइ बरे पूरे प्रदेश मा कइयौ जनहित योजना चलाई जाइ रही अहैं, जउन न खाली आर्थिक रूप से कमजोर लोगन के सहारा बनी अहैं, बल्कि नौजवानन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के आज के सरकार के सोच समाज के आखिरी छोर पर बइठे मनई तक तरक्की के मुख्यधारा का बढ़िया तरीका से पहुँचाउब अअइ। एही संकल्प का सच करइ बरे पूरे प्रदेश मा कइयौ जनहित योजना चलाई जाइ रही अहैं, जउन न खाली आर्थिक रूप से कमजोर लोगन के सहारा बनी अहैं, बल्कि नौजवानन अउर बुजुर्गन के जिंदगी मा एक बहुत बड़ा बदलाव भी लेके आई अहैं। एही कड़ी मा चित्रकूट जिला मा चलि रही समाज कल्याण विभाग के बड़ी पहल &#8216;मुख्यमन्तरी अभ्युदय योजना&#8217; अउर &#8216;वृद्धजन आश्रम&#8217; जइसन प्रोजेक्ट समाज सेवा के क्षेत्र मा नया मिसाल कायम कइ रहे अहैं। ई सरकार के बढ़िया सोच अउर जिला प्रशासन के फुर्ती के ही नतीजा अअइ कि आज बुंदेलखंड के दूर-दराज के इलाकन मा रहइ वाले होनहार छात्र अपनी आँखिन मा बड़ा अधिकारी बनइ के सपना सच होत देख रहे अहैं, अउर बेसहारा बुजुर्गन का आदर के साथे जिंदगी जिए के हक मिलि रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमन्तरी अभ्युदय योजना प्रदेश के होनहार नौजवानन बरे एक क्रांतिकारी कदम बनके उभरी अअइ। प्रदेश सरकार के एही योजना के मुख्य मकसद उन गरीब छात्रन का मुफ्त कोचिंग अउर बढ़िया मास्टरन के सलाह उपलब्ध कराउब अअइ, जउन पइसा के तंगी के नाते बड़ी परीच्छन के तैयारी नाहीं कइ पावत रहे। चित्रकूट के राजकीय जिला पुस्तकालय कर्वी मा चलि रहे एही केंद्र पर आज के बखत मा 301 छात्र-छात्रा सिविल सेवा, जेईई (JEE), नीट (NEET) अउर दूसर परीच्छन बरे मुफ्त पढ़ाई कइ रहे अहैं। एही योजना के क्वालिटी अउर सच्चाई के सबसे बड़ा सबूत श्री दिवाकर सिंह के कामयाबी मा दिखात है। दिवाकर सिंह एही कोचिंग के मदद से तैयारी कइके उत्तर प्रदेश समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी परीक्षा-2023 मा सफलता पाय के समीक्षा अधिकारी के पद पर अपना नाम पक्का कीनिन। दिवाकर सिंह के ई कामयाबी न खाली उनके खुद के मेहनत के फल अअइ, बल्कि ई सरकार द्वारा दीन्हे गए पढ़ाई के साधनन के जरूरत का भी देखावत अअइ। उनके एही सफलता से चित्रकूट के दूसर गाँव-गिरावं अउर दूर के छात्रन मा एक नया भरोसा जागा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">लरिकन के बढ़ती रुचि अउर नीक नतीजा का देखत भए जिला प्रशासन आवइ वाले पढ़ाई के सत्र 2026-27 से मऊ, मानिकपुर अउर राजापुर जइसन दूसर तहसीलन मा भी एही मुफ्त कोचिंग के फइलाव करइ के फैसला कीनिस अअइ। प्रदेश सरकार के ई कोशिश ई साफ देखावत अअइ कि पढ़ाई के क्षेत्र मा भेदभाव खतम करइ बरे प्रशासन लगातार काम कइ रहा अअइ। पढ़ाई के साथे-साथे समाज के एक दूसर बहुत संवेदनशील हिस्सा हमार बुजुर्ग अहैं, जेकर ध्यान रखब कौनों भी नीक सरकार के आधार होत है। समाज कल्याण विभाग द्वारा चलावा जाइ रहा वृद्धजन आश्रम एही दयालु सोच के एक बहुत बढ़िया उदाहरण अअइ। विनायकपुर, विकास खण्ड कर्वी मा बना ई आश्रम बेसहारा अउर लाचार बुजुर्गन का न खाली छत दइ रहा अअइ, बल्कि उनका आदर के साथे खाना-पीना अउर दवाई-इलाज जइसन सब सुविधा मुफ्त मा दइ रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हाल ही मा जिला प्रशासन के संवेदनशीलता के बहुत सुघर नतीजा सामने आए अहैं। एक 100 साल के बूढ़ी महतारी का, जेका उनके परिवार वाले छोड़ि दिहे रहेन, प्रशासन तुरंत कार्यवाही कइके सुरक्षित आश्रम तक पहुँचाएस। एकरे बाद प्रशासन के लगातार समझावै से परिवार वालेन का अपनी गलती के अहसास भवा अउर ऊ महतारी का फिर से अपने साथे लइ गइन। एही तना रामघाट इलाका मा भीख मांगिके बहुत खराब हालत मा जिंदगी बितावै वाली एक लाचार बूढ़ी माई का जिला प्रशासन तुरंतै जिला अस्पताल मा भर्ती करवाय के बढ़िया इलाज करवाएस अउर नीक होय के बाद उनका वृद्धजन आश्रम मा सुरक्षित आसरा दिहिस। प्रदेश सरकार के ई कोशिश ई साफ देखावत अअइ कि प्रशासन न खाली नौजवानन के भविष्य सँवारइ बरे तैयार अअइ, बल्कि समाज के सबसे कमजोर बुजुर्गन का सुरक्षा अउर सम्मान दिवावै बरे भी पूरी तना लाग अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश सरकार के इन योजनन ने चित्रकूट जइसन जिला मा एक बहुत बड़े सामाजिक बदलाव के नेव रखी अअइ। मुख्यमन्तरी अभ्युदय योजना से लेके वृद्धजन आश्रम तक के ई सफर सरकार के &#8216;सबका साथ, सबका विकास&#8217; के मूल भावना का धरती पर सच कइ रही अअइ। इन सब कामन से जहाँ दिवाकर सिंह जइसन गरीब मेधावियों का अपनी मंजिल मिलि रही अअइ, वहीं बेसहारा बुजुर्गन का भी समाज मा आदर के साथे रहे के जगह मिलि रही अअइ। प्रशासन द्वारा चलाए जाइ रहे ई सब कार्यक्रम आज पूरे प्रदेश बरे एक बड़ी प्रेरणा बनि गइन अहैं, जउन ई साबित कइ रहे अहैं कि जनहित मा लाग सरकारी योजना किस तना एक समृद्ध अउर दयालु समाज बनाय सकत अहैं।</p>



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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>फैमिली आईडी: एक परिवार, एक पहिचान योजना से शासन मा पारदर्शिता अउर तरक्की के नई शुरुआत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 12:04:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[भारत जइसन बहुत बड़े अउर विविधता वाले देस मा ई पक्का करब कि सरकार के योजनन के फायदा सही अउर जरूरतमंद लोगन तक सही बखत पर पहुँचे, हमेशा से एक बहुत बड़ी चुनौती रही अअइ। कइयौ बार योजनन के सही जानकारी न होय के नाते, नियमन के अड़चन अउर पहिचान से जुड़ी दिक्कतन के नाते &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
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<p class="wp-block-paragraph">भारत जइसन बहुत बड़े अउर विविधता वाले देस मा ई पक्का करब कि सरकार के योजनन के फायदा सही अउर जरूरतमंद लोगन तक सही बखत पर पहुँचे, हमेशा से एक बहुत बड़ी चुनौती रही अअइ। कइयौ बार योजनन के सही जानकारी न होय के नाते, नियमन के अड़चन अउर पहिचान से जुड़ी दिक्कतन के नाते असली हकदार फायदा पाय से वंचित रहि जात रहे। एही मुसीबत का खतम करइ बरे उत्तर प्रदेश सरकार &#8220;फैमिली आईडी-एक परिवार, एक पहिचान&#8221; योजना के शुरुआत कीनिस अअइ। ई योजना न खाली सरकारी काम-काज का मजबूत बनावत अअइ, बल्कि हर परिवार का एक अलग पहिचान दइके उनका सीधे सरकारी सुविधायन से जोड़इ के काम कइ रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फैमिली आईडी योजना के मुख्य मकसद प्रदेश मा चलि रही जनहित योजनन का नीक से चलावै, सही बखत पर काम पूरा करइ अउर साफ-सुथरा तरीका पक्का करब अअइ। एकरे जरिया हर परिवार का एक अलग पहिचान नम्बर दीन जात अअइ, जेहसे सरकारी योजनन के फायदा सीधे अउर बिना कौनों अड़चन के उन तक पहुँचि सके। ई योजना सरकारी काम का आसान अउर सबके पहुँच मा बनावै के दिशा मा भी एक बहुत बड़ा कदम अअइ। जब कौनों परिवार के पूरा जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलि जाई, त लोगन का बार-बार अलग-अलग विभाग मा जाइके अपने कागज देखावै के जरूरत नाहीं परी। एसे सरकारी काम-काज मा तेजी आई अउर ऊ अउर आसान व बढ़िया होय जाई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एही योजना के सबसे बड़ी खूबी ई अअइ कि ई हर परिवार का एक खास पहिचान देइत है। एही पहिचान नम्बर के जरिया परिवार के सब मनइन के जानकारी—जैसे कमाई, पढ़ाई, रोजगार अउर सामाजिक स्थिति—एक ही कम्प्यूटर डेटाबेस मा सुरक्षित कइ दीन जात अअइ। जिन परिवारन के लगे पहिले से राशन कार्ड अअइ, उनके बरे राशन कार्ड के नम्बर का ही फैमिली आईडी मानि लीन गवा अअइ। वहीं जिन परिवारन के लगे राशन कार्ड नाहीं अअइ, उनके बरे अलग से फैमिली आईडी बनावै के इंतजाम कीन गवा अअइ। एकरे बरे एक ऑनलाइन पोर्टल की सुविधा भी दीन गई अअइ, जहाँ परिवार खुदै अपना नाम चढ़ाय (पंजीकरण) सकत अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश मा राशन कार्ड वाले परिवारन के संख्या लगभग 3.64 करोड़ अअइ, जेहमा करीब 14.60 करोड़ लोग शामिल अहैं। इन सब परिवारन का एही योजना मा जोड़े के लक्ष्य तय कीन गवा अअइ। 31 मार्च 2026 तक लगभग 44,32,090 परिवारन के फैमिली आईडी बन चुकी अअइ, जउन ई देखावत है कि योजना कितनी तेजी से आगे बढ़ि रही अअइ। एकरे अलावा, प्रदेश अउर केंद्र सरकार के 32 विभागन के 98 योजनन व सुविधायन का फैमिली आईडी डेटाबेस से जोड़ दीन गवा अअइ। गाँव-घर के जउन राशन कार्ड धारक परिवार अहैं (3.64 करोड़ परिवार अउर 14.60 करोड़ व्यक्ति), उनके राशन कार्ड के नम्बर ही उनके फैमिली आईडी अअइ। अइसन परिवार जेकरे लगे राशन कार्ड नाहीं अअइ, उनके फैमिली आईडी बनावै बरे पोर्टल ($familyid.up.gov.in$) चालू अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फैमिली आईडी योजना के कइयौ बड़े फायदा अहैं, जउन एका जनता बरे बहुत काम के बनावत अहैं। ई फायदा न खाली सरकारी काम-काज का मजबूत करत अहैं, बल्कि आम जनता के जिंदगी का अउर नीक बनावै मा भी मददगार अहैं। एही योजना के तहत सब जानकारी एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलत है, जेहसे योजनन के काम मा पूरी सफाई आवत अअइ। एसे बेईमानी अउर फर्जी फायदा उठावै वालेन के उम्मीद खतम होत अअइ अउर अधिकारिन के जवाबदेही बढ़त अअइ। फैमिली आईडी के जरिया सरकार का ई साफ-साफ पता चलि रहा अअइ कि कौनों परिवार किस योजना के लायक अअइ। एसे ई पक्का कीन जाइ रहा अअइ कि योजनन के फायदा सही मनई तक ही पहुँचे अउर कौनों गड़बड़ी न होय।</p>



<p class="wp-block-paragraph">योजना के तहत अलग-अलग सरकारी विभागन अउर उनके सुविधायन का एक ही प्लेटफॉर्म से जोड़ा गवा अअइ। एसे गाँव के लोगन का अलग-अलग दफ्तरन के चक्कर नाहीं काटे का पड़त। ऊ एक ही जगह से कइयौ सुविधायन के फायदा उठाय सकत अहैं। पहिले लोगन का हर योजना बरे अलग-अलग कागज जमा करे का पड़त रहा, जेहसे बखत अउर मेहनत दोनों बहुत खरच होत रही। फैमिली आईडी के जरिया ई काम बहुत आसान होय गवा अअइ अउर जनता का बार-बार कागज देइ के जरूरत नाहीं पड़त।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ई योजना कम्प्यूटर अउर मोबाइल (डिजिटल माध्यम) के इस्तेमाल का बढ़ावा देइत है, जेहसे न खाली लोगन मा डिजिटल समझ बढ़ि रही अअइ, बल्कि प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के &#8220;डिजिटल इंडिया&#8221; के सपन का सच करइ मा भी बहुत बड़ी भूमिका निभाय रही अअइ। फैमिली आईडी के जरिया सरकार हर परिवार के सामाजिक अउर आर्थिक स्थिति का अउर नीक से समझि सकत अअइ। एसे जरूरतमंद परिवारन के पहिचान कइके उनका सही बखत पर मदद दीन जाइ सकत है, जेहसे सामाजिक सुरक्षा के ढांचा मजबूत होत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एही योजना मा इकट्ठा कीन गवा डेटा सरकार का एकदम सही अउर नई जानकारी देत है। एसे सरकार का अउर बढ़िया नीति बनावै अउर योजनन का अउर नीक से चलावै मा मदद मिलत है। फैमिली आईडी के जरिया ई पक्का कीन जाइ सकत है कि कौनों भी हकदार मनई सरकारी योजनन से वंचित न रहे। एसे योजनन के पहुँच बढ़त अअइ अउर ज्यादा से ज्यादा लोग एकर फायदा उठाय पावत अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ई योजना एक मनई के बजाय पूरे परिवार का एक इकाई मानिके पहिचान देइत है। एसे परिवार के सब सदस्यों का एक साथे योजनन के फायदा मिलि सकत है अउर उनका पूरा विकास पक्का होत है। फैमिली आईडी के जरिया सरकारी काम-काज मा तेजी आई अअइ। अधिकारिन का लाभार्थियों के जानकारी तुरंत मिलि जात है, जेहसे फैसला लेइ के काम तेज अउर अउर बढ़िया होय जात है। डिजिटल रिकॉर्ड अउर साफ-सुथरे इंतजाम के नाते फर्जी फायदा उठावै वाले अउर बिचौलियन के भूमिका खतम होय रही अअइ। एसे योजनन के फायदा सीधे जनता तक पहुँचि रहा अअइ, जेहसे भ्रष्टाचार का रोका जाइ सकत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फैमिली आईडी योजना आवइ वाले बखत मा एक बहुत बड़ी पहिचान प्रणाली के आधार बनि सकत अअइ, जेहसे पूरे देस मा एक जइसन पहिचान के तरीका बनाया जाय सके। फैमिली आईडी योजना &#8220;डिजिटल इंडिया&#8221; अउर &#8220;सुशासन&#8221; के नियमन का मजबूत करइ मा बहुत बड़ी भूमिका निभाय रही अअइ। ई योजना तकनीक के माध्यम से शासन का अउर साफ, जवाबदेह अउर असरदार बनावत अअइ। डिजिटल डेटाबेस के जरिया लोगन के जानकारी सुरक्षित अउर बढ़िया तरीका से रखी जात है, जेहसे सरकारी काम-काज के क्वालिटी सुधरत अअइ। साथे, ई योजना जनता अउर सरकार के बीच एक मजबूत पुल के काम करत अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फैमिली आईडी योजना आगे चलिके एक बहुत बड़े सामाजिक अउर आर्थिक विकास मॉडल के आधार बनि सकत अअइ। अगर एका सही तरीका से चलावा जाय, त ई योजना पढ़ाई, दवाई, रोजगार, पेंशन, बीमा अउर दूसर सामाजिक योजनन का एक साथे जोड़इ मा बहुत मददगार होई। एकरे जरिया सरकार ई पक्का कइ सकत है कि कौनों भी जरूरतमंद नागरिक सरकारी मदद से छूटे न। ई योजना सबको साथे लइके विकास का बढ़ावा देइत है अउर समाज के हर वर्ग का आगे बढ़इ के मौका देइत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">फैमिली आईडी-एक परिवार, एक पहिचान योजना एक दूरदर्शी अउर असरदार पहल अअइ, जउन सरकारी काम मा सफाई, तेजी अउर सबको साथे लइके चलइ के भाव का बढ़ावत अअइ। ई योजना न खाली सरकारी सुविधायन का आसान बनावत अअइ, बल्कि जनता का मजबूत बनाय के उनका तरक्की के मुख्यधारा से जोड़त अअइ। एकरे बड़े फायदन का देखत भए ई कहा जाइ सकत है कि ई योजना उत्तर प्रदेश के तरक्की मा एक बहुत बड़ी भूमिका निभाय रही अअइ। अगर एही योजना का लगातार बढ़ाया अउर सुधारा जात रहा, त ई न खाली प्रदेश, बल्कि पूरे देस बरे एक बहुत बढ़िया मिसाल बनि सकत अअइ। फैमिली आईडी योजना आधुनिक प्रशासन, नई तकनीक अउर जनता के भलाई के एक बहुत बढ़िया उदाहरण अअइ, जउन एक मजबूत, साफ अउर सबको साथे लइके चलइ वाले समाज बनावै के दिशा मा एक बहुत बड़ा कदम अअइ।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211; आशिया खातून,</strong></p>
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		<item>
		<title>प्राविधिक शिक्षा से लिखी जाइ रही स्वर्णिम उत्तर प्रदेश अउर विकसित भारत के नई कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 12:00:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[आज के दुनिया मा पढ़ाई-लिखाई हमेशा से ही तरक्की के अकेला जरिया रही अअइ, पै ई इक्कीसवीं सदी मा पढ़ाई के मतलब अउर ओकर जरूरत एक नया मोड़ लिहिस अअइ। आज के जमाना खाली साक्षर होय के नाहीं अअइ, बल्कि तकनीक मा माहिर अउर हुनरमंद होय के अअइ। सूचना अउर संचार क्रांति के एही दौर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
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<p class="wp-block-paragraph">आज के दुनिया मा पढ़ाई-लिखाई हमेशा से ही तरक्की के अकेला जरिया रही अअइ, पै ई इक्कीसवीं सदी मा पढ़ाई के मतलब अउर ओकर जरूरत एक नया मोड़ लिहिस अअइ। आज के जमाना खाली साक्षर होय के नाहीं अअइ, बल्कि तकनीक मा माहिर अउर हुनरमंद होय के अअइ। सूचना अउर संचार क्रांति के एही दौर मा प्राविधिक शिक्षा (Technical Education) कौनों भी देस के तरक्की तय करइ वाली सबसे बड़ी ताकत बनके उभरी अअइ। भारत, जउन आज पूरी दुनिया मा सबसे ज्यादा नौजवानन के आबादी वाला देस अअइ, अपनी एही अपार जनशक्ति का &#8216;जनसांख्यिकीय लाभांश&#8217; मा बदलि देइ बरे तकनीकी शिक्षा का ही अकेला रास्ता मानि रहा अअइ। विज्ञान, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन अउर फार्मेसी जइसन क्षेत्रन मा दीन जाइ वाली ई प्रैक्टिकल पढ़ाई खाली डिग्री बटोरे के जरिया नाहीं अअइ, बल्कि ई उ ताकत अअइ जउन एक सीधे-साधे नौजवान का दुनिया के स्तर के नए सोच (Innovation) अउर समस्या से लड़इ के काबिल बनावत अअइ। अगर हमका भारत का साल 2047 तक एक &#8216;विकसित देस&#8217; बनावै का अअइ, त हमका अपने तकनीकी स्कूलन अउर हुवां के पढ़ाई के स्तर का बढ़िया बनाय रखइ का परी। तकनीकी शिक्षा के जरूरत खाली नौकरी तक सीमित नाहीं अअइ, बल्कि ई आत्मनिर्भरता के उ सपन का सच करइ के जरिया अअइ, जेकर गोहार प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी लगाए अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एही देस के संकल्प का धरती पर उतारइ मा उत्तर प्रदेश के भूमिका बहुत बड़ी अअइ। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई मा उत्तर प्रदेश आज पूरे देस के &#8216;ग्रोथ इंजन&#8217; के रूप मा जाना जात अअइ। राज्य सरकार ई बात बहुत नीक से जानि चुकी अअइ कि बिना तकनीकी हुनर के कौनों भी बड़े उद्योग मा पइसा लगावइ के काम का सफलता तक नाहीं पहुँचावा जाइ सकत। उत्तर प्रदेश मा प्राविधिक शिक्षा के ढांचा का मजबूत करइ बरे पिछले कुछ बरिसन मा जउन बड़ा बदलाव भवा अअइ, ऊ आवइ वाली पीढ़ियन बरे सुनहरे भविष्य के दुआर खोलि रहा अअइ। योगी सरकार के सोच &#8216;शिक्षा का सीधे धंधा&#8217; (Education to Industry) से जोड़इ के अअइ। एही नाते राज्य के 150 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) का टाटा टेक्नोलॉजीज के सहयोग से नया रूप दीन जाब एक ऐतिहासिक कदम अअइ। ई खाली बिल्डिंग के मरम्मत नाहीं अअइ, बल्कि ई पढ़ाई अउर वर्कशॉप का &#8216;इंडस्ट्री 4.0&#8217; के नई जरूरतन के हिसाब से ढालइ के एक बहुत बड़ा प्रयास अअइ। आज जब पूरी दुनिया रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) अउर 3डी प्रिंटिंग जइसन नई तकनीक के ओर बढ़ि रही अअइ, तब उत्तर प्रदेश के नौजवान इन सब क्षेत्रन मा ट्रेनिंग पाय के दुनिया भर मा अपना लोहा मनवावै बरे तैयार होय रहे अहैं। ई नया बदलाव उन सब गरीब घर के बच्चन बरे संजीवनी के तना अअइ जउन पइसा के तंगी के नाते बड़ी तकनीकी पढ़ाई से वंचित रहि जात रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के तरक्की के सफर मा &#8216;डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर&#8217; एक मील के पत्थर साबित होय रहा अअइ। लखनऊ, कानपुर, झाँसी, आगरा, अलीगढ़ अउर चित्रकूट जइसन सहरन मा फइले एही कॉरिडोर का कामयाब बनावै बरे जउन हुनरमंद कारीगरन के जरूरत अअइ, ओका तैयार करइ के जिम्मा प्रदेश के तकनीकी स्कूलन का दीन गवा अअइ। सरकार ई पक्का कीनिस अअइ कि इन सब औद्योगिक इलाकन के लगे जउन पॉलिटेक्निक अउर इंजीनियरिंग कॉलेज अहैं, ऊ सीधे उन कारखाना के साथे मिलिके काम करइँ। एसे न खाली कारखाना का तुरंत तैयार कारीगर मिलि रहे अहैं, बल्कि गाँव-घर के नौजवानन का अपने ही जिला मा आदर के साथे काम-धंधा मिलि रहा अअइ। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के &#8216;एक जनपद, एक उत्पाद&#8217; (ODOP) अभियान भी बिना तकनीकी शिक्षा के अधूरा रहि जात। पुरान दस्तकारी अउर गाँव के धंधा का नई तकनीक से जोड़िके उनका दुनिया के बाजार के लायक बनाउब प्राविधिक शिक्षा के ही देन अअइ। सरकार तकनीक का खाली सहर तक नाहीं रोकी अअइ, बल्कि सुदूर गाँव-गिरावं तक पहुँचाएस अअइ ताकि गाँव के बच्चा भी डिजिटल इंडिया के हिस्सा बनि सकइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8216;स्वामी विवेकानन्द युवा सशक्तिकरण योजना&#8217; के तहत प्रदेश के लाखन छात्र-छात्रा का मुफ्त टैबलेट अउर स्मार्टफोन बांटल खाली एक सामान देब नाहीं अअइ, बल्कि ई बच्चन के हाथ मा &#8216;जानकारी के समन्दर&#8217; सौंपइ जइसन अअइ। आज के बखत मा जब पढ़ाई मोबाइल अउर कम्प्यूटर पर सिमटि रही अअइ, तब इन सामानन के मिलइ से तकनीकी शिक्षा के छात्रन बरे नए मौके खुले अहैं। एकरे साथे, डॉ0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) जइसन संस्थानन के जरिया नए सोच अउर स्टार्टअप के चलन का जइसन बढ़ावा दीन जाइ रहा अअइ, ओने उत्तर प्रदेश का देस के बड़े स्टार्टअप केंद्रन मा खड़ा कइ दिहिस अअइ। सरकार के मंशा एकदम साफ अअइ कि नौजवान खाली नौकरी ढूँढइ वाला न बने, बल्कि स्टार्टअप के जरिया &#8216;नौकरी देइ वाला&#8217; बने। &#8216;मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना&#8217; अउर तकनीकी शिक्षा के मेल से प्रदेश मा एक नया धंधा करइ के माहौल (Entrepreneurship Ecosystem) बन गवा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी प्राविधिक शिक्षा का अउर आसान अउर सबके पहुँच मा बनाय दिहिस अअइ। अब भाषा के अड़चन तकनीकी पढ़ाई के आड़े नाहीं आई। योगी सरकार एही दिशा मा बड़ी पहल करत भए इंजीनियरिंग अउर डिप्लोमा के पढ़ाई का अपनी मातृभाषा हिन्दी मा करवावै के काम तेज कइ दिहिस अअइ। ई उन मेधावी छात्रन बरे वरदान अअइ जउन अंग्रेजी के कठिन शब्द के नाते अपनी तकनीकी हुनर नाहीं देखा पावत रहे। पढ़ाई के जरिया जब आसान होत है, त नई खोज अउर रिसर्च के समझ अउर बढ़त अअइ। साथे, &#8216;कौशल भारत मिशन&#8217; (Skill India) के तहत छोटे अउर बड़े ट्रेनिंग कार्यक्रमान लाखन नौजवानन का &#8216;स्किल सर्टिफिकेट&#8217; दइके सीधे काम-धंधा से जोड़े अअइ। प्रधानमन्त्री कौशल विकास योजना अउर उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मिलिके राज्य के मजूरी करइ वाले हाथन के हुनर मा बहुत बड़ा सुधार कीनिन अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कारखाना के बदलती मांग अउर स्कूलन के पढ़ाई के बीच के अंतर (Skill Gap) का कम करब एक लगातार चलइ वाला काम अअइ। प्राइवेट तकनीकी स्कूलन का भी खाली पइसा कमावै के सोच से ऊपर उठिके बढ़िया पढ़ाई अउर ईमानदारी पर ध्यान देइ बरे कहा जाइ रहा अअइ। मास्टरन के ट्रेनिंग अउर नई रिसर्च बरे बढ़िया बजट भी दीन जाइ रहा अअइ। भारत का &#8216;सेमीकंडक्टर मिशन&#8217; अउर &#8216;ग्रीन एनर्जी&#8217; जइसन भविष्य के क्षेत्रन मा सबसे आगे बनावै बरे छात्रन का तैयार कीन जाइ रहा अअइ। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक गाड़ी अउर हमेशा टिकइ वाली खेती के तकनीक (Agri-Tech) जइसन क्षेत्रन मा उत्तर प्रदेश के लगे बहुत मौके अहैं, जेका खाली तकनीकी हुनर के जरिया ही आगे बढ़वावा जाइ रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्राविधिक शिक्षा कौनों भी समाज के पूरा विकास के आईना होत अअइ। ई खाली पइसा के खुशहाली नाहीं लावत, बल्कि समाज मा वैज्ञानिक सोच (Scientific Temper) का भी बढ़ावत अअइ। उत्तर प्रदेश जिस रफ्तार से अपने तकनीकी ढांचा का नया रूप दइ रहा अअइ, ऊ दिन अब दूर नाहीं अअइ जब &#8216;विकसित भारत&#8217; के तस्वीर मा एही प्रदेश के सबसे बड़ा हाथ होई। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के &#8216;सक्षम युवा-समृद्ध प्रदेश&#8217; के सपन का पूरा करइ बरे सरकार, स्कूल अउर धंधा जगत सब मिलिके काम कइ रहे अहैं। नौजवानन का किताबी ज्ञान के साथे-साथे उनके हाथ के हुनर ही उनके असली ताकत अअइ। जब तकनीकी शिक्षा के जरिया मजबूत हाथ अउर नए सोच वाले दिमाग एक साथे काम करिहैं, तब भारत का फिर से &#8216;विश्व गुरु&#8217; के आसन पर बइठइ से केऊ नाहीं रोकि सकी। प्राविधिक शिक्षा के ई महायज्ञ देस बनावै के सबसे पवित्र आहुति अअइ।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211; अमरेश कुमार,</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>निराश्रित गोवंश के बचाव अउर तरक्की मा प्रदेश सरकार के बड़ी कामयाबी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 11:56:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के मा0 मुख्यमन्तरी योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई अउर नीक दिशा-निर्देशन मा पिछले नौ बरिसन मा प्रदेश मा भारतीय संस्कृति के आस्था के प्रतीक गोवंश के बचाव अउर देख-रेख बरे बहुत बड़े काम सरकार द्वारा कीन गइन अहैं। पहिले के सरकारन के बखत उत्तर प्रदेश मा छुट्टा अउर निराश्रित गोवंश के समस्या बरिसन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
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<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के मा0 मुख्यमन्तरी योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई अउर नीक दिशा-निर्देशन मा पिछले नौ बरिसन मा प्रदेश मा भारतीय संस्कृति के आस्था के प्रतीक गोवंश के बचाव अउर देख-रेख बरे बहुत बड़े काम सरकार द्वारा कीन गइन अहैं। पहिले के सरकारन के बखत उत्तर प्रदेश मा छुट्टा अउर निराश्रित गोवंश के समस्या बरिसन से किसानन, गाँव अउर सहर के लोगन बरे एक बहुत बड़ी मुसीबत बनी रही। खेत मा खड़ी फसलन के नुकसान, सड़कन पर एक्सीडेंट के डर अउर जानवरन के दयनीय हालत का खाली प्रशासनिक नाहीं, बल्कि मनई के दया से जुड़े गम्भीर मामला मानिके प्रदेश मा गोवंश के बढ़ावै अउर छुट्टा गोवंश के बचाव व चारा-पानी के इंतजाम बरे &#8220;निराश्रित गोवंश संरक्षण नीति-2019&#8221; लागू कीन गई। आज ई नियम ज़मीनी स्तर पर बहुत बढ़िया नतीजा दइ रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गोवंश के बचाव अउर देख-रेख प्रदेश सरकार के सबसे बड़ी प्राथमिकता अअइ अउर एही नाते प्रदेश के गाँव-गिरावं मा 6,433 अस्थायी गो आश्रय स्थल, 518 वृहद गो संरक्षण केंद्र अउर 253 कांजी हाउस चलाए जाइ रहे अहैं। एकरे अलावा सहरन मा भी 323 कान्हा गो आश्रय स्थल बनाए गइन अहैं। एही तना पूरे प्रदेश मा कुल 7,527 गो आश्रय स्थलों के एक बहुत मजबूत नेटवर्क तैयार कीन गवा अअइ, जेहमा लगभग 12.39 लाख छुट्टा गोवंश का सुरक्षित रखल जाइ रहा अअइ। सरकार के तरफ से हर एक जानवर बरे रोज ₹50 के हिसाब से रुपिया दीन जाइ रहा अअइ। प्रदेश सरकार गोवंश के ई समस्या का बहुत गम्भीरता से लइके ओकर पूरा इंतजाम कीनिस अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गो आश्रय स्थलों का चलावै अउर गोवंश के चारा-पानी बरे प्रदेश सरकार हर दिन लगभग ₹7.50 करोड़ के रुपिया खरच कइ रही अअइ। ई खरचा खाली जानवरन के बचाव बरे नाहीं अअइ, बल्कि ई किसानन के सुरक्षा अउर गाँव के अर्थव्यवस्था का मजबूत करइ बरे एक बहुत बड़ा काम अअइ। सरकार के ई लगन साफ देखावत अअइ कि गोवंश बचाव का एक सामाजिक जिम्मेदारी मानिके काम कीन जाइ रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एही अभियान के एक सबसे मजबूत खम्भा &#8220;मा0 मुख्यमन्तरी सहभागिता योजना&#8221; अअइ। एही योजना के तहत अब तक 1,14,481 इच्छुक किसानन अउर पशुपालकन का 1,83,389 छुट्टा गोवंश सुपुर्द कीन जाइ चुके अहैं। एसे गोवंश का एक पक्का घर मिलि गवा अअइ अउर साथे-साथे पशुपालकन के कमाई भी बढ़ि रही अअइ। गोवंश के देख-रेख बरे &#8216;सेन्ट्रल प्रोजेक्ट मानीटरिंग यूनिट&#8217; बनाई गई अअइ, जेहसे निराश्रित गोवंश के निगरानी कीन जाइ सके अउर डी०बी०टी० (DBT) के माध्यम से चारा-पानी के रुपिया सीधे गो आश्रय स्थलों अउर पशुपालकन के बैंक खाता मा भेजा जाइ रहा अअइ। ई योजना गाँव के लोगन का अपने गोड़ पर खड़ा करइ मा एक बहुत बढ़िया पहल साबित होय रही अअइ, जेहमा जानवरन के बचाव अउर रोजी-रोटी दोनों के तालमेल दिखाई दइ रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश मा गो संरक्षण केंद्रन के निर्माण का भी बहुत बढ़ावा दीन गवा अअइ। अब तक 630 वृहद गो संरक्षण केंद्रन के निर्माण के मंजूरी दीन जाइ चुकी अअइ, जेहमा से 539 केंद्र बनिके तैयार अहैं अउर 518 केंद्र चालू कइ दीन गइन अहैं। हर एक बड़े गो संरक्षण केंद्र मा लगभग 400 गोवंश का रखइ के जगह अअइ, अउर एक केंद्र बनावै मा लगभग ₹160.12 लाख के खरचा आवा अअइ। एकरे अलावा वित्तीय वर्ष 2026-27 मा नए बड़े गो संरक्षण केंद्र बनावै बरे ₹100.00 करोड़ के रुपिया के इंतजाम कीन गवा अअइ। प्रदेश सरकार एही दिशा मा लगातार काम बढ़ा रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गोवंश बचाव के इन कोशिश के बहुत नीक असर अब खेती-किसानी मा साफ-साफ दिखाई दइ रहा अअइ। गो आश्रय स्थलों मा जानवरन का नीक से रखइ के नाते खेत मा फसलन के होय वाले नुकसान मा बहुत बड़ी कमी आई अअइ। गो आश्रय स्थलों से निकलइ वाले गोबर से खाद बनाय के प्राकृतिक खेती का बढ़ावा दीन जाइ रहा अअइ। एसे किसानन के कमाई बढ़ी अअइ अउर प्रदेश मा अन्न के पैदावार मा भी लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज कीन गई अअइ। ई कोशिश किसानन बरे बहुत बड़ी राहत बनके उभरी अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गोवंश के चारा-पानी का पक्का करइ बरे &#8220;भूसा-संग्रहण अभियान&#8221; एक बहुत बड़ा कदम अअइ। 15 अप्रैल 2026 से 31 मई 2026 तक चलाए जाइ रहे एही अभियान के तहत 60.99 लाख कुन्तल भूसा इकट्ठा करइ के लक्ष्य तय कीन गवा अअइ। अब तक दान के माध्यम से 0.598 लाख कुन्तल अउर खरीद के माध्यम से 5.02 लाख कुन्तल भूसा इकट्ठा कइ लीन गवा अअइ। ई अभियान न खाली चारा के तंगी खतम कइ रहा अअइ, बल्कि समाज मा एक-दूसर के मदद करइ के भाव भी जगाय रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एकरे साथे, गो आश्रय स्थलों मा रहइ वाले गोवंश का रोज हरा चारा मिलि सकइ, एही बरे चरागाह के जमीन का भी सुधारा जाइ रहा अअइ। प्रदेश मा मौजूद 61,118.85 हेक्टेयर चरागाह के जमीन मा से 11,834.50 हेक्टेयर जमीन का 7,339 गो आश्रय स्थलों से जोड़ दीन गवा अअइ। अब तक 7,364.03 हेक्टेयर जमीन पर हरा चारा बोय दीन गवा अअइ। ई कोशिश गोवंश के सेहत सुधारइ के साथे-साथे आश्रय स्थलों का अपने गोड़ पर खड़ा करइ मा मदद कइ रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार के सोच खाली जानवरन का रखइ तक सीमित नाहीं अअइ, बल्कि गो आश्रय स्थलों का कमाई अउर धंधा के केंद्र बनाउब भी एकर बहुत बड़ा हिस्सा अअइ। पशुपालन विभाग द्वारा गो आश्रय स्थलों का स्वावलम्बी (अपने गोड़ पर खड़ा) बनावै बरे गोबर पेंट, गो दीप, धूपबत्ती, गो लठा, गोबर के गमले, वर्मी कम्पोस्ट अउर जैविक खाद बनावै के यूनिट लगाई जाइ रही अहैं। इन सब कामन से पर्यावरण के बचाव त होइबे करत है, साथे गाँव-गिरावं मा कमाई अउर रोजगार के नवा मौके भी बन रहे अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मेहरारुन के स्वयं सहायता समूहों के हिस्सेदारी एही काम का अउर मजबूत बनाय रही अअइ। ई समूह गोवंश से जुड़े सामानन का बनावै अउर बाजार मा बेचइ मा बहुत बड़ी भूमिका निभाय रहे अहैं, जेहसे मेहरारुन का कमाई करइ अउर आगे बढ़इ के मौका मिलि रहा अअइ। ई पहल मेहरारुन का मजबूत बनावै के साथे-साथे गाँव के समाज का भी अउर नीक बना रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश सरकार के एही अनूठे अउर नवा प्रयास छुट्टा गोवंश के समस्या का एक बहुत बड़े मौके मा बदलि दिहिस अअइ। जहाँ एक तरफ गो आश्रय स्थलों के माध्यम से निराश्रित गोवंश का सुरक्षित रखल जाइ रहा अअइ, वहीं सरकार गो आश्रय स्थलों का आत्मनिर्भर बनावै, गाँव मा रोजगार बढ़ावै, मेहरारुन का आगे बढ़ावै अउर नए-नए तरीका अपनावै बरे लगातार कोशिश कइ रही अअइ। निश्चित तौर पर गोवंश के बचाव के दिशा मा उत्तर प्रदेश सरकार के ई पहल बहुत सराहनीय अअइ अउर देस के दूसर राज्यों बरे भी एक बहुत बढ़िया मिसाल अअइ।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211; निधि वर्मा, सूचना अधिकारी</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>खाद्य प्रसंस्करण: किसानन के कमाई, नौजवानन बरे रोजगार अउर आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के नई पहिचान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 11:55:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[उत्तर प्रदेश मा खेती खाली पेट भरइ के जरिया नाहीं अअइ, बल्कि ई यहाँ के अर्थव्यवस्था के सबसे मजबूत नेव अअइ। उत्तर प्रदेश न खाली देस के सबसे बड़ा खेती पैदावार वाला राज्य अअइ, बल्कि अलग-अलग फसल, फल, सब्जी, दूध अउर पशुपालन के क्षेत्र मा भी सबसे आगे अअइ। एही मजबूत आधार का अउर मजबूत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
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<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश मा खेती खाली पेट भरइ के जरिया नाहीं अअइ, बल्कि ई यहाँ के अर्थव्यवस्था के सबसे मजबूत नेव अअइ। उत्तर प्रदेश न खाली देस के सबसे बड़ा खेती पैदावार वाला राज्य अअइ, बल्कि अलग-अलग फसल, फल, सब्जी, दूध अउर पशुपालन के क्षेत्र मा भी सबसे आगे अअइ। एही मजबूत आधार का अउर मजबूत बनावै बरे राज्य सरकार खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) के क्षेत्र का एक नई दिशा अउर रफ्तार दइ रही अअइ। &#8220;उत्तर प्रदेश खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति-2023&#8221; के माध्यम से किसानन, नौजवानन अउर व्यापारियन बरे कमाई अउर रोजगार के नवा मौके बन रहे अहैं। ई कोशिश न खाली खेत के सामानन के दाम बढ़ा रही अअइ, बल्कि &#8216;खेत से लेके थाली तक&#8217; (फार्म से फोर्क तक) एक मजबूत, नया अउर साफ-सुथरा इंतजाम भी तैयार कइ रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">खाद्य प्रसंस्करण आज उ क्षेत्र बनि चुका अअइ, जहाँ किसान अपनी फसल के बढ़िया दाम पाय सकत अहैं अउर नौजवान नौकरी के साथे-साथे खुद के धंधा शुरू कइके आगे बढ़ि सकत अहैं। पहिले जहाँ किसान अपनी फसल का कच्चा ही बेचइ बरे मजबूर होत रहे, वहीं अब ओका नया रूप दइके (वैल्यू एडिशन) कइयौ गुना ज्यादा कमाई कइ रहे अहैं। टमाटर से सॉस, आम से जूस अउर गूदा (पल्प), गेहूँ से पैकेट वाले सामान, अउर दूध से पनीर व दूसरा डेयरी सामान बनाय के बाजार मा बढ़िया दाम वसूला जाइ रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्य सरकार द्वारा दीन जाइ रही छूट (सब्सिडी) अउर अलग-अलग तरह के रुपियन के मदद इन योजनन का अउर बढ़िया बनाय रही अअइ। नया धंधा लगावै पर सरकारी मदद, स्टाम्प ड्यूटी मा छूट, बिजली के बिल मा रियायत अउर ट्रेनिंग के सुविधायन धंधा करइ वालन का हौसला बढ़ा रही अअइ। एकरे साथे सरकार गाँव-गाँव मा जागरूकता अभियान भी चलाय रही अअइ, जेहसे ज्यादा से ज्यादा लोग एही क्षेत्र मा पइसा लगावइ अउर कारखाना खोलइ बरे आगे आवइँ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार के नीति के एक सबसे बड़ा पहलू ई अअइ कि फूड प्रोसेसिंग के कारखाना मा जउन कच्चा माल लागी, ओकर खरीद सीधे गाँव के किसानन अउर दूध पैदा करइ वालन से कीन जाय, एही पर खास जोर अअइ। एसे किसानन के कमाई सीधे बढ़ि रही अअइ अउर गाँव मा रुपियन के आवक बढ़ि रही अअइ। एकरे साथे कारखाना मा बढ़िया क्वालिटी अउर नियमन के पालन पक्का करइ बरे जरूरी सर्टिफिकेट अउर पैमाना भी तय कीन गइन अहैं, जेहसे धंधा मा ईमानदारी अउर सामान के क्वालिटी बनी रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एही नीति के तहत फल अउर सब्जी के प्रसंस्करण, रेडी-टू-ईट (तुरंत खाय वाला) अउर रेडी-टू-कुक (तुरंत पकावै वाला) सामान, मसाला, मशरूम, शहद, सोयाबीन, कोको सामान, गुड़ से बने सामान, फ्रूट जूस, डेयरी सामान, कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक अउर मछली के चारा बनावै जइसन कइयौ क्षेत्रन का शामिल कीन गवा अअइ। ई विविधता उत्तर प्रदेश का खाद्य प्रसंस्करण के एक बहुत बड़े हब के रूप मा खड़ा करइ बरे बहुत बड़ा कदम अअइ।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सफलता के प्रेरक कहानियाँ</h3>



<p class="wp-block-paragraph">एही नीति के नीक असर अब जमीन पर साफ-साफ दिखाई दइ रहा अअइ। बड़ी कम्पनियन के साथ-साथ छोटे अउर मझोले व्यापारी भी एही क्षेत्र मा तेजी से आगे बढ़ि रहे अहैं। बड़ी कम्पनियन से रिटायर हुए जानकार लोग, बढ़िया पढ़े-लिखे नौजवान अउर विदेशन से लउके हुए प्रोफेशनल्स उत्तर प्रदेश मा फूड प्रोसेसिंग मा पइसा लगाय रहे अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अमेठी जिला के इंजीनियर एस0 के0 तिवारी</strong> एकरे बहुत बढ़िया उदाहरण अहैं। 42 साल के बड़े अनुभव के साथे ऊ स्टार्च बनावै के प्रोजेक्ट लगावै के फैसला कीनिन अअइ, जेकर इस्तेमाल बिस्कुट अउर टॉफी जइसन सामान बनावै मा कीन जाई। ऊ साफ-साफ कहिन कि राज्य सरकार के बढ़िया सब्सिडी अउर नीक नीति ही उनका ई पइसा लगावइ बरे खींचे अअइ। उनके हुनर अउर अनुभव से न खाली धंधा मजबूत भवा अअइ, बल्कि गाँव के लोगन का काम भी मिलि रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एही तना <strong>बुलन्दशहर जिला के नौजवान व्यापारी मुकुल भूषण गुप्ता</strong> द्वारा शुरू कीन गवा &#8216;शाकुम्भरी ऑर्गेनिक एक्जिम एलएलपी&#8217; भी एक बहुत बढ़िया मिसाल अअइ। ऊ तिल, मूँगफली, गेहूँ अउर दाल के सफाई, छंटाई (ग्रेडिंग) अउर पैकिंग के धंधा मा पइसा लगाए अहैं। 20 साल से ज्यादा के अनुभव के साथे ऊ एही क्षेत्र मा कदम रखिके ई साबित कइ दिहिन कि खाद्य प्रसंस्करण न खाली फायदेमन्द अअइ, बल्कि ई किसान अउर व्यापारी के बीच के एक मजबूत कड़ी भी अअइ।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मेहरारुन अउर स्वयं सहायता समूहों के भूमिका</h3>



<p class="wp-block-paragraph">खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र मा मेहरारुन के हिस्सेदारी बहुत तेजी से बढ़ि रही अअइ। स्वयं सहायता समूह (SHGs) के माध्यम से मेहरारू पापड़, अचार, मसाला, बेकरी सामान, जैम, जेली अउर दूसरा खाय के सामान बनाय रही अहैं। ई सब सामान गाँव के बाजारन के साथ-साथ ऑनलाइन भी खूब बिकि रहे अहैं अउर अपनी पहिचान बनाय रहे अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मेहरारुन के एही मेहनत से न खाली उनके कमाई बढ़ि रही अअइ, बल्कि ऊ अपने गोड़ पर खड़ी होय रही अहैं। एसे गाँव के अर्थव्यवस्था का एक नई ताकत मिलि रही अअइ अउर समाज मा मेहरारुन के मान-सम्मान भी बढ़ि रहा अअइ।</p>



<h3 class="wp-block-heading">कोल्ड स्टोरेज अउर लॉजिस्टिक्स के विस्तार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">फूड प्रोसेसिंग का बढ़ावा देइ बरे &#8216;कोल्ड स्टोरेज&#8217; (शीतगृह), गोदाम अउर माल ढोवै के गाड़ी के इंतजाम का भी अउर मजबूत कीन जाइ रहा अअइ। फल अउर सब्जियन का सड़इ से बचावै बरे नया कोल्ड चेन सिस्टम बनावा जाइ रहा अअइ, जेहसे किसानन का अपनी फसल सुरक्षित रखइ अउर सही बखत पर बढ़िया दाम वसूलइ मा मदद मिलि रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार द्वारा फूड पार्क, मेगा फूड पार्क अउर एग्री लॉजिस्टिक्स हब बनावै पर भी जोर दीन जाइ रहा अअइ, जेहसे सामान बनइ से लेके बाजार मा पहुँचइ तक के पूरा काम व्यवस्थित अउर बढ़िया होय सके।</p>



<h3 class="wp-block-heading">आर्थिक बदलाव के मजबूत धुरी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">खाद्य प्रसंस्करण के फइलाव से प्रदेश के गाँव के अर्थव्यवस्था का एक नई मजबूती मिलि रही अअइ। किसान अपनी फसल का सीधे बाजार मा बेचइ के बजाय ओकर नया सामान बनाय के बढ़िया दाम पाय रहे अहैं, जेहसे उनके कमाई हमेशा बरे बढ़ि रही अअइ अउर बिचौलियन के भरोसा खतम होय रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नौजवानन बरे ई क्षेत्र नौकरी अउर स्वरोजगार के बहुत बड़ा मौका बनके उभरा अअइ। नई तकनीक, स्टार्टअप के चलन अउर सरकारी मदद के नाते आज के नौजवान नौकरी ढूँढइ वाला नाहीं, बल्कि &#8216;रोजगार देइ वाला&#8217; बनि रहा अअइ।</p>



<h3 class="wp-block-heading">निर्यात अउर वैश्विक पहिचान के ओर कदम</h3>



<p class="wp-block-paragraph">फूड प्रोसेसिंग के जरिया उत्तर प्रदेश के सामान अब पूरी दुनिया के बाजारन मा अपनी पहिचान बनाय रहे अहैं। प्रसंस्कृत खाद्य सामानन के क्वालिटी, बढ़िया पैकिंग अउर ब्रांडिंग मा सुधार के नाते बाहर माल भेजइ (निर्यात) के उम्मीद बहुत बढ़ि गई अअइ, जेहसे प्रदेश के अर्थव्यवस्था का विदेशी रुपिया कमावै के मौका भी मिलि रहा अअइ।</p>



<h3 class="wp-block-heading">विकसित भारत के ओर एक मजबूत कदम</h3>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश सरकार के ई पहल &#8216;आत्मनिर्भर भारत अउर विकसित भारत&#8217; के सपन का पूरा करइ मा बहुत बड़ी भूमिका निभाय रही अअइ। खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से न खाली किसानन के कमाई बढ़ावै के काम होय रहा अअइ, बल्कि प्रदेश का उद्योग अउर रुपिया-पइसा के मामले मा भी नई ऊंचाइयों पर पहुँचावा जाइ रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आज उत्तर प्रदेश के विकास के सफर के एक बहुत बड़ा आधार बनि चुका अअइ। ई क्षेत्र किसानन के खुशहाली, नौजवानन के रोजगार अउर धंधा के बढ़ावै का एक साथे आगे बढ़ावय रहा अअइ। आवइ वाले बखत मा ई क्षेत्र न खाली प्रदेश, बल्कि पूरे देस के अर्थव्यवस्था का एक नई दिशा देइ मा सबसे बड़ी भूमिका निभाई।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211; बी0 एल0 यादव, से०नि० सहायक निदेशक</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>सोनभद्र मा बायो-फ्लॉक तकनीक से मेहरारुन के तरक्की अउर खुशहाली के नवा अध्याय</title>
		<link>https://rahasyalok.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%a8%e0%a4%ad%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%8b-%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%95-%e0%a4%a4%e0%a4%95%e0%a4%a8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 11:49:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन उत्तर प्रदेश के जिला सोनभद्र के सुदूर पथरीले अउर पहाड़ी इलाकन मा, जहाँ हमेशा पानी के तंगी अउर ऊबड़-खाबड़ जमीन खेती व कमाई के राह मा अड़चन बनी रहत रही, हुवां अब तरक्की के एक नई कहानी लिखी जाइ रही अअइ। &#8220;उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM)&#8221; के देख-रेख मा &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन</strong></p>



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<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के जिला सोनभद्र के सुदूर पथरीले अउर पहाड़ी इलाकन मा, जहाँ हमेशा पानी के तंगी अउर ऊबड़-खाबड़ जमीन खेती व कमाई के राह मा अड़चन बनी रहत रही, हुवां अब तरक्की के एक नई कहानी लिखी जाइ रही अअइ। &#8220;उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM)&#8221; के देख-रेख मा चलि रही योजनन गाँव के मेहरारुन का खाली रुपिया-पइसा के मजबूती नाहीं दिहिन, बल्कि उनका एक &#8216;व्यापारी&#8217; के रूप मा एक नई पहिचान भी दिहिन अअइ। जिला के विकास खण्ड चतरा के ग्राम चपईल मा &#8220;शिव गुरु आजीविका स्वयं सहायता समूह&#8221; के कामयाबी ए बात के जीती-जागती मिसाल अअइ कि अगर सरकारी योजनन के सही इस्तेमाल अउर वैज्ञानिक सोच एक साथ मिलि जाय, त कठिन से कठिन हालात मा भी खुशहाली के दुआर खुलि सकत अहैं। यहाँ के मेहरारुन पुरान अउर जोखिम भरे मछली पालन के जगह पर आधुनिक &#8216;बायो-फ्लॉक&#8217; तकनीक का अपनाय के अपनी जिंदगी के आधार बदलि दिहिन अअइ। ई बदलाव के असली रीढ़ सरकार के उ माली मदद अअइ, जउन गाँव के गरीब लोगन का सीधे साधन से जोड़त अअइ। योजना के तहत एक बायो-फ्लॉक यूनिट लगावै बरे कुल ₹3.5 लाख के खरचा तय कीन गवा रहा, जेहमा से ₹2 लाख के बहुत बड़ी रकम आजीविका निधि के रूप मा मिशन द्वारा सीधे ग्राम संगठन का दीन गई। बाकी के रुपिया सी.आई.एफ. (कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड) से कर्ज के रूप मा लइके इन मेहरारुन अपने गोड़ पर खड़ा होय के हिम्मत जुटाइन, जउन सरकारी तंत्र के दया अउर दूर की सोच का देखावत अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सोनभद्र जइसन इलाका मा, जहाँ मनई के जिंदगी पूरी तना बरखा के पानी पर टिकी रहत है अउर जेठ-बइसाख के महिना मा ताल-तलइया सूख जाय से मछली पालन जइसन धंधा मा बहुत घाटा सहे का पड़त रहा, हुवां बायो-फ्लॉक तरीका एक भगवान के वरदान जइसन सामने आवा अअइ। एही तकनीक के सबसे बड़ी खूबी ई अअइ कि एमा पानी बहुत कम लागत है अउर थोड़े से जगह मा बहुत ज्यादा पैदावार होत अअइ। खाली 1300 वर्ग फीट के पानी के टंकी मा, जहाँ पानी के अदला-बदली बहुत कम करे का पड़त है, हुवां 2000 मछलियन का पालल जाइ सकत है। सरकारी मदद से समूह के मेहरारून आज के बखत मा 4 टैंक लगाए अहैं, जेहमा लगभग 6000 मछलियन का वैज्ञानिक तरीका से पाला जाइ रहा अअइ। ई मछलियाँ खाली 7 महीना के भीतर ही बेचे बरे तैयार होय जात अहैं। अगर रुपियन के हिसाब से देखा जाय त 7 महिना के एक चक्र मा ₹6 से ₹7 लाख तक के बिक्री होय जात अअइ, जेहसे समूह के मेहरारुन का ₹1 से ₹2 लाख के शुद्ध मुनाफा होय रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ई फायदा खाली कागजी आँकड़न तक नाहीं अअइ, बल्कि इसने गाँव-समाज के उ कड़वी हकीकत का बदलि दिहिस अअइ जहाँ मेहरारू मजूरी करइ बरे दूसरे गाँव जाइ का मजबूर रही। पहिले धान-गेहूँ के कटाई के बखत खाली ₹100 अउर 3 किलो चउर के मजूरी पर दिन भर खटइ वाली मेहरारू अब अपने घर के आँगन मा काम करत भए आदर के साथे रोज ₹300 तक कमाय रही अहैं। एसे न खाली गाँव से होय वाला पलायन रुका अअइ, बल्कि मेहरारू अब अपने बच्चन के पढ़ाई-लिखाई अउर दवाई-इलाज पर भी बढ़िया ध्यान दइ पावत अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार के तरफ से मिली 03 दिन के ट्रेनिंग इन मेहरारुन का तकनीकी रूप से इतना हुनरमंद कइ दिहिस अअइ कि ऊ अब टार्पुलिन टैंक, प्रोटेक्टिव लाइनर, एयर पम्प अउर टीडीएस मीटर जइसन औजारन का बड़ी आसानी से चलाय रही अहैं। गाँव-घर मा ही इन सब सामानन के मिलइ से लागत कम भई अअइ अउर गाँव के लोगन का काम भी मिला अअइ। बायो-फ्लॉक तरीका मा बैक्टीरिया बरे बढ़िया माहौल बनइ के नाते मछलियाँ बहुत तेजी से बढ़त अहैं अउर उनके मरे के डर भी नाहीं रहत, जेहसे जोखिम कम अउर फायदा पक्का होत अअइ। राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के ई मॉडल अब जिला के दूसर विकास खण्डन मा भी चलावै के तैयारी अअइ, ताकि ज्यादा से ज्यादा गाँव के परिवारन का गरीबी के दलदल से बाहर निकाला जाय सकइ। सोनभद्र के ई कामयाबी के कहानी सरकारी मदद, वित्तीय अनुदान अउर नई तकनीक के मेल से कौनों भी इलाका के सूरत बदलि सकत अअइ, जेहसे न खाली गाँव-घर के मांग पूरी होय रही अअइ बल्कि आगे चलिके बाहर माल भेजइ के उम्मीद भी बढ़ि रही अअइ।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>जनपद-सोनभद्र</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>स्ट्रॉबेरी के मिठास से संतपाल सिंह लिखीन खुशहाली के नई इबारत</title>
		<link>https://rahasyalok.com/%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%89%e0%a4%ac%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 11:42:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[स्ट्रॉबेरी अउर ड्रैगन फ्रूट से मिर्जापुर के किसान संतपाल अउर जय सिंह गढ़िन कामयाबी के नई कहानी सफलता के कहानी कृषि अउर संबद्ध सेक्टर (उद्यान विभाग) मिर्जापुर जिला के राजगढ़ विकासखण्ड मा स्थित ग्राम धनसीरीया के एक प्रगतिशील किसान श्री संतपाल सिंह बागवानी के क्षेत्र मा एक बहुत बढ़िया मिसाल पेश कीन अहैं। श्री संतपाल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-medium-font-size wp-block-paragraph"><strong>स्ट्रॉबेरी अउर ड्रैगन फ्रूट से मिर्जापुर के किसान संतपाल अउर जय सिंह गढ़िन कामयाबी के नई कहानी</strong></p>



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<p class="has-text-align-center wp-block-paragraph"><strong>सफलता के कहानी</strong> <strong>कृषि अउर संबद्ध सेक्टर (उद्यान विभाग)</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">मिर्जापुर जिला के राजगढ़ विकासखण्ड मा स्थित ग्राम धनसीरीया के एक प्रगतिशील किसान श्री संतपाल सिंह बागवानी के क्षेत्र मा एक बहुत बढ़िया मिसाल पेश कीन अहैं। श्री संतपाल सिंह के लगे कुल 2.0 हेक्टेयर खेती के जमीन अअइ, जेह पर ऊ बरिसन से धान, गेहूँ अउर आलू जइसन पुरान तरीका से खेती करत आवत रहे। बहुत मेहनत कइके भी इन फसलन से होय वाली कमाई खरचा अउर मेहनत के आगे बहुत कम रही, जेहसे उनके तरक्की के राह मा हमेशा अड़चन बनी रहत रही। संतपाल सिंह कुछ अइसन करइ चाहत रहे जेहसे न खाली उनके कमाई बढ़े, बल्कि इलाका के दूसर किसानन का भी एक नई दिशा मिलि सकइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उनके जिंदगी मा बड़ा बदलाव तब आवा जब ऊ राजगढ़ ब्लॉक मा उद्यान विभाग के तरफ से लगाए गए कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम (किसान ट्रेनिंग) मा हिस्सा लीनिन। हुवां उनका स्ट्रॉबेरी के खेती के नई तकनीक अउर बाजार मा एकर मांग के बारे मा विस्तार से जानकारी मिली। ट्रेनिंग से खुश होय के ऊ पुरान खेती के साथे-साथे प्रयोग के तौर पर स्ट्रॉबेरी उगावइ के मन बनाइन। उद्यान विभाग मिर्जापुर के अधिकारिन से लगातार सलाह लइके ऊ साल 2024 मा अपनी 16 बिस्वा जमीन पर स्ट्रॉबेरी के खेती शुरू कीनिन। प्रदेश सरकार के तरफ से मिली मदद व अनुदान अउर नई तकनीक व सही देख-रेख के बढ़िया नतीजा खाली 05 से 06 महीना के भीतर ही देखे का मिलि गवा, जब स्ट्रॉबेरी के फसल पूरी तना तैयार होय गई तब ऊ ओकर बिक्री शुरू कीनिन।</p>



<p class="wp-block-paragraph">संतपाल सिंह के खेत मा एक पेड़ से लगभग 0.5 से 1.0 किलोग्राम तक बढ़िया क्वालिटी के फल मिले। काहे से कि जिला मा स्ट्रॉबेरी के खेती एकदम नई रही, एही नाते गाँव-गिरावं के बाजारन मा एकर बहुत मांग रही अउर उनका बहुत नीक दाम मिला। एही छोटे से खेत से उनका कुल ₹4.0 लाख के शुद्ध मुनाफा भवा, जउन ई साबित कइ दिहिस कि कम जमीन मा भी अगर तकनीक के सही इस्तेमाल कीन जाय, त खेती फायदे के सौदा बनि सकत अअइ। उनके एही बड़ी कामयाबी से खुश होय के आस-पास के गाँव के किसानन मा भी स्ट्रॉबेरी के खेती बरे बहुत उत्साह देखा जाइ रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज संतपाल सिंह के प्रेरणा से उनके गाँव अउर आस-पास के इलाकन मा कुल 05 हेक्टेयर क्षेत्र मा स्ट्रॉबेरी के खेती कीन जाइ रही अअइ। अपनी एही कामयाबी के श्रेय प्रदेश सरकार के सही जानकारी अउर अनुदान का देवत भए किसान श्री संतपाल सिंह कहत अहैं कि उद्यान विभाग के सही सलाह उनके तकदीर बदलि दिहिस अअइ। उनके ई कहानी ई संदेस देइत है कि अगर किसान नवा तरीका अपनाएं अउर नई बागवानी के ओर कदम बढ़ाएं, त ऊ अपनी कमाई बढ़ाके आत्मनिर्भर बनि सकत अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश सरकार स्ट्रॉबेरी जइसन फायदे वाली फसल का बढ़ावा देइ बरे किसानन का रुपियन के मदद दइके उनका आत्मनिर्भर बनावै के बहुत सराहनीय काम कीनिस अअइ। उद्यान विभाग के मुताबिक स्ट्रॉबेरी के एक इकाई लगावै मा लगभग ₹2 लाख प्रति हेक्टेयर के खरचा आवत है, जेकरे बदले सरकार 40 प्रतिशत के दर से ₹80,000 प्रति हेक्टेयर के अनुदान (छूट) दइ रही अअइ। ई सरकारी मदद न खाली किसानन पर शुरुआत के खरचा के बोझ कम करत है, बल्कि उनका नई खेती अपनावै बरे हौसला भी देइत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश मा किसानन के कमाई बढ़ावै अउर खेती का फायदेमन्द बनावै के दिशा मा मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई मा उद्यान विभाग कइयौ बढ़िया योजना चलाय रहा अअइ। इन्हीं कोशिश के नतीजा अअइ कि पुरान खेती से आगे बढ़िके किसान अब ज्यादा दाम वाली फसलन—जैसे स्ट्रॉबेरी—के ओर तेजी से खिंचे चले आवत अहैं अउर अपनी कमाई बढ़ा रहे अहैं।</p>



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<h3 class="wp-block-heading">मिर्जापुर के किसान जय सिंह ड्रैगन फ्रूट से लिखीन कामयाबी के नई कहानी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश मा किसानन के कमाई बढ़ावै अउर उनका नई खेती के ओर मोड़इ बरे कइयौ योजना अउर ट्रेनिंग कार्यक्रम चलाए जाइ रहे अहैं। इन्हीं कोशिश के एक बहुत नीक नतीजा मिर्जापुर जिला के किसान जय सिंह के कामयाबी के रूप मा सामने आवा अअइ, जउन पुरान खेती छोड़िके ड्रैगन फ्रूट के खेती अपनाइन अउर आज पूरे इलाका के किसानन बरे मिसाल बनि चुके अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मिर्जापुर जिला के नारायणपुर विकासखण्ड के ग्राम रानीपुर के रहइया जय सिंह एक सीधे-साधे किसान परिवार से अहैं। उनके लगे लगभग 2 हेक्टेयर खेती के जमीन अअइ, जेह पर ऊ पहिले पारंपरिक तरीका से धान, गेहूँ अउर आलू जइसन फसल उगावत रहे। पै इन फसलन से उनका सही मुनाफा नाहीं मिलि पावत रहा। बढ़ता खरचा, मौसम के मार अउर बाजार के भरोसा न होय के नाते उनके कमाई बहुत कम रहि जात रही, जेहसे परिवार के हालत मा कौनों खास सुधार नाहीं होय पावत रहा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">किसानन के भलाई करइ वाली प्रदेश सरकार के औद्यानिक खेती के तहत उद्यान विभाग के एक ट्रेनिंग कार्यक्रम के बारे मा उनका जानकारी मिली, जेमा श्री जय सिंह हिस्सा लइके ट्रेनिंग पूरा कीनिन। ट्रेनिंग मा उनका नई बागवानी अउर खास कइके &#8216;ड्रैगन फ्रूट&#8217; के खेती के बारे मा पूरी जानकारी दीन गई। हुवां उनका बतावा गवा कि ई फसल कम पानी मा भी बहुत बढ़िया पैदावार देइत है, एमा बीमारी बहुत कम लागत है अउर बाजार मा एकर मांग भी लगातार बढ़ि रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">शुरुआत मा किसान जय सिंह बरे ई एक नया अउर जोखिम भरा फैसला रहा, काहे से कि उनके इलाका मा पहिले कबहूँ केऊ ड्रैगन फ्रूट के खेती नाहीं करे रहा। फिर भी ऊ हिम्मत जुटाए अउर प्रयोग के तौर पर अपने खेत के एक छोटे हिस्से मा ड्रैगन फ्रूट के खेती शुरू कीनिन। ऊ उद्यान विभाग से जरूरी सलाह लीनिन अउर वैज्ञानिक तरीका से पेड़ लगाइन, सिंचाई कीनिन अउर देख-रेख कीनिन। धीरे-धीरे उनके मेहनत रंग लावै लागी। पेड़ बढ़िया से बढ़े अउर कुछ बखत के बाद फल देइ लागे। ड्रैगन फ्रूट के बाजार मा बहुत बढ़िया दाम मिलइ के नाते उनके कमाई मा बहुत बड़ा उछाल आवा। जहाँ पहिले पुरान खेती से बहुत कम कमाई होत रही, वहीं अब कम खरचा मा ज्यादा मुनाफा मिलइ लगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज जय सिंह अपने इलाका मा एक प्रगतिशील किसान के रूप मा जाने जात अहैं। उनके कामयाबी के कहानी ई साबित करत है कि सही जानकारी, ट्रेनिंग अउर हिम्मत के साथे कौनों भी किसान अपनी किस्मत बदलि सकत है। ड्रैगन फ्रूट के खेती से जय सिंह ई देखा दिहिन कि खेती मा नया तरीका अउर आधुनिकता अपनाके न खाली कमाई बढ़ाई जाइ सकत है, बल्कि गाँव के अर्थव्यवस्था का भी मजबूत कीन जाइ सकत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश मा बागवानी फसलन का बढ़ावा देइ बरे अउर किसानन के कमाई मा बड़ी बढ़ोत्तरी पक्की करइ बरे मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई मा राज्य सरकार लगातार नए-नए काम कइ रही अअइ। एही नाते उद्यान विभाग द्वारा ड्रैगन फ्रूट जइसन कीमती फसल का बढ़ावा देइ बरे बहुत बढ़िया अनुदान योजना चलाई जाइ रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ड्रैगन फ्रूट के खेती का बढ़ावा देइ बरे एक इकाई लगावै मा लगभग ₹6.75 लाख प्रति हेक्टेयर के खरचा आवत है, जेकरे बदले प्रदेश सरकार 40 प्रतिशत के हिसाब से ₹2.70 लाख प्रति हेक्टेयर के अनुदान दइ रही अअइ। ई रुपियन के मदद किसानन बरे बहुत बड़ी राहत साबित होय रही अअइ, जेहसे ऊ बिना कौनों पइसा के तंगी के नई अउर फायदेमन्द खेती के ओर आगे बढ़ि रहे अहैं।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211; प्रदीप कुमार, </strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>शिक्षा अउर उद्योग के मेल: अलीगढ़ के औद्योगिक तरक्की अउर आत्मनिर्भरता के नई कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 11:34:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[शिक्षा अउर उद्योग के संगम अलीगढ़ जिला के पहिचान हमेशा से ओकरे ऐतिहासिक गौरव, पढ़ाई-लिखाई के पुरान विरासत अउर दुनिया भर मा मशहूर ताला से रही अअइ, पै अब ई जिला अपनी पारंपरिक पहिचान का आज के औद्योगिक जरूरतन के साथे जोड़िके एक बहुत बड़े बदलाव के कगार पर खड़ा अअइ। उत्तर प्रदेश सरकार के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="has-text-align-center wp-block-paragraph"><strong><strong>शिक्षा अउर उद्योग के संगम</strong></strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">अलीगढ़ जिला के पहिचान हमेशा से ओकरे ऐतिहासिक गौरव, पढ़ाई-लिखाई के पुरान विरासत अउर दुनिया भर मा मशहूर ताला से रही अअइ, पै अब ई जिला अपनी पारंपरिक पहिचान का आज के औद्योगिक जरूरतन के साथे जोड़िके एक बहुत बड़े बदलाव के कगार पर खड़ा अअइ। उत्तर प्रदेश सरकार के जउन कोशिश अअइ—जउन यहाँ के धंधा के जरूरत के हिसाब से आईटीआई अउर पॉलिटेक्निक के पढ़ाई का नया रूप देइ रही अअइ—ऊ खाली एक सरकारी सुधार नाहीं अअइ। बल्कि ई &#8216;स्किल इंडिया&#8217; अउर &#8216;आत्मनिर्भर भारत&#8217; जइसन देस के सपनन का धरती पर उतारइ के एक बहुत मजबूत जरिया अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री के शिक्षा सलाहकार प्रो0 डी0पी0 सिंह के हाल के अलीगढ़ दौरा से ई सोच अउर साफ होय गई अअइ कि अब समय खाली किताबी ज्ञान से आगे बढ़िके हुनर अउर प्रैक्टिकल पढ़ाई का अपनावै के अअइ। ई पहल &#8216;एक जनपद, एक उत्पाद&#8217; (ODOP) योजना का सीधे पढ़ाई-लिखाई से जोड़त अअइ, जेहसे गाँव-घर के नौजवानन का अपनी ही धरती पर काम-धंधा अउर स्वरोजगार के बढ़िया मौके मिलि सकइँ। अलीगढ़ के मामले मा एकर जरूरत अउर ज्यादा अअइ, काहे से कि यहाँ के ताला अउर हार्डवेयर के धंधा खाली एक व्यापार नाहीं अअइ, बल्कि एक सांस्कृतिक विरासत अअइ। जेकर तकनीकी स्कूलन मा ताला बनावै, नई मशीनन के इस्तेमाल अउर सामान के क्वालिटी जाँचे जइसन बात पढ़ाई मा शामिल कीन जाइहैं, त ओसे पढ़ाई अउर उद्योग के बीच के उ दूरी खतम होय जाई, जेकरे नाते अक्सर डिग्री लेइ के बाद भी नौजवान बेरोजगार रहि जात रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आज के बखत मा जब जेवर एयरपोर्ट अउर डिफेंस कॉरिडोर जइसन बहुत बड़े प्रोजेक्ट्स पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आर्थिक सूरत बदलि रहे अहैं, तब हुनरमंद कारीगरन (स्किल्ड मैनपावर) के मांग भी बहुत तेजी से बढ़ी अअइ। सीमेंट उद्योग अउर नए-नए औद्योगिक इलाकन के जरूरत का ध्यान मा रखिके तैयार कीन गइन ट्रेड अउर हुनर वाले नए कोर्स ई पक्का करिहैं कि यहाँ के टैलेंट का बाहर भटकइ के बजाय गाँव-घर मा ही आदर के साथे रोजी-रोटी मिलि सकइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ई बड़ा बदलाव छात्रन का खाली नौकरी पाय के लायक नाहीं बनाई, बल्कि उनके भीतर खुद के व्यापार शुरू करइ के हौसला भी पैदा करी, जेहसे ऊ छोटे-छोटे स्टार्टअप अउर कारखाना खोलिके खुद &#8216;रोजगार दाता&#8217; बनि सकिहैं। एही योजना के सबसे बड़ी खूबी अअइ—पढ़ाई-लिखाई के जानकारों अउर व्यापार जगत के विशेसन के बीच बढ़िया तालमेल बनाउब, ताकि बखत-बखत पर पढ़ाई का बाजार के मांग के हिसाब से बदला जाय सकइ। जेडी माध्यमिक मनोज गिरी जइसन अधिकारिन के एही पहल का पूरा समर्थन देब ई पक्का करत है कि शासन अउर प्रशासन दोनों ही पढ़ाई का विकास अउर खुशहाली के आधार बनावै बरे पूरी तना तैयार अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पूरा देखल जाय त अलीगढ़ के ई &#8216;इंडस्ट्री-कनेक्ट&#8217; पढ़ाई के तरीका पूरे प्रदेश बरे एक आदर्श मॉडल बनि सकत अअइ। ई पहल ई साबित करत है कि जब पढ़ाई का गाँव-घर के जरूरत अउर संभावनन के साथे जोड़ा जात है, त ऊ खाली डिग्री देइ के जरिया नाहीं रहि जात, बल्कि समाज के आर्थिक अउर सामाजिक मजबूती के रीढ़ बनि जात है। शिक्षा, रोजगार अउर उद्योग के ई त्रिवेणी अलीगढ़ के नौजवानन के भविष्य का सँवारइ के साथे-साथे उत्तर प्रदेश के अर्थव्यवस्था का एक नई रफ्तार अउर नई ऊंचाई देइ के पूरी ताकत रखत अअइ।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>जनपद-अलीगढ़</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>अयोध्या मा पर्यटकों का लुभावै बरे ईको-टूरिज्म के कीन जाइ रहा विकास</title>
		<link>https://rahasyalok.com/%e0%a4%85%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%9f%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%81/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 11:33:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[आज के बढ़ते कल-कारखानन अउर पर्यावरण के बदलते चक्र से मनई अपनी जिंदगी जिए के तरीका मा बदलाव लाय के कइयौ गंभीर बीमारियन से छुटकारा पाय सकत है। भारतीय जीवनशैली मा प्रकृति के साथे तालमेल बइठाय के जिए के कला का सबसे बढ़िया माना गवा अअइ। एही मकसद का लेके ईको-पर्यटन के सोच बनाई गई, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">आज के बढ़ते कल-कारखानन अउर पर्यावरण के बदलते चक्र से मनई अपनी जिंदगी जिए के तरीका मा बदलाव लाय के कइयौ गंभीर बीमारियन से छुटकारा पाय सकत है। भारतीय जीवनशैली मा प्रकृति के साथे तालमेल बइठाय के जिए के कला का सबसे बढ़िया माना गवा अअइ। एही मकसद का लेके ईको-पर्यटन के सोच बनाई गई, जेकरे तहत ई बात तय कीन गई कि प्रकृति का कौनों नुकसान पहुँचाए बिना मनई एक आदर्श जिंदगी जी सकत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश मा ईको-टूरिज्म का बढ़ावा देइ बरे बढ़िया बुनियादी सुविधायन बनाई जाइ रही अहैं, ताकि पर्यटक सुघर अउर हरियाली वाले माहौल मा कुछ बखत बिताय के अपनी रोज के दिनचर्या मा बदलाव लाय सकइँ। राज्य सरकार ईको-टूरिज्म का बढ़ावा देइ बरे पर्यटकों बरे बढ़िया सुविधा बनावै के साथे-साथे उनके अनुभव का अउर नीक बनावै बरे 16 बड़ी योजनन के शुरुआत कीनिस अअइ। सैलानियों अउर प्रकृति प्रेमियों बरे लखनऊ से दुधवा राष्ट्रीय उद्यान के बीच 27 सितम्बर, 2024 से हवाई जहाज सेवा शुरू कीन गई, जउन पर्यटकों का बहुत कम बखत मा दुधवा पार्क घुमावै मा मदद कइ रही अअइ। भारी संख्या मा पर्यटक लखनऊ घूमे के बाद अब दुधवा के तरफ खिंचे चले आवत अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एही तना श्री राम नगरी अयोध्या मा पर्यटकों का लुभावै बरे ईको-टूरिज्म के विकास कीन जाइ रहा अअइ। अयोध्या मा दुनिया के स्तर के मन्दिर संग्रहालय के स्थापना कीन जाइ रही अअइ, ताकि अयोध्या आवइ वाले पर्यटक यहाँ के ऐतिहासिक धरोहर अउर गौरवशाली इतिहास से रूबरू होय सकइँ। एकरे अलावा अयोध्या शोध संस्थान का अंतरराष्ट्रीय रामायण अउर वैदिक शोध संस्थान के रूप मा अउर बड़ा बनावा जाइ रहा अअइ, जेहसे भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र, त्याग, बलिदान अउर मर्यादा का सुरक्षित रखिके आवइ वाली पीढ़ियन तक पहुँचावा जाय सकइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अब अयोध्या मा रामलला के दर्शन के साथे-साथे प्रकृति के हरियाली भी पर्यटकों का लुभाय रही अअइ। सहर के कुमारगंज इलाका मा स्थित वनस्पति उद्यान का ईको-टूरिज्म जगह के रूप मा विकसित करइ बरे एक बड़ी योजना तैयार कीन गई अअइ। एही योजना पर लगभग ₹2.5 करोड़ के खरचा आई, जउन वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट मा शामिल कीन गवा अअइ। ई विकास के काम पर्यटन विभाग द्वारा करवावा जाई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई मा उत्तर प्रदेश सरकार धरम-करम के साथे-साथे ईको-टूरिज्म का भी बढ़ावा दइ रही अअइ। अयोध्या खाली भगवान श्रीराम के नगरी के रूप मा ही नाहीं जानी जात, बल्कि अब एका प्रकृति प्रेमियों अउर पर्यावरण अनुरागियों बरे भी सुघर बनावै के कोशिश कीन जाइ रही अअइ। वनस्पति उद्यान का आधुनिक सुविधायन से सजावा जाई, ताकि यहाँ आवइ वाले पर्यटक प्रकृति के आनंद लेत भए एक खास अनुभव पाय सकइँ। एही योजना के तहत उद्यान मा एक मुख्य फाटक (प्रवेश द्वार) बनावा जाई अउर औद्यानिक क्षेत्र विकसित कइके अलग-अलग तरह के फूल, पेड़-पौध अउर ऐरोमेटिक (खुशबूदार) वनस्पतियों के संग्रह कीन जाई। ई योजना अयोध्या मा पर्यटन का एक नई दिशा देइ वाली साबित होई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भगवान श्रीराम के मन्दिर, सरयू नदी अउर दूसर धार्मिक जगह के साथे-साथे अब प्रकृति के ई सुघर बगीचा भी पर्यटकों का लुभाई। एही बगीचा मा बच्चन अउर प्रकृति प्रेमियों बरे खास &#8216;बटरफ्लाई गार्डन&#8217; (तितली पार्क) बनावा जाई, जहाँ रंग-बिरंगी तितलियाँ पर्यटकों के मन का मोह लिहइँ। साथै एक बढ़िया कैफेटेरिया के इंतजाम होई, जहाँ पर्यटक चाय-पानी अउर हल्का खाना खाय सकिहैं। टिकट काउंटर भी बनाया जाई ताकि भीतर जाइ के इंतजाम ठीक रहे। पर्यटकों के सुविधा बरे &#8216;वॉक-वे&#8217; (पइदल चलइ के रास्ता) बनावा जाई, जेह पर चलत भए बगीचा के हरियाली के मजा लीन जाइ सकइ। अलग-अलग जगह पर आराम करइ बरे विश्राम स्थल अउर गजेबीहट भी बनावा जाई, जहाँ बइठिके पर्यटक सुस्ताय सकिहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इन सब सुविधायन से ई उद्यान न खाली देखइ लायक बनी, बल्कि आवइ वाले लोगन, स्कूल के बच्चन, प्रकृति प्रेमियों अउर विदेशी पर्यटकों बरे एक बहुत बढ़िया जगह साबित होई। ईको-टूरिज्म मा रोजगार अउर कमाई के बहुत बड़े मौके अहैं। एही उद्यान से स्थानीय स्तर पर नौकरी अउर धंधा के मौके बढ़िहैं अउर अयोध्या के अर्थव्यवस्था का मजबूती मिली। मा0 मुख्यमंत्री जी के कोशिश से अयोध्या नगरी धीरे-धीरे धार्मिक, सांस्कृतिक अउर पर्यावरणीय पर्यटन के केंद्र बनत जाइ रही अअइ। वनस्पति उद्यान के विकास पूरा होय के बाद यहाँ साल भर पर्यटकों के आवइ-जाइ के उम्मीद अअइ। ई योजना खाली प्रकृति के बचाव के प्रतीक नाहीं अअइ, बल्कि हमेशा चलइ वाले पर्यटन के मामले मा एक मॉडल के रूप मा विकसित होई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एही तना प्रदेश के पक्षी अभ्यारण्यों, वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी, कतर्निया घाट अउर चूका बीच, पीलीभीत जइसन जगह पर पर्यटकों का खींचइ बरे आवइ-जाइ के बढ़िया सुविधा बनाई जाइ रही अअइ। मा0 मुख्यमंत्री योगी जी के मार्गदर्शन मा 2017 के बाद उत्तर प्रदेश पर्यटन एक नया रूप लेइ रहा अअइ। हर जिला मा कौनों न कौनों पर्यटन विकास के योजना चलि रही अअइ। कानून व्यवस्था अउर सड़क-हवाई सेवा (कनेक्टिविटी) नीक होय से उत्तर प्रदेश मा पर्यटकों के आवइ-जाइ लगातार बढ़ि रहा अअइ। धार्मिक सर्किट अउर बौद्धिष्ट सर्किट के तहत आवइ वाले पर्यटन स्थलों का नए सिरे से सजावा व सँवारा जाइ रहा अअइ। साथे-साथे ईको-पर्यटन के संभावनन का खोजत भए सैलानियों बरे हरियाली वाला सुघर माहौल तैयार कीन जाइ रहा अअइ।</p>



<h3 class="wp-block-heading">प्रदेश मा ईको-टूरिज्म से अर्थव्यवस्था का मिलिही मजबूती</h3>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम अउर श्री कृष्ण के लीला भूमि होय के साथै काशी, मथुरा, वृन्दावन, बरसाना, प्रयागराज, अयोध्या अउर कुशीनगर जइसन अंतरराष्ट्रीय जगह बरे पूरी दुनिया मा प्रसिद्ध अअइ। एकरे अलावा यहाँ प्राकृतिक सम्पदा, सुघर जगह अउर नदी-झरना के भरमार अअइ। उत्तर प्रदेश अब प्रकृति अउर पर्यावरण के बचाव के साथे पर्यटन विकास के एक नया अध्याय लिखि रहा अअइ। नदी, झरना, पहाड़, पक्षी विहार अउर दुर्लभ वन्यजीवों से घिरा उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म के उभरता हुआ केंद्र बनत जाइ रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राज्य सरकार ईको-टूरिज्म का बढ़ावा देइ बरे &#8216;ईको-टूरिज्म बोर्ड&#8217; के गठन कीनिस अअइ। एकरे तहत लगभग 27 विभागन का जोड़िके अलग-अलग काम करइ के फैसला कीन गवा। बोर्ड के बनइ के बाद उत्तर प्रदेश के प्राकृतिक पर्यटन के नक्शा तेजी से बदलत जाइ रहा अअइ। तीन सालन मा दर्जनों नई जगह विकसित कीन गई अहैं। जहाँ पहिले पर्यटक खाली चुनिंदा जगह तक सीमित रहत रहे, अब ऊ नई-नई जगह सैलानियों के पसंद बनत जाइ रही अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ईको-टूरिज्म का मशहूर बनावै बरे पर्यटन विभाग पिछले चार सालन मा ₹245 करोड़ से ज्यादा के रुपिया खरच कीनिस अअइ। एही रुपियन से पर्यटकों बरे सुविधा बनाई जाइ रही अअइ, अउर साथे-साथे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नवा मौके भी पैदा होय रहे अहैं। सुविधा बढ़इ से पर्यटकों के संख्या लगातार बढ़ि रही अअइ। सूर सरोवर पक्षी विहार आगरा, रपड़ी टूरिज्म फिरोजाबाद अउर हाथी नाला बायोडायवर्सिटी पार्क सोनभद्र एकरे कुछ बड़े उदाहरण अअइ। ईको पर्यटन के चलन पूरी दुनिया मा बढ़ि रहा अअइ अउर पर्यटक नवा-नवा जगह खोजत अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पहिले जहाँ पर्यटक खाली लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच, सोनभद्र अउर मिर्जापुर तक सीमित रहे, वहीं अब रायबरेली, महाराजगंज, मुजफ्फरनगर, बलिया, कुशीनगर, ललितपुर, प्रयागराज, बांदा, लखनऊ, सहारनपुर अउर गोरखपुर जइसन जिला मा भी जाइके प्राकृतिक दृश्यों के मजा लइ रहे अहैं। एका ध्यान मा रखत भए ईको पर्यटन के नई योजनन के शुरुआत कीन गई अअइ, जेहसे पर्यटकों के संख्या मा बहुत बड़ी बढ़ोत्तरी भई अअइ। दुधवा टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म के सबसे बड़ा आकर्षण बनके उभरा अअइ। एही रिजर्व मा दुर्लभ जंगली जानवर अउर कइयौ तरह के चिरई पर्यटकों का लुभावत अहैं। एही तना पीलीभीत, अमानगढ़ अउर रानीपुर टाइगर रिजर्व पर्यटकों बरे आकर्षण के केंद्र बनत जाइ रहे अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पर्यटकों के सुविधा बरे प्रदेश सरकार नीक से सीखे हुए &#8216;नेचर गाइड&#8217; के एक बड़ी टीम तैयार कीनिस अअइ। ई गाइड पर्यटकों का पूरी जानकारी देत अहैं। गाँव के नौजवानन का गाइड, कैंटीन कर्मी, कुक अउर मेंटेनेंस कर्मी के रूप मा ट्रेनिंग दइके काम-धंधा से जोड़ा गवा अअइ। थारू जनजाति के लोगन द्वारा बनाया गवा खाना पर्यटकों का बहुत पसंद आइ रहा अअइ। दुधवा क्षेत्र मा गाँव के लोगन का &#8216;होम-स्टे&#8217; बनावै बरे बढ़ावा दीन जाइ रहा अअइ, ताकि पर्यटक गाँव के जिंदगी, संस्कृति अउर खान-पान के मजा लइ सकइँ। एसे गाँव के अर्थव्यवस्था का मजबूती मिलि रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दुधवा, कतर्नियाघाट अउर किशनपुर अभ्यारण्यों का जोड़इ वाली &#8216;विस्टाडोम ट्रेन&#8217; सेवा उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज्म के एक नई पहिचान बनके उभरी अअइ। ईको टूरिज्म बोर्ड नौजवानन का प्रकृति बचाव अउर ईको टूरिज्म के मुख्य धारा मा लाय रहा अअइ। नवाबगंज (उन्नाव) अउर लाख बहोसी (कन्नौज) पक्षी विहार मा विद्यार्थियन बरे पढ़ाई-लिखाई से जुड़े कार्यक्रम चलाए जाइ रहे अहैं। एकरे अलावा सोनभद्र जिला मा स्थित सलखन जीवाश्म पार्क (फॉसिल पार्क) पूरे भारत बरे एक आकर्षण के केंद्र बनत जाइ रहा अअइ। यहाँ बनी भू-आकृति लगभग 1.4 अरब साल पुरानी अअइ, जउन धरती पर जिंदगी के शुरुआती झलक देखावत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के बढ़िया अगुवाई मा उत्तर प्रदेश के ईको-टूरिज्म मॉडल के सबसे बड़ी ताकत ई अअइ कि ई खाली पर्यटन नाहीं अअइ, बल्कि गाँव-समाज के विकास, रोजगार, शिक्षा अउर पर्यावरण के बचाव का एक साथे जोड़त है। उत्तर प्रदेश आज धार्मिक पर्यटन से प्राकृतिक पर्यटन के ओर तेजी से आगे बढ़ि रहा अअइ। ईको-टूरिज्म बोर्ड के कोशिश से ई राज्य न खाली भारत के, बल्कि पूरी दुनिया के एक प्रमुख नेचर टूरिज्म डेस्टिनेशन (प्राकृतिक पर्यटन स्थल) बनइ के ओर आगे बढ़ि रहा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ईको-पर्यटन एक उभरता हुआ क्षेत्र अअइ, जेमा रोजगार के बहुत मौके अहैं। एक पर्यटक 6 लोगन का काम-धंधा मुहैया करावत है, एसे टूर ऑपरेटर, टैक्सी, गाइड, होटल-रेस्टोरेंट अउर स्थानीय बाजार का काम मिलत है। पर्यटन विभाग पूरे प्रदेश मा धार्मिक अउर आस्था से जुड़े जगह पर बुनियादी सुविधायन उपलब्ध कराय रहा अअइ। साल 2016 के बाद उत्तर प्रदेश मा आए बदलाव से पर्यटकों के संख्या लगातार बढ़ि रही अअइ। पर्यटन अब प्रदेश के अर्थव्यवस्था का अउर तेज बनावै मा महत्वपूर्ण योगदान दइ रहा अअइ। ऊ दिन अब दूर नाहीं अअइ जब पर्यटन विभाग प्रदेश का 1 ट्रिलियन डॉलर के अर्थव्यवस्था बनावै मा सबसे बड़ी भूमिका निभाई।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211; केवल, से0नि0 सूचना अधिकारी</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>धार्मिक पर्यटन अउर विकास के नवा इतिहास लिखत मैनपुरी: सरकारी योजनन से बदली विरासत के सूरत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 11:28:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[मैनपुरी जिला बरिसन से धार्मिक आस्था, पुरान परंपरा अउर सांस्कृतिक विरासत के केंद्र रहा अअइ, पै पिछले कुछ सालन मा उत्तर प्रदेश सरकार के बढ़िया योजनन अउर रुपियन के खरचा से ई ऐतिहासिक धरती का दुनिया के पर्यटन नक्शा मा खड़ा कइ दीन गवा अअइ। 17 अप्रैल 2026 तक के तरक्की के रिपोर्ट देखी जाय &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">मैनपुरी जिला बरिसन से धार्मिक आस्था, पुरान परंपरा अउर सांस्कृतिक विरासत के केंद्र रहा अअइ, पै पिछले कुछ सालन मा उत्तर प्रदेश सरकार के बढ़िया योजनन अउर रुपियन के खरचा से ई ऐतिहासिक धरती का दुनिया के पर्यटन नक्शा मा खड़ा कइ दीन गवा अअइ। 17 अप्रैल 2026 तक के तरक्की के रिपोर्ट देखी जाय त साफ जाहिर होत है कि जिला प्रशासन अउर पर्यटन विभाग के मिलि-जुली कोशिश से यहाँ के मन्दिरन, आश्रमन अउर तीरथ के खाली कायाकल्पे नाहीं भवा अअइ, बल्कि यहाँ के कमाई के जरिया अउर व्यापार का भी एक नई रफ्तार मिली अअइ। पर्यटन विकास के ई सफर वित्तीय वर्ष 2020-21 मा शुरू भवा रहा, जब लगभग ₹46 लाख के शुरुआती खरचा से लालपुरी मन्दिर महाराज मेला स्थल, खप्पर वाले बाबा सेवा आश्रम अउर मार्कण्डेय ऋषि आश्रम के विकास कीन गवा। ई भले ही एक छोटी शुरुआत रही, पै एका देखिके गाँव के लोगन मा साफ-सफाई अउर सुघराई के प्रति एक नया भरोसा जागा। एकरे ठीक बाद वित्तीय वर्ष 2021-22 मा भाईचारा अउर समरसता के एक बहुत बढ़िया मिसाल पेश करत भए ₹48.84 लाख के लागत से करीमगंज मा स्थित मन्दिर अउर खान बाबा के मज़ार का एक साथे सँवारा गवा, जेहसे समाज मा एकता के संदेस पहुँचा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विकास के ई पहिया वित्तीय वर्ष 2022-23 मा अउर तेजी से घूमा, जब सरकार ₹1181.91 लाख के बहुत बड़ा बजट दइके रामलीला मैदान, मार्कण्डेय मन्दिर विधूना, ऋषि आश्रम औंछा अउर मयन ऋषि आश्रम के पूरा हुलिया बदलि दिहिस। इन सब कामन मा खाली मन्दिरन के देवारिन का नाहीं चमकावा गवा, बल्कि आवइ वाले लोगन बरे बइठइ के बढ़िया इंतजाम, आधुनिक लाइट, शौचालय अउर गाड़ी खड़ी करइ के पार्किंग जइसन जरूरी सुविधा बढ़ाई गईं, जेहसे रामलीला मैदान जइसन जगह पर यहाँ के कलाकारन का एक बहुत बड़ा मंच मिला। आधुनिकता अउर विस्तार के एही काम का आगे बढ़ावत भए वित्तीय वर्ष 2024-25 मा ₹1984 लाख खरच कीन गइन, जेकरे तहत ग्राम सहन मा थिमेटिक गेट बनावा गवा अउर शनिदेव मन्दिर, सत्य कैलाश आश्रम नौरंगपुर, तुलसीदास मन्दिर अड्डूपुर अउर पुरान घंटाघर जइसन जगह का नया अउर सुंदर रूप दीन गवा। करहल रामलीला मैदान का मजबूत करब अउर ओकर बाउंड्रीवॉल (घेराबांदी) बनइ से इन सांस्कृतिक धरोहरन का सुरक्षित अउर भव्य बनाय दीन गवा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जिला मा पर्यटन के सबसे बड़ी छलांग वित्तीय वर्ष 2025-26 मा देखे का मिली, जहाँ ₹3838.32 लाख के बहुत बड़े बजट से बजरंगबली हनुमान मन्दिर खिरना खुर्द, नरसिंहधाम मंछना, वनखण्ड़ेश्वर आश्रम घिरोर अउर सती माता मन्दिर दौलतपुर समेत कइयौ जगह के कायाकल्प कीन गवा। इन सब कामन मा &#8216;स्मार्ट टूरिज्म&#8217; के तरीका अपनावत भए सड़कन का सुधारा गवा अअइ अउर बढ़िया लाइटिंग व साफ-सफाई पर खास ध्यान दीन गवा अअइ। संस्कृति विभाग के तरफ से लगभग ₹24 करोड़ 61 लाख के खरचा से प्रेक्षागृह अउर बहुउद्देशीय हॉल (मल्टीपर्पज हॉल) बनावै के काम भी चलि रहा अअइ, जउन मैनपुरी के सांस्कृतिक काम-काज का एक नया रूप देइ। एकरे अलावा, पर्यटन विभाग द्वारा आवास विकास क्षेत्र मा बहुउद्देशीय हॉल अउर ₹812.90 लाख के दूसर विकास योजनन का मंजूरी दीन गई अअइ, जेहसे सहर अउर गाँव के बीच के अंतर कम होई। सरकार खाली धरम-करम के जगह नाहीं, बल्कि ईको-टूरिज्म (प्राकृतिक पर्यटन) का बढ़ावा देइ बरे भी ₹481.17 लाख के इंतजाम कीनिस अअइ, जेहसे मैनपुरी का सुघर हरियाली अउर प्राकृतिक पर्यटन के क्षेत्र मा भी एक नई पहिचान मिली। सरकार के इन सब बढ़िया योजनन के नीक से चले के नाते न खाली जिला के लोगन मा अपनी विरासत पर घमंड बढ़ा अअइ, बल्कि फूल-माला बेचइ वालन से लेके गाँव के छोटे-बड़े दुकानदारन के कमाई मा भी बहुत बड़ा सुधार आवा अअइ, जउन मैनपुरी का विकास अउर सांस्कृतिक संपन्नता के एक नया रोल मॉडल बनावत अअइ।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>जनपद-मैनपुरी</strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>आंगनवाड़ी पोषण क्रांति: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगुवाई मा सुधरत अहै नौनिहालन के सेहत</title>
		<link>https://rahasyalok.com/%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8b%e0%a4%b7%e0%a4%a3-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%ae/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 11:27:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगुवाई मा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलावल जाइ रही &#8216;सक्षम आंगनवाड़ी अउर पोषण 2.0 योजना&#8217; प्रदेश के नौनिहालन के पूरा विकास बरे एक बहुत बड़ी अउर काम के पहल साबित भई अहै। ई योजना के मकसद खाली बच्चन का खाना खवाउब नाहीं अहै, बल्कि उनका कुपोषण से बचाके तन्दुरुस्त, &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगुवाई मा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चलावल जाइ रही &#8216;सक्षम आंगनवाड़ी अउर पोषण 2.0 योजना&#8217; प्रदेश के नौनिहालन के पूरा विकास बरे एक बहुत बड़ी अउर काम के पहल साबित भई अहै। ई योजना के मकसद खाली बच्चन का खाना खवाउब नाहीं अहै, बल्कि उनका कुपोषण से बचाके तन्दुरुस्त, हुनरमंद अउर पढ़ल-लिखल नागरिक बनाउब अहै। खास कइके 3 से 6 साल के बच्चन बरे आंगनवाड़ी केंद्रन मा गरम, ताजा अउर पौष्टिक खाना देइ के इंतजाम ई योजना के सबसे बड़ी खूबी अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ई कोशिश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के मकसद अउर भारत सरकार के &#8216;प्रधानमन्त्री पोषण शक्ति निर्माण योजना&#8217; (पीएम पोषण) के नियमन के मुताबिक अअइ। केंद्र सरकार द्वारा प्री-प्राइमरी स्तर के बच्चन का भी पोषण योजना मा जोड़े के फैसला के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार एका नीक से लागू कइके आंगनवाड़ी केंद्रन तक बढ़ाएस अअइ। प्रदेश सरकार 12 अक्टूबर 2023 से प्रदेश मा ई व्यवस्था का मजबूती से लागू कीनिस अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">24 नवंबर 2023 का अयोध्या से प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ई योजना के शुरुआत कीनिन, जउन बाल पोषण के क्षेत्र मा एक नई दिशा दिहिस। आज के बखत मा प्रदेश के लगभग 1.90 लाख आंगनवाड़ी केंद्रन पर ई योजना बहुत बढ़िया से चलि रही अअइ, जेहसे लाखन बच्चन का हर दिन फायदा मिलि रहा अअइ। ई पहल न खाली पोषण के सुरक्षा पक्की कइ रही अअइ, बल्कि समाज मा सबको साथे लइके चलइ के भाव भी बढ़ा रही अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एही योजना के नीक असर अब साफ-साफ दिखाई दइ रहा अअइ। बच्चन का हर दिन प्रोटीन अउर कैलोरी वाला संतुलित खाना मिलइ से उनके शारीरिक विकास मा बड़ा सुधार भवा अअइ। कुपोषण के स्तर मा कमी आई अअइ, अउर एनीमिया (खून के कमी) जइसन बीमारी मा भी गिरावट दर्ज कीन गई अअइ। बच्चन के वजन अउर लंबाई सुधरइ के साथ-साथ उनके बीमारी से लड़इ के ताकत भी बढ़ी अअइ, जउन उनके सुनहरे भविष्य के नेव का मजबूत करत अअइ। पढ़ाई के क्षेत्र मा भी ई योजना के असर बहुत बढ़िया अअइ। आंगनवाड़ी केंद्रन मा बच्चन के नाम लिखवावै अउर उनके आवे मा बढ़ोत्तरी भई अअइ। जब बच्चन का ताजा अउर नीक खाना मिलत है, त ऊ रोज केंद्र मा आवत हैं, जेहसे उनके शुरुआती पढ़ाई मजबूत होत है अउर स्कूल जाइ के आदत बनत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश मा ई योजना का नीक से चलावै बरे एक मजबूत अउर व्यावहारिक मॉडल अपनावा गवा अअइ। बाल विकास सेवा अउर पुष्टाहार विभाग, शिक्षा विभाग अउर पंचायती राज संस्था के बीच बहुत बढ़िया तालमेल बनावा गवा अअइ। जउन आंगनवाड़ी केंद्र प्राथमिक स्कूल से 200 मीटर के भीतर अहैं, हुवां स्कूल के रसोई के इस्तेमाल कइके खाना बनावा जात है अउर आंगनवाड़ी सहायिका बच्चन तक पहुँचावत अहैं। वहीं, दूर वाले केंद्रन मा सहायिका खुदै खाना तैयार करत अहैं। खाना के क्वालिटी अउर वैरायटी पक्की करइ बरे हफ्ता के हिसाब से मेनू तय कीन गवा अअइ, जेमा दाल-चावल, रोटी-सब्जी, तहरी अउर खिचड़ी जइसन पौष्टिक खाना शामिल अअइ। ई बच्चन का संतुलित आहार त देत ही अअइ, साथे उनके पसंद अउर रुचि के भी ध्यान रखत है। एकरे साथै खाना बनावै वाले रसोइयन का अलग से प्रोत्साहन के रुपिया दइके उनके काम के सम्मान कीन गवा अअइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई मा चलि रही ई योजना उत्तर प्रदेश के बच्चन के बढ़िया भविष्य के आधारशिला रखि रही अअइ। ई पहल खाली पोषण सुधारइ के जरिया नाहीं अअइ, बल्कि एक मजबूत, तन्दुरुस्त अउर पढ़ल-लिखल समाज बनावै के दिशा मा एक बहुत बड़ा कदम अअइ।</p>



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<h3 class="wp-block-heading">सेवा, समर्पण अउर बदलाव के मिसाल बना आंगनवाड़ी केंद्र</h3>



<p class="wp-block-paragraph">जनपद मिर्जापुर के गाँव चांदलेवा कला के आंगनवाड़ी केंद्र आज उ सच्चे जज्बा के नाम बन चुका अअइ, जउन बिना कौनों दिखावा के समाज मा बड़ा बदलाव लाए अअइ। ई केंद्र के बच्चन के सेहत अउर पोषण मा बड़ा सुधार आवा अअइ अउर पूरे गाँव मा जागरूकता के एक मजबूत नेव खड़ी भई अअइ। 1185 के आबादी वाले एही गाँव मा ई आंगनवाड़ी केंद्र विभागीय भवन मा चलत अअइ। एही केंद्र पर 0 से 06 महीना के 09 शिशु, 07 महीना से 03 साल के 36 बच्चे, 03 से 06 साल के 47 बच्चे, 06 गर्भवती मेहरारू अउर 09 धात्री (दूध पियावै वाली) माता पंजीकृत अहैं, जेकर देख-रेख अउर सही रास्ता देखावै के जिम्मेदारी आंगनवाड़ी कार्यकत्री पूरी लगन से निभाय रही अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश सरकार के जनकल्याण कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी कार्यकत्री रोजे घर-घर जाके मिलत अहैं, हर परिवार से बातचीत करत अहैं अउर माता का बच्चन के सही पोषण, सही बखत पर टीका लगवावै, साफ-सफाई अउर सेहत से जुड़ी जरूरी बातें बतावत अहैं। गर्भवती मेहरारू का खास तौर पर संतुलित खाना, बच्चा पैदा होय के पहिले के तैयारी अउर मानसिक सेहत बरे जागरूक कीन जात है, अउर बच्चा पैदा होय के एक घंटा के भीतर ही माँ के दूध पियावै पर जोर दीन जात है, जेहसे नवजात का जिंदगी के सबसे पहिली अउर जरूरी सुरक्षा मिलि सकइ।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ग्राम चांदलेवा कला आंगनवाड़ी केंद्र पर पंजीकृत गंभीर कुपोषित (SAM) बच्चन का लगातार देख-रेख, सही खाना अउर परिवार का सही सलाह दइके सामान्य श्रेणी मा लावा गवा अअइ। अब गाँव मा ई समझ आ गई अअइ कि 0 से 06 महीना तक के बच्चन का खाली माँ के दूध ही दीन जाय अउर 06 महीना के बाद उनका पौष्टिक खाना दीन जाय। एही बदलाव से बच्चन के सेहत मा बहुत बड़ा सुधार भवा अअइ अउर कुपोषण के दर घटी अअइ। आंगनवाड़ी केंद्र से सेहत, पोषण अउर सफाई के संदेस पूरे गाँव मा फइलि रहा अअइ। बच्चन के पूरा विकास होय रहा अअइ अउर परिवारन मा सेहत के प्रति एक नीक सोच बन रही अअइ।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211; लाल कमल</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>शाहजहाँपुर मा स्वास्थ्य क्रांति: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगुवाई मा मजबूत भई चिकित्सा व्यवस्था अउर खुशहाल भइन नागरिक</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 11:21:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[लेख (चिकित्सा अउर स्वास्थ्य विभाग) शाहजहाँपुर जिला मा स्वास्थ्य सेवा का मजबूत अउर आम जनता बरे आसान बनावै के संकल्प के साथे उत्तर प्रदेश सरकार साल 2025-26 के दौरान तरक्की के एक नई कहानी लिखी अहै। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘सर्वे सन्तु निरामयाः’ (सबै निरोगी रहइँ) के सोच का सच करत भए जिला के चिकित्सा &#8230;]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph"><strong>लेख</strong> (<strong>चिकित्सा अउर स्वास्थ्य विभाग</strong>)</p>



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<p class="wp-block-paragraph">शाहजहाँपुर जिला मा स्वास्थ्य सेवा का मजबूत अउर आम जनता बरे आसान बनावै के संकल्प के साथे उत्तर प्रदेश सरकार साल 2025-26 के दौरान तरक्की के एक नई कहानी लिखी अहै। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘सर्वे सन्तु निरामयाः’ (सबै निरोगी रहइँ) के सोच का सच करत भए जिला के चिकित्सा विभाग नई तकनीक अउर सेवा भाव के तालमेल से सरकारी अस्पतालन के कायाकल्प कइ दिहिस अहै। तरक्की वाली एही सोच के नतीजा अहै कि आज शाहजहाँपुर के सुदूर गाँव-गिरावं से लेके सहरन तक बढ़िया स्वास्थ्य सेवा लोगन के घर के लगे पहुँचि रही अहैं। साल 2019 मा संयुक्त जिला अस्पताल के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) से जुड़ब जिला बरे एक मील के पत्थर साबित भवा रहा। एकरे बाद से अस्पताल के साधन अउर इलाज के क्वालिटी मा जउन बड़ा सुधार आवा अहै, ऊ आज आँकड़न मा साफ-साफ दिखाई पड़त अहै। साल 2025-26 के आँकड़े बतावत अहैं कि जिला मा इलाज के दायरा इतनी तेजी से बढ़ा अहै कि कुल ओपीडी (OPD) सेवा के माध्यम से लाखन लोगन का नया जीवन मिला अहै। हुवां हर दिन लगभग 44,000 से 45,000 मरीजन के इलाज कीन जाब स्वास्थ्य विभाग के बढ़ती ताकत के जीती-जागती मिसाल अहै। एही तना, आईपीडी (IPD) सेवा के तहत 45,622 गंभीर मरीजन का भर्ती कइके नया जीवन दीन गवा, जेमा हर दिन लगभग 3,800 मरीजन के खास देख-रेख पक्की कीन गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार के मंशा के मुताबिक जाँच सेवा का इतना साफ-सुथरा अउर आसान बनाय दीन गवा अहै कि गरीब से गरीब मनई का भी अब निजी पैथोलॉजी के चक्कर नाहीं काटे का पड़त। जिला मा रिकॉर्ड 37,39,768 पैथोलॉजी जाँच पूरा होयब सरकार के सक्रियता का देखावत है, जहाँ हर दिन 3 लाख से ज्यादा जाँच मुफ्त या बहुत कम दाम पर कीन जाइ रही अहैं। एकरे अलावा, गंभीर बीमारियन के पहिचान बरे 1,14,665 एक्स-रे, 20,711 अल्ट्रासाउंड अउर 13,069 सीटी स्कैन जइसन आधुनिक सुविधायन शाहजहाँपुर का एक मेडिकल हब के रूप मा खड़ा कइ दिहिस अहै। खास कइके डायलिसिस के सुविधा गुर्दा के मरीजन बरे वरदान साबित भई अहै, जेकरे तहत 2,460 सत्र (सिटिंग) के माध्यम से जरूरतमंद लोगन का बड़ी राहत पहुँचाई गई। प्रदेश सरकार के जननी सुरक्षा योजना अउर महतारी-शिशु कल्याण कार्यक्रम जिला के सेहत के स्थिति मा क्रांतिकारी सुधार कीनिन अहैं। गाँव-गिरावं मा अस्पताल मा बच्चा पैदा करावै का बढ़ावा देइ बरे सरकार के तरफ से ₹1,400 अउर सहरन मा ₹1,000 के मदद सीधे महतारी के बैंक खाता मा ऑनलाइन भेजी जाइ रही अहै, जेहसे बच्चा जनत बखत महतारी के होय वाली मौत मा बड़ी कमी आई अहै। नवजात बच्चन के सेहत पर संवेदनशीलता देखावत भए एसएनसीयू (SNCU) विभाग मा 1,877 नवजात बच्चन के सफल इलाज कीन गवा, वहीं बाल स्वास्थ्य सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 6,638 बच्चन का बढ़िया पौष्टिक खाना अउर देख-रेख उपलब्ध कराई गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आयुष तरीका का मुख्यधारा से जोड़त भए जिला मा चलि रहे आयुष विंग के माध्यम से होम्योपैथिक, आयुर्वेदिक अउर यूनानी इलाज द्वारा भी 6,200 मरीजन के इलाज कीन गवा, जउन सरकार के समग्र स्वास्थ्य नीति का देखावत है। साथहीं, योग के माध्यम से आम जनता का सेहतमंद जिंदगी जिए बरे जागरूक कीन जाइ रहा अहै। परिवार नियोजन के क्षेत्र मा भी जिला बहुत बढ़िया काम करत भए 4,072 परिवारन का जागरूक कइके अपनी सेवा से जोड़े अहै। स्वास्थ्य सुविधायन के एही मजबूती के पीछे अस्पतालन के तेजी से होत डिजिटलीकरण, नई मशीनन के स्थापना अउर स्टाफ के लगातार ट्रेनिंग जइसन प्रदेश सरकार के कड़े कदम अहैं। दूर-दराज के इलाकन मा लगाए गए स्वास्थ्य शिविरों (कैंप) ई पक्का कीनिन अहैं कि तरक्की के फायदा खाली सहरन तक सीमित न रहिके समाज के आखिरी पायदान पर खड़े मनई तक पहुँचे। साफ-सफाई, पोषण अउर पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता अउर सरकार के पक्का इरादा शाहजहाँपुर का प्रदेश के स्वास्थ्य नक्शा मा एक आदर्श जिला के रूप मा गौरवान्वित कीन अहै।</p>



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]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रदेश सरकार के नीक इंतजाम से संचारी रोग पर लाग लगाम</title>
		<link>https://rahasyalok.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%95-%e0%a4%87%e0%a4%82%e0%a4%a4%e0%a4%9c%e0%a4%be/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 11:19:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[लेख (चिकित्सा अउर स्वास्थ्य विभाग) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के बढ़िया अगुवाई अउर नीक इंतजाम के ही नतीजा अहै कि प्रदेश के पूर्वांचल के जिला मा पिछले चार-पांच दशक से बच्चन मा फइली जानलेवा जापानी बुखार अउर दिमागी बुखार जइसन संचारी रोग पर पूरी तना लगाम लगाय लीन गवा अहै। प्रदेश के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph"><strong>लेख</strong> (<strong>चिकित्सा अउर स्वास्थ्य विभाग</strong>)</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के बढ़िया अगुवाई अउर नीक इंतजाम के ही नतीजा अहै कि प्रदेश के पूर्वांचल के जिला मा पिछले चार-पांच दशक से बच्चन मा फइली जानलेवा जापानी बुखार अउर दिमागी बुखार जइसन संचारी रोग पर पूरी तना लगाम लगाय लीन गवा अहै। प्रदेश के पूरब वाले जिला मा ई संचारी रोग बरिसन से आम जनता के सेहत का खराब करत रहा अहै। ई बीमारी खास कइके 15 साल से कम उमिर के बच्चन का अपना शिकार बनावत रही। एही बीमारी के नाते हर साल सैकड़न बच्चन के जान चली जात रही। पै प्रदेश मा साल 2017 मा सरकार बनइ के बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी लगातार जनता का साथे लइके साफ-सफाई, टीका लगावइ, जांच कइके मुफ्त दवा बांटइ अउर बढ़िया अस्पताल के इंतजाम कीनिन, जेहसे दिमागी बुखार पर तगड़ी रोक लागि गई। प्रदेश सरकार संचारी रोग नियंत्रण अउर दस्तक अभियान लगातार चलाय के समाज के आखिरी मनई तक ई संदेस पहुँचाएस अउर बीमारी से बचाव के तरीका बताय के एका काबू मा कइ दिहिस।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश मा संचारी रोगन का रोकइ बरे कइयौ विभागन का साथे मिलाय के अउर जनता के सहयोग से चलाय जाइ रहा ई अभियान आज एक अइसन मजबूत मॉडल बन चुका अहै, जेकर चर्चा अपने देस मा त अहै ही, विदेशन मा भी होय रही अहै। एही अंतर्विभागीय समन्वय मा स्वास्थ्य अउर चिकित्सा के साथे-साथे बेसिक शिक्षा, महिला अउर बाल कल्याण, पुष्टाहार, नगर विकास, कृषि, पशुपालन, उद्यान, जल निगम, दिव्यांगजन सशक्तीकरण अउर चिकित्सा शिक्षा विभाग शामिल अहैं। संचारी रोग नियंत्रण अउर दस्तक अभियान मा कुल 12 विभाग एक साथ मिलिके काम करत अहैं। एमा महिला अउर बाल विकास विभाग कमजोर अउर कुपोषित बच्चन का पहिचान कइके उनका पोषाहार देत है। गाँव के विकास बरे ग्राम्य विकास अउर पंचायती राज विभाग गाँव-गाँव मा नाली के सफाई, पानी के निकास, नियमित सफाई अउर मच्छर मारइ के दवा के छिड़काव व फागिंग करवावत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नगर विकास विभाग सहरन के गली-मुहल्लों के सफाई, खुली नालियन का ढकइ, कूड़ा उठवावै, दवा के छिड़काव अउर फागिंग के काम करत है। उथले हैंडपम्पों का चिन्हित कइके उनके पानी पिए से रोकत है। कृषि विभाग किसानन का सिंचाई के नवा तरीका बतावत है, उद्यान विभाग मच्छर भगावै वाले पेड़-पौध लगावइ बरे कहत है, अउर पशुपालन विभाग सुअरन के बाड़ों का आबादी से दूर रखवावत है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग एईएस (AES) अउर जेई (JE) बीमारी के बाद जउन बच्चे दिव्यांग होय गइन, उनका खोजिके इलाज करवावत है अउर जरूरी सामान दिवावत है। चिकित्सा अउर चिकित्सा शिक्षा विभाग जांच कइके दवा बांटइ अउर इलाज करइ के पूरा जिम्मा उठावत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार प्रदेश मा लगातार चलाए जाइ रहे ई विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान के माध्यम से जनता अउर सरकार के बीच के बातचीत, सहयोग अउर भरोसा का अउर मजबूत कइ दिहिस अहै अउर संचारी रोगन के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई छेड़ि रखी अहै। सरकार के दिन-रात के मेहनत अउर जनता के अपने मन से दीन्हे गए सहयोग के नतीजा अहै कि ई बीमारी के खिलाफ बहुत बड़ी कामयाबी मिली अहै।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश के मुख्यमंत्री जी अस्पतालन मा संचारी रोग के रोकथाम बरे खास इंतजाम कीनिन अहै। दिमागी बुखार के इलाज बरे पूरी तना साधन से लैस 16 पीआईसीयू (PICU), 15 मिनी पीआईसीयू, 117 ईटीसी (ETC) अउर 86 सेंटीनल लैब चालू अहैं। प्रदेश सरकार संचारी रोगन का रोकइ बरे हर साल 3 बार दस्तक अउर संचारी रोग नियंत्रण अभियान चलाय के ई बीमारी पर पूरा काबू पाय लीन अहै। प्रदेश के जउन अस्पताल बंद या सुस्त पड़े रहे, हुवां मशीन, दवा अउर डॉक्टर-नर्स के इंतजाम कइके उनका चालू कीन गवा। आम जनता का उनके घर के लगे ही जांच अउर इलाज के सब सुविधा दइके संचारी रोग का रोक दीन गवा अहै।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गाँव-गाँव मा आशा बहुएं हर घर मा जाइके लोगन का दिमागी बुखार, डेंगू, चिकनगुनिया, जापानी इंसेफ्लाइटिस जइसन बीमारी से बचाव, लक्षण अउर सरकारी अस्पतालन मा मिलइ वाले मुफ्त इलाज के बारे मा बतावत अहैं अउर लोगन का जागरूक करत अहैं। सरकार के सब विभाग अपनी-अपनी जिम्मेदारी नीक से निभाय रहे अहैं। सरकार के एही खास अभियान के नतीजा अहै कि संचारी रोग अब पूरी तना काबू मा अहै।</p>



<h3 class="wp-block-heading">डेंगू अउर जापानी इंसेफ्लाइटिस पर तगड़ी रोक</h3>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>डेंगू के मरीज मा भारी कमी:</strong> डेंगू के मरीज मा 94 प्रतिशत के कमी आई अहै अउर एसे होय वाली मौत मा 99 प्रतिशत के कमी दर्ज कीन गई अहै। सही बखत पर जांच अउर इलाज से डेंगू के असर का लगभग खतम कइ दीन गवा अहै।</li>



<li><strong>जापानी इंसेफ्लाइटिस (जे.ई.) मा सुधार:</strong> जापानी इंसेफ्लाइटिस के मामला मा 96 प्रतिशत के कमी आई अहै अउर एसे होय वाली मौत मा 99 प्रतिशत के गिरावट भई अहै। पूर्वी उत्तर प्रदेश, जउन पहिले एही बीमारी से बहुत परेशान रहा, हुवां अब एका काफी हद तक काबू मा कइ लीन गवा अहै।</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश मा &#8216;इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोजेक्ट&#8217; (आई.डी.एस.पी.) के तहत बीमारी के निगरानी के इंतजाम का अउर मजबूत कीन गवा अहै। प्रदेश के लाखन स्वास्थ्य केंद्रन का सीधे पोर्टल से जोड़ दीन गवा अहै, जेहसे बीमारी के रिपोर्ट अउर निगरानी लगातार होय सकइ। कोरोना समेत 16 तरह के बीमारियन के हर हफ्ता के रिपोर्ट लीन जात है। एही इंतजाम से सही बखत पर बीमारी के पहिचान अउर ओका रोकइ मा बहुत मदद मिली अहै।</p>



<h3 class="wp-block-heading">डेंगू जांच अउर इलाज मा बड़ा सुधार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">साल 2017 मा जहाँ बहुत कम जांच केंद्र रहे, वहीं साल 2025 तक प्रदेश के सब 75 जिला मा जांच के पूरा इंतजाम होय गवा। कुल 86 सेंटीनल लैब अउर नेटवर्क लैब बनाई गईं। डेंगू से होय वाली मौत के दर जउन साल 2017 मा 0.91 प्रतिशत रही, ऊ साल 2025 मा घटिके खाली 0.03 प्रतिशत रहि गई—यानी 96.70 प्रतिशत के बड़ी कमी भई अहै। अस्पतालन के सुधरत ढांचा अउर तुरंत इलाज के इंतजाम से जान बचावै मा बहुत बड़ी मदद मिली।</p>



<h3 class="wp-block-heading">मलेरिया नियंत्रण मा बड़ी कामयाबी</h3>



<p class="wp-block-paragraph">मलेरिया के जउन मामला साल 2017 मा 32,342 रहे, ऊ साल 2025 मा घटिके खाली 14,988 रहि गइन—यानी 53.66 प्रतिशत के कमी आई अहै। मलेरिया के जांच मा बहुत बड़ी बढ़ोत्तरी भई अहै। साल 2017 मा जहाँ 46,69,321 जांच भई रही, वहीं साल 2025 मा 1,70,84,168 जांच कीन गई, जेमा कुल 266 प्रतिशत के बढ़ोत्तरी भई अहै। एही तना &#8216;एनुअल ब्लड एग्जामिनेशन रेट&#8217; (ABER) 2.02 प्रतिशत से बढ़ि के 7.78 प्रतिशत होय गवा, जेमा 285 प्रतिशत के बढ़ोत्तरी दर्ज कीन गई अहै। जांच बढ़इ से बीमार लोगन के संख्या घटी अहै, जउन सरकार के बढ़िया रणनीति के ही नतीजा अहै।</p>



<p class="wp-block-paragraph">संचारी रोग नियंत्रण अभियान उत्तर प्रदेश मा जनस्वास्थ्य के क्षेत्र मा एक मील के पत्थर साबित भवा अहै। प्रदेश सरकार के एही कड़े प्रयास से उत्तर प्रदेश अब संचारी रोगन से पूरी तना आजाद होय के राह पर आगे बढ़ि रहा अहै।</p>



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<p class="wp-block-paragraph"><strong>&#8211; अखिलेशमणि त्रिपाठी</strong></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रदेश सरकार के सरंक्षण से बढ़ी वन्यजीवों के संख्या</title>
		<link>https://rahasyalok.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%a3-%e0%a4%b8/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 10:54:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[सफलता के कहानी वन अउर वन्यजीव विभाग वन अउर वन्यजीव ई धरती के असली प्राकृतिक धरोहर अहैं। जंगल अउर जंगली जानवरन से ही पर्यावरण के संतुलन बना रहत है, जउन मनई के जिंदगी का सुखी अउर समृद्ध बनावत है। हमार देश मा कइयौ जात के वन्यजीव रहत अहैं। वन्यजीव भी प्राणी अहैं, मनई के तना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
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<p class="has-text-align-center wp-block-paragraph"><strong>सफलता के कहानी</strong> <strong>वन अउर वन्यजीव विभाग</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">वन अउर वन्यजीव ई धरती के असली प्राकृतिक धरोहर अहैं। जंगल अउर जंगली जानवरन से ही पर्यावरण के संतुलन बना रहत है, जउन मनई के जिंदगी का सुखी अउर समृद्ध बनावत है। हमार देश मा कइयौ जात के वन्यजीव रहत अहैं। वन्यजीव भी प्राणी अहैं, मनई के तना उनके भी सब अंग होत हैं अउर उनके दिल के धड़कन भी आम मनई के जइसन ही धड़कत अहै। आज वन्यजीवों के सही बचाव अउर देख-रेख बरे लोगन का जागरूक करब अउर उनके प्रति दया अउर मया के भाव जगाउब बहुत जरूरी अहै। हमार पुरान समय से ही वन्यजीवों का सुरक्षित रखइ के परंपरा रही अहै, एही नाते आज बढ़ते सहर अउर कारखानन के बावजूद भी कइयौ तरह के वन, पेड़-पौध अउर वन्यजीव जिन्दा अहैं। धरती के सुघराई अउर संतुलन बनाय रखइ बरे अलग-अलग जीव-जन्तु मा तालमेल बहुत जरूरी अहै। वन्यजीव उ हर पेड़-पौध, जानवर, चिरई अउर जीव का कहा जात है, जेका मनई पालतू नाहीं बनाएस अहै। जंगली जीव दुनिया के हर इलाका—रेगिस्तान, जंगल, मैदान, पहाड़, पानी अउर सहरन मा भी पाए जात अहैं, पै ऊ मनई के बस्ती से दूर जंगल-पहाड़ जइसन अपने प्राकृतिक ठिकाना मा रहत अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के अगुवाई मा उत्तर प्रदेश मा वन्यजीवों के घर, सरंक्षण अउर देख-रेख बरे खास काम कीन जात अहैं। वन्यजीवों का नीक प्राकृतिक माहौल देइ बरे प्रदेश सरकार बहुत बड़ा पेड़ लगावइ के अभियान चलाय के पौधरोपण करवाएस अहै। प्रदेश सरकार के 09 साल के राज मा पूरे प्रदेश मा 242.13 करोड़ पेड़ लगाय के जंगल अउर हरियाली का बढ़ावा दीन गवा अहै। सरकार के एही काम से प्रदेश मा साल 2017 से 2023 के बीच 03 लाख 38 हजार एकड़ मा जंगल अउर हरियाली बढ़ि गई अहै।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश सरकार वन्यजीवों का प्राकृतिक माहौल दइके उनके आबादी मा बढ़ोत्तरी कइ दिहिस अहै। जब वन्यजीवों का उनके मन मुताबिक घर अउर भरपेट खाना मिली अउर नर-मादा प्राकृतिक रूप से मिलिहैं, त उनका कुनबा त जरूर बढ़ी। सरकार के नीक इंतजाम के नतीजा अहै कि प्रदेश मा राष्ट्रीय पशु बाघ के संख्या जउन पहिले 173 रही, ऊ अब बढ़ि के 205 होय गई अहै। प्रदेश मा बाघों के संख्या मा 18 प्रतिशत के बढ़ोत्तरी भई अहै। पूरे देश मा सबसे ज्यादा 2397 डॉल्फिन उत्तर प्रदेश मा अहैं। प्रदेश सरकार झील अउर ताल-तलइया के संख्या भी बढ़ाएस अहै। जउन झील, नदी अउर तालाब मा कूड़ा-कचरा अउर घास उगी रही, उनका साफ-सुथरा कइके पुरान रंग-रूप मा लावा गवा अहै। नीक माहौल अउर पूरा बचाव देइ के नतीजा अहै कि राज्यपक्षी सारस के संख्या पिछले बरिसन मा 19994 से बढ़ि के 20281 होय गई अहै। प्रदेश के लोग सारस से बहुत मया करत अहैं अउर उनके रहे के ठिकाना से कौनों छेड़छाड़ नाहीं करत। एही तना प्रदेश मा हाथी के संख्या 232 से बढ़ि के 352 होय गई अहै। प्रदेश के जंगल मा हाथियों का पूरा सरंक्षण दीन जाइ रहा अहै।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रदेश सरकार 27 वन्यजीव विहार अउर पक्षी विहार का सुरक्षित कइ रही अहै। इन विहारन मा वन्यजीवों का बढ़िया माहौल मिलि रहा अहै अउर उनके संख्या बढ़ि रही अहै। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी चित्रकूट जिला के विन्ध्य पर्वतमाला मा स्थित लगभग 53000 हेक्टेयर के बड़े अउर सुघर जंगल का, जैव विविधता बरे खास होय के नाते, 19 अक्टूबर 2022 का ‘रानीपुर टाइगर रिजर्व’ के नाम से प्रदेश के चौथा टाइगर रिजर्व घोषित कइ दिहिन। गोरखपुर जिला के कैम्पियरगंज रेंज मा रेडहेडेड गिद्ध सरंक्षण अउर प्रजनन केंद्र बनाय के गिद्धों के संख्या बढ़ाई जाइ रही अहै। उत्तर प्रदेश मा वेटलैण्डस (नम भूमि) के संख्या मा भी बढ़ोत्तरी भई अहै। इन वेटलैण्ड रामसर साइट मा चिरई अउर पानी के जीव रहत अहैं। प्रदेश मा 12 वेटलैण्ड रामसर साइट घोषित भई अहैं, जउन पूरे देश मा सबसे ज्यादा अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>प्रदेश मा गौरैया सरंक्षण अभियान का मिली रफ्तार</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">पर्यावरण अउर जैव विविधता का बचावै बरे हर साल 20 मार्च का ‘विश्व गौरैया दिवस’ मनाया जात है। ई साल नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान मा विश्व गौरैया दिवस धूमधाम से मनावा गवा। लोगन का गौरैया के जरूरत अउर ओका बचावै बरे आगे आवइ बरे प्रेरित कीन गवा। प्रदेश सरकार के मुख्य मकसद तेजी से घटती गौरैया के संख्या का रोकइ बरे जरूरी तरीका जन-जन तक पहुँचाउब अहै। जउन गौरैया कबहूँ घर के आंगन अउर छत पर चहचहात रही, ऊ आज बढ़ते सहर, प्रदूषण अउर बदलती जिंदगी के नाते गायब होय रही अहै। गौरैया हमार पर्यावरण बरे बहुत काम के चिरई अहै। ई कीड़ा-मकोड़ा खाय के फसल के रक्षा करत है अउर बीया का फैलावे मा मदद करत है, जेहसे प्रकृति के संतुलन बना रहत है। बनावटी घोंसला, माटी के बर्तन, पेड़-पौध, दाना-पानी देइ अउर लोगन का अपने घर मा गौरैया बरे नीक माहौल तैयार करइ बरे सरकार प्रेरित कइ रही अहै।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विश्व गौरैया दिवस पहली बार साल 2010 मा मनावा गवा रहा। भारत से शुरू भवा ई अभियान आज पूरी दुनिया मा फइलि चुका अहै। गौरैया का बचाउब खाली एक चिरई का बचाउब नाहीं अहै, बल्कि अपने पर्यावरण अउर आने वाले कल का सुरक्षित करब अहै। प्रदेश सरकार के वन्यजीव सुरक्षा, जंगलों के देख-रेख अउर नई तकनीक के इस्तेमाल से वन्यजीवों के बचाव का एक नया रास्ता मिला अहै।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रवि यादव</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना से नीरज दुबे गढ़िन आत्मनिर्भरता के मिसाल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[RahashyaLok]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 02 May 2026 10:51:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेख]]></category>
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					<description><![CDATA[सफलता के कहानी एम0एस0एम0ई (सूक्ष्म, लघु अउर मध्यम उद्यम) अउर निर्यात प्रोत्साहन विभाग उत्तर प्रदेश का अपने गोड़ पर खड़ा अउर उद्यमशील राज्य बनावै के माननीय मुख्यमन्तरी जी के सपन का सच करइ मा ’मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना’ एक मील के पत्थर साबित होय रही अहै। ई बड़ी योजना के मुख्य मकसद प्रदेश के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity"/>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सफलता के कहानी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>एम0एस0एम0ई (सूक्ष्म, लघु अउर मध्यम उद्यम) अउर निर्यात प्रोत्साहन विभाग</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश का अपने गोड़ पर खड़ा अउर उद्यमशील राज्य बनावै के माननीय मुख्यमन्तरी जी के सपन का सच करइ मा ’मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना’ एक मील के पत्थर साबित होय रही अहै। ई बड़ी योजना के मुख्य मकसद प्रदेश के पढ़ल-लिखल अउर हुनरमंद नौजवानन का नौकरी ढूँढइ वाले के बजाय ’रोजगार दइ वाला’ (जॉब क्रिएटर) बनाउब अहै। योजना के तहत छोट मोट उद्योग लगावै बरे नौजवानन का पहिले चरण मा ₹5.0 लाख तक के ब्याज मुक्त कर्ज (या माली मदद) आसानी से दीन जात अहै। जब व्यापार नीक से चले लागत है अउर कर्ज चुकता होय जात है, त व्यापार का अउर बढ़ावै बरे दूसरे चरण मा भी रुपियन के मदद देइ के नियम अहै। एमा खाली रुपिया-पइसा के फायदा नाहीं अहै, बल्कि नौजवानन का उद्योग लगावै बरे तकनीकी बात अउर बाजार के पैतरा भी सिखावा जात है। प्रदेश सरकार के एही जनहित योजना के मजबूत भरोसा पर अमेठी जिला के बालीपुर, सवनगी के रहइया नीरज दुबे आत्मनिर्भरता के एक जीती-जागती मिसाल कायम करे अहैं। नीरज के ई सफर आज के उन सब नौजवानन बरे बहुत बड़ी प्रेरणा अहै, जउन कम साधन होय के बावजूद अपने सपनन का पूरा करइ के हिम्मत रखत अहैं। एक जमाना रहा जब नीरज पइसा के तंगी अउर पक्का काम न होय के नाते अपने भविष्य का लेके सोच मा डूबे रहत रहे। उनके मन मा धंधा करइ के सोच त रही, पै हाथ मा रुपिया न होय के नाते कदम आगे नाहीं बढ़ि पावत रहे। अइसन कठिन बखत मा ’मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना’ उनके बरे आस के एक किरन बनके आई अउर उनके सपनन का उड़ान दइ दिहिस।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नीरज दुबे के एही बहादुरी भरे सफर मा जिला प्रशासन के भूमिका एक रास्ता देखावै वाले अउर हौसला बढ़ावै वाले के तौर पर रही अहै। जिला प्रशासन के पूरा सहयोग अउर साफ-सुथरा काम के नाते ही योजना के फायदा उन तक बड़ी आसानी से पहुँच सका। जब नीरज उद्योग विभाग के तरफ से लगाए गए जागरूकता शिविर मा ’मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना’ से मिलइ वाले रुपियन के फायदा के बारे मा विस्तार से जानिन, त उनके मन मा बरिसन से दबा स्वरोजगार के सपना फिर से जाग उठा। जिला प्रशासन अउर व्यापार विभाग के अधिकारिन अरजी भरइ से लेके प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करइ तक नीरज के हर कदम पर मदद अउर मार्गदर्शन कीनिन। प्रशासन के एही फुर्ती के नतीजा रहा कि उनके अरजी का तुरंत मंजूरी मिलि गई अउर योजना के तहत उनका ₹5.0 लाख के कर्ज पास होय गवा। ई रुपिया खाली एक कर्ज नाहीं रहा, बल्कि नीरज के व्यापारी बनइ के सपना के मजबूत नेव रही। जिला प्रशासन ई बात का भी ध्यान रखिस कि पइसा मिलइ के बाद नीरज का कच्चा माल लेइ अउर मशीनरी बैठावै मा कौनों तकनीकी अड़चन न आवै, जेहसे उनके हौसला का अउर मजबूती मिली।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना से मिली एही संजीवनी के नीरज दुबे पूरा सदुपयोग कीनिन। ऊ मिलल कर्ज के रुपियन से दोना-पत्तल बनावै के एक नया कारखाना चालू कीनिन अउर बढ़िया क्वालिटी के मशीन खरीदे। योजना के फायदा से उनके धंधा का अइसन रफ्तार मिली, जेकर ऊ कल्पनावो नाहीं करे रहेन। जउन धंधा शुरू मा बहुत छोटे स्तर पर रहा, ऊ सरकारी मदद अउर नीरज के कड़ी मेहनत के नीक तालमेल से बहुत कम बखत मा एक बड़ा व्यापार बन गवा। आज नीरज के कारखाना मा बने वाला दोना-पत्तल अपनी बेहतरीन क्वालिटी अउर मजबूती के नाते आस-पास के बाजारन मा भी अपनी खास पहिचान बनाय चुका अहै। उनके धंधा के तरक्की के अंदाजा एही बात से लगावा जाइ सकत है कि काम शुरू होय के कुछे महीना मा उनके माल के मांग चार गुना से ज्यादा बढ़ि गई। ई लगातार बढ़ती मांग नीरज का अपने धंधा का अउर बढ़ावै बरे हौसला दिहिस अहै।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकारी योजना के नीक से चले के नाते नीरज के जिंदगी मा जउन बदलाव आवा अहै, ऊ खाली पइसा तक सीमित नाहीं अहै, बल्कि इससे समाज मा उनका मान-सम्मान भी बढ़ा अहै। धंधा मा भई ई तरक्की के सीधा असर उनके कमाई पर पड़ा अहै। आज नीरज के महीना के टर्नओवर अउर मुनाफा पहिले के हालत से कइयौ गुना ज्यादा अहै, जेहसे उनके परिवार के रहन-सहन मा बहुत सुधार आवा अहै। धंधा के एही कामयाबी नीरज का एक सफल मालिक के रूप मा खड़ा कइ दिहिस अहै। योजना के असली मकसद का पूरा करत भए आज ऊ अपने कारखाना के माध्यम से 03 अउर गांव के नौजवानन का पक्का रोजगार दइ रहे अहैं, जउन सीधे तौर पर गांव के अर्थव्यवस्था का मजबूत कइ रहा अहै। नीरज अब दूसर नौजवानन बरे एक सलाहकार के काम भी करत अहैं अउर उनका जिला प्रशासन अउर सरकारी योजनन के फायदा उठावै बरे प्रेरित करत अहैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नीरज दुबे के ई कामयाबी के कहानी ए बात के पक्का सबूत अहै कि जेकर सरकार के नीति सही दिशा मा होय अउर जिला प्रशासन ओका नीक से चलावै, त प्रदेश के नौजवान कौनों भी ऊंचाई का छू सकत अहै। ’मुख्यमन्तरी युवा उद्यमी विकास योजना’ नीरज जइसन हजारन नौजवानन के भीतर छिपे हुनर का पहिचान दिहिस अहै अउर उनका अपने गोड़ पर खड़ा होय के रास्ता देखाएस अहै। आज नीरज के दोना-पत्तल के कारखाना न खाली बढ़िया से चलि रहा अहै, बल्कि आगे ओका अउर बड़े स्तर पर बढ़ावै के पूरा उम्मीद दिखाई दइ रही अहै। उनकी तरक्की ई साफ जाहिर करत अहै कि सरकारी मदद जब मनई के पक्का इरादा अउर मेहनत से मिलत है, त कामयाबी के नवा इतिहास लिखा जात है। अमेठी के गांव-गिरावं से निकलि के एक सफल व्यापारी बनइ तक के नीरज के ई सफर प्रदेश के हर उस नौजवान बरे एक रास्ता देखावै वाला अहै, जउन खुद के काम से अपना अउर उत्तर प्रदेश के भविष्य संवारइ चाहत अहै।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>जनपद अमेठी</strong></p>
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