
जेहि देस मा सड़क किनारे जेसीबी (JCB) क साधारण खुदाई देखै खातिर सैकड़न लोगन क भीड़ जुटि जात है, तनिक सोचौ… जउं हुआं क सड़कन पर अचानक 308 चक्कन वाला एक ‘दैत्य’ जैसन मेगा ट्रक अउर ओहि पर लदी 200 टन क भारी-भरकम मशीन साम्हनै आय जाय, तौ नजारा कइसन होई? जी हां, ई समय उत्तर प्रदेश क चंदौली जिला मा कुछ अइसनै अचरज भरा नजारा देखै का मिलत है! ई मेगा ट्रक का देखै खातिर लोगन क भारी भीड़ उमड़ि पड़ी है। फिलहाल ई ट्रक चंदौली मा रुका है अउर आगू क रस्ता साफ होवै (रूट क्लेरेंस) क इंतज़ार करत है।
म़ुदा सवाल ई है कि आखिर 308 चक्कन वाला ई मेगा ट्रक आवत कहां से है? एका जाय का कहां है? ई कउन-कउन रस्ता से होइके गुजरा, अब तक मा केतना डीजल फूँकि दीन्ह गा अउर सबसे जरूरी बात ई भारी-भरकम मशीन क असली काम का है? आवौ, ई मेगा ट्रक क पूरी सफरनामा अउर एसे जुड़ी हर एक मजे क बात विस्तार से जानित है।
कहां से आई है 200 टन वजनी मशीन?
200 टन वजन क ई औद्योगिक वेसल (Industrial Vessel) यूरोपीय देस बेल्जियम से समुन्दर के रस्ता भारत आवा है। ई वेसल बेल्जियम के एंटवर्प बंदरगाह से ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुँचा। एकरे बाद एका खास हाइड्रोलिक ट्रक के जरिया सड़क मार्ग से बलरामपुर मा स्थित चीनी मिल लावा जात है। सोमार तक ई ट्रक बनारस पहुँचा रहा। मंगर क सबारे राजातालाब से रिंग रोड चढ़ावत भए हरहुआ, संदहा होत भए गाजीपुर खातिर निकारा जाई।
रूट क्लेरेंस सबसे बड़ी समस्या
308 चक्का वाला, 100 फीट लम्बा अउर लगभग सात मीटर चौड़ा ट्रेलर निकारै खातिर सड़कन मा बाधा बनी है। कहुँ सड़क क चौड़ाई कम है तौ कहुँ फूटओवर ब्रिज तौ कहुँ बिजली क खम्भा अउर होर्डिंग्स समस्या बनल हय। रस्ता साफ करै खातिर लगातार काम चलत है, यही वजह है कि ट्रक अपनी औसत रफ़्तार (20 किमी/प्रतिदिन) सेउ कम चाल से चलि पावत है।
कउन-कउन राज्यन से होइके गुजरा ट्रक?
308 चक्कन वाला ई ट्रक ओडिशा के पारादीप पोर्ट से लम्बी सड़क यात्रा पर निकला है। ओडिशा के बाद ई झारखंड होत भए बिहार क सीमा मा कदम रक्खिस। बिहार के औरंगाबाद, रोहतास अउर कैमूर जिलन से होइके गुजरत भए, ई नौबतपुर के रस्ता उत्तर प्रदेश के चंदौली जिला मा घुसा। अब चंदौली से आगू बढ़त भए ई वाराणसी, गाजीपुर, आजमगढ़ अउर लखीमपुर खीरी समेत यूपी क कई बड़े जिलन का पार करी। एकरे सफर क आखिरी पड़ाव बलरामपुर शुगर मिल है, जहां ई मशीन पहुँचावै का है।
कउन काम आइ ई 200 टन वजनी वेसल?
बेल्जियम से मगावा गवा ई 200 टन वजन क वेसल बलरामपुर चीनी मिल से जुड़े एथनॉल प्लांट मा लगावा जाई। ई वेसल के भीतर ‘वैक्यूम बॉयलर’ जैसन भारी औद्योगिक औज़ार लाग हय। बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड (BCML) ई वेसल क इस्तेमाल खाली चीनी बनावै तक सीमित न रक्खि के, गन्ना से एथनॉल जैसन सह-उत्पाद तैयार करै खातिर करी।
अब तक मा केतना डीजल फूँकि दीन्ह गा?
ट्रक ड्राइवर के मुताबिक अब तक 2 करोड़ क डीजल फूँकि चुका है। ट्रक के ड्राइवर बताइन कि रोजै 200 लीटर डीजल क खपत होइ रही है। उम्मीद है कि आवै वाली नवरात्र तक ई ट्रक लखीमपुर प्लांट तक पहुँच जाई।
308 चक्का वाले ट्रक क खासियत
200 टन वजन, 100 फीट लम्बा अउर 7 मीटर चौड़ा विशाल वेसल का सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी मा स्थित बलरामपुर चीनी मिल तक पहुँचावै खातिर 308 चक्कन वाला एक खास हैवी-ड्यूटी ट्रक क इस्तेमाल कीन जात है। जेएम बक्शी ग्रुप द्वारा चलावे जाइ रहे ई काम मा स्वीडिश ऑटोमोबाइल दिग्गज वोल्वो क Volvo FH16 ट्रक मॉडल लगावा गवा है। 100 टन से ढेर भार सहै खातिर डिजाइन कीन गवा ई ट्रक 600 से 780 HP क जबरदस्त इंजन क्षमता अउर लगभग 3800 Nm क भारी टॉर्क पैदा करत है, जे सैकड़न टन वजन क सिंगल-यूनिट वेसल क भार 308 चक्कन मा बराबर बांटि के बिना कउनो रुकावट के खींचै मा सक्षम है।
