रहस्यलोक | विशेष फीचर
भारत में पर्यटन केवल घूमने-फिरने की गतिविधि नहीं है। यह भारत की सभ्यता, संस्कृति, आध्यात्मिक परंपरा, प्राकृतिक विविधता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक साथ जोड़ने वाला विशाल आर्थिक और सामाजिक तंत्र है। हिमालय से हिंद महासागर तक, कच्छ के रण से लेकर पूर्वोत्तर के वर्षावनों तक और काशी-अयोध्या से लेकर बोधगया, अमृतसर, पुरी और हम्पी तक—भारत के पास पर्यटन अनुभवों की ऐसी विविधता है, जो दुनिया के बहुत कम देशों में एक साथ दिखाई देती है।
आज भारत पर्यटन को केवल अधिक पर्यटकों की संख्या तक सीमित रखने के बजाय उच्च-मूल्य, समावेशी, डिजिटल, अनुभव-आधारित और संवहनीय पर्यटन अर्थव्यवस्था में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बेहतर सड़क और रेल संपर्क, नए हवाई मार्ग, क्षेत्रीय विमानन, डिजिटल सेवाएं, ई-वीजा, होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन, चिकित्सा एवं आरोग्य पर्यटन और गंतव्य-केंद्रित योजनाएं इस बदलाव की आधारभूमि तैयार कर रही हैं।
भारत सरकार के पर्यटन डेटा पोर्टल के अनुसार 2025 में भारत में 20.22 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन दर्ज किए गए। इनमें लगभग 9.15 मिलियन विदेशी पर्यटक और 11.07 मिलियन अनिवासी भारतीय आगमन शामिल थे। इसी वर्ष घरेलू पर्यटक यात्राओं की संख्या लगभग 4.29 अरब रही। पर्यटन से विदेशी मुद्रा आय लगभग 31.69 अरब डॉलर रही। पर्यटन का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान 2023-24 के लिए लगभग 5.22 प्रतिशत और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार लगभग 8.46 करोड़ आंका गया है।
ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में पर्यटन अब केवल सेवा क्षेत्र का एक हिस्सा नहीं, बल्कि रोजगार, स्थानीय उद्यम, परिवहन, हस्तशिल्प, खानपान, होटल, संस्कृति और क्षेत्रीय विकास को गति देने वाला महत्वपूर्ण आर्थिक इंजन बन चुका है।
पर्यटन: अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर स्थानीय विकास का माध्यम
पर्यटन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका आर्थिक प्रभाव केवल होटल और यात्रा कंपनियों तक सीमित नहीं रहता। एक पर्यटक किसी शहर या गांव में पहुंचता है तो उसके खर्च का प्रभाव टैक्सी चालक, होटल कर्मचारी, रेस्तरां, स्थानीय दुकानदार, हस्तशिल्पकार, गाइड, कलाकार, किसान और छोटे उद्यमी तक पहुंचता है।
इसी कारण पर्यटन को रोजगार-सृजन का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। विशेष रूप से ग्रामीण और छोटे शहरों में पर्यटन ऐसी आय के अवसर पैदा कर सकता है, जिनके लिए बड़े औद्योगिक निवेश की आवश्यकता नहीं होती।
भारत के 2024 के आंकड़े भी घरेलू पर्यटन की विशालता को दर्शाते हैं। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार 2024 में लगभग 2948.19 मिलियन यानी 294.82 करोड़ घरेलू पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं। यह संख्या महामारी-पूर्व वर्षों की तुलना में भारतीय घरेलू पर्यटन की मजबूत वापसी को दर्शाती है।
यही घरेलू मांग भारत के पर्यटन क्षेत्र को बाहरी झटकों के सामने अपेक्षाकृत अधिक मजबूत बनाती है।
भारत की सबसे बड़ी ताकत—विविधता
भारत में पर्यटन की वास्तविक शक्ति उसके विशाल भूगोल से भी अधिक उसकी सभ्यतागत और सांस्कृतिक विविधता में छिपी है।
एक पर्यटक एक ही देश में हिमालयी पर्वतों, रेगिस्तान, समुद्र तटों, द्वीपों, वर्षावनों, वन्यजीव अभयारण्यों, प्राचीन मंदिरों, बौद्ध स्थलों, मुगल और राजपूत स्थापत्य, औपनिवेशिक विरासत, आदिवासी संस्कृति, लोककलाओं, शास्त्रीय संगीत और विविध खानपान का अनुभव कर सकता है।
भारत की विश्व धरोहर सूची में जुलाई 2026 में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ी। सारनाथ के प्राचीन बौद्ध स्थल को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के बाद भारत के विश्व धरोहर स्थलों की संख्या 45 हो गई।
इसलिए मूल लेख में दिए गए 44 UNESCO स्थलों का आंकड़ा अब अद्यतन किया जाना चाहिए।
प्राकृतिक विरासत भी भारत की ताकत है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार देश में वर्तमान में 106 राष्ट्रीय उद्यान सहित कुल 987 संरक्षित क्षेत्र हैं।
यह विरासत भारत को सांस्कृतिक पर्यटन के साथ-साथ वन्यजीव, इको-टूरिज्म और प्रकृति-आधारित पर्यटन के लिए भी असाधारण संभावनाएं देती है।
आध्यात्मिक पर्यटन: भारत की वैश्विक पहचान
भारत की पहचान सदियों से आध्यात्मिक यात्राओं के केंद्र के रूप में रही है। काशी, अयोध्या, मथुरा, वृंदावन, प्रयागराज, हरिद्वार, बद्रीनाथ, केदारनाथ, पुरी, तिरुपति और अमृतसर जैसे केंद्र देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं।
भारत केवल हिंदू धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है। बौद्ध, जैन और सिख परंपराओं से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण स्थल भी देश में मौजूद हैं।
बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर और श्रावस्ती बौद्ध दुनिया के लिए विशेष महत्व रखते हैं। जुलाई 2026 में सारनाथ को UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना इसी वैश्विक विरासत को नई अंतरराष्ट्रीय पहचान देता है।
यहां पर्यटन का अर्थ केवल किसी धार्मिक स्थल पर पहुंचना नहीं है। बेहतर मॉडल वह होगा जिसमें तीर्थयात्री के लिए परिवहन, आवास, स्वच्छता, भोजन, डिजिटल जानकारी, स्थानीय बाजार, सांस्कृतिक अनुभव और आसपास के अन्य स्थलों को एक ही पर्यटन सर्किट में जोड़ा जाए।
विरासत पर्यटन: स्मारक से अनुभव तक
भारत के किले, महल, मंदिर, गुफाएं, पुरातात्विक स्थल और ऐतिहासिक नगर केवल पुराने भवन नहीं हैं। वे भारत के अतीत की जीवित कहानियां हैं।
पर्यटन की नई अवधारणा में अब केवल किसी स्मारक को देखने के बजाय अनुभव-आधारित विरासत पर्यटन पर जोर बढ़ रहा है।
स्थानीय भोजन, लोक संगीत, हस्तशिल्प, नृत्य, पारंपरिक बाजार, त्योहार और स्थानीय जीवनशैली को पर्यटन अनुभव का हिस्सा बनाना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इससे एक ओर पर्यटक का ठहराव बढ़ता है, दूसरी ओर स्थानीय समुदाय को पर्यटन से प्रत्यक्ष आय मिलती है।
योग, आयुर्वेद और चिकित्सा पर्यटन की नई संभावनाएं
भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियां भी पर्यटन अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही हैं।
योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और वेलनेस सेवाओं के साथ आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का संयोजन भारत को वैश्विक स्वास्थ्य एवं वेलनेस पर्यटन के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक अवसर देता है।
विशेष रूप से उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाओं की अपेक्षाकृत कम लागत, प्रशिक्षित चिकित्सा मानव संसाधन और अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में सेवा उपलब्धता भारत की ताकत हैं।
भविष्य में वेलनेस पर्यटन को केवल उपचार तक सीमित रखने के बजाय योग, आयुर्वेद, मानसिक विश्राम, प्रकृति, स्थानीय भोजन और स्वस्थ जीवनशैली से जोड़ना भारत को एक अलग वैश्विक पहचान दे सकता है।
वन्यजीव और इको-टूरिज्म
भारत के जंगल और जैव विविधता पर्यटन के लिए विशाल अवसर प्रस्तुत करते हैं।
राष्ट्रीय उद्यान, टाइगर रिजर्व, पक्षी अभयारण्य, आर्द्रभूमियां, मैंग्रोव, हिमालयी क्षेत्र और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र प्रकृति-आधारित पर्यटन को मजबूत आधार देते हैं।
लेकिन यहां सबसे महत्वपूर्ण शब्द है—जिम्मेदार पर्यटन।
यदि किसी पर्यटन स्थल पर पर्यटकों की संख्या उसकी पर्यावरणीय क्षमता से अधिक हो जाती है तो पर्यटन स्वयं उस स्थान के लिए खतरा बन सकता है। इसलिए भविष्य का पर्यटन मॉडल केवल अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने वाला नहीं, बल्कि कितने पर्यटक, कितने समय के लिए और किस पर्यावरणीय क्षमता के भीतर—इन सवालों पर आधारित होना चाहिए।
इसी दृष्टिकोण से स्थानीय समुदायों को पर्यटन का भागीदार बनाना आवश्यक है। स्थानीय गाइड, होमस्टे, हस्तशिल्प, स्थानीय भोजन और सामुदायिक उद्यम पर्यटन आय को सीधे गांवों तक पहुंचा सकते हैं।
गांवों से जुड़ता पर्यटन
भारत के पर्यटन का अगला बड़ा क्षेत्र ग्रामीण पर्यटन हो सकता है।
देश के हजारों गांव अपनी संस्कृति, भोजन, कृषि, हस्तशिल्प, लोककला और प्राकृतिक वातावरण के कारण अनूठे पर्यटन अनुभव दे सकते हैं।
होमस्टे, गांव की सैर, कृषि अनुभव, स्थानीय व्यंजन, पारंपरिक कला और हस्तशिल्प पर्यटकों को भारत के वास्तविक जीवन से जोड़ सकते हैं।
यह मॉडल विशेष रूप से युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार पैदा कर सकता है।
पर्यटन मंत्रालय द्वारा समुदाय-आधारित भागीदारी पर जोर देने वाली ‘पर्यटन मित्र’ और ‘पर्यटन दीदी’ जैसी पहलें भी इसी सोच को आगे बढ़ाती हैं।
भारत का MICE पर्यटन
पर्यटन का एक तेजी से बढ़ता क्षेत्र है—MICE: Meetings, Incentives, Conferences and Exhibitions।
भारत मंडपम जैसे आधुनिक सम्मेलन केंद्रों, बेहतर हवाई संपर्क और बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी के अनुभव ने भारत की क्षमता को बढ़ाया है।
भारत की G20 अध्यक्षता इसका महत्वपूर्ण उदाहरण रही। देश के विभिन्न शहरों में 200 से अधिक बैठकें आयोजित हुईं और इससे विदेशी प्रतिनिधियों को दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों की सांस्कृतिक और पर्यटन क्षमता देखने का अवसर मिला।
इस मॉडल ने यह साबित किया कि बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन स्वयं पर्यटन के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।
समुद्र तट, क्रूज और साहसिक पर्यटन
भारत की लगभग 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा, द्वीप, नदियां, पर्वतीय क्षेत्र और रेगिस्तान साहसिक तथा अनुभवात्मक पर्यटन के लिए व्यापक अवसर प्रदान करते हैं।
क्रूज पर्यटन, वाटर स्पोर्ट्स, ट्रैकिंग, पर्वतारोहण, रिवर राफ्टिंग, रेगिस्तान सफारी, पक्षी अवलोकन और फिल्म पर्यटन जैसे क्षेत्र नए पर्यटक वर्गों को आकर्षित कर सकते हैं।
इन गतिविधियों का सबसे बड़ा लाभ यह है कि वे पर्यटकों को पारंपरिक पर्यटन स्थलों से बाहर ले जाती हैं और नए क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधि पैदा करती हैं।
गंतव्य विकास में बदलती सरकारी सोच
भारत के पर्यटन विकास में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब केवल अलग-अलग स्मारकों के विकास के बजाय पूरे गंतव्य का विकास किया जा रहा है।
इस परिवर्तन में ‘स्वदेश दर्शन’ योजना महत्वपूर्ण रही है।
मंत्रालय के अनुसार स्वदेश दर्शन योजना के तहत 76 परियोजनाएं लगभग ₹5,290.33 करोड़ की लागत से स्वीकृत हुईं और 75 परियोजनाएं भौतिक रूप से पूरी हो चुकी हैं।
इसके बाद स्वदेश दर्शन 2.0 को अधिक टिकाऊ और गंतव्य-केंद्रित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया गया।
2026 की उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत 53 परियोजनाएं लगभग ₹2,208.31 करोड़ की लागत से स्वीकृत हैं।
PRASHAD से तीर्थ पर्यटन को आधार
तीर्थ स्थलों के विकास के लिए PRASHAD—Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual, Heritage Augmentation Drive योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
2026 की सरकारी जानकारी के अनुसार PRASHAD के अंतर्गत 54 परियोजनाएं लगभग ₹1,726.74 करोड़ की लागत से स्वीकृत की गई हैं।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल धार्मिक स्थल का सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि यात्री सुविधाओं, स्वच्छता, पहुंच, पार्किंग, सूचना और अन्य बुनियादी सुविधाओं में सुधार करना है।
कम प्रसिद्ध गंतव्यों की ओर बढ़ता ध्यान
भारत के पर्यटन विकास की एक बड़ी चुनौती यह रही है कि कुछ ही प्रमुख शहरों और स्थलों पर पर्यटकों का अत्यधिक दबाव रहता है।
इस समस्या का समाधान कम प्रसिद्ध लेकिन उच्च क्षमता वाले गंतव्यों को विकसित करके किया जा सकता है।
इसी दिशा में Special Assistance to States for Capital Investment—SASCI के अंतर्गत 23 राज्यों में 40 परियोजनाओं के लिए ₹3,295.76 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य प्रतिष्ठित पर्यटन केंद्रों को वैश्विक स्तर तक विकसित करना है।
इस योजना में पर्यटन अनुभव की पूरी श्रृंखला—कनेक्टिविटी, उपयोगिताएं, पर्यटक सुविधाएं, स्थानीय अर्थव्यवस्था, पर्यावरणीय क्षमता और रोजगार—को ध्यान में रखने का प्रयास किया गया है।
CBDD: चुनौती के आधार पर गंतव्य विकास
Challenge Based Destination Development (CBDD) के माध्यम से ऐसे गंतव्यों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनमें पर्यटन की उच्च संभावना है लेकिन अभी पर्याप्त बुनियादी ढांचा या अनुभवात्मक सुविधाएं विकसित नहीं हुई हैं।
फरवरी 2026 तक उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार CBDD के अंतर्गत 38 परियोजनाएं ₹697.94 करोड़ की लागत से स्वीकृत थीं।
इसमें आध्यात्मिक पर्यटन, संस्कृति एवं विरासत, इको-टूरिज्म और अमृत धरोहर तथा वाइब्रेंट विलेज जैसे क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
यह मॉडल भारत के पर्यटन को केवल प्रसिद्ध शहरों से निकालकर नए क्षेत्रों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
कनेक्टिविटी: पर्यटन की रीढ़
किसी पर्यटन स्थल की सफलता केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि वहां क्या देखने को मिलता है। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि वहां पहुंचना कितना आसान है।
राष्ट्रीय राजमार्ग, आधुनिक रेलवे स्टेशन, वंदे भारत ट्रेनें, नए हवाई अड्डे, क्षेत्रीय विमान सेवाएं और बेहतर सार्वजनिक परिवहन पर्यटन को नए क्षेत्रों तक ले जा रहे हैं।
क्षेत्रीय विमानन में UDAN ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मार्च 2026 तक योजना के तहत 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और वाटर एयरोड्रोम से 663 मार्ग संचालित हो चुके थे। इसके बाद संशोधित UDAN को 2026-27 से 2035-36 तक लागू करने के लिए ₹28,840 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने और 200 आधुनिक हेलीपैड के विकास का लक्ष्य शामिल है।
यदि यह नेटवर्क पर्यटन स्थलों से प्रभावी रूप से जोड़ा जाता है, तो टियर-2 और टियर-3 शहर भारत के अगले पर्यटन केंद्र बन सकते हैं।
डिजिटल पर्यटन का नया दौर
आज का पर्यटक यात्रा से पहले ही इंटरनेट पर गंतव्य, होटल, परिवहन, भोजन, मौसम, टिकट और स्थानीय गतिविधियों की जानकारी प्राप्त करना चाहता है।
इसलिए डिजिटल पर्यटन अब सुविधा नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धा का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।
पर्यटन मंत्रालय ने Incredible India Digital Platform को नए रूप में विकसित किया है। इसमें पर्यटन अनुभवों के साथ AI आधारित व्यक्तिगत सुझाव और अन्य यात्रा सेवाओं को शामिल किया गया है।
इसी तरह NIDHI+ आतिथ्य और पर्यटन क्षेत्र का राष्ट्रीय एकीकृत डेटाबेस विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसमें होटल, होमस्टे, टूर ऑपरेटर, ट्रैवल एजेंट, पर्यटक परिवहन और अन्य पर्यटन सेवा प्रदाताओं को डिजिटल रूप से जोड़ने की व्यवस्था है।
मार्च 2026 तक NIDHI+ के अंतर्गत 2023 से 2026 के बीच 19,389 नए पंजीकरण दर्ज किए गए थे, जिनमें 11,667 आवास इकाइयां और 7,722 पर्यटन सेवा प्रदाता शामिल थे।
वीजा सुविधा और वैश्विक बाजार
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में यात्रा की सुगमता एक महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धात्मक कारक है।
भारत ने ई-वीजा प्रणाली के माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया को काफी हद तक डिजिटल बनाया है। हालांकि यहां एक तथ्य महत्वपूर्ण है—मूल लेख में 33 हवाई अड्डे, 19 समुद्री बंदरगाह और 4 भूमि पत्तनों का आंकड़ा दिया गया है, जबकि मार्च 2026 के आधिकारिक उत्तर में ई-वीजा के लिए 33 नामित हवाई अड्डे, 16 समुद्री बंदरगाह और 2 भूमि पत्तन बताए गए हैं।
इसलिए प्रकाशन के लिए नवीनतम आंकड़ा इस्तेमाल करना अधिक उपयुक्त होगा।
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन: संख्या से अधिक गुणवत्ता की चुनौती
2025 के अंतरराष्ट्रीय पर्यटन आंकड़ों को लेकर भी सावधानी जरूरी है।
पर्यटन मंत्रालय के नवीनतम डैशबोर्ड में 2025 के लिए 20.22 मिलियन International Tourist Arrivals दर्ज हैं।
वहीं जनवरी 2026 के आधिकारिक आंकड़ों में 2024 के लिए 20.57 मिलियन ITAs दर्ज किए गए थे।
इसलिए यह कहना अधिक उचित होगा कि महामारी के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय पर्यटन में मजबूत वापसी की है, लेकिन 2025 में ITAs का स्तर 2024 की तुलना में थोड़ा कम रहा। जनवरी 2026 की एक बाद की सरकारी सूचना में 2025 के लिए 20.09 मिलियन के आसपास का provisional आंकड़ा भी दिया गया है।
अर्थात भारत की चुनौती अब केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उच्च खर्च करने वाले पर्यटकों, लंबी अवधि के ठहराव और अधिक मूल्यवर्धित पर्यटन अनुभवों को आकर्षित करना है।
संवहनीय पर्यटन: विकास की अगली कसौटी
पर्यटन जितना बड़ा आर्थिक अवसर है, उतनी ही बड़ी पर्यावरणीय चुनौती भी है।
अत्यधिक भीड़, कचरा, जल संकट, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव, यातायात और अनियोजित निर्माण पर्यटन स्थलों की दीर्घकालिक क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए भारत को ऐसा पर्यटन मॉडल विकसित करना होगा जिसमें आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलें।
Travel for LiFE जैसे अभियानों का उद्देश्य पर्यटकों को जिम्मेदार यात्रा व्यवहार के प्रति जागरूक करना है।
भविष्य के पर्यटन केंद्रों में जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, अक्षय ऊर्जा, सार्वजनिक परिवहन, स्थानीय सामग्री और स्थानीय रोजगार को पर्यटन नियोजन का हिस्सा बनाना होगा।
पर्यटन का अगला चरण—स्थानीय समुदाय
भारत के पर्यटन की वास्तविक सफलता का पैमाना केवल यह नहीं होना चाहिए कि किसी स्थान पर कितने पर्यटक आए।
सवाल यह होना चाहिए कि—
उन पर्यटकों से स्थानीय लोगों की आय कितनी बढ़ी?
कितने युवाओं को रोजगार मिला?
कितने स्थानीय कारीगरों के उत्पाद बिके?
कितने गांव पर्यटन अर्थव्यवस्था से जुड़े?
कितनी स्थानीय संस्कृति संरक्षित हुई?
और पर्यावरण पर कितना दबाव पड़ा?
यदि इन प्रश्नों का उत्तर सकारात्मक है तो पर्यटन वास्तव में समावेशी विकास का माध्यम बन सकता है।
उत्तर प्रदेश के लिए विशेष अवसर
भारत की पर्यटन कहानी में उत्तर प्रदेश का स्थान विशेष है।
अयोध्या, काशी, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन, सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती, आगरा, लखनऊ, झांसी और बुंदेलखंड जैसे गंतव्य धार्मिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन की अलग-अलग धाराओं को एक साथ जोड़ते हैं।
सारनाथ को जुलाई 2026 में UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल किया जाना उत्तर प्रदेश की वैश्विक पर्यटन पहचान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
स्वदेश दर्शन 2.0 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में नैमिषारण्य का वैदिक-वेलनेस अनुभव और प्रयागराज में आजाद पार्क एवं ‘देखो प्रयागराज’ ट्रेल अनुभव जैसी परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इसके अलावा CBDD के अंतर्गत महोबा के सांस्कृतिक परिदृश्य के विकास की परियोजना भी शामिल है।
उत्तर प्रदेश के लिए अगला अवसर इन बड़े गंतव्यों को छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों, हस्तशिल्प और एक जिला एक उत्पाद (ODOP) जैसे स्थानीय आर्थिक मॉडल से जोड़ने का है।
यदि पर्यटक अयोध्या या वाराणसी आता है और उसे आसपास के जिलों के हस्तशिल्प, भोजन, लोककला, ग्रामीण अनुभव और स्थानीय उत्पादों से जोड़ा जाए तो पर्यटन का आर्थिक लाभ कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।
आगे की राह
भारत के पास पर्यटन की बुनियादी ताकत पहले से मौजूद है। आवश्यकता अब उसे व्यवस्थित, डिजिटल, सुरक्षित, संवहनीय और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की है।
इसके लिए पांच क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देना होगा—
पहला—गंतव्य प्रबंधन।
पर्यटन स्थलों का विकास केवल निर्माण परियोजना न होकर दीर्घकालिक destination management के रूप में किया जाना चाहिए।
दूसरा—कनेक्टिविटी।
सड़क, रेल और हवाई नेटवर्क को पर्यटन सर्किटों से जोड़ना होगा।
तीसरा—स्थानीय अर्थव्यवस्था।
होटल और बड़े निवेश के साथ स्थानीय दुकानदार, कारीगर, किसान, गाइड, कलाकार और होमस्टे संचालक भी पर्यटन मूल्य-श्रृंखला का हिस्सा बनें।
चौथा—डिजिटल अनुभव।
यात्रा की योजना से लेकर टिकट, आवास, स्थानीय परिवहन, डिजिटल भुगतान, भाषा सहायता और फीडबैक तक एकीकृत डिजिटल व्यवस्था विकसित करनी होगी।
पांचवां—संवहनीयता।
पर्यटन की वह सीमा तय करनी होगी जिसके भीतर किसी गंतव्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान सुरक्षित रह सके।
भारत की अगली पर्यटन कहानी
भारत की पर्यटन यात्रा अब उस दौर में प्रवेश कर चुकी है जहां केवल ‘कितने पर्यटक आए’ यह पर्याप्त प्रश्न नहीं रह गया है।
अब असली सवाल है—पर्यटक क्या अनुभव लेकर लौटे, स्थानीय समाज को क्या मिला और गंतव्य की विरासत को हमने कितना सुरक्षित रखा?
भारत की सभ्यता हजारों वर्षों की है। उसके पास मंदिर हैं, मस्जिदें हैं, बौद्ध स्थल हैं, गुरुद्वारे हैं, किले हैं, महल हैं, जंगल हैं, समुद्र हैं, पर्वत हैं, नदियां हैं और हजारों जीवित परंपराएं हैं।
लेकिन इन सबको पर्यटन अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए केवल विरासत पर्याप्त नहीं है। इसके लिए बेहतर प्रबंधन, बेहतर कनेक्टिविटी, प्रशिक्षित मानव संसाधन, डिजिटल सुविधा, स्वच्छता, सुरक्षा और स्थानीय भागीदारी आवश्यक है।
भारत यदि इन सभी तत्वों को एक साथ जोड़ने में सफल होता है तो वह केवल दुनिया के सबसे अधिक देखे जाने वाले देशों में शामिल होने की दिशा में नहीं बढ़ेगा, बल्कि दुनिया के सबसे प्रभावशाली, जिम्मेदार और उच्च-मूल्य पर्यटन गंतव्यों में अपनी जगह बना सकता है।
भारत की पर्यटन कहानी इसलिए केवल पर्यटकों की कहानी नहीं है।
यह रोजगार की कहानी है।
यह गांवों की कहानी है।
यह संस्कृति और विरासत की कहानी है।
यह स्थानीय उद्यम की कहानी है।
और अंततः यह उस भारत की कहानी है, जो अपनी हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता को आधुनिक अर्थव्यवस्था की नई शक्ति में बदल रहा है।
—रहस्यलोक विशेष फीचर

