राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) फरीदाबाद कै बड़खल मां 25 एकड़ वन भूमि पर कथित अवैध खनन कय लेकर हरियाणा सरकार अउर दूसर लोगन से जवाब मांगा अहै। एनजीटी इहइ से पहिले संरक्षित क्षेत्र मां कथित अवैध खनन से जुड़़ी अखबार कय एक खबर पर स्वतः संज्ञान लिहिस रहा।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव अउर विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद कय पीठ 16 सितंबर कै एक आदेश मां कहिन कि इ खबर अरावली मां जारी अवैध खनन गतिविधियों से संबंधित अहै। आदेश मां कहा गवा कि रिपोर्ट कय मुताबिक, हालाँकि हरियाणा कै अरावली मां दुई दशक से अधिक समय से खनन पर प्रतिबंध बा लेकिन फरीदाबाद कै बड़खल मां 25 एकड़ वन भूमि पर उत्खनन करै वाली दुई मशीनें चलत हुई पाई गािन, जहँवा बड़े पैमाने पर पत्थरन की खुदाई की गई रही अउर टूटे हुए पत्थरन कै बड़े ढेर आस-पास बिखरे हुए रहे।
पीठ कहिस कि अखबार कय खबर मां इहो संकेत मिलत अहै कि इ तरह की खुदाई कै दौरान लगभग 500 मीट्रिक टन पत्थर निकाले गए। हालाँकि वन विभाग इहें इनकार कीन्हिस बा। ऊ इहो कहिन कि उक्त स्थान महत्वपूर्ण अहै काहेंकि 2002 मां सूखने कै बाद से बड़खल झील कै पुनरुद्धार किया जा रहा अहै।
पीठ कहिन कि इ खबर पर्यावरण मानदंडों कै अनुपालन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठावत अहै। ट्रिब्यूनल अपने मुख्य सचिव कै माध्यम से हरियाणा सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य कै प्रधान मुख्य वन संरक्षक अउर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय मां वन महानिरीक्षक कय प्रतिवादी या पक्षकार कै रूप मां शामिल कीन्हिस अहै।
ट्रिब्यूनल कहिस, “उक्त प्रतिवादियों कय मामला मां अगली सुनवाई (1 दिसंबर) से कम से कम एक हफ्ता पहिले ट्रिब्यूनल कै समन्मुख हलफनामे कै माध्यम से अपना जवाब दाखिल करै खातिर नोटिस जारी करौ।”
