
हिंदू धरम मां हर साल कुल चौबीस एकादशी आवत अहैं अउर इन्हैं सबका आपन अलग महातम बा। पै, आश्विन महीना कै किसनच्छ पच्छ मां पड़े वाली ‘इंदिरा एकादशी’ बहुत खास मानि जात अहै। अइसन इहें से अहै काहेकि इ पितरिन से जुड़ी बा। सराद पच्छ के बीच मां आवे के कारन पितृ तर्पण अउर सराद करम बरे इ एकादशी बहुत पबित्र मानि जात अहै। अगर तोहरे घरे मां बेमतलब कै मुसीबत अहैं या तोहरे पितृ दोष के परेसानी से जूझ रहल हव, त इ एकादशी पर दीपक बारे के बहुत ही आसान उपाय तोहरी मदद कइ सकत अहै। इ साल इंदिरा एकादशी कल यानी छह अक्टूबर दो हजार छब्बीस को पड़ रही अहै। आवा जानैं जा कि इ दिन कहॉ-कहॉ दीया बारब सुभ मानि गवा अहै।
पीपल के पेड़ के नीचे करैं इ उपाय
अगर तोहरे पितृ दोष से छुटकारा चाहत हव, त इंदिरा एकादशी कै संझा के पीपल के पेड़ के नीचे तिल के तेल या सुद्ध घी कै दीपक जरूर बारैं। सास्तरो के अनुसार पीपल के पेड़ मां देवता लोगन के वास होत अहै। मान्यता बा कि इ एक उपाय करै से पितृ रिन से आसानी से मुक्ति मिल जात अहै अउर पूरबज लोगन के आतमा के संति अउर तृप्ति मिल जात अहै।
घर के मुख्य दरवाजा से जुड़ा उपाय
एकादशी कै रात के घर के मुख्य दुआर पर एक दीया जरूर बारैं। मान्यता बा कि दुआर पर उजियार देखिकै पितरिन कै आतमा रस्ता नइ भटके न.। इ दीपक घर मां सकरात्मक ऊर्जा लेइ आवत अहै।
घर के रसोई मां करैं इ उपाय
रसोईघर यानी किचेन को मां अन्नपूर्णा कै सबसे पबित्र ठउर मानि गवा अहै। एकादशी कै रात किचेन मां एक दीपक जरूर बारै चाही। इ से पूरबज खुस होत अहैं अउर उनका आसीरबाद मिल जात अहै।
कवनो नदी के किनारे बारैं दीया
पुराणो मां नदिन को देवी कै रूप मानि गवा अहै। इ दिन गंगा, जमुना या कवनो पबित्र नदी के किनारे दीपदान करै से पितरिन को दिब्य लोक कै प्राप्ति होत अहै। मान्यता बा कि अगर तोहरे नदी न मिलै या फिर तोहरे नदी तलक नइ जा सकत हव, त घरे मां ही एक लोटा या कलस मां पानी भरिकै ओकरे लगे दीपक रखि सकत हव।
तुलसी माता के लगे बारैं एक दीपक
श्री हरि को तुलसी सबसे ज्यादा पियारी अहैं। संझा के बेरा तुलसी के पौधा के लगे दीपक लगावै से भगवान बिस्नु बहुत जल्दी प्रसन्न होत अहैं। अउर, जब बिस्नु जी कै किरपा होत अहै, त पितरिन के आतमा को अपने आप संति मिल जात अहै।
मंदिर या देवालय मां करैं दीपदान
तोहरे आस-पास के कवनो भी बिस्नु मंदिर मां जाइकै दीपक जरूर बारैं। इ से अनजाने मां भवा पाप नस्ट होत अहैं। साथ ही, पितरिन को मोच्छ कै रस्ता भी मिल जात अहै।




