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ECI मार्च पर विपक्ष पर बरसे शिवराज सिंह चौहान, कहिन- चुनाव सुधारन कै विरोध बंद करैं

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान मंगलवार कै दिन भारत के चुनाव आयोग (ECI) कय ओर विपक्ष कै मार्च पर कड़ा निशाना साधिन। उ विपक्ष कै नेतान पर आरोप लगइन कि उ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अउर चुनाव प्रक्रिया पर बार-बार सवाल उठाय कै संवैधानिक संस्थाउन कै ‘बदनाम’ करै कै कोशिश कर रहें हैं। चौहान कहिन कि अगर विपक्ष कय अब इ मानब अहै कि मौजूदा सिस्टम कै तहत भवा चुनावन पर भरोसा नाहीं कीनइ जाइ सकत, तौउनकै इ बताए पड़इ कि का केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, पंजाब अउर झारखंड मां उनकर चुनावी जीत भी ‘गैर-कानूनी’ रहा?

शिवराज एक्स पर लिखिन कि इन्है लोकतंत्र कै चिंता नाहीं अहै, हार कै खीज अहै अउर जनादेश कै अपमान करब अहै। सोचिए 19 दल, 3 किलोमीटर कै मार्च, अउर मांग का अहै? कि देश कै बैलेट पेपर कै जमाना मां फेर से लइ जाव। न मशीन चलइ, न मतदाता सूची कै सफाई होइ। खड़गे जी कै तीन ‘नॉन-नेगोशिएबल’ मांगैं, जरा आप सुनिए… “ज्ञानेश कुमार कै इस्तीफा, SIR कै रद्द करब अउर बैलट पेपर पर चुनाव करवाब।” मतलब वही दौर, जब 80-90 कै दशक मां बिहार अउर यूपी मां मतपेटियां लूटी जात रहां, दूसरन् कै नाम पर वोट पड़त रहा। ओही दौर कै फेर से लइ आवै चाहत हैं?

केंद्रीय मंत्री वोटर लिस्ट मां सुधार करै कै ECI कै कवायद कै भी बचाव करिन अउर पूछिन कि मरि गे मइनइ, गैर-नागरिक या एक से ज्यादा जगहन पर रजिस्टर्ड मइनइयन कै नाम वोटर लिस्ट मां काहें रहै चाही? उ आगे कहिन कि फर्जी वोट रोकै बरे चुनाव व्यवस्था मां लगातार सुधार भवा अहै। EVM बूथ लूट पर लगाम लगइस, अउर फोटो वोटर आईडी व सूची कै जांच फर्जी मतदाताउन कै रोकिस। S.I.R. भी सुधार कै इहै कड़ी कै हिस्सा अहै। मृत, डुप्लिकेट अउर जगह छोड़ि चुका नाम सूची से हटैं। जब सूची ही साफ नाहीं होइ, तौ साफ चुनाव कैसि होइ?

चौहान कहिन कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया कै विश्वसनीयता बनाए रखै बरे सही वोटर लिस्ट बहुत जरूरी अहै। उ चेतावनी दीहिन कि संवैधानिक संस्थाउन पर बार-बार सवाल उठाय से चुनावी सिस्टम कै प्रति मइनइयन कै भरोसा कम होइ सकत अहै अउर अस्थिरता पैदा होइ सकत अहै। उ कहिन, "देश कै अस्थिरता अउर अराजकता मां ढकेलै कै पाप न करैं। देश अउर हइयां कै मइनइ कबहू माफ नाहीं करिहैं।"

हालाँकि, विपक्ष कै कहब अहै कि उनकर चिंता सिर्फ अपनी चुनावी हार कै लइके नाहीं अहै, बल्कि वोटर लिस्ट कै निष्पक्षता अउर पारदर्शिता तथा ECI कै कामकाज कै लइके अहै। सुधार कै रास्ता आगे जात अहै, पीछे नाहीं। जनादेश कै सम्मान कीजिए, सुधार कै विरोध नाहीं।

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