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सुप्रीम कोर्ट जंतर-मंतर पर कॉजपा के प्रदर्शन कै स्वतंत्र जांच कै मांग वाली याचिका खारिज कर दिहिन

नयी दिल्ली, नौ अक्टूबर। उच्चतम न्यायालय शुक्रवार कै दिनु उस याचिका कै खारिज कर दिहिन जेहिमां केंद्र, दिल्ली सरकार अउर पुलिस का जुलाई महीना मां जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के अगुवाई मां भवा प्रदर्शन कै स्वतंत्र अउर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करै खातिर निर्देश दै कै अनुरोध कीन गवा रहा। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कॉजपा कर यह प्रदर्शन तबे के केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा के साथ खतम भवा रहा।

शीर्ष अदालत इ अनुरोध का भी स्वीकार करै से मना कर दिहिन कि इ घोषित कीन जाव कि पुलिस भी न्यायपालिका के नियन कानून-व्यवस्था बनाए रखै अउर अपराधों कै जांच करै मां संप्रभु अउर स्वतंत्र रूप से काम करत अहै अउर उकरे कामकाज मां तब तक दखल ना दीन जाव, जब तक उकर कार्रवाई कानून के खिलाफ ना होय।

भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची अउर न्यायमूर्ति वी. मोहना के पीठ जंतर-मंतर पर भवा प्रदर्शनन के संबंध मां दर्ज प्राथमिकी कै जांच से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कीन। याचिका मां केंद्र सरकार, पुलिस आयुक्त, दिल्ली सरकार, कॉजपा के प्रदर्शन से जुड़े मामला मां जनहित याचिका दायर करै वाले शैलेंद्र मणि त्रिपाठी अउर कॉजपा नेता अभिजीत दीपके का पक्षकार बनाइन गवा रहा।

याचिकाकर्ता एल. रामनाथन के तर्फ से हाजिर वकील मैथ्यूज नेदुमपारा असली वादियन के ना होय पर न्यायिक हस्तक्षेप कै मांग करै वाली जनहित याचिका के वैधता पर सवाल उठाइन। उ कहिन कि लोग अदालत मां इहाँ पहुँचत हैं, मानहुं उकर निजी संपत्ति होय।

इ दलीलियन पर प्रतिक्रिया देत हुवे प्रधान न्यायाधीश कुछ प्राथमिकी रद्द करै खातिर संविधान के अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल करै के अदालत के फैसला के बचाव कीन। पीठ कहिन, ‘‘इ बात कै कोई गारंटी ना अहै कि हम हमेशा सौ टका सही आदेश ही पास करीं। आप कहत अहैं कि हमार का अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल करके प्राथमिकी रद्द ना करै का रहा… कृपा करके समझीं, इ युवा छात्र हैं।’’

उ कहिन, ‘‘हमका उनके महतारी-बाप अउर उनके भविष्य के बारे मां भी सोचै का पड़ी। हम नई चाहत कि उनहन का अदालत का रुख करै पड़े… आप विधायकन अउर सांसद्स से जुड़ें मामला मां हमार आदेस नाइ देखेन अहै।’’

हिमाचल प्रदेश कै मिसाल देत हुवे प्रधान न्यायाधीश कहिन कि उहाँ कुछ नेता धरना दिहिन अउर सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान पहुँचाइन। उ कहिन, ‘‘मगर जब कोविड आवा रहा, तबे देश के लोग इ तहर के संकट का झेलै खातिर तैयार ना रहे… एहिसे लोगन अपने हालात के हिसाब से प्रतिक्रिया दीहिन। उच्च न्यायालय प्राथमिकी रद्द करै से मना कर दिहिन रहा, बकि हम उनहन का रद्द करै के छूट दीहिन, काहेकि उ आदतन अपराधी नाइ हैं।’’

पीठ कहिन कि याचिका मां संविधान के अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल करके प्राथमिकी रद्द करै के आदेश कै समीक्षा करै कै अनुरोध कीन गवा रहा। याचिका मां इ घोषित करै कै मांग कीन गवा रहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखै, अपराधों कै जांच करै अउर अपराधीन का न्याय के कटघरे मां खड़ा करै के मामला मां पुलिस का भी स्वतंत्र अधिकार मिला अहै, ठीक वैसेहि जइसे न्याय दै के मामला मां न्यायपालिका स्वतंत्र अहै।

याचिका मां कहा गवा कि जइसे कार्यपालिका न्यायिक कामन मां दखल नाइ देइ सकत, वैसेहि पुलिस के तय अधिकार क्षेत्र मां उकरे कामकाज मां भी दखल ना दीन जाव। फेर, अगर पुलिस कानून के खिलाफ या गलत नीयत से काम करत अहै, तबे दखल दीन जा सकत अहै। अइसन मामला मां तथ्यन से जुड़े विवादित सवालियन पर न्यायिक फैसला कै जरूरत पड़ सकत अहै।

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