
कर्नाटक कै उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भारत कै मुख्य न्यायाधीश (CJI) द्वारा लोकसभा मां विपक्ष कै नेता राहुल गांधी से मिलै से इनकार करै पय तीखा आलोचना कीन्हिस अहै।ऊ कहे कि भारत कै लोगन कै आवाज़ सुनी जानी चाहि अहै अहर विपक्ष के साथ बातचीत न करै खातिर राजनीतिक व्यवस्था कय जवाबदेह ठहराया जाना चाहि अहै। १२ अक्टूबर कै बोलते हुए, शिवकुमार इन प्रयासों कय नागरिकन कै अधिकारन कै सुरक्षा खातिर एक बुनियादी संघर्ष बताए। ऊ कहे कि सार्वजनिक जीवन मां, हम इस देश कै लोकतंत्र अउर हर नागरिक कै वोट देवै कै अधिकार कै बचावै खातिर हर संभव कोशिश करत हैं। वोट देवै कै अधिकार जीने कै अधिकार अहै, अउर इ हमारी ज़िंदगी अहै। इहई वजह से, इ सब चल रहा अहै, इ देश कै आवाज़ अहै, विपक्ष कै नेता कै आवाज़ अहै। लोकतंत्र मां कुछउ संभव अहै।
ऊ आगे कहे कि इस देश कै लोगन कै आवाज़ सुनी जानी चाहि अहै। जब चुनाव आयोग [विपक्ष] से नाहीं मिलत अहै, तौ प्रधानमंत्री कय उनका बुलाकर पूछना चाहि कि ‘आपकी समस्या का अहै?’ शिवकुमार बताए कि गठबंधन CJI से मिलै कै अनुरोध इहई खातिर कीन्हिस काहेकि शिकायतें कय समाधान कै अन्य सभी तरीके नाकाम होइ चुका रहे। ऊ कहे, “जब कोई अउर विकल्प नाहीं बचा, तौ हमें CJI से मिलै कै समय मांगना पड़ा। दुर्भाग्य से, काहेकि इस मुद्दे पय अदालतें बंद हैं, इहई खातिर अदालतें जनहित से जुड़े इन मामलों मां दखल नाहीं देना चाहतीं।”
कांग्रेस सांसद प्रवीण चक्रवर्ती विपक्ष कै नेता से मिलै से CJI कै इनकार पय सवाल उठाते हुए कहे कि CJI विपक्ष कै नेता से मिलै से काहें इनकार करत हैं? का विपक्ष कै नेता (LoP) कै पद संवैधानिक नाहीं अहै? भारत कै मुख्य न्यायाधीश संविधान कै सम्मान करत हैं अउर उसे बनाए रखते हैं… का इ भारत कै संवैधानिक आदर्शों कय बनाए रखने कै मामला नाहीं अहै? किसके कहने पय CJI मिलै से इनकार करत हैं?
बीजेपी प्रवक्ता सी आर केसवन राहुल गांधी पय संवैधानिक संस्थाओं कै राजनीतिकरण करै कै आरोप लगान। ऊ कहे कि राहुल गांधी कै बार-बार हमारी संवैधानिक संस्थाओं – अउर इस बार हमारी न्यायपालिका – कै राजनीतिकरण करै कै अराजक प्रयास, हमारी राष्ट्रीय एकता कय कमजोर करै कै एक खतरनाक साजिश कै सिवाय कुछ अउर नाहीं अहै। लगातार कई राजनीतिक अउर चुनावी हार कै बाद, राहुल गांधी सचमुच अस्थिर अउर मानसिक रूप से असंतुलित होइ गए हैं। अउर इसी हताशा मां, राहुल गांधी अपने विफल राजनीतिक करियर कय बचावै खातिर हमारी संवैधानिक संस्थाओं कय डराने-धमकाने कै कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी हमारे लोकतंत्र कय नुकसान पहुंचावै, कमजोर करै अउर अस्थिर करै कै कोशिश करके हमारे देश अउर हमारे संविधान कै प्रति विश्वासघात कर रहे हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं कय बदनाम करै अउर उनमें जनता कै अविश्वास पैदा करै कै राहुल गांधी कै कोशिश सफल नाहीं होई। इ बुरी तरह विफल होई काहेकि भारत कै समझदार जनता राहुल गांधी कै खतरनाक अउर बांटने वाली राजनीति कय खारिज करइ देई।
