राष्ट्रीय

सीबीआई कै एफआईआर बरकरार, सीएम मान कै ओएसडी कै गिरफ्तारी पै सुप्रीम कोर्ट लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट सोमार कै आदेश दिहिन कि सीनियर अफसरन कै भ्रष्टाचार कै आरोपन कै जाँच कै सिलसिला मां पंजाब सरकार सूं जुड़़े लोगन कै खिलाफ सीबीआई कोनो सख्त कार्रवाई न करै। यह आदेश राज्य सरकार कै उस याचिका पै सुनवाई कै दौरान आवा, जवने मां हाई कोर्ट कै उस निर्देश कै चुनौती दी गवा रहा जवने मां एजेंसी सूं आरोपन कै जाँच करै अउर दुई महीना कै भीतर रिपोर्ट सौंपै कै कहा गवा रहा।

जस्टिस एमएम सुंदरेश अउर पीबी वराले कै बेंच केंद्र, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अउर दूसरन कै नोटिस जारी करिन। अपने आदेश कै स्पष्ट करत भये बेंच कहिन कि “हम एफआईआर पै रोक नाई लगाइ रहे हैं। हम कहत हैं कि कोनो सख्त कार्रवाई नाई की जानी चाहि।”

पंजाब सरकार कै तरफ सूं सीनियर वकील विकास सिंह अउर सिद्धार्थ लूथरा पेश भइहन। पिछिले सोमार कै, पंजाब सरकार वकील निखिल सराफ़ कै याचिका पै पंजाब अउर हरियाणा हाई कोर्ट कै आदेश कै खिलाफ सुप्रीम कोर्ट कय रुख करिन। इन आरोपन मां ट्रांसफर खातिर पइसा कै लेन-देन अउरफायदमंद नीतियन बनवै खातिर पइसा कै इस्तेमाल शामिल अहै।

याचिकाकर्ता कोर्ट कै बताइन कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कै तरफ सूं आम आदमी पार्टी सरकार कै सूचना भेजै कै बादहूँ अबहीं तक कोनो कार्रवाई नाई की गवा बा। यह तर्क दी गवा कि इन आरोपन कै निष्पक्ष जाँच जरूरी अहै काहेकि इनसे राज्य सरकार कै कामकाज पै गंभीर सवाल उठत हैं। हाई कोर्ट पंजाब पुलिस अउर राज्य सरकार कै यहहूँ निर्देश दिहिन रहा कि ऊ इस मामला सूं जुड़े सब दस्तावेज सीबीआई कै सौंप दैं।

कई आधारन पै उस आदेश कै चुनौती देत भये, पंजाब सरकार कहिन कि फैसला मां कुछ गलती रहा; जैसे कि ‘प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट’ कै धारा 66(2) कै तहत शेयर की गवा जानकारी कै अउसा निर्देश मान लेना जवने सूं केस दर्ज करब अनिवार्य होइ जात अहै। सरकार कै कहब रहा कि यह सुप्रीम कोर्ट कै 2022 कै विजय मदनलाल चौधरी केस वाले फैसला कै खिलाफ रहा।

राज्य सरकार यहहूँ कहिन कि हाई कोर्ट कै फैसला मां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कै धारा 17A कै तहत जरूरी मंजूरी लीने बिना सरकारी कर्मचारी द्वारा ट्रांसफर, टेंडर अउर पॉलिसी सूं जुड़े मामलन मां लीने गए फैसला पै एफआईआर दर्ज करै कै निर्देश दी गवा रहा। साथ ही, राज्य कहिन कि फैसला मां ब्यूरो कै इस बात खातिर आलोचना की गवा कि ऊ कोनो मौजूदा अफसर कै जाँच मां शामिल नाई करिन, जबकि अउसी मंजूरी कै बिना ऊ उस अफसर कै खिलाफ कानूनी तौर पै जाँच नाई कर सकत रहिन।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट पंजाब सरकार सूं जुड़े लोगन कै सख्त कार्रवाई सूं सुरक्षा दीहिन अउर एफआईआर कै बरकरार रहै दिहिन।

Related Articles

Back to top button