उत्तरप्रदेश

अग्रगामी दुर्गा पूजा समिति कै पूरा भवा गौरवशाली ३९ साल

अग्रगामी दुर्गा पूजा समिति कै स्थापना साल १९८८ मां सामाजिक एकता, सांस्कृतिक समागम अउर धार्मिक परंपरा कै बढ़ावा देय के उद्देश्य से कीन गवा रहा। बीतल ३९ सालन मां समिति दुर्गा पूजा समेत अलगा-अलगा धार्मिक अउर सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से समाज मां आपन एक खास पहिचान बनउले अहै।

समिति कै स्थापना के सुरुवाती दिनन मां ही भव्य दुर्गा पूजा कै आयोजन कीन गवा रहा। स्थापना कै पहिला साल मां मां दुर्गा कै प्रतिमा कै ऊँचाइ छह फीट से ज्यादा रहा। एकरे बाद लगातार पांच साल धरि काली पूजा कै आयोजन कीन गवा। वर्तमान मां समिति द्वारा हर साल लक्ष्मी पूजा अउर सरस्वती पूजा भी श्रद्धा अउर उमंग के साथ मनाई जात अहै।

साल १९८८ मां, जहाँ वर्तमान मां पायनियर मॉन्टेसरी स्कूल अउर कल्याण मंडप स्थित अहै, सेक्टर एक, विकास नगर मां समिति कै पहिली दुर्गा पूजा कै आयोजन कीन गवा रहा। समिति के संस्थापक सदस्यन मां स्वर्गीय जी. डी. भट्टाचार्य, स्वर्गीय चिन्मय नियोगी, स्वर्गीय एच. जी. नाथ, स्वर्गीय दीपक चक्रवर्ती, स्वर्गीय प्रदीप चौधरी, श्री दिलीप कुमार मित्रा अउर श्री कांति प्रसाद चक्रवर्ती समेत अउर सम्मानित सदस्य शामिल रहेन। एह सबन के योगदान समिति कै नींव मजबूत बनावय मां महत्वपूर्ण भूमिका निभावै।

समय के साथ रोजगार अउर दूसर कारनन से समिति के कईगो सदस्य शहर छोड़िकेत चला गएन। एकरे परिणामस्वरुप पूजा कै आयोजन कै स्वरूप पहिलके तुलना मां सीमित होइ गवा। एकरे बादो समिति के सदस्य आपन परंपरा अउर सांस्कृतिक विरासत के जियावत रखै खतिर लगातार कोशिश करत अहैं।

पिछला छह साल से समिति द्वारा विकास नगर स्थित हरी गृह गेस्ट हाउस मां दुर्गा पूजा कै आयोजन कीन जात अहै। इहाँ से छेत्र के लोगन के एक साथ आवा, मां दुर्गा कै आराधना करै अउर आपसी मेल-मिलाप अउर भाईचारा के मजबूत करै कै मौका मिलत अहै।

समिति कै उद्देश्य खाली धार्मिक आयोजन करै भर नाय, बल्कि समाज के लोगन के एक मंच पर लइआवना अउर सामाजिक अउर सांस्कृतिक एकजुटता के बढ़ावा देय अहै। समिति सब्भे लोगन से सहयोग कै अपील करत अहै, जइसे आवै वाला सालन मां भी मां दुर्गा कै पूजा-पाठ ओही श्रद्धा, उमंग अउर समर्पण के साथ जारी राखल जा सके।

अग्रगामी दुर्गा पूजा समिति कै संकल्प अहै कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत अउर मां दुर्गा के प्रति आस्था कै इहे परंपरा आवै वाली पीढ़ियन तक लगातार आगे बढ़त रहे।

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