भोपाल, २९ सितंबर। भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी कय कहब बा कि राजभाषा हिंदी कै सरकारी फाईलन से आगे बढ़ावय कै डिजिटल भारत के डिजिटल जीवन की भाषा बनावब पड़ी। आज हिंदी के प्रयोग दायरा प्रशासन से निकरि कै कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल मीडिया, विज्ञान, शिक्षा, बैंकिंग अउर ई-कॉमर्स तक पहुँच चुका बा। केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा आयोजित ‘राजभाषा हिंदी के आधुनिक प्रयोग’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम मा अध्यक्षीय भाषण देत भइले प्रो. द्विवेदी कहिन कि ई-गवर्नेंस के दौर मा सरकारी पोर्टल, मोबाइल एप अउर ऑनलाइन सेवाइन मा सरल हिंदी के प्रयोग शासन कै अउर नागरिक-केंद्रित बनाइ सकत बा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर पूरन चंद टंडन रहिन। संचालन केशरीनंदन करिन। इ मौके पर संस्थान के परियोजना विभाग के अध्यक्ष प्रो. धनजी प्रसाद उपस्थित रहिन।
प्रो. संजय द्विवेदी कहिन कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता हिंदी खातिर बड़का अवसर बा। मशीन अनुवाद, वॉइस टेक्नोलॉजी, स्पीच-टू-टेक्स्ट अउर जनरेटिव एआई मा हिंदी की प्रभावी उपस्थिति खातिर डिजिटल कॉर्पस, शब्दकोश अउर आधुनिक भाषा-संसाधनन के विकास बहुत जरूरी बा।
प्रो. द्विवेदी कहिन कि हिंदी कै विज्ञान, तकनीक अउर उच्च शिक्षा की भाषा के रूप मा मजबूत करै के साथ-साथ डिजिटल पत्रकारिता, सोशल मीडिया, पॉडकास्ट अउर कंटेंट निर्माण मा भी एकरे संभावनाइन कै विस्तार करवब पड़ी। ऊ प्रशासनिक हिंदी मा सरलता, स्पष्टता अउर व्यावहारिकता कै प्राथमिकता देवै की बात कहिन।
प्रो. द्विवेदी के मुताबिक हिंदी कै अउर भारतीय भाषाइन के बीच संवाद अउर ज्ञान-विनिमय कै सेतु बनै के चाही। हिंदी कै भविष्य खाली सरकारी कामकाज मा एकरे प्रयोग से नाहीं, बल्कि नई तकनीक अउर नया ज्ञान की दुनिया मा एकरे उपस्थिति से तय होई।
कार्यक्रम मा डा. चंद्रलेखा पुरोहित, डा. मेनका चौधरी, डा. कुसुमलता पुरोहित, डा. एस.सुभा अउर निवेदिता सिंह अपने शोध पत्र प्रस्तुत करिन।
