पूर्व अर्द्धसैनिक कर्मियों कै एक एसोसिएशन सरकार से सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) कै लगभग उन 400 जवानों कय बुधवार कय बहाल करै कय अपील करिन, जेन्हूं फर्जी कौशल प्रमाणपत्रों कै नाते सेवा कै दुइ साल पूरा भवा कै बाद ही बर्खास्त कर दीहिन रहा। इन जवानों कय रसोइये अउर जलवाहक कै पदों पर भर्ती कीन गवा रहा। ये जवान 2023-24 कै दौरान केंद्र सरकार की ओर से आयोजित रोजगार मेले के माध्यम से देश के सबसे बड़े सीमा सुरक्षा बल मां शामिल भए रहे। रसोइया, जलवाहक अउर वेटर कै पदों पर कांस्टेबल के रूप में शामिल होने के बाद, उनसे राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) प्रमाणपत्र जमा करै कय कहा गवा। बाद मां जांच कै दौरान बीएसएफ इन प्रमाणपत्रों कय फर्जी पाविस। बीएसएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ‘पीटीआई-भाषा’ कय बताए कि कौशल प्रमाणपत्र ‘‘अनुचित’’ पाए जाने के बाद इन कर्मियों कय ‘‘उचित प्रक्रिया’’ क पालन करत हुए सेवा से बर्खास्त कीन गवा।
‘द एलायंस ऑफ ऑल एक्स-पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन’ (एएपीडब्ल्यूए) यहां संवाददाता सम्मेलन आयोजित करिन अउर दावा करिन कि इन कर्मियों कय काहू तरे कै ‘कारण बताओ नोटिस’ दिए बिना ही सेवा से बर्खास्त कर दीहिन गवा। एएपीडब्ल्यूए के अध्यक्ष अउर सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त अतिरिक्त महानिदेशक एच आर सिंह कहिन, ‘‘बीएसएफ लगभग 400 कर्मियों के कौशल प्रमाणपत्रों कय फर्जी पाविस। ये युवा जवानों जालसाजी नाहीं कीन रहे; वे साइबर धोखाधड़ी के शिकार अहैं, काहेकि एक व्यक्ति उनका भर्ती के समय फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराई रहा।’’
उन्हूं कहिन, ‘‘कथित धोखाधड़ी करै वाले व्यक्ति के खिलाफ झारखंड पुलिस मामला दर्ज कई लिहिस है।’’ सिंह कहिन कि केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय अउर बीएसएफ कय ‘‘समग्र अउर मानवीय दृष्टिकोण’’ अपनावचाहिए अउर इन जवानों कय बहाल करैचाहिए, काहेकि उनके परिवारों की जिम्मेदारी उनके ऊपर बा अउर कुछ पर कर्ज भी बा, जेकै उनका भुगतान करै अहै।
उन्हूं कहिन, ‘‘सरकार के पास इन जवानों कय बहाल करै कै अधिकार बा… हम सब जानत हई कि नौकरी मिलब बहुत कठिन बा अउर इन कर्मियों के साथ सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार कीन जावचाहिए।’’
बीएसएफ की 135वीं बटालियन से बर्खास्त किए गए कांस्टेबल गौरव कुमार ‘पीटीआई-भाषा’ कय बताए कि उहें अउर उनके जैसे अन्य कर्मियों बेदाग सेवा दीहिन अहै। उहें कहिन कि उनमें से कईयन्कय बढ़िया खाना बनावब अउर परोसब कै कौशल खातिर उनके वरिष्ठ अधिकारियों पुरस्कृत भी कीन रहे। कुमार कहिन, ‘‘हम सरकार से अनुरोध करत हई कि हमार नौकरियां बरकरार रखी जाव, जौन हम अपनी योग्यता के आधार पर पइने रहे। हम काहू तरे कै धोखाधड़ी या जालसाजी नाहीं कीन हई।’’
एएपीडब्ल्यूए के महासचिव रणबीर सिंह कहिन कि अइसन फर्जी प्रमाणपत्रों वाले कर्मियों की पहचान होने के बावजूद दुइ मामलों मां वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उनका बल मां बने रहै की अनुमति दीहिन गवा।
उन्हूं कहिन, ‘‘ये देश के प्रशिक्षित जवान अहैं। उहें अपनी दक्षता साबित कई लिहिन अहै अउर केवल प्रमाणपत्र मां भई गड़बड़ी के कारण उनका बेसहारा नाहीं छोड़ा जावचाहिए।’’
एसोसिएशन कहिन कि यदि उनकी मांग पूरी नाहीं कीन गवा तौ उनके सदस्य अउर प्रभावित जवान नौ अक्टूबर कय जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से धरना देइहीं।
