उच्चतम न्यायालय शुक्रवार कै दिन फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड कै ओ याचिका खारिज करिदिहिन, जेहमां कंपनी अउर ओकर पुरान प्रवतकन कै लेन-देन कै जांच (फॉरेंसिक ऑडिट) संबंधी आदेश के चुनौती दी गई रहा। इ जांच कथित तौर पर जापानी दवा कंपनी दाइची सैंक्यो कै हक मां निर्गत 3,500 करोड़ रुपिया कै हर्जाना से जुड़ा अहै।
दिल्ली उच्च न्यायालय 31 अगस्त कै दिन फोर्टिस अउर ओकर पुरान प्रवतकन – मलविंदर मोहन सिंह अउर शिविंदर मोहन सिंह – कै लेन-देन कै जांच कराय कै आदेश दिहिन रहा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची अउर न्यायमूर्ति वी. मोहना कै पीठ फोर्टिस हेल्थकेयर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करत रहा अउर इ उच्च न्यायालय कै आदेश मां हस्तक्षेप करै से इनकार करिदिहिन।
पीठ कहिन, ‘‘हमका दिल्ली उच्च न्यायालय कै संबंधित फैसला मां हस्तक्षेप करै कााई कारण नजर नाइ आवत अहै।’’ शीर्ष अदालत इहो कहिन कि फोर्टिस के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय कै ओ टिप्पणी, जेहमां फॉरेंसिक ऑडिट का उचित ठहराया गया अहै, खाली अस्थायी अउर प्रथमदृष्टया अहै।
अदालत फोर्टिस कै तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी अउर दाइची सैंक्यो कै तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी कै दलील सुनै कै बाद इ आदेश पारित करिन। वरिष्ठ अधिवक्ता सिंघवी अदालत के सामने दलील दिहिन कि ओकर मुवक्किल का न तौ कबो इ मामले मां पक्षकार बनाया गया अउर न ही मध्यस्थ बनाया गया, फेर ओकर साथ ऋणी कै रूप मां व्यवहार कीन जात अहै।
इ याचिका मां दिल्ली उच्च न्यायालय कै 31 अगस्त कै दिहल गे ओ आदेश के चुनौती दी गई रहा, जौन ‘दाइची सैंक्यो कंपनी लिमिटेड बनाम मलविंदर मोहन सिंह अउर अन्य’ मामले मां पारित कीन गवा रहा। उच्च न्यायालय आपन फैसला मां दाइची कै ओ अर्जी मंजूर करिदिहिन रहा, जेहमां फोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड (एफएचएल), सिंह बंधुअन अउर अन्य के बीच भवा लेनदेन कै जांच खातिर ‘फॉरेंसिक ऑडिटर’ नियुक्त करै कै अपील कीन गई रहा।
अदालत फॉरेंसिक ऑडिट खातिर एस. रामानंद अय्यर एंड कंपनी का नियुक्त करिन अउर छह महीना के भीतर जांच पूरा करै कै निर्देश दिहिन।
