
दिल्ली हाई कोर्ट कहिस अहै कि रामलीला अउर दूसर सांस्कृतिक या धार्मिक करवर कै नाते पब्लिक ग्राउंड अलॉट करै कै आधार सिर्फ़ पहिले आओ, पहिले पाओ (first come, first served) वाली पॉलिसी ना होइ सकत। कोर्ट कहिस कि इ तौर-तरीके से आवेदन करै वाले बरे असमान मौका बन सकत अहै अउर इ संवैधानिक निष्पक्षता कै जरूरत का अपने-आप पूरा ना करत।
जस्टिस अमित महाजन कहिस कि पब्लिक सुविधा कै नाते सबसे पहिले आवेदन करै वाले कै दावा ही सबसे मजबूत होय, इ जरूरी ना अहै। उ दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) का निर्देश दीहिन कि उ अपने मौजूदा निर्देश कै समीक्षा करै अउर ग्राउंड अलॉटमेंट कै नाते व्यापक सालाना गाइडलाइंस बनावै। कोर्ट कहिस, कोनो मानदंड कै निश्चित होय अउर ओकर तर्कसंगत होय दुई अलग-अलग बात अहै। कोर्ट इ भी कहिस कि कोनो पॉलिसी का सिर्फ़ इ नाते सही ना ठहराया जा सकत कि आवेदन मिलै कै तारीख अउर समय कै पता आसानी से लगाया जा सकत अहै।
कोर्ट कहिस कि ‘पहिले आओ, पहिले पाओ’ कै तरीका से “जानकारी पावैक एक असमान होड़” पैदा होइ सकत। इ से उ आवेदन करै वाले का फायदा मिल सकत अहै जिकर प्रशासनिक जानकारी तक विशेष पहुंच अहै, जैसे कि सार्वजनिक मैदान कै उपलब्धता कै बारे मा जानकारी। इ टिप्पणी ‘रेज ऑफ़ न्यू बिगिनिंग फाउंडेशन’ कै याचिका पर सुनवाई कै दौरान कीन गवा।
फाउंडेशन पश्चिमी दिल्ली कै राजा गार्डन मा शिवाजी प्लेस स्थित ‘चंक-सी ग्राउंड’ का अपने सालाना रामलीला-दशहरा महोत्सव कै नाते आवंटित करै कै अपने आवेदन का खारिज कीन जाब कै चुनौती दिहिस। हालांकि कोर्ट मौजूदा आवंटन का रद्द करै या 2026 कै उत्सव कै नाते मैदान याचिकाकर्ता का सौंपै से मना कर दिहिस, पै उ अधिकारियन का भविष्य कै आवंटन कै नाते एक पारदर्शी अउर व्यवस्थित प्रक्रिया शुरू करै कै निर्देश दीहिन।
इ निर्देश कै तहत, पहिले तय कार्यक्रम से कम से कम 90 दिन पहिले एक सालाना साइट-आवंटन नोटिस जारी कीन जाब चाइए। इ नोटिस मा उपलब्ध मैदान, बुकिंग कै तारीख, पात्रता कै शर्त, मूल्यांकन कै मानदंड, लागू शुल्क अउर आपत्ति दर्ज करवै कै प्रक्रिया कै जानकारी होय चाइए।
एक ही जगह अउर बुकिंग कै समय कै नाते आवेदन आम तौर पर एक तय समय-सीमा कै भीतर ही मंगाया जाब चाइए। जब ढेर सारा योग्य आवेदक एक ही मैदान कै नाते आवेदन करैं, तिकर दावा कै जांच पहिले से तय अउर पब्लिश कीन गए स्कोरिंग मैट्रिक्स या दूसर पारदर्शी तरीका से कीन जाब चाइए। गाइडलाइंस मा शिकायत दूर करै कै सिस्टम भी होय चाइए अउर इ पक्का करै चाइए कि इवेंट शुरू होवै से बहुत पहिले ही अलॉटमेंट अउर आम शिकायत से जुड़ल प्रक्रिया पूरा होइ जाव।
कोर्ट उ संगठनन का बार-बार वही मैदान अलॉट करके असल मा एकाधिकार (monopoly) बनावै कै खिलाफ चेतावनी दीहिन, जे पिछले सालन मा हुवां कार्यक्रम आयोजित कीन रेहिन। कोर्ट कहिस कि निरंतरता अउर अनुभव अहम बात होइ सकत अहै, पै दूसर दावेदारन कै दावा का नजरअंदाज करके सिर्फ़ इहे कै आधार पर फैसला ना कीन जाब चाइए। कोर्ट कहिस कि नियम का ठीक से पालन करै वाले संगठन का थोड़िका प्राथमिकता मिल सकत अहै, पै अइसे प्राथमिकता से अलॉटमेंट कै कोनो पक्का अधिकार ना बन जात।
