नयी दिल्ली: सात अक्टूबर। दिल्ली उच्च न्यायालय एक मामला मां कथित तौर पर तथ्य के रूप से गलत बयान देय के खातिर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पांच अधिकारीन के खिलाफ मजिस्ट्रेट अदालत के सामने झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू करै का निर्देश दिहिन बा।
न्यायमूर्ति मधु जैन छह अक्टूबर का पारित आदेश मां कहिन कि प्रथम दृष्टया सीबीआई अधिकारीन अउर विशेष लोक अभियोजक 2016 मां दाखिल एक जवाब का ‘‘तैयार करै, ओहू मां बदलाव करै, ओकर जांच, प्रक्रिया, मंजूरी या दाखिल करै’’ मां हिस्सा लिहिन रहा।
इ जवाब मां आय से अधिक संपत्ति अर्जित करै के मामला मां पूर्व आईआरएस अधिकारी के खिलाफ आगे कानूनी कार्यवाही करै के खातिर विधि मंत्रालय के साथ ‘पत्राचार’ होय के गलत दावा किहिन गवा रहा, जबकि अधिकारीन का ‘वास्तविक स्थिति’ की जानकारी राही कि इ मामला एजेंसी के स्तर पर सिर्फ आंतरिक विचार-विमर्श के चरण मां रहा।
एक निचली अदालत 2016 मां पूर्व आईआरएस अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल का वैध मंजूरी न होय के आधार पर मामला से मुक्त करि दिहिन रहा। एक बाद ओहू जब्त दस्तावेज का वापस की जाय के मांग करत हुए एक आवेदन दाखिल किहिन रहा।
सीबीआई आवेदन के जवाब मां निचली अदालत मां दावा किहिन रहा कि मामला मां आगे कानूनी कार्यवाही के संबंध मां प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार ‘जारी’ बा अउर एहिसे इ स्तर पर जब्त दस्तावेज का वापस करब उचित न होई।
न्यायमूर्ति जैन अधिकारीन के खिलाफ अग्रवाल के याचिका पर झूठी गवाही की कार्यवाही करै से इनकार करै संबंधी निचली अदालत के आदेश का खारिज करि दिहिन।
अदालत कहिन कि सीबीआई का आपन आंतरिक प्रस्ताव का मंत्रालय के साथ पत्राचार के रूप मां पेश करै के कउनो अधिकार नाहीं रहा। अदालत कहिन कि मंत्रालय पहिले ही इ राय देइ चुका रहा कि उच्चतर मंच के सामने मामला का आगे बढ़ाव के खातिर कउनो उचित आधार नाहीं नजर आवत बा।
अदालत कहिन, ‘‘वर्तमान मामला मां जारी पत्राचार के संबंध मां कीन गए दावा के इस्तेमाल अपीलकर्ता के अनुरोध का विरोध करै अउर ओकर दस्तावेज का आपन पास बनाए रखै के खातिर तथ्यात्मक आधार के रूप मां कीन गवा। जवाब का तैयार करै, ओहू मां बदलाव करै, ओकर जांच, प्रक्रिया, मंजूरी अउर दाखिल करै से संबंधित कारज के साथ-साथ पहिले के मसौदा अउर फाइल मां दर्ज टिप्पणी से सामने आई जानकारी प्रथम दृष्टया इ मानै के उचित आधार देवत बा कि संबंधित अधिकारीन अइसन दावा का आगे बढ़ाव मां भाग लिहिन, जेकर मौजूदा स्थिति के विपरीत होय के उनके जानकारी राही।’’
अदालत कहिन कि अग्रवाल द्वारा विशेष न्यायाधीश के सामने दायर दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 340 के तहत आवेदन स्वीकार की जात बा।
अदालत विशेष न्यायाधीश का निर्देश दिहिन कि उ सुशील दीवान, विनीत विनायक, अमित कुमार, रमन त्यागी, प्रेम कुमार गौतम अउर मोहम्मद आजाद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 191 के साथ धारा 193 तथा धारा 209 के तहत कथित अपराध के खातिर लिखित शिकायत दर्ज करैं अउर फैसला की प्रति मिलै की तारीख से चार सप्ताह के भीतर इ संबंधित क्षेत्राधिकार वाली मजिस्ट्रेट अदालत का भेजैं।
उच्च न्यायालय स्पष्ट किहिन कि निचली अदालत इ मामला मां स्वतंत्र रूप से कार्यवाही करि अउर ओकर सामने मामला की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की कउनो टिप्पणी से प्रभावित नाहीं होई।
