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भारतीय नौसेना मां शामिल भवा एंटी सबमरीन वॉरशिप मंगरोल, तटीय सुरक्षा होई मजबूत

भारतीय नौसेना कै उथले समुद्री क्षेत्र मां चले वाले तीसर पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) ‘मंगरोल’ कै सोमचर कोइ यहाँ बेड़े मां शामिल कीन्ह गवा। इहइ से नौसेना कै पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता मजबूत होवे कै उम्मीद बा। खासकर तटीय समुद्री क्षेत्रन मां, जहवाँ बड़े युद्धपोतन का संचालन संबंधी सीमाकन का सामना करै परता है।

कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) द्वारा निर्मित इ पोत समुद्री गश्ती विमानन, हेलीकॉप्टरन अव अन्य युद्धपोतन कै साथ मिलकर काम कर सकत है। इ दुश्मन कै पनडुब्बियन का पता लगावे अव उनके खतरा से निपटे मां सक्षम अहै। इ पोत कै नौसेना मां शामिल होवे से बंदरगाहन, समुद्री पत्तनान अव तटीय समुद्री मारगन कै सुरक्षा करै कै नौसेना कै क्षमता बढ़ी। एकरे साथै, इ बेड़े कै व्यापक अभियानन मां भी मदद करी।

बदलते समुद्री सुरक्षा परिदृश्य मां पानी कै भीतर से बढ़ते खतराकन कै बीच ‘मंगरोल’ का नौसेना मां शामिल करब ओकर पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता का मजबूत करै कै दिशा मां एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अहै खासकर तटीय समुद्री क्षेत्रन मां एकर अहम भूमिका होई। इ पोत का नौसेना मां शामिल कीन्ह जबब भारत कै बढ़ती स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमता का भी दर्शावत है।

इ अवसर पर पश्चिमी नौसेना कमान कै फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल संजय वत्सायन मुख्य अतिथि कै रूप मां उपस्थित रहें। इ पोत कै नाम गुजरात कै जूनागढ़ जिला कै तटीय शहर अव मछरी धरे वाले प्रमुख बंदरगाह मंगरोल कै नाम पर रख्खा गवा बा। इ पोत पूर्ववर्ती आईएनएस मंगरोल (एम85) कै विरासत का आगे बढ़ावत है। पूर्ववर्ती पोत एक बारूदी सुरंग-रोधी पोत राह्य, जउन अप्रैल 2004 तक भारतीय नौसेना मां सेवा दीन्ह राह्य। इ नवा पोत कै नामकरण नौसेना कै उस परंपरा का जारी राखत है, जिके तहत ओकर पूर्ववर्ती युद्धपोतन कै विरासत का संरक्षित कीन्ह जाटा है।

नौसेना बताइस कि 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री से निर्मित ‘मंगरोल’ युद्धपोतन कै डिजाइन, निर्माण तथा उन्नत हथियारन अव सेंसरन का एकीकृत करै कै भारत कै बढ़ती क्षमता का दर्शावत है। तटीय अव कम गहराई वाले समुद्री क्षेत्रन मां पानी कै भीतर मौजूद खतराकन का पता लगावे अव उनसे निपटे खातिर तैयार ‘मंगरोल’ आधुनिक हथियारन अव सेंसरन से लैस अहै। इन्हन मां ‘अभय’ हल-माउंटेड सोनार, हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर अव ‘मारीच’ उन्नत टॉरपीडो डिकॉय प्रणाली शामिल अहै।

तीन डीजल इंजनन अव वॉटरजेट प्रणोदन प्रणाली से संचालित इ पोत उथले समुद्री क्षेत्रन मां बेहद कुशलता से दिशा बदले अव संचालन करै मां सक्षम अहै। इ पानी कै भीतर निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानन अव बारूदी सुरंगन से जुड़े अभियानन का अंजाम दै मां भी सक्षम अहै।

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