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भारतीय रेलवे मां यात्री लोकोमोटिव की कमी, मालगाड़ी के इंजन से चलाई जा रहीं ट्रेनें

(जीवन प्रकाश शर्मा) नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर: यात्री ट्रेनन कै बरे लोकोमोटिव (इंजन) की कमी कै नाते रेलवे का कम गति वाले मालगाड़ी इंजनन का इस्तेमाल करै का पड़ रहा अहै, जवसे कई यात्री ट्रेनन का कई घंटा तक देरी का सामना करै पड़ रहा अहै। रेलवे कै रिकॉर्ड से इ जानकारी सामने आई अहै। हालांकि, रेल मंत्रालय कहलस अहै कि इंजन कै उत्पादन बढ़ावैक प्रयास तेज कीन गए अहैं। मंत्रालय 2026-27 मां 492 अउर 2027-28 मां 187 यात्री ट्रेन लोकोमोटिव कै उत्पादन का मंजूरी दीहिन अहै।

मंत्रालय कै एक वरिष्ठ अधिकारी बताइन, “2026-27 कै कार्यक्रम मां 326 डब्ल्यूएपी-7 अउर 166 डब्ल्यूएपी-7 लोकोमोटिव शामिल अहैं। उत्पादन कै बरे पहिले से चल रही इ परियोजनाहन के अलावा आधुनिक ट्रेनसेट का तेजी से अपनावा जा रहा अहै अउर मौजूदा संपत्तियन कै इस्तेमाल मां सुधार भी कीन जा रहा अहै।”

उ कहिन कि पिछला 12 सालन मां ट्रेन संचालन मां कई गुना बढ़ोतरी भवा अहै अउर भारतीय रेलवे यात्रीमन कै हर वर्ग के बरे आरामदेह अउर सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करैक हरसंभव प्रयास कर रहा अहै।

आधिकारिक रिकॉर्ड कै मुताबिक, कई मामलाहन मां यात्री ट्रेनन के बरे कोचिंग लोकोमोटिव की कमी कै नाते उनकन का कम गति वाले मालगाड़ी इंजनन से चलावैक पड़ा। इहें से ट्रेनन के संचालन समय का नुकसान भवा अउर देरी भई। अधिकारियन इहो बताइन कि देश के अलग-अलग रेलवे जोन से हर महीना औसतन 80 से 100 अइसे मामला सामने आवत अहैं।

रिकॉर्ड के अनुसार, हाल के एक मामला मां ट्रेन संख्या 11044 (बलिया-दादर सेंट्रल एक्सप्रेस) का संचालन 3 सितंबर, 2026 का जरूरी कोचिंग लोकोमोटिव ना मिलैक नाते 5 घंटा 28 मिनट प्रभावित भवा। इ ट्रेन मां डब्ल्यूएपी-4 यात्री इंजन लगावा जावक रहा, जेकर गति 130 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा अहै। पै कोचिंग लोकोमोटिव ना मिलैक कारण पूर्वोत्तर रेलवे जोन 100 किलोमीटर प्रति घंटा की क्षमता वाला मालगाड़ी इंजन उपलब्ध कराई दिहिस।

सूत्र कहिन, “एकर बाद बीना-खंडवा खंड मां 13:26 बजे से 00:59 बजे के बीच ट्रेन के संचालन समय मां नुकसान भवा। इ घटना के कारण 328 मिनट (5 घंटा 28 मिनट) की देरी दर्ज कीन गई।”

सितंबर 2026 के आंकड़ा के अनुसार, भारतीय रेलवे के पास लगभग 17,900 लोकोमोटिव अहैं, जवमां करीब 13,700 इलेक्ट्रिक अउर लगभग 4,200 डीजल इंजन अहैं। करीब 13,700 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव मां से लगभग 3,400 यात्री ट्रेनन के बरे इस्तेमाल होत अहैं। जवमां वाइड/ब्रॉड गेज एसी श्रेणी के अलग-अलग डब्ल्यूएपी लोकोमोटिव शामिल अहैं। बाकी मालगाड़ी अउर दूसर संचालन जरूरतन के बरे इस्तेमाल होवैक वाला डब्ल्यूएजी श्रेणी के लोकोमोटिव अहैं।

करीब 4,200 डीजल लोकोमोटिव मां से 284 का इस्तेमाल यात्री ट्रेनन के बरे कीन जात अहै, जबकि ज्यादातर का इस्तेमाल मालगाड़ी, शंटिंग, विभागीय अउर दूसर काजमन मां होत अहै।

भारतीय रेलवे के आंकड़ा के मुताबिक, 2013-14 मां ओकर पास 5,633 डीजल अउर 4,823 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव रहे, यानी कुल 10,456 लोकोमोटिव रहे। जवमां 4,823 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव मां से 1,371 यात्री लोकोमोटिव रहे। हालांकि, 2013-14 के आंकड़ा मां डीजल यात्री लोकोमोटिव की कुल संख्या का जिक्र नाहीं अहै।

अधिकारियन कहिन कि 2014 के बाद रेलवे विद्युतीकरण की गति बढ़ैक साथ डीजल लोकोमोटिव कै उत्पादन धीरे-धीरे कम भवा अउर इलेक्ट्रिक इंजनन कै उत्पादन का गति मिलिस।

देश के लगभग सब रेलवे जोन से यात्री ट्रेनन मां मालगाड़ी के इंजनन के इस्तेमाल के कई दूसर मामला भी सामने आए अहैं। 21 सितंबर, 2026 का कम से कम दुई यात्री ट्रेनन का 100 किलोमीटर प्रति घंटा की क्षमता वाला डब्ल्यूएजी-9 मालगाड़ी इंजनन से चलावैक मामला सामने आवा। अइसा ज्यादा गति क्षमता वाले कोचिंग लोकोमोटिव की कमी के नाते कीन गवा।

इन्हों मां से एक मामला मां ट्रेन संख्या 14102 (कानपुर सेंट्रल-प्रयागराज संगम इंटरसिटी एक्सप्रेस) मां 100 किलोमीटर प्रति घंटा की क्षमता वाला डब्ल्यूएजी-9 मालगाड़ी इंजन लगावा गवा। सूत्र कहिन कि तय कार्यक्रम के मुताबिक, इ ट्रेन मां डब्ल्यूएपी-1 इंजन लगावा जावक रहा, जेकर अधिकतम गति क्षमता 130 किलोमीटर प्रति घंटा अहै।

रेलवे के एक सूत्र कहिन, “यात्री लोकोमोटिव की कमी के नाते रेलवे प्रशासन का ओकर जगह मालगाड़ी के इंजन लगावक पड़त अहै। इहें से उन खंडन मां कम से कम 30 मिनट की देरी भई, जहवां गति सीमा 130 किलोमीटर प्रति घंटा रहा, काहेकि ट्रेन का 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलै का पड़ा।”

एक वरिष्ठ क्षेत्रीय रेलवे अधिकारी कहिन, “पिछला 12 सालन मां लोकोमोटिव कै उत्पादन कई गुना बढ़ा अहै। हालांकि, 2014 से पहिले कई जरूरी निर्माण काजमन की सालोसाल उपेक्षा होवैक नाते लोकोमोटिव, वैगन अउर कोच की भारी कमी पैदा होइ गवा रहा, जेकर भरपाई समय के साथ कर ली जाई।”

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