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संवैधानिक अधिकार नाइ अहै, बल्कि अब उनके परिवार कै अहंकार बोलत अहै, राहुल गांधी पय बरसिन सुधांशु त्रिवेदी

बीजेपी कै राष्ट्रीय प्रवक्ता अउर सांसद सुधांशु त्रिवेदी राहुल गांधी पय निशाना साधिन अहै। वहिन कहिन कि कांग्रेस कै पहिला परिवार दिल्ली कै सड़कन पय जो कुछउ किहिस, ओहू बहुत दुर्भाग्यपूर्ण अउर निंदनीय अहै। इहिसे एकदम साफ होइ जात अहै कि उनके संविधान से कानों नाता नाइ अहै; उनके बस अराजकता से मतलब बा। एकर सुबूत इ बात से मिलत अहै कि जब चुनाव आयोग (EC) उनके मिलै खातिर तइयार रहा, तौ वेउ उनके मिलै खातिर तइयार रहें। संविधान कहत अहै कि EC, CJI या CAG का कानों सवाल कै जवाब देइ खातिर संसद में नाइ बोलाइ जाइ सकत।

राहुल पय हमला जारी रखत वे कहिन कि फेर वे (विपक्ष कै नेता) कहत अहैं कि उनके अप्पन पार्टी कै सांसडन कै सामने पेश होइच चाही। एकर मतलब इ अहै कि इ कानों संवैधानिक अधिकार नाइ अहै, बल्कि अब उनके परिवार कै अहंकार बोलत अहै। हम कांग्रेस पार्टी से कहब चाहत हियै कि SP उनके उत्तर प्रदेश में 50 सीट कै लायक समझत अहै अउर उनके इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पय 50 घंटा कै पब्लिसिटी मिलि चुका अहै। सच तौ इ अहै कि उनके सहयोगी उनके उति सीट देइ कै लायक नाइ समझत, जित्ति उनके इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पय पब्लिसिटी मिलि अहै।

जहाँ तक चुनाव कै बात अहै, अधीर रंजन चौधरी कहिन रहा कि बंगाल में लोकतंत्र नाइ अहै अउर ममता बनर्जी कै शासन में कांग्रेस कार्यकर्ताइन कै हत्या होत बा। बीजेपी नेता सवाल किहिस कि हम इ ड्रामा करइ वारे लोगन से पूछब चाहत हियै कि वे अप्पन ही कार्यकर्ताइन कै लासन पय गोड़ रखिके चलत रहें अउर दिल्ली में कहत रहें, ‘लोकतंत्र बचावै खातिर हमार ममता कै जरूरत बा।’ का रउवा उबे सही रहव या अब? रउवा अराजकता में भरोसा करब चाहत हियै, संविधान में नाइ। इ संवैधानिक अधिकार नाइ, बल्कि रउवा परिवार कै अहंकार अहै। इ साफ अहै कि ‘दिमागी नक्सल’ कांग्रेस, जवन जनता कै जनादेश गँवा चुका अहै, कै पास अब बस एक ही रस्ता बचल बा – मीडिया कै सुर्खी में आवै अउर अराजकता चुनै।

बीजेपी कै राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन विपक्ष अउर विपक्ष कै नेता राहुल गांधी पय निशाना साधिन अहै। वहिन कहिन कि इ देश कै विपक्ष कै नेता अराजकता कै माहौल में असामाजिक तत्वन कै साथ मिलिके काम करत अहैं। हम उनके साफ-साफ कहब चाहत हियै कि भारत कै जनता उनके मकसद अउर इरादा का कबहूँ हकीकत नाइ बनै देइ। वे हमेशा उ लोगन कै परवाह किहिन जवन इहाँ कै जनता कै अधिकार छीनत अहैं। वे असामाजिक तत्वन कै मदद से दिल्ली में अराजकता फैलावै कै कोसिस करत अहैं।

नितिन नवीन आगे कहिन कि हम विपक्ष कै नेता से कहब चाहत हियै कि जिन लोगन का अधिकार दिवावै कै वे बात करत अहैं, भारत कै जनता अइसन घुसपैठियन का कबहूँ अधिकार नाइ देइ। रउवा काकर परवाह करत हियै? रउवा काकर खातिर लड़त हियै?…अगर SIR कै जरिये अइसन घुसपैठियन कै नाँव हटाइ दीन्ह जाथै अउर फेरौ रउवा इहि लइके देश कै लोकतंत्र पय सवाल उठवत हियै, तौ सबसे बड़ा सवाल रउवा पय ही उठत अहै। अइसन अराजक सोच कै जवाब भारत कै जनता देइ।

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