
हिंदू धरम मां सर्वपितृ अमावस्या (Sarvapitri Amavasya 2026) कै बहुत खास महातम बा। इ दिन पितरन् का प्रसन्न करै खर्तिन बहुतु शुभ मानि जात अहै। इ अवसर पर पबित्र नदि मां असनान अउर दान करै कै बिधान बा।
बदिक पंचांग के अनुसार, इ बार सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर का मनाइ जइ। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृ पच्छ मां धरती पर पितर आवत हैं अउर सर्वपितृ अमावस्या कै दिन पितरलोक वापस लौटि जात हैं।
इ दिन तर्पण, पंचबली करम, ब्राह्मण भोज अउर दान-पुण्य करै कै बिधान बा। अइसा मानि जात अहै कि इ काम करै तें पितर प्रसन्न होत हैं अउर पितृ दोष कै समस्या दूर होत बा। साथे-साथे सुख-समृद्धि मां बृद्धि होत अहै।
इ दिन पितरन् कै बिदाई के बेरा कुछ खास बातन् कै ध्यान रखै चाही। अइसा मानि जात अहै कि नियमन कै पालिन न करै तें पितर नाराज होइ सकत हैं अउर मानुस का अशुभ फल मिल सकत अहै। एहसे आवा हम तनक बिस्तार से बतावत हैं कि पितरन् कै बिदाई के बेरा का-का ध्यान रखै चाही।
भूलिकैउ न करै इ गल्ती
सर्वपितृ अमावस्या कै दिन अगर तोहरे घर कोउ भिखरी आवै, तौ ओका खाली हाथ न लौटाइवा। ओका कुछ रुपिया दिइवा या फिर भोजन कराइवा।
इ दिन पितरन् कै तर्पण करै कै शुभ समय कुतुप मुहरत होत अहै। इ मुहरत मां तर्पण करै तें पुरखा प्रसन्न होत हैं, जवने से जिनगानी मां सुख-संतोष बनारहत अहै अउर रुका भवा काम पूर होत हैं।
पितरन् कै बिदाई के बेरा पुरखन का भोजन परोसै खर्तिन लोहा या स्टील कै बरतन कै जोग न कराइवा। एकर खातिर तइं पीतल, तांबा या चान्दी कै बरतन कै इस्तेमाल करइ सकत हव।
सर्वपितृ अमावस्या कै दिन घर मां भूलिकैउ तामसिक भोजन न करिवा। भोजन एकदम शुद्ध अउर सात्विक होवै चाही।
सर्वपितृ अमावस्या कै दिन पितरन् का प्रसन्न करै खर्तिन होत अहै। एहसे इ दिन घर मां कोनो से झगड़ा, लडाई या क्लेश न करिवा। मान्यता बा कि अइसा गल्ती करै तें पितर नाराज होइ सकत हैं अउर जिनगानी मां ओकर खराब फल मिल सकत अहै। ओकरे अलावा मेहरारू अउर बुड्ढन् कै कभू अपमान न करिवा।
सर्वपितृ अमावस्या कै दिन करिया रंग कै कपड़ा न पहिरिबा। अइसा मानि जात अहै कि करिया रंग कै कपड़ा पहिरै तें नकारत्मक ऊर्जा खिंचात अहै।



