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शिवसेना चुनाव चिह्न विवाद: Eknath Shinde गुट सुप्रीम कोर्ट मां निर्वाचन आयोग के फैसले का सही ठहराइन

नयी दिल्ली, सात अक्टूबर: महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट बुध के दिन उच्चतम न्यायालय मां निर्वाचन आयोग के उस फैसले का बचाव करिन, जवने मां ओका असली शिवसेना के रूप मां मान्यता देत भवे पार्टी का चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ आवंटित कीन गवा रहा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत अउर न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना के पीठ के समन्धे शिंदे गुट के तर्फे पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन. के. कौल कहिन कि इ बात का ‘‘रत्ती भर भी सबूत नाहीं अहै’’ कि 2011 के बाद शिवसेना का कोनो संविधान निर्वाचन आयोग के समन्धे प्रस्तुत कीन गवा रहा।

कौल पार्टी के संविधान, आंतरिक लोकतंत्र, निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र अउर चुनाव चिह्न विवाद के निपटारे खर्तिन आयोग द्वारा फैसला कीन जावे के समय समेत कई मुद्दा पर दलील दीहिन। ओनकहिन रहा कि आयोग अपने दुइ आदेशन मां दर्ज कीन रहा कि ओकरे पास उपलब्ध पार्टी का एकमात्र संविधान 2011 कर रहा, जवने का आयोग के आवश्यकताओं के अनुरूप बनाइन गवा रहा।

ओनकहिन रहा कि विवाद बाद मां तब पैदा भवा, जब पार्टी के संविधान मां बदलाव करै के प्रयास कीन गवा अउर इ दावा कीन गवा कि संशोधित दस्तावेज आयोग का सौंप दीन गवा रहा।

कौल कहिन कि आयोग के अनुसार ओका अइसन कोनो दस्तावेज कभी ना मिलि सका अउर ओकरे समन्धे भेजे गए पत्रन मां भी संशोधित संविधान संलग्न नाहीं रहा।

ओनकहिन रहा कि शिंदे का समर्थन करै वाले 40 विधायक 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव मां शिवसेना के 55 विजयी विधायकों का मिले कुल मतन मां से 76 प्रतिशत मतन का प्रतिनिधित्व करत रहिन। इएह तरे, शिंदे समर्थक 13 सांसद, पार्टी के 18 निर्वाचित सांसदों का मिले कुल मतन मां से 73 प्रतिशत मतन का प्रतिनिधित्व करत रहिन।

मामले के अगली सुनवाई बिहफे (बृहस्पतिवार) का होई। उद्धव ठाकरे गुट के सुनील प्रभु के मुख्य याचिका मां महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष के 10 जनवरी 2024 के फैसले का चुनौती दीन गई अहै, जवने मां शिंदे गुट के विधायकों का दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य ठहराए से इनकार कर दीन गवा रहा।

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