राष्ट्रीय

हमार मुंह मां शब्द न डालें…फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट स्थिति साफ किहिन, न तौ मंज़ूरी दीहिन अउर न ही अस्वीकार किहिन

सुप्रीम कोर्ट सोमवार कै साफ किहिस कि वह भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के नया फॉर्म 6 कै वैधता पर कबहूँ क्यौ फ़ैसला ना दीहिन अहै। कोर्ट इ बात पर जोर दीहिन कि जब ऊ इ साल कै सुरुवाती मां बिहार मां वोटर लिस्ट कै ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) कै समीक्षा करिन रहा, तब इकर बदला हुआ वर्शन मौजूद ही ना रहा। इ स्पष्टीकरण उ विवाद कै बीच जरूरी होइ जात अहै जहँवा ECI कै दावा अहै कि सुप्रीम कोर्ट SIR प्रक्रिया खर्तिन ‘फॉर्म 6’ कै साथ जोड़े गए घोषणा-पत्र कय सही ठहराए रहा। कोर्ट कहिन कि उकर पिछला टिप्पणी कय क्यौ बदले हुए फॉर्म कै न्यायिक मंज़ूरी या उसे खारिज करै कै तौर पर ना देखा जा सकता, अउर मामला संज्ञान मां आवै कै बाद ऊ इ मुद्दा कै जाँच करै पर सहमति जताई।

हमार बात कय गलत तरीका से न पेश करैं

सोमवार कय भारत कै मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत अउर जस्टिस जॉयमाल्य बागची अउर वी. मोहना कै बेंच एक नया रिट याचिका कै वकील से कहिन कि इ कोर्ट कै टिप्पणियों कय संवैधानिक फैसला ना माना जा सकता। नया फॉर्म 6 पर क्यौ फैसला ना भवा अहै अउर हमन बस यही कहिन अहै। बेंच आगे कहिन कि मंज़ूरी मिलि गवा या ना मिलि गवा, इ बात उहाँ ना रहा। हमार मुंह मां अपनी बात न डालें।

जस्टिस बागची आगे साफ किहिस कि CJI कै 5 अक्टूबर कै टिप्पणी कै मतलब सिर्फ़ इ रहा कि जब कोर्ट बिहार SIR पर अपना फ़ैसला सुनाए रहा, तब बदला हुआ फ़ॉर्म मौजूद ना रहा। ऊ कहिन, इवसे इ पता ना चलत अहै कि सुप्रीम कोर्ट इ कय मंज़ूरी दीहिन रहा कि नाहीं। बेंच कहिन कि अब जब इ मामला उकर ध्यान मां लाया गवा अहै, तौ ऊ इकर जाँच करिहै। साथ ही, बेंच निर्देश दीहिन कि इ मामला कय SIR से जुड़ी उ याचिकाओ कै साथ लिस्ट किहा जाए जिनकर सुनवाई 27 अक्टूबर कय होय वारी अहै। उ दिन बेंच ECI कै कामकाज अउर वोटर लिस्ट मां बदलाव कै प्रक्रिया से जुड़े फ़ैसला लेवै कै तरीक़े कय चुनौती दै वारी व्यापक याचिकाओ पर भी सुनवाई करिहै।

पिछली सुनवाई मां कोर्ट का कहिन

5 अक्टूबर कय बेंच कहिन कि ऊ ‘फॉर्म 6’ मां क्यौ भी बदलाव कय मंज़ूरी ना दीहिन अहै। बेंच इ पता लगावै खर्तिन रिकॉर्ड मांगिन कि इ बदलाव कयन मंज़ूर किहिन रहा अउर इमां का-का शामिल रहा। कोर्ट ECI कै ECINet/ERONet पोर्टल पर मौजूद ऑनलाइन फ़ॉर्म मां कथित बदलावो कय चुनौती दै वारी एक याचिका पर नोटिस जारी किहिन रहा।

विवाद एक अतिरिक्त घोषणा (डिक्लेरेशन) कय लेकर अहै, जहँवा आवेदकन कय इ बतावइ परत अहै कि का उकर अपना नाम, या उकर माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी कै नाम पिछला SIR (मतदाता सूची कै विशेष पुनरीक्षण) कै दौरान तैयार की गई मतदाता सूची मां शामिल रहा कि नाहीं। इ घोषणा मौजूदा पुनरीक्षण प्रक्रिया कै दौरान ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रोसेस मां जोड़ी गई रहा, जिवसे इकर कानूनी आधार अउर पहिलका बार वोट दै वारेन तथा मतदाता सूची मां दोबारा नाम जुड़वाववारेन पर इकर असर कय लेकर सवाल उठ रहल अहै।

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