जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला नई दिल्ली मा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात कइहीं। इ दौरान दुन्नौ नेता जम्मू-कश्मीर से जुड़ा विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दा पर विस्तार से बात-चीत कइहीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अउर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच भई बैठक का एह बरे भी महत्वपूर्ण मानत हँय काहे से केंद्र सरकार के लगे जम्मू-कश्मीर सरकार के कई महत्वपूर्ण फाइल अंतिम मंजूरी खातिर रुकी पड़ी है।
नेशनल कांफ्रेंस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून 2019 के तहत अब तक काम-काज के नियम न तय होय से साल 2024 में चुनी भई सरकार बनय के बाद से प्रशासनिक काम-काज पर असर पड़त है। नेता बताइन कि कई विभाग में मुख्यमंत्री अउर उपराज्यपाल के रोल साफ तौर प तय नाहिं है, जवने से शासन-व्यवस्था मा दिक़्क़त आवत है अउर मुख्यमंत्री खातिर आपन अधिकारन का सही से इस्तेमाल करब मुश्किल होय जात है।
अइसन बतावा जात है कि जम्मू-कश्मीर सरकार आरक्षण नीति से जुड़ी उ तीन सदस्यीय समिति के सिफारिश पर भी केंद्र के अंतिम मंजूरी के इंतज़ार करत है, जवने का पिछले साल अप्रैल में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का भेजा गय रहा। इ रिपोर्ट के मकसद मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करब रहा, जवने के कारण सरकारी शिक्षण संस्थान अउर विभागन मा ओपन मेरिट वर्ग के हिस्सेदारी घट के 30 प्रतिशत बची रही। उमर अब्दुल्ला सरकार अक्टूबर 2024 मा सत्ता सम्भालय के बाद ओपन कैटेगरी के हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक बढ़ाय के सुझाव देय खातिर एक उपसमिति बनइली रही।
एकरे अलावा जम्मू-कश्मीर सरकार नया महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) के नियुक्ति से जुड़ी फाइल भी केंद्र का भेज रखी है, लेकिन मंजूरी न मिलय के कारण साल 2024 से इ पद खाली है।
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हम आप का इ भी बताइ देयँ कि मुख्यमंत्री दिल्ली निकलय से पहिले श्रीनगर मा पत्रकारन से बात करत कहिन कि ऊ केंद्र शासित प्रदेश से जुड़ल सब प्रमुख मुद्दा गृह मंत्री के सामने उठाउब। ऊ साफ कहिन कि राज्य के दर्जा बहाल करय के मुद्दा भी उनकर प्राथमिकता मा शामिल रही।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला नई दिल्ली मा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात कइहीं। इ दौरान दुन्नौ नेता जम्मू-कश्मीर से जुड़ा विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दा पर विस्तार से बात-चीत कइहीं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अउर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच भई बैठक का एह बरे भी महत्वपूर्ण मानत हँय काहे से केंद्र सरकार के लगे जम्मू-कश्मीर सरकार के कई महत्वपूर्ण फाइल अंतिम मंजूरी खातिर रुकी पड़ी है।
नेशनल कांफ्रेंस के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून 2019 के तहत अब तक काम-काज के नियम न तय होय से साल 2024 में चुनी भई सरकार बनय के बाद से प्रशासनिक काम-काज पर असर पड़त है। नेता बताइन कि कई विभाग में मुख्यमंत्री अउर उपराज्यपाल के रोल साफ तौर प तय नाहिं है, जवने से शासन-व्यवस्था मा दिक़्क़त आवत है अउर मुख्यमंत्री खातिर आपन अधिकारन का सही से इस्तेमाल करब मुश्किल होय जात है।
अइसन बतावा जात है कि जम्मू-कश्मीर सरकार आरक्षण नीति से जुड़ी उ तीन सदस्यीय समिति के सिफारिश पर भी केंद्र के अंतिम मंजूरी के इंतज़ार करत है, जवने का पिछले साल अप्रैल में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का भेजा गय रहा। इ रिपोर्ट के मकसद मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा करब रहा, जवने के कारण सरकारी शिक्षण संस्थान अउर विभागन मा ओपन मेरिट वर्ग के हिस्सेदारी घट के 30 प्रतिशत बची रही। उमर अब्दुल्ला सरकार अक्टूबर 2024 मा सत्ता सम्भालय के बाद ओपन कैटेगरी के हिस्सेदारी 50 प्रतिशत तक बढ़ाय के सुझाव देय खातिर एक उपसमिति बनइली रही।
एकरे अलावा जम्मू-कश्मीर सरकार नया महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) के नियुक्ति से जुड़ी फाइल भी केंद्र का भेज रखी है, लेकिन मंजूरी न मिलय के कारण साल 2024 से इ पद खाली है।
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