राष्ट्रीय

अधीर रंजन चौधरी क बड़का दावा, कहिन- बंगाल में टीएमसी पर भाजपा लागू करत अहै ‘एकनाथ शिंदे’ मॉडल!

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चलत घमासान के बीच, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी पश्चिम बंगाल में पार्टी पइसा आरोप लगाएन कि ऊ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने घुटने टेक दिहे हयन। बुधवारे क बोलत चौधरी कहिन कि बंगाल में ‘एकनाथ शिंदे मॉडल’ लागू कीन जात अहै। ऊ कहिन कि टीएमसी के विधायक डरे हयन कि अगर ऊ भाजपा में शामिल भइयन त मुसलमान ओनका अइसन ना करै दैहैं। चौधरी ईहो दावा करिन कि जेतने भी चुनल प्रतिनिधि नवा दल बनावै की कोशिश कर रहे हयन, उनकर सबके ऊपर भ्रष्टाचार क कम से कम एक आरोप जरूर अहै। उनकर कहब अहै कि एहसे ममता बनर्जी के लिए विपक्ष के नेता (एलओपी) बनब कठिन होइ जाई।

ये बयान अइसन समय मा आइ अहै जब टीएमसी अंदरूनी कलह से जूझत अहै। निष्कासित विधायक ऋतब्रता बनर्जी अउर संदीपान साहा समेत बागी विधायकन के एक गुट पश्चिम बंगाल विधानसभा मा 58 विधायकन के समर्थन क दावा कीन अहै। ई गुट पार्टी नेतृत्व द्वारा विपक्ष के नेता (एलओपी) पद के लिए चुनल गए शोभनदेब चट्टोपाध्याय क विरोध करत अहै। बागी गुट विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्रनाथ बोस क पत्र लिख के ऋतब्रता बनर्जी के लिए एलओपी पद अउर संदीपान साहा के लिए मुख्य सचेतक पद क मांग कीन अहै। जावेद अहमद खान, सेउली साहा अउर सबीना यास्मीन क उप-एलओपी नामांकित कीन गवा अहै। अध्यक्ष पत्र स्वीकार कइ लिहिन अहै अउर मंजूरी की प्रक्रिया चलत अहै। पत्र में ममता बनर्जी क पार्टी नेता के तौर पर फिर से स्थापित कीन गवा अहै। टीएमसी द्वारा हस्ताक्षर करै वाले 58 विधायकन में से दुई जने क निलंबित करै के बाद, एह गुट के प्रति पार्टी क रुख अभी साफ़ नाइ अहै। 58 विधायकन क समर्थन दलबदल विरोधी कानून के तहत दुई-तिहाई बहुमत क पार कइ जाई, जवने से पार्टी में औपचारिक विभाजन होइ सकत अहै अउर महाराष्ट्र जइसन राजनीतिक समीकरण बनै की संभावना पैदा होइ सकत अहै।

इहय बीच, तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) बुधवारे क एक बड़का संगठनात्मक फेरबदल करत पश्चिम बंगाल में आपन जेतनी समितियाँ अउर सहयोगी संगठन रहे, ओका भंग करै क घोषणा कइ दिहिन।

पार्टी क बड़ा फैसला: संगठन क पुनर्गठन

X पर जारी एक बयान में पार्टी कहिस कि बहुत सोच-विचार के बाद ई फैसला लीन गवा अहै कि पश्चिम बंगाल में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की जेतनी समितियाँ अउर सहयोगी संगठन हयन, ओका तुरंत प्रभाव से भंग कइ दीन जाई। पार्टी आगू कहिस कि ऊ ‘हर स्तर पर गहन आत्मनिरीक्षण, काम-काज क समीक्षा अउर संगठनात्मक मूल्यांकन’ करिहै अउर जौन नतीजा निकलि, ओकरे आधार पर आपन संगठनात्मक ढाँचा क फिर से तैयार करिहै।

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