
आज 13 मई क अपरा एकादशी क पावन बरत रखा जाइ रहा हय। सास्तरन क अनुसार, एकादशी क बरत तब तक पूरा नाहीं मानल जात, जब तक ओकर कथा क श्रवण (सुनब) या पाठ नाहीं कीन्ह जात। आवां पढ़त अही अपरा एकादशी क पौराणिक बरत कथा अउर ओकर अद्भुत लाभ।
श्रीकृष्ण अउर युधिष्ठिर क संवाद
महाभारत काल मइँ धरमराज युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण से पूछिन, “हे भगवन! जेठ मास क किरिसन पछ क एकादशी क का नाव हय अउर एकर महातम का हय?” भगवान श्रीकृष्ण एकर उत्तर देत कहिन, “हे राजन! इ एकादशी क ‘अपरा’ अउर ‘अचला’ एकादशी क नाव से जानल जात हय। इ दिन भगवान त्रिविक्रम (विष्णु जी क बामन अवतार) क पूजा कीन्ह जात हय। पुरानन क अनुसार, इ बरत अपार धन देवे वाला हय। जौन भी मानुस सच्ची सरधा से इ बरत क करत हय, उ संसार मइँ कीरती अउर प्रसिद्धि पावत हय।”
अपरा एकादशी क पौराणिक बरत कथा
पुरान जमाना मइँ महीध्वज नाव क एक धरमातमा अउर न्यायप्रिय राजा रहय। ओकर छोट भाई बज्रध्वज ओकर एकदम उल्टा क्रूर, अधरमी अउर अन्यायी रहय। बज्रध्वज आपन बड़का भाई से बहुत ईरस्या करत रहय। एक रात मौका पाय के बज्रध्वज राजा महीध्वज क हतिया कइ दिहिस अउर उनकर सव (लास) क जंगल मइँ एक पीपल क पेड़ क नीचे गाड़ दिहिस। अकाले मरन क नाते राजा क आतिमा क सांति नाहीं मिलि अउर उ प्रेत बनि के उहइ पीपल क पेड़ पर रहे लागिन। प्रेत योनि मइँ आइ के उ अक्सर उहाँ से गुजरइ वालन क परेसान करत रहिन।
रिसी अइसन दिलाइन राजा क मुकती
एक दिन धौम्य नाव क एक महान रिसी उ जंगल से गुजरत रहिन। उ उ प्रेत क देखिन अउर आपन तपोबल से ओकर अतीत अउर इ दुर्दसा क कारन जानि लिन। रिसी क राजा पर दइया आइ गय अउर उ प्रेत क पेड़ से नीचे उतारिन अउर परलोक विद्या क गियान दिहिन। रिसी राजा क इ कसटकारी प्रेत योनि से मुकती दिलावे क संकल्प लिन। उ आपन खुद पूरा बिधि-बिधान से अपरा एकादशी क बरत करिन अउर बरत से मिलय वाला सारा पुंन्य उ प्रेत (राजा महीध्वज) क अरपित कइ दिहिन। इ महापुंन्य क परभाव से राजा क तुरंत प्रेत योनि से मुकती मिलि गय। उ एक दिवय सरीर धारण करिन अउर रिसी धौम्य क हिरदय से धनयबाद देत पुष्पक बिमान मइँ बइठ के सरग लोक क ओर प्रस्थान करिन।




