दुनिया आजु भारत क विकास यात्रा क हिस्सा एहि बरे बनय चाहत अहै, काहे से भारत अब सिरिफ “बड़ा बाजार” नाहीं रहि गवा अहै, बल्कि ई देस अब वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था, तकनीक, सुरक्षा अउर मनई संसाधन क एक निर्णायक केंद्र बनत जात अहै। खास बात ई अहै कि अब ई कई मामलन मा अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस-जर्मनी-यूके जइसन यूरोपीय देसन से होड़ो लेवै लाग अहै।
पहिला, दुनिया का भारत मा सबसे बड़ा बाजार देखात अहै: भारत दुनिया क सबसे बड़ी आबादी वाला देस अहै। हियाँ तेजी से बढ़त मध्यम वर्ग, डिजिटल उपभोक्ता अउर भारी युवा शक्ति वैश्विक कंपनियन का अपनी ओर खींचत अहै। एही कारन तकनीक, ई-कॉमर्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा, सेमीकंडक्टर अउर ऊर्जा क्षेत्रन मा भारी विदेशी निवेश आवत अहै।
दूसरा, चीन क विकल्प के रूप मा भारत: अमेरिका-चीन क तनातनी अउर सप्लाई चेन क संकट के बाद दुनिया “चाइना प्लस वन” रणनीति अपनावत अहै। कइयौ बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब उत्पादन अउर निवेश क बड़ा हिस्सा भारत मा भेजै चाहत अहैं, काहे से भारत का एक थिर लोकतांत्रिक, कानूनी अउर भारी श्रम-आधारित अर्थव्यवस्था माना जात अहै।
तीसरा, भारत क डिजिटल क्रांति दुनिया का प्रभावित करेस: यूपीआई, आधार, डिजिटल गवर्नेंस, स्टार्टअप इकोसिस्टम अउर एआई आधारित सेवन भारत का “डिजिटल पावर” बनाय दिहे अहै। काहे से दुनिया अब भारतीय डिजिटल मॉडल का कम खरच मा अउर बड़े पैमाने पर लागू होय वाली व्यवस्था क रूप मा देखत अहै, एहि बरे भारत कइती उनका झुकाव स्वाभाविक अहै।
चौथा, भारत वैश्विक स्थिरता क नया खंभा बनत अहै: आजु दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था कइती बढ़त अहै। अइसन समय मा भारत अमेरिका से भी संबंध रखत अहै, रूस से भी, अउर यूरोप, जापान, खाड़ी देसन अउर अफ्रीका से भी। इहै संतुलित कूटनीति भारत का “भरोसेमंद ताकत” बनावत अहै। एहि बरे जादेतर देस भारत क साथ रणनीतिक साझेदारी बढ़ावय चाहत अहैं।
पचवां, भारत क युवा मनई संसाधन दुनिया क जरूरत अहै: यूरोप, जापान अउर कइयौ विकसित देसन मा बुढ़वन क आबादी बढ़त जात अहै। एकरे उलट भारत क पास भारी युवा कार्यबल अहै। आईटी, सेहत, इंजीनियरिंग, एआई अउर सेवा क्षेत्र मा भारतीय प्रतिभा वैश्विक अर्थव्यवस्था का चलावै मा महत्वपूर्ण भूमिका निभावत अहै.
छठा, रक्षा अउर सामरिक ताकत क बढ़त असर: भारत तेजी से रक्षा उत्पादन अउर तकनीकी आत्मनिर्भरता बढ़ावत अहै। ब्रह्मोस मिसाइल, रक्षा कॉरिडोर, अंतरिक्ष कार्यक्रम अउर समुद्री ताकत भारत का सामरिक नजरिया से महत्वपूर्ण बनाय दिहे अहै।
सातवां, भारत “ग्लोबल साउथ” क आवाज बन गवा अहै: अफ्रीका, एशिया अउर विकासशील देसन का लागत अहै कि भारत पश्चिम अउर चीन- दुनहुन से अलग एक संतुलित मॉडल देइ सकत अहै। जी-20, ब्रिक्स अउर अंतरराष्ट्रीय मंचन पर भारत क भूमिका लगातार बढ़त जात अहै।
अठवां, निवेश करै वालन का भारत मा लंबे समय क मौका दिखात अहै: दुनिया क बड़ी कंपनियां समुझत अहैं कि अगले 20-25 बरिसन तक भारत तेजी से बढ़त अर्थव्यवस्था रहिहै, अउर इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, एआई, हरी तकनीक अउर विनिर्माण मा भारी मौका मौजूद अहैं।
लेकिन चुनौतियन भी कम नाहीं अहैं। भले ही दुनिया भारत मा मौका देखत अहै, पै साथ ही कुछ चिंता भी अहैं: बेरोजगारी, सामाजिक असमानता, पढ़ाई अउर सेहत क गुणवत्ता, अदालती अउर प्रशासनिक देरी, राजनीतिक ध्रुवीकरण, अउर बुनियादी ढांचा क असमानता। जउ भारत इन चुनौतियन का संतुलित ढंग से संभाल लेत अहै, तउ 21वीं सदी मा ऊ सिरिफ एक बड़ी अर्थव्यवस्था ही नाहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था का प्रभावित करै वाली महाशक्ति बन सकत अहै।
– कमलेश पांडेय
वरिष्ठ पत्रकार अउर राजनीतिक विश्लेषक