
बढ़त सामर्थ्य, अधिक भरोसा अउर दुनिया म मजबूत पहचान
बिगत बारह बरिसन म भारत क रच्छा क्षेत्र म जउन बदलाव देखै का मिला हउवे, उ खाली सेना क ताकत बढ़ावै तक सीमित नाहीं अहै। ई बदलाव देस क रणनीतिक सोच, वैज्ञानिक तरक्की, आत्मनिर्भरता अउर बिस्व मंच प भारत क बढ़त प्रतिष्ठा क परिचायक हउवे। सन 2014 ते 2026 क बीच लागू भइ नीतियन, बढ़त निवेश, स्वदेशी अनुसंधान अउर निजी उद्योगन क सक्रिय भागीदारी से भारत रच्छा क्षेत्र म नवा मुकाम हासिल कइ लिहिस।
आज भारत आपन फौजी जरूरत पूरा करै खातिर विदेशी हथियारन प पहिले जइसन निर्भर नाहीं रहिगा। अब देस स्वदेशी उत्पादन प अधिक भरोसा करत हउवे। एकरे संग-संग भारत बिस्व रच्छा बाजार म भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता क रूप म भी तेजी से उभरत हउवे।
सन 2013-14 म जउन रच्छा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपया रहा, उ 2026-27 म बढ़िके 7.85 लाख करोड़ रुपया तक पहुँचि गवा। एहिच बीच रच्छा उत्पादन 46,429 करोड़ रुपया ते बढ़िके 1.78 लाख करोड़ रुपया होइ गवा। रच्छा निर्यात भी अभूतपूर्व ढंग से बढ़ा अउर 686 करोड़ रुपया ते 38,424 करोड़ रुपया तक पहुँचि गवा। आज भारत म बनत रच्छा उपकरण 80 ते अधिक देसन म भेजे जात अहैं।
ई उपलब्धियन क पीछे रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया-2020, सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची, आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, आईडेक्स (iDEX) अउर डीआरडीओ जइसन योजनन क महत्वपूर्ण योगदान रहा। एह नीतियन से देसी उद्योगन, स्टार्टअपन अउर एमएसएमई क नवा अवसर मिला अउर रच्छा उत्पादन म तेजी आई।
बदलत सोच, बदलत नीति
एक समय रहा जब भारत दुनिया क सबसे बड़ा रच्छा सामान खरीदै वाला देसन म गिनल जात रहा। लड़ाकू जहाज, मिसाइल, टैंक, रडार अउर कई जरूरी सैन्य उपकरण खातिर विदेशन प निर्भरता बहुत अधिक रही।
बाकिर पिछला एक दहाई म सरकार ई सोच बदली। अब रच्छा क्षेत्र का खाली खरीदारी क माध्यम न मानिके अनुसंधान, नवाचार अउर उत्पादन क आधार प विकसित कइ जाय लाग।
रच्छा अधिग्रहण प्रक्रिया-2020 अउर नवा खरीद नियमन से स्वदेशी कंपनियन का प्राथमिकता दिहि गइ। एकरे चलते निजी उद्योगन क भागीदारी तेजी से बढ़ी अउर रच्छा निर्माण अब सरकारी कारखानन तक सीमित नाहीं रहा।
डीआरडीओ बनिस आत्मनिर्भरता क आधार
रच्छा अनुसंधान अउर विकास संगठन (डीआरडीओ) एह बदलाव क सबसे मजबूत आधार बनिके उभरिस।
डीआरडीओ खाली नवा हथियार विकसित करै तक सीमित नाहीं रहा, बल्कि उद्योग, विश्वविद्यालय अउर वैज्ञानिक संस्थानन क संग मिलिके अनुसंधान क नवा मॉडल तैयार कइ दिहिस।
आज मिसाइल, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, ड्रोन, संचार तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य प्रणाली अउर भविष्य क हाइपरसोनिक तकनीक प लगातार काम होत अहै।
संगे-संग डीआरडीओ आपन आधुनिक परीक्षण सुविधा निजी उद्योगन का भी उपलब्ध करावत हउवे, जेहसे स्वदेशी तकनीक तेजी से विकसित होइ सकय।
रच्छा बजट म लगातार बढ़ोतरी
कउनो भी देस क सेना तबे मजबूत होइ सकत हउवे जब ओकरा लगे पर्याप्त संसाधन होय।
एही सोच का ध्यान म राखत भारत सरकार रच्छा बजट म लगातार बढ़ोतरी करत रही।
सन 2013-14 म जवन कुल रच्छा बजट 2.53 लाख करोड़ रुपया रहा, उ 2026-27 म बढ़िके 7.85 लाख करोड़ रुपया होइ गवा।
पूँजीगत खर्च म भी भारी बढ़ोतरी भइ। 2014-15 म जवन खर्च 94,587 करोड़ रुपया रहा, उ बढ़िके 2.19 लाख करोड़ रुपया होइ गवा।
ई धनराशि लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, मिसाइल प्रणाली, निगरानी उपकरण, संचार प्रणाली अउर आधुनिक सैन्य ढाँचा विकसित करै म लगाई जात हउवे।
अनुसंधान प बढ़ा जोर
आधुनिक युद्ध अब खाली सैनिकन क संख्या से नाहीं जीतल जात। वैज्ञानिक तकनीक, अनुसंधान अउर नवाचार अब सबसे बड़ी ताकत बनि चुके अहैं।
एह कारण सरकार रक्षा अनुसंधान प लगातार निवेश बढ़ावत रही।
सन 2014-15 म अनुसंधान खातिर 13,716 करोड़ रुपया दिहा गवा रहा। 2026-27 तक ई बढ़िके 29,100 करोड़ रुपया ते अधिक होइ गवा।
सरकार 2022-23 ते अनुसंधान बजट क 25 प्रतिशत हिस्सा निजी उद्योगन, स्टार्टअपन अउर विश्वविद्यालयन खातिर सुरक्षित कइ दिहिस।
एह फैसला से रक्षा अनुसंधान सरकारी प्रयोगशालन से निकलिके पूरा नवाचार तंत्र क हिस्सा बनिगा।
उद्योगन खातिर खुलीं डीआरडीओ क प्रयोगशाला
रच्छा मंत्रालय डीआरडीओ क 24 आधुनिक परीक्षण सुविधा उद्योगन खातिर खोलि दिहिस।
अब देसी कंपनियन आपन रक्षा उपकरणन क परीक्षण अउर प्रमाणन आसानी से करा सकत अहैं।
एह पहल से स्वदेशी रच्छा उद्योग क विकास म तेजी आई अउर नवाचार का भी बढ़ावा मिला।
आईडेक्स: नवाचार क नवा अध्याय
आईडेक्स (Innovations for Defence Excellence) भारत क रक्षा नवाचार क सबसे महत्वपूर्ण योजना बनिके उभरी।
एह योजना से स्टार्टअप, एमएसएमई, विश्वविद्यालय अउर युवा वैज्ञानिक सीधे रक्षा क्षेत्र से जुड़ गइन।
मार्च 2026 तक 676 स्टार्टअप अउर एमएसएमई एह योजना से जुड़ चुके रहेन अउर 551 डिजाइन अउर विकास अनुबंध होइ चुके रहेन।
ई बतावत हउवे कि अब रक्षा अनुसंधान खाली सरकारी संस्थानन तक सीमित नाहीं रहा।
प्रौद्योगिकी विकास कोष से मिली नई रफ्तार
प्रौद्योगिकी विकास कोष (TDF) क माध्यम से स्टार्टअप अउर निजी उद्योगन का प्रति परियोजना 50 करोड़ रुपया तक सहायता दिहल जात हउवे।
जून 2026 तक 80 परियोजनन प काम चलत रहा, जवन लगभग 334 करोड़ रुपया लागत वाली रहीं।
ई योजना भविष्य क रक्षा तकनीक विकसित करै म महत्वपूर्ण भूमिका निभावत हउवे।
ज्ञान, विज्ञान अउर उद्योग क संगम
डीआरडीओ देश भर म 15 उत्कृष्टता केंद्र स्थापित कइ चुका हउवे, जहाँ विश्वविद्यालय, वैज्ञानिक अउर उद्योग मिलिके अनुसंधान करत अहैं।
पाँच यंग साइंटिस्ट लैब भी स्थापित भइ चुकी अहैं, जवन भविष्य क तकनीक प काम करत अहैं।
हर बरिस हजारन इंजीनियर अउर वैज्ञानिक डीआरडीओ म प्रशिक्षण पावत अहैं अउर देश क रक्षा अनुसंधान से जुड़त अहैं।
बहुत बढ़िया। प्रस्तुत है भाग–2 का शुद्ध साहित्यिक अवधी रूपांतरण।
भारत क रच्छा आत्मनिर्भरता क मजबूत बनावै म प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ) क बहुत अहम भूमिका रही। एह योजना क मकसद अइसन आधुनिक सैन्य तकनीक विकसित करब रहा, जउन खातिर पहिले भारत का विदेशी देसन प निर्भर रहै का पड़त रहा।
एह योजना क तहत स्टार्टअप, एमएसएमई अउर निजी उद्योगन का प्रति परियोजना पचास करोड़ रुपया तक आर्थिक सहायता दिहल जात हउवे। एहसे बहुत सी नई स्वदेशी तकनीक विकसित भइं, अउर कुछ तकनीकन क इस्तेमाल अंतरिक्ष अभियानन म भी सफलतापूर्वक भवा।
सरकार भविष्य क गहन (डीप-टेक) तकनीकन का बढ़ावा देइ खातिर एह योजना म अतिरिक्त पाँच सौ करोड़ रुपया क प्रावधान भी कइ दिहिस। जून 2026 तक लगभग 334 करोड़ रुपया लागत वाली 80 परियोजनन प काम चलत रहा। ई बतावत हउवे कि भारत अब भविष्य क युद्ध तकनीक म भी तेजी से निवेश करत हउवे।
अनुसंधान अउर उद्योग क बीच मजबूत पुल
रच्छा अनुसंधान का विश्वविद्यालय अउर उद्योगन से जोड़ै खातिर डीआरडीओ देश भर म डीआरडीओ–इंडस्ट्री–एकेडेमिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित कइ चुका हउवे।
आज 15 उत्कृष्टता केंद्र 82 ते अधिक अनुसंधान क्षेत्रन म काम करत अहैं। एह केंद्रन क माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान सीधा उद्योगन तक पहुँचित हउवे। एकरे अलावा डीआरडीओ क प्रयोगशालन म इंडस्ट्री इंटरैक्शन ग्रुप भी गठित कइ गवा हउवे, जेहसे वैज्ञानिक अउर उद्योग लगातार मिलिके काम कइ सकैं।
भविष्य क वैज्ञानिक तैयार होत अहैं
रच्छा क्षेत्र म तकनीकी आत्मनिर्भरता खाली मशीनन से नाहीं आवत, बल्कि योग्य वैज्ञानिक अउर इंजीनियरन से आवत हउवे।
एही सोच क साथ डीआरडीओ जनवरी 2020 म पाँच यंग साइंटिस्ट प्रयोगशाला स्थापित कइ दिहिस। छठवीं प्रयोगशाला भी स्थापित करै क तैयारी चलत हउवे।
नए वैज्ञानिकन का प्रयोगशाला म नियुक्ति से पहिले डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से एम.टेक. प्रशिक्षण पूरा करब जरूरी बनावा गवा।
हर बरिस साढ़े तीन हजार ते अधिक इंजीनियर अउर तकनीशियन डीआरडीओ म प्रशिक्षण लेत अहैं। सवेतन इंटर्नशिप योजना से इंजीनियरिंग छात्रन का भी रक्षा अनुसंधान से जोड़ल जात हउवे।
रच्छा खरीद म आय नवा बदलाव
सरकार रच्छा खरीद प्रणाली का अधिक पारदर्शी, सरल अउर स्वदेशी उद्योगन क पक्ष म बनावै खातिर कई महत्वपूर्ण सुधार कइ दिहिस।
रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया-2020 क तहत भारतीय डिजाइन अउर स्वदेशी निर्माण का सबसे अधिक प्राथमिकता दिहल गइ।
एह नीति क बाद डीआरडीओ द्वारा विकसित अउर भारतीय उद्योगन द्वारा निर्मित छह लाख करोड़ रुपया ते अधिक मूल्य क विभिन्न सैन्य प्रणाली का एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) प्राप्त भवा।
एह मंजूरी म लगभग 62 हजार करोड़ रुपया लागत क 97 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमान, लगभग 62,700 करोड़ रुपया लागत क 156 प्रचंड हल्का लड़ाकू हेलीकॉप्टर, अउर भारतीय नौसेना खातिर 26 राफेल मरीन विमान शामिल अहैं।
ई फैसला साफ बतावत हउवे कि भारत अब खरीददार कम अउर निर्माता अधिक बने क राह प बढ़ि रहा हउवे।
खरीददार ते निर्माता बने क सफर
एक समय रहा जब भारत दुनिया क सबसे बड़ा रक्षा आयातक देशन म गिनल जात रहा।
आज स्थिति बदलि चुकी हउवे।
रच्छा उत्पादन तेजी से बढ़त हउवे अउर देश धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता क ओर बढ़त हउवे।
वित्त वर्ष 2025-26 म भारत क कुल रच्छा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपया तक पहुँचि गवा।
2020-21 क तुलना म ई लगभग 110 प्रतिशत अधिक हउवे।
सबसे खास बात ई हउवे कि अब खाली सरकारी कारखाना नाहीं, बल्कि निजी उद्योग भी तेजी से रक्षा उत्पादन म भाग लेत अहैं।
आज कुल उत्पादन म लगभग 76 प्रतिशत योगदान सरकारी उपक्रमन क हउवे, जबकि 24 प्रतिशत योगदान निजी उद्योगन क होइ गवा हउवे।
रच्छा निर्यात म बनिस नया इतिहास
भारत क सबसे बड़ी उपलब्धियन म रच्छा निर्यात क नाम सबसे ऊपर गिनल जात हउवे।
सन 2013-14 म जवन निर्यात खाली 686 करोड़ रुपया रहा, उ 2025-26 म बढ़िके 38,424 करोड़ रुपया होइ गवा।
मतलब करीब बारह बरिस म 5500 प्रतिशत ते अधिक बढ़ोतरी।
आज भारत म बनत मिसाइल, रडार, गोला-बारूद, गश्ती नौका, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अउर अनेक आधुनिक रक्षा प्रणाली दुनिया क 80 ते अधिक देसन म भेजी जात अहैं।
सरकार अब 2029 तक एहका 50 हजार करोड़ रुपया तक पहुँचावै क लक्ष्य राखे हउवे।
रच्छा उद्योग क बढ़त आधार
रच्छा उद्योग का बढ़ावा देइ खातिर सरकार लाइसेंस प्रक्रिया भी आसान कइ दिहिस।
आज देश म 16 रक्षा सार्वजनिक उपक्रम, करीब 500 लाइसेंस प्राप्त रक्षा कंपनी, अउर लगभग 17 हजार एमएसएमई रक्षा उत्पादन से जुड़ल अहैं।
सन 2015 म जवन रक्षा लाइसेंस 258 रहा, उ मार्च 2026 तक बढ़िके 834 होइ गवा।
एहसे साफ हउवे कि निजी उद्योग तेजी से रक्षा निर्माण म उतरि रहा हउवे।
उत्तर प्रदेश अउर तमिलनाडु बनत अहैं रक्षा उद्योग क नया केंद्र
भारत सरकार क रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर योजना अब जमीन प असर देखावै लाग हउवे।
उत्तर प्रदेश रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर म अप्रैल 2026 तक 42,057 करोड़ रुपया क निवेश प्रस्ताव मिल चुके रहेन।
एह म से 4,409 करोड़ रुपया क निवेश धरातल प उतरि चुका रहा।
एह कॉरिडोर म स्थापित डिफेंस टेस्टिंग एंड टेक्नोलॉजी सेंटर उद्योगन अउर वैज्ञानिकन खातिर नवा अवसर पैदा करत हउवे।
उधर तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर म 32,699 करोड़ रुपया क निवेश प्रस्ताव मिलिन, जेमे से 6,446 करोड़ रुपया क निवेश पूरा होइ चुका रहा।
ई दुनों कॉरिडोर खाली कारखाना नाहीं, बल्कि रोजगार, अनुसंधान अउर तकनीकी विकास क नया आधार बनत जात अहैं।
बदलत उद्योग, बदलत भारत
दस बरिस पहिले रक्षा उद्योग लगभग पूरा सरकारी हाथ म रहा।
आज स्टार्टअप, निजी उद्योग, एमएसएमई, विश्वविद्यालय अउर वैज्ञानिक संस्थान सब मिलिके भारत क रक्षा क्षेत्र का नवा रूप देत अहैं।
अब भारत खाली हथियार खरीदै वाला देश नाहीं रहिगा।
भारत अब हथियारन क डिजाइन, अनुसंधान, निर्माण अउर निर्यात करै वाला देश बनत जात हउवे।
रक्षा उत्पादन म आय ई बदलाव आर्थिक मजबूती क साथे-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा अउर तकनीकी आत्मनिर्भरता क भी मजबूत आधार बनत हउवे।
बहुत बढ़िया। प्रस्तुत है भाग–3 का शुद्ध साहित्यिक अवधी रूपांतरण।
पिछला बारह बरिस म भारत क रच्छा क्षेत्र म सबसे बड़ा बदलाव ई भवा कि सेना खाली हथियारन क संख्या प निर्भर नाहीं रही। अब जोर आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक नवाचार, सटीक हमला करै वाली प्रणाली अउर तेजी से बदलत युद्ध कला प दिहल जात हउवे।
आज भारतीय सेना अइसन स्वदेशी तकनीक से लैस होत जात हउवे, जवन आधुनिक युद्ध क हर चुनौती का सामना करै म सक्षम हउवे। मिसाइल रक्षा प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, अंतरिक्ष सुरक्षा, साइबर सुरक्षा अउर हाइपरसोनिक तकनीक जइसन क्षेत्रन म भारत लगातार आगे बढ़त हउवे।
एह उपलब्धियन क पीछे डीआरडीओ, सार्वजनिक उपक्रम, निजी उद्योग, स्टार्टअप अउर देश क वैज्ञानिक संस्थानन क साझा मेहनत हउवे।
मिशन शक्ति : अंतरिक्ष म भारत क सामरिक शक्ति
27 मार्च 2019 क दिन भारत रक्षा इतिहास म हमेशा खातिर दर्ज होइ गवा।
एह दिन मिशन शक्ति क तहत भारत सफलतापूर्वक अंतरिक्ष म मौजूद आपन लक्ष्य उपग्रह का मार गिराइस।
एह उपलब्धि क बाद भारत दुनिया क उन चुनिंदा देसन म शामिल होइ गवा, जिनका लगे एंटी-सैटेलाइट (ASAT) क्षमता मौजूद हउवे।
आज जउन युद्ध क संभावना बनत दिखत हउवे, उ खाली धरती, जल अउर आकाश तक सीमित नाहीं अहै। अंतरिक्ष भी राष्ट्रीय सुरक्षा क महत्वपूर्ण क्षेत्र बनि चुका हउवे, अउर भारत एह दिशा म मजबूत तैयारी करि चुका हउवे।
मिशन दिव्यास्त्र : बढ़त सामरिक क्षमता
11 मार्च 2024 का भारत मिशन दिव्यास्त्र क सफल परीक्षण कइके एक अउर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल कइ लिहिस।
एह मिसाइल प्रणाली म एमआईआरवी (MIRV) तकनीक क इस्तेमाल भवा, जेहसे एके मिसाइल कई अलग-अलग लक्ष्यन प एक साथ हमला कर सकत हउवे।
ई तकनीक भारत क सामरिक प्रतिरोध क्षमता का अउर मजबूत बनावत हउवे अउर भविष्य क सुरक्षा चुनौती खातिर तैयारी का भी दर्शावत हउवे।
ऑपरेशन सिंदूर म दिखी स्वदेशी तकनीक क ताकत
हालिया सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर म भारत क स्वदेशी रक्षा तकनीक क प्रभाव साफ दिखाई दिहिस।
आकाश वायु रक्षा प्रणाली, ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, एंटी-ड्रोन प्रणाली, हवाई निगरानी प्रणाली अउर कई अन्य स्वदेशी उपकरणन सफलतापूर्वक आपन भूमिका निभाइन।
एह अभियान से ई साबित भवा कि अब भारतीय सेना आधुनिक युद्ध म देसी तकनीक प भरोसा करै लायक बनि चुकी हउवे।
नई पीढ़ी क सैन्य तकनीक
भारत अब खाली वर्तमान जरूरत पूरा करै प ध्यान नाहीं देत, बल्कि भविष्य क युद्ध प्रणाली विकसित करै म भी तेजी से काम करत हउवे।
तेजस हल्का लड़ाकू विमान आज भारतीय वायुसेना क शक्ति क प्रतीक बनि चुका हउवे।
फरवरी 2019 म अंतिम परिचालन स्वीकृति मिलै क बाद भारतीय वायुसेना खातिर 83 तेजस विमानन क खरीद मंजूर भइ।
एह विमान भारतीय वैज्ञानिकन, इंजीनियरन अउर उद्योगन क संयुक्त मेहनत क परिणाम हउवे।
एही तरह अर्जुन एमके-1ए मुख्य युद्धक टैंक आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, अधिक मारक क्षमता अउर उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणन से लैस हउवे।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब सेना क साथी
आधुनिक युद्ध म कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) क महत्व लगातार बढ़त जात हउवे।
भारत भी एह क्षेत्र म तेजी से काम करत हउवे।
सन 2022 म रक्षा उपयोग खातिर 75 एआई आधारित प्रणाली विकसित भइं।
एह म निगरानी, साइबर सुरक्षा, रसद प्रबंधन, स्वचालित युद्ध प्रणाली अउर युद्ध क्षेत्र म निर्णय लेवै वाली तकनीक शामिल अहैं।
आगामी बरिसन म कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारतीय सेना क कार्यप्रणाली का अउर अधिक सक्षम बनाइ।
हाइपरसोनिक तकनीक : भविष्य क तैयारी
भविष्य क युद्ध म हाइपरसोनिक हथियार सबसे प्रभावशाली मानल जात अहैं।
भारत एह दिशा म भी तेजी से आगे बढ़त हउवे।
9 जनवरी 2026 का डीआरडीओ स्क्रैमजेट फुल-स्केल कंबस्टर क सफल परीक्षण कइ लिहिस।
लगातार 12 मिनट ते अधिक समय तक सफल परीक्षण भारत खातिर बहुत बड़ी उपलब्धि मानल गवा।
एहके अलावा हैदराबाद म अत्याधुनिक हाइपरसोनिक विंड टनल भी स्थापित कइ गइ हउवे, जहाँ भविष्य क उच्च गति वाली मिसाइलन प अनुसंधान कइल जात हउवे।
रच्छा कूटनीति : दुनिया म बढ़त भारत
रच्छा क्षेत्र म आत्मनिर्भरता क साथे-साथ भारत क रक्षा कूटनीति भी नई ऊँचाई प पहुँची हउवे।
अब भारत क विदेश नीति म रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण आधार बनि चुका हउवे।
आज रक्षा साझेदारी खाली हथियार खरीदै तक सीमित नाहीं रही।
अब संयुक्त अनुसंधान, तकनीक विकास, सह-उत्पादन, सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा अउर रणनीतिक सहयोग क नया दौर शुरू होइ चुका हउवे।
अमेरिका क संग मजबूत संबंध
पिछला दशक म भारत अउर अमेरिका क रक्षा संबंध बहुत मजबूत भइन।
लेमोआ (LEMOA), कॉमकासा (COMCASA) अउर बेका (BECA) जइसन समझौतन से दुनों देशन क बीच सैन्य सहयोग नई ऊँचाई प पहुँचल।
एहके बाद आई-सीईटी (iCET) अउर ट्रस्ट पहल क माध्यम से कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक, सेमीकंडक्टर अउर उन्नत तकनीक म सहयोग बढ़ा।
2025 म दस बरिस क नवा रक्षा सहयोग ढाँचा भी तय भवा, जवन भविष्य क साझेदारी का अउर मजबूत करिहै।
रूस : पुरान दोस्त, मजबूत साझेदार
रूस आज भी भारत क सबसे महत्वपूर्ण रक्षा साझेदारन म शामिल हउवे।
एस-400 वायु रक्षा प्रणाली, एसयू-30 एमकेआई विमानन क आधुनिकीकरण अउर इंद्र संयुक्त सैन्य अभ्यास एह संबंध क मजबूत आधार अहैं।
रूस अब खाली हथियार बेचै वाला देश नाहीं, बल्कि तकनीकी सहयोगी क रूप म भी महत्वपूर्ण भूमिका निभावत हउवे।
फ्रांस : भरोसे क रिश्ता
फ्रांस क संग भारत क रक्षा संबंध लगातार मजबूत भइन।
राफेल लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना क शक्ति बढ़ावत अहैं।
प्रोजेक्ट-75 क तहत बनत कलवरी श्रेणी क पनडुब्बियन भारतीय नौसेना का नई मजबूती देत अहैं।
एहके अलावा फ्रांसीसी कंपनी अउर भारतीय उद्योगन क साझेदारी से देश म विमान निर्माण क्षमता भी बढ़त जात हउवे।
जापान, ऑस्ट्रेलिया अउर यूरोप क संग सहयोग
भारत जापान, ऑस्ट्रेलिया अउर यूरोपीय देशन क संग भी लगातार रक्षा सहयोग बढ़ावत हउवे।
संयुक्त नौसैनिक अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, तकनीकी सहयोग अउर हिंद-प्रशांत क्षेत्र म स्थिरता बनाए रखै खातिर कई समझौता कइल गवा हउवे।
क्वाड अउर हिंद-प्रशांत नीति
भारत, अमेरिका, जापान अउर ऑस्ट्रेलिया क क्वाड समूह आज हिंद-प्रशांत क्षेत्र क सुरक्षा म महत्वपूर्ण भूमिका निभावत हउवे।
मालाबार नौसैनिक अभ्यास अउर समुद्री सुरक्षा अभियानन से चारों देश आपसी सहयोग मजबूत करत अहैं।
भारत क सागर (क्षेत्र म सबकर सुरक्षा अउर विकास) नीति भी हिंद महासागर क्षेत्र म भारत क बढ़त भूमिका का दर्शावत हउवे।
दुनिया म बढ़त भरोसा
आज भारत क रक्षा नीति क मकसद खाली आपन सीमा क रक्षा करब नाहीं हउवे।
भारत अब अइसन देश क रूप म उभरत हउवे जवन आधुनिक तकनीक विकसित करत हउवे, हथियार बनावत हउवे, दोस्त देशन क मदद करत हउवे अउर दुनिया म शांति अउर सुरक्षा बनाए रखै म भी महत्वपूर्ण भूमिका निभावत हउवे।
एह बदले स्वरूप से भारत क वैश्विक प्रतिष्ठा लगातार मजबूत होत जात हउवे।
पिछला बारह बरिस म भारत क रच्छा क्षेत्र म जवन बदलाव आय अहै, उ खाली सेना क ताकत बढ़ावै तक सीमित नाहीं रहा। एह दौरान भारत आपन रक्षा कूटनीति, वैश्विक साझेदारी अउर सामरिक सोच का भी नवा आयाम दिहिस। आज भारत अइसन मुकाम प खड़ा अहै, जहाँ उ खाली हथियार खरीदै वाला देस नाहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक विकसित करै वाला, रच्छा उपकरण बनावै वाला अउर दुनिया क भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार क रूप म पहचान बनावत हउवे।
भारत क विदेश नीति म अब रक्षा सहयोग क महत्व बहुत बढ़ि गवा हउवे। द्विपक्षीय समझौता होय, बहुपक्षीय मंच होय या समुद्री सुरक्षा क सवाल—हर जगह भारत क सक्रिय भागीदारी साफ दिखाई देत हउवे। उद्देश्य खाली आपन सीमा क सुरक्षा करब नाहीं, बल्कि पूरा क्षेत्र म शांति, स्थिरता अउर सहयोग का मजबूत बनावब भी हउवे।
रच्छा कूटनीति भइ बहुआयामी
आज भारत क रक्षा संबंध अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप अउर कई अन्य मित्र देसन से लगातार मजबूत होत जात अहैं।
ई संबंध अब खाली हथियार खरीदै-बेचै तक सीमित नाहीं रहिन। अब संयुक्त अनुसंधान, तकनीक विकास, सह-उत्पादन, सैन्य प्रशिक्षण, संयुक्त अभ्यास अउर रक्षा उद्योग म साझेदारी तक विस्तार होइ चुका हउवे।
क्वाड, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ), आसियान रक्षा मंच अउर हिंद-प्रशांत क्षेत्र क विभिन्न पहलन म भारत क सक्रिय भूमिका ओकर बढ़त वैश्विक महत्व का दर्शावत हउवे।
भारत आज भी आपन रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखत हउवे। एक ओर अमेरिका अउर यूरोप से आधुनिक तकनीक म सहयोग बढ़ावत हउवे, त दूसर ओर रूस जइसन पुरान मित्र देशन क साथ भी संतुलित संबंध निभावत हउवे।
हिंद-प्रशांत म बढ़त भूमिका
आज पूरा दुनिया क ध्यान हिंद-प्रशांत क्षेत्र प केंद्रित होत जात हउवे।
व्यापार, समुद्री मार्ग, ऊर्जा सुरक्षा अउर सामरिक प्रतिस्पर्धा क कारण एह क्षेत्र क महत्व बहुत बढ़ि गवा हउवे।
भारत अपनी ‘सागर’ (क्षेत्र म सबकर सुरक्षा अउर विकास) नीति क माध्यम से साफ संदेश दिहिस कि हिंद महासागर म शांति, सहयोग अउर सुरक्षित समुद्री मार्ग बनाए रखब ओकर प्राथमिकता हउवे।
नियमित नौसैनिक गश्त, बहुराष्ट्रीय अभ्यास, मानवीय सहायता अभियान अउर तटीय देशन का सहयोग देइके भारत आपन जिम्मेदार भूमिका निभावत हउवे।
आत्मनिर्भरता क मजबूत आधार
अगर पिछला बारह बरिस क सबसे बड़ी उपलब्धियन क गिनती कइल जाय, त सबसे ऊपर आत्मनिर्भरता क नाम आवत हउवे।
रच्छा उत्पादन म रिकॉर्ड बढ़ोतरी भइ।
रच्छा निर्यात नया इतिहास लिखिस।
डीआरडीओ, आईडेक्स, टीडीएफ अउर रक्षा औद्योगिक कॉरिडोर जइसन योजनन से स्वदेशी उद्योग का नई ताकत मिली।
स्टार्टअप, एमएसएमई, निजी उद्योग अउर विश्वविद्यालय आज रक्षा क्षेत्र क महत्वपूर्ण भागीदार बनि चुके अहैं।
अब भारत खाली छोट-छोट उपकरण नाहीं, बल्कि लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, मिसाइल, युद्धपोत, रडार, ड्रोन अउर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली तक बनावत हउवे।
ई बदलाव भारत क औद्योगिक क्षमता अउर वैज्ञानिक आत्मविश्वास दुनों का मजबूत करत हउवे।
चुनौती अबहिन बाकी अहैं
हालाँकि उपलब्धियन बहुत बड़ी अहैं, लेकिन अभी कुछ क्षेत्रन म अउर काम करै क जरूरत हउवे।
उन्नत जेट इंजन, गैस टर्बाइन इंजन, आधुनिक सेमीकंडक्टर, उच्च श्रेणी क रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स अउर कुछ संवेदनशील तकनीकन म भारत अबहिन पूरी तरह आत्मनिर्भर नाहीं भवा हउवे।
विशेषज्ञन क मानब हउवे कि अगर भारत का दुनिया क अग्रणी रक्षा शक्ति बने क लक्ष्य हासिल करै क हउवे, त अनुसंधान अउर मूल तकनीक विकास प अउर अधिक निवेश करै क पड़ी।
निजी उद्योगन अउर वैज्ञानिक संस्थानन क भागीदारी भी लगातार बढ़ावत रहै क जरूरत रही।
विकसित भारत 2047 क राह
विकसित भारत 2047 क सपना म रच्छा क्षेत्र क बहुत महत्वपूर्ण भूमिका हउवे।
आवइ वाला बरिसन म भारत क प्राथमिकता साफ हउवे—
- स्वदेशी अनुसंधान अउर तकनीक विकास का अउर गति देब।
- रच्छा निर्यात का 50 हजार करोड़ रुपया ते ऊपर लेइ जाब।
- नई पीढ़ी क मिसाइल, ड्रोन अउर हाइपरसोनिक तकनीक विकसित करब।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक अउर साइबर सुरक्षा का रक्षा व्यवस्था म पूरी तरह शामिल करब।
- वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला म भारत क हिस्सेदारी बढ़ावब।
- स्टार्टअप अउर निजी उद्योगन का अधिक अवसर देब।
अगर ई दिशा म लगातार काम होत रहा, त भारत दुनिया क प्रमुख रक्षा निर्माण केंद्रन म जरूर शामिल होई।
पिछला बारह बरिस भारत क रक्षा इतिहास म परिवर्तन क दहाई क रूप म याद कइल जइहैं।
एह दौरान रच्छा बजट बढ़ा, स्वदेशी उत्पादन म तेजी आई, रक्षा निर्यात नया कीर्तिमान बनाइस, अनुसंधान अउर विकास मजबूत भवा, निजी उद्योग आगे आए अउर भारत क रक्षा कूटनीति का नई पहचान मिली।
आज आत्मनिर्भरता खाली सरकारी नारा नाहीं रहिगै, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा क मजबूत आधार बनि चुकी हउवे।
भारत अब धीरे-धीरे अइसन राष्ट्र क रूप म उभरत हउवे, जवन आपन सुरक्षा खुद सुनिश्चित कर सकत हउवे, आधुनिक तकनीक विकसित कर सकत हउवे अउर दुनिया क मित्र देशन क भरोसेमंद साझेदार भी बनत जात हउवे।
अगर एह गति से सुधार जारी रहा, त विकसित भारत 2047 क सपना खाली आर्थिक महाशक्ति बने तक सीमित नाहीं रही। भारत दुनिया क प्रमुख सैन्य, वैज्ञानिक अउर सामरिक ताकतन म भी सम्मानजनक स्थान हासिल करी।




