
हिन्दुस्तान में हर बच्चा क्रिकेटर बनै के चाहत तौ रखत है, बाकिर मजा तौ बल्लेबाजी करै में ही आवत है। फील्डिंग करै या गेंद फेंकै में लोग कम मन लगावत हैं। इंदौर में जब 12 बरिस के एक बचवा क्रिकेट सीखै पहुँचा, तौ कोच कय तेज नजर ने ओकर भीतर एक बढ़िया ऑलराउंडर देख लई। बाकिर ऊ तौ सिर्फ बल्लेबाजी करै पे अड़ा रहा। बचवन कय कई बार प्यार से समझावा गय तौ कई बार डांटौ पई। आख़िर में ऊ गेंद अइसन थामिस कि बल्लबाजिन कय आफत बन गय।
कौन हैं माधव तिवारी?
आईपीएल कय मौजूदा सीजन में आपन पहिला मैच खेलै उतरे 22 बरिस के इ जवान कय जब दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अक्षर पटेल ने पंजाब किंग्स के खिलाफ गेंद थमाई, तौ ऊ निडर होके प्रियांश आर्या और कूपर कोनोली जइसन दिग्गज खिलाड़िन कय पवेलियन भेजि दिहिस। फेर जब बल्लेबाजी कय पारी आई, तौ आखिरी मोड़ पे 225 कय स्ट्राइक रेट से रन बनाके ऊ आपन टीम कय हारी भई बाजी जिताय दिहिस। इ कहानी है मध्य प्रदेश के माधव तिवारी की।
तिवारी अपनी कहानी अइसन बतावत हैं, “जब हम 13 बरिस के रहे, तब क्रिकेट कोचिंग लेय पहुँचा रहे। हमका सिर्फ बल्लेबाजी करै में मजा आवत रहा और गेंदबाजी में तौ वैसे भी थकान होत है, इहे मारे हम ओसे बचते रहे। बाकिर हमार कोच अमय खुरासिया के पास बहुत अनुभव है, उन्होंने हमका समझावा कि गेंदबाजी काहे जरूरी है। ओकरे बाद उन्होंने ही हमार गेंदबाजी और बल्लेबाजी दूनों पे बराबर मेहनत कीहिन और ओकर फायदा आज मिलत है।”
पिता अवधेश तिवारी बेटा कय प्रदर्शन देखके कुछ भावुक भये और कोच के प्रति आभार जतावत कहे, “हम 12 बरिस कय उमर में कोच खुरासिया कय इका सौंप दिहे रहे। हम तो इका जनम दिहे हैं, बाकिर इका क्रिकेटर बनावे वाला गुरु हैं।” माधव भी उनका उहे सम्मान देत है। जब कोच बचपन में कहे रहे कि इ बड़ा क्रिकेटर बनई, बस मौका मिलै दिय। दुई बरिस से मप्र क्रिकेट लीग में माधव बल्लेबाजी और गेंदबाजी में सबसे ऊपर चलत हैं।
मध्य प्रदेश रणजी टीम से अब तक मौका ना मिला
माधव भले ही मप्र लीग में धुआंधार प्रदर्शन करत होय, बाकिर मध्य प्रदेश कय सीनियर टीम में कउनो भी फॉर्मेट में उनका अब तक खिलावै लायक नहीं समझा गय। प्रदेश कय अंडर-23 टीम में जरूर शामिल किया जात रहा, बाकिर उहवा भी उनका ऊपर कय क्रम पे बल्लेबाजी नहीं मिलत है। ओकरे बाद भी जब मौका मिला, तब ऊ रन बनाइन।
कोच अमय खुरासिया बतावत हैं, “माधव बहुत आत्मविश्वासी है। उका चुनौती लेय में मजा आवत है। इहे ओकर ताकत है। हमका याद है, जब ऊ 12-13 बरिस कय रहा तौ क्लब मैच में गेंद लागै से ओकर अंगूठा सूज गय रहा। टीम कय जीतै खतिर आखिरी ओवर में विकेट कय जरूरत रही और ऊ चोटिल अंगूठा लेके कोच के पास गेंदबाजी मांगै पहुँच गय और मैच जिताय भी लाय।”




