धर्म/अध्यात्म

कामाख्या मंदिर में साल के 3 दिन काहे नाहीं होत पूजा-पाठ?

भारत अपनी संस्कृति अउर कला के साथ-साथ आपन अध्यात्म अउर धार्मिक मानयता खातिर दुनिया भर में जानल जात है। खास कइके हिंदू धरम में आस्था से जुड़ल ढेर चमत्कार देखे का मिलत है। इहाँ अइसन ढेर मंदिर हैं, जउन आपन रहस्य खातिर जानल जात हैं। पूरब भारत के असम में स्थित मां कामाख्या देवी का दरबार भी अइसने एक दिव्य अउर चमत्कारी जगह है, जेकर रहस्य आज भी मनइयन का हैरान कइ देल है। इहाँ हर साल जून के महीना में आस्था, अध्यात्म अउर रहस्य का एक अइसन अनोखा संगम देखे का मिलत है, जेका दुनिया ‘अंबुबाची मेला’ कहत है। अइहा जानीं कि इ साल कब से शुरू होई इ मेला अउर का है इ मेला की खासियत-

रहस्यन से भरा मां कामाख्या का दरबार

मां कामाख्या का इ पावन धाम असम के गुवाहाटी शहर के नीलाचल पहाड़ियन पर बना है। हिंदू धरम के कुल 51 शक्तिपीठ में कामाख्या मंदिर का स्थान बहुत खास अउर सबसे ऊँच मानल गा है। इ मंदिर की सबसे बड़ी खासियत इ है कि इहाँ बाकी मंदिरन की तरह कउनो देवी की मूरत नाहीं है। जी हाँ, मूरत की जगह इहाँ एक प्राकृतिक रूप से बनल शिला की पूजा की जात है, जेकर आकार एक योनि के समान है। अइसन मानल जात है कि देवी सती का योनि भाग इहाँ गिरा रहा, जेके बाद इ शक्तिपीठ बना।

कब से शुरू होई अंबुबाची मेला?

अंबुबाची मेला इहाँ होवे वाला एक बड़ अउर जरूरी परब है। इ मेला से बहुत ही पुरान अउर गहरा धार्मिक मानयता जुड़ल है। अइसन मानल जात है कि इ वार्षिक मेला के दौरान मां कामाख्या आपन मासिक धर्म यानी रजस्वला से गुजरत हैं। यही कारण है कि इ दौरान देवी मां का पूरा आराम दीन जात है अउर मंदिर के मुख्य कपाट तीन दिन खातिर पूरी तरह बंद कइ दीन जात हैं। इ तीन दिन में मंदिर परिसर में कउनो तरह की पूजा-पाठ, आरती या अउर कउनो धार्मिक अनुष्ठान नाहीं होत हैं। चौथे दिन, खास शुद्धिकरण अनुष्ठान कइके मंदिर के पट भक्तन खातिर खोल दीन जात हैं।

इ साल अंबुबाची मेला की शुरुआत 22 जून से होवे जा रही है, जउन 26 जून तक चलिहै। इ मेला से जुड़ल ढेर मानयता है। मानल जात है कि मंदिर का पट बंद करत समय इहाँ एक सफेद कपड़ा राखल जात है, जउन 3 दिन बाद मंदिर खुलत समय पूरा लाल रंग का होइ जात है। भक्तन का प्रसाद के रूप में इही ‘अंगवस्त्र’ यानी लाल कपड़ा का एक टुकड़ा दीन जात है, जेका लोग मां का परम आशीर्वाद मानत हैं।

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