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का शिवसेना के दुनौ गुट साथ आवे वाले हैं? 2 नेता के बयान से पलटी खाई बाजी!

आज से ठीक चार बरस पहिले जून के महीना मा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के दिन एकनाथ शिंदे का नाम पूरे दिन सुर्खियन मा छाया रहा। शिंदे के कदम शिवसेना के अगुवाई वाली महाराष्ट्र के महाविकास अघाड़ी सरकार के राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़ा कइ दिहिस। एकनाथ शिंदे अउर 40 विधायकन के बगावत के कारन उद्धव ठाकरे के कुर्सी से लइके पार्टी तक चली गई। लेकिन अब राजनीतिक अटकलें तेज अहैं अउर कहल जाइ रहा है कि का शिवसेना फेर से जुड़े वाली है? का उद्धव ठाकरे अउर एकनाथ शिंदे एक बार फेर से एक ही पार्टी मा दिखाई देहीं? महाराष्ट्र की राजनीति मा ई सवाल अचानक इहे कारन उठै लाग है काहे से कि दुनौ खेमा के बड़हन नेता अब खुल के एकजुटता की बात करै लाग हैं। दिलचस्प बात ई है कि जे बीजेपी के साथ रिश्ता के लेइके शिवसेना मा टूट भई रही, आज ओही बीजेपी का दुनौ तरफ के कुछ नेता सबसे बड़हन खतरा बताइ रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक उद्धव ठाकरे की शिवसेना अउर एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सीनियर नेता अइसन संकेत दिहे हैं। इशारा इहे तरफ है कि दुनौ गुटन का फेर से एक करै पर विचार होइ चाही। ई बयान अइसन वक्त पर आवा है जब महाराष्ट्र की राजनीति मा बीजेपी के दबदबा लगातार बढ़त दिख रहा है। ई चर्चा की शुरुआत शिवसेना यूबीटी नेता अंबादास दानवे अउर शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता अब्दुल सत्तार के बयानन से भई। जब अंबादास दानवे से पूछा गा कि का शिवसेना के दुनौ गुटन का फेर से एक होइ जाइ चाही? तौ उ कहेन, “मोका कई मौका पर अइसन लागत है लेकिन सिर्फ मेरे चाहै से कउनो फायदा नइखे।” यानी उद्धव गुट के अंदर कम से कम कुछ नेता अब खुल के ई मानत हैं कि पार्टी के दुनौ हिस्सा का फेर से साथ आवै पर विचार करै चाही।

उधर शिंदे गुट के नेता अब्दुल सत्तार भी लगभग ओही दिशा मा बात किहिन। सत्तार कहेन, “एकजुट होवै के ईहे सही समय है।” अइसन मा आप बैकग्राउंड से जुड़ी एक बात समझीं। 2022 मा एकनाथ शिंदे शिवसेना के अंदर बगावत किहिन, जेकर साथ ही तब की शिवसेना दुई हिस्सा मा बँट गई। तब की शिवसेना का अविभाजित शिवसेना भी कहा जाइ सकत है। एकरे बाद जौन दुनौ गुट बने रहैं, उहाँ दुनौ गुट अदालत से लइके चुनाव आयोग तक लड़त रहे।

पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न, संगठन अउर राजनीतिक विरासत, हर चीज के खातिर टकराव अउर संघर्ष भवा। अइसन मा आज अगर दुनौ तरफ के नेता यूनिटी या एकता की बात करत हैं तौ ई अपने आप मा बड़हन पॉलिटिकल मैसेजिंग मानल जाइ रहा है। खासकर तब जब शिंदे सेना के सीनियर नेता ई टाइमिंग का एकदम सही बतावत हैं। अंबादास दानवे का साफ कहब है कि बीजेपी धीरे-धीरे अपने सहयोगी दलान का कमजोर करत है। दानवे कहत हैं, “बड़हन मछरी छोट मछरी का निगल जात है। बीजेपी भी एनसीपी अउर शिवसेना के साथ ईहे करत है।” ई उनका दावा है। आगे उ दावा किहिन कि बीजेपी के मकसद शिवसेना का खतम करब है काहे से कि उ ई पार्टी का सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिद्वंदी नइखे मानत, बल्कि अपना दुश्मन मानत है। उ ई भी कहेन कि जौन लोग कभी अविभाजित शिवसेना छोड़ के अलग भये रहे, उहौ अब शायद ई बात का एहसास करत होइहीं।

उधर अब्दुल सत्तार जौन शिंदे की शिवसेना के नेता हैं, उहौ बीजेपी की ओर इशारा करत भये कहेन, “अगर हमार बड़हन भाई ही हमें खतम करत है, तौ फिर एकता की बात करै मा का गलत है? का हर्ज है?” ध्यान दीं, यहाँ ‘बड़हन भाई’ शब्द के इस्तेमाल भवा है। अंग्रेजी मा एकका ‘बिग ब्रदर एटीट्यूड’ कहल जाइ है। यानी उ पक्ष जौन ज्यादा मजबूत है अउर अपने करीबी छोट पक्ष पर धौंस जमावत होय।

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