
पश्चिम बंगाल सीआईडी (केंद्रीय जांच विभाग) के चार अफ़सरन की एक टीम शनिवार दुपहरिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के सरकारी आवास ‘शांतिनिकेतन’ पर अचानक पहुँच गई। यह अचानक पड़ा छपा हफ़्ता भर से कम समय में दूसरी बार है जब क़ानून लागू करै वालें मुलाज़िम भाबानीपुर निर्वाचन क्षेत्र के हरीश मुखर्जी रोड पर स्थित इस हाई-प्रोफाइल घर पर आए हैं। इससे ठीक चार दिन पहले, कोलकाता पुलिस की एक दूसरी टीम भी इसी जगह पर आई रही। राज्य की जांच एजेंसी की इस अचानक कार्रवाई के पीछे कवन मकसद है, यह अभी साफ़ नहीं है, लेकिन खबर राखन वालें ज़रिया से पता चला है कि सीआईडी के पहुंचै पर बनर्जी अपने घर पर मौजूद नहीं रहे। उनकी गैर-हाज़िरी में, सीआईडी की चार जनी की टीम वहां मौजूद सांसद के एक करीबी सहयोगी से खूब पूछताछ की और फिर वहां से चली गई।
शनिवार शाम तक, न तो सीआईडी के बड़े अफ़सरन और न ही डायमंड हार्बर सांसद के नुमाइंदों ने इस मुलाकात के मकसद या नतीजा के बारे में कोई सरकारी बयान जारी किया है। सोमवार के दिन कोलकाता की सियासत में हलचल मच गई जब छः से दस कोलकाता पुलिस वालें अचानक डायमंड हार्बर सांसद अभिषेक बनर्जी के घर पहुँच गए। हालांकि अफ़सरन ने इस कार्रवाई का कोई सरकारी कारण नहीं बताया, पर जाते वक़्त पुलिस वालें परिसर से एक कंप्यूटर मॉनिटर ले जाते देखे गए। इस बात से बहुत अटकलें लगाई जा रही हैं कि पुलिस घर के आसपास जो निगरानी का सिस्टम लाग रहा, उसे हटा रही थी।
खास तौर से, ऐसा मानै जात है कि टीम ने सीसीटीवी कैमरे हटा दिए हैं जो शुरू में बाहर की सुरक्षा देखै के लिए लगाए गए रहे, उस वक़्त जब बनर्जी को ख़ास ज़ेड+ (Z+) सुरक्षा मिली रही। यह एक ऐसी सुविधा रही जिसे पश्चिम बंगाल की सियासत में हाल ही में भई बदलाव के बाद राज्य सरकार ने वापस ले लिया है। हालांकि बनर्जी ने इस दौरे पर कुछ नहीं कहा, पर तृणमूल कांग्रेस के सीनियर सांसद सौगता रॉय ने इसे सियासी बदला बताया है। उन्होंने कहा, ‘यह सियासी बदले की भावना का हिस्सा है। बंगाल के अलग-अलग हिस्सा में टीएमसी नेताओं के घरों पर छापे मारे जात हैं। अभिषेक बनर्जी के ऊपर का इल्जाम है, यह भी अभी तक पता नहीं है… बिना किसी ठोस आधार के अभिषेक बनर्जी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, मुझे हैरानी नहीं है, काहे से कि पूरे राज्य में भाजपा का यही तरीका है।’