
गुरुवार का दिन भगवान बिष्णु भगवान क समर्पित अहै। या दिन संसार क पालनहार भगवान बिष्णु क विधि-बिधान से पूजा-अर्चा कइके नियम अहै। साथइ जीवन मा सब सुख पावै क ताई बरत भी कीन जात अहै। धार्मिक मान्यता क अनुसार, श्रीहरि क साधना करै से साधक क जीवन मा खुशियाली आवत अहै अउर कामन मा आवत बाधा दूर होत अहै। भगवान बिष्णु क्षीरसागर मा बड़हन शेषनाग क सेज पर शांत मुद्रा मा आराम करत हीं, लेकिन का आप जानत हीं कि भगवान बिष्णु शेषनाग क सेज पर काहे आराम करत हीं। अगर नाहीं पता, तौ अइसा मा आवां हम आप क एकर कारण बतावत अही।
क्षीरसागर क का मतलब अहै
क्षीर क मतलब दूध होत अहै। दूध सात्विकता अउर पवित्रता क प्रतीक मानल जात अहै। भगवान बिष्णु जी क दूध क सागर मा वास इ देखावत अहै कि ईश्वर हमेशा शुद्ध अउर पवित्र हिरदय मा ही निवास करत हीं। अगर मन दूध क तरह साफ होई, तौ वँयि ईश्वर क वास जरूर होई।
शेषनाग क रहस्य
शेष क मतलब अहै जो अंत मा बचि जाइ। जब पूरी दुनिया नस्ट होइ जात अहै, ओकरे बाद भी ऊ शेषनाग बचि रहत अहै। शेषनाग इ अनंत समय क प्रतीक हीं। भगवान बिष्णु क शेषनाग पर सोवै इ बतावत अहै कि परमेश्वर समय अउर काल से भी ऊपर हीं। भगवान बिष्णु क क्षीरसागर मा शेषनाग पर विराजमान होब इ देखावत अहै कि मनइयन क जीवन मा चाहे जेतना परेशानी आ जाइ, लेकिन आपन धीरज नाहीं खोवै चाही। ओकरे अलावा भगवान बिष्णु क शेषनाग पर आराम करब इ भी देखावत अहै कि श्री हरि आपन इच्छा अउर मोह-माया क आपन काबू मा राखि रखे हीं। क्षीरसागर मा भगवान बिष्णु क शेषनाग पर लेटे क इ अवस्था क योगनिद्रा क नाम से जानल जात अहै। ऊ इ दौरान गहरा ध्यान मा ब्रह्मांड क संचालन क चिंतन करत रहत हीं।
सास्त्रन मा मिलत अहै बरनन
भगवान बिष्णु क इ महिमा क बिस्तार से बरनन बिष्णु पुराण मा देखै क मिलत अहै। इ मा बतावा गवा अहै कि सृष्टि क उत्पत्ति से पहिले बिष्णु जी शेषनाग क सेज पर योगनिद्रा मा लीन रहत हीं।




