
अमेरिका कै विदेश मंत्री मार्को रुबियो राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप क साथे चीन दौरा पर पहुँचे अहैं, लेकिन इनकै ई यात्रा एक गजबै क कूटनीतिक बदलाव क बादै संभव होइ पाई अहै। असल मा, चीन कई साल पहिले मानवाधिकार मामला मा आलोचना करै क नाते मार्को रुबियो पर पाबंदी लगाय दिहे रहा। अइसन मा अब चीन उनकै नावँ का चीनी भाखा मा लिखै क तरीका बदलि क एक तरे क कूटनीतिक रस्ता निकारिस अहै, ताकि उन पर लाग पाबंदी तकनीकी रूप स लागू न होइ पावै।
चीन काहे लगाय रहा मार्को रुबियो पर पाबंदी?
मार्को रुबियो जब अमेरिकी सीनेटर रहेन, तब उ चीन क मानवाधिकार रिकॉर्ड, शिनजियांग मा उइगर मुसलमानन क मुद्दा, हांगकांग क हालत अउर चीन क कम्युनिस्ट सरकार क नीतियन का लै क लगातार आलोचना करत रहेन। एकरे जवाब मा चीन उन पर दुई बार पाबंदी लगाय रहा, जेहिमा चीन मा घुसै पर रोक भी शामिल रही। लेकिन अब जब मार्को रुबियो डोनल्ड ट्रंप प्रशासन मा विदेश मंत्री अहैं, चीन उनकै दौरा का नाहीं रोकिस।
चीन दियिस मार्को रुबियो का इजाजत
चीनी दूतावास क प्रवक्ता लियू पेंगयू कहिन कि, पाबंदी रुबियो क उन बयानन अउर कामन क नाते लगाइ गय रही, जउन उ अमेरिकी सीनेटर रहत काल चीन क खिलाफ दिहे रहेन। हालाँकि चीन सीधा-सीधा पाबंदी हटावै क घोषणा नाहीं कीस, बल्कि एक अलगै तरीका अपनायस। रिपोर्ट क मुताबिक, चीनी सरकार अउर सरकारी मीडिया मार्को रुबियो क सरनेम Rubio क पहिले हिस्सा ‘Ru’ का चीनी भाखा मा दूसरे अक्षर स लिखब शुरू कइ दिहिन। चीनी भाखा मा विदेशी नावन क अनुवाद आवाज क आधार पर कीन जात अहै अउर एकै उच्चारण क कई अलग-अलग अक्षर होइ सकत अहैं। चीन ‘Ru’ क बरे इस्तेमाल होवै वाला चीनी अक्षर बदलि दीस, जेहिसै तकनीकी तौर पर उ वही मनई नाहीं माना जाइ जेहि पर पहिले पाबंदी लगाइ गय रही। जानकार यका चीन क ओर स अपनावा गय एक कूटनीतिक रास्ता बतावत अहैं।
ट्रंप केउ हैं दुई चीनी नावँ
रिपोर्ट मा बतावा गवा अहै कि खाली रुबियो ही नाहीं, बल्कि डोनल्ड ट्रंप क भी चीन मा दुई अलग-अलग नावँ चलत अहैं। तेलांगपु (Telangpu) अउर छुआनपु (Chuanpu)। चीनी सरकार अउर सरकारी मीडिया अक्सर तेलांगपु नावँ कै इस्तेमाल करत अहै, जबकि आम मनई कई बार छुआनपु भी कहत अहैं।
ट्रंप-शी चिनफिंग कै शिखर वार्ता पर दुनिया कै नजर
डोनल्ड ट्रंप बुधवार का चीन पहुँचे, जहाँ उनकै राष्ट्रपति शी चिनफिंग क साथे जरूरी शिखर वार्ता होय वाली अहै। दुइनो देसन क बीच व्यापार जुद्ध, ताइवान मुद्दा, तकनीकी पाबंदी, दक्खिन चीन सागर अउर दुनिया भर क सुरक्षा जैसन मुद्दन का लै क लम्बे समय स खींचतान चलि रही अहै। अइसन मा ई बैठक बहुतै खास मानी जात अहै।
बीजिंग मा का रही कार्यक्रम?
ट्रंप अउर शी चिनफिंग कै खास बातचीत बियफे क सुबह बीजिंग क मशहूर ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ मा होइ। एकरे अलावा ट्रंप पुरान ‘टेंपल ऑफ हेवन’ क दौरा करिहैं, जहाँ पहिले क चीनी राजा-महाराजा नीक फसल क बरे पूजा-प्रार्थना करत रहेन। साँझ का दुइनो नेतन क बीच राजकीय भोज होइ। सुक्कइ का दुइनो नेता चाय अउर लंच क दौरान आगे क चर्चा करिहैं, जेकरे बाद ट्रंप अमेरिका लौटि जइहैं। जानकारों क मानब अहै कि मार्को रुबियो क मामला मा चीन कै ई कदम ई इशारा करत अहै कि बीजिंग फिलहाल अमेरिका क साथे बात-बातचीत बनाय रखै चाहत अहै, चाहै दुइनो देसन क बीच कतनो गम्भीर मतभेद काहे न होय।




