जनपद चित्रकूट के तहसील मानिकपुर के पाठा क्षेत्र मा खेती-किसानी हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही अअइ। इहाँ के पथरीली जमीन अउर पइसा के तंगी के बीच ‘जरेरा टैंक’ (तालाब) ही किसानों के आस रहा। मुला, बखत के साथे एही तालाब मा एक बड़ी समस्या आइ गई—सीपेज (जल रिसाव)। चट्टानन मा दरार होय के नाते बरसात के पइसा नवंबर आवइ से पहिले ही जमीन के भीतर समाइ जात रहा, जेहसे रबी के फसल बरे बूंद-बूंद पानी का लईका तरसत रहे।
तकनीक से मिला दरारन का समाधान:
सिंचाई विभाग ने एही गंभीर समस्या का खतम करइ बरे एक वैज्ञानिक तरीका अपनाया, जेका ‘कर्टेन ग्राउटिंग’ (Curtain Grouting) कहि जात है। जरेरा टैंक के अपस्ट्रीम इलाका मा करीब 200 मीटर के लंबाई मा ई काम कीन गवा।
- कइसन भवा काम: जमीन मा 4 से 7 मीटर गहिरे छेद कइके भारी दबाव (Pressure) के साथे सीमेंट के घोल (स्लरी) भरा गवा। ई घोल चट्टानन के भीतर छुपल सब दरारन का भरि दिहिस, जेहसे पानी के भीतर जइब बंद होइ गवा।
- चुनौतियां: काम के दौरान हुवाँ बहुत जादा कीचड़ रहा, जेहसे मशीन चलावै मा दिक्कत आवत रही। विभाग ने पहिले कीचड़ हटाइके माटी भरी अउर फिर कदम-दर-कदम ड्रिलिंग अउर ग्राउटिंग के काम पूरा कीन।
किसानों के जिंदगी मा आवा बदलाव:
जून 2024 तक ई काम पूरा होय के बाद नतीजा बहुत सुघर निकलेन। अब तालाब नवंबर मा खाली नाहीं होत, बल्कि ओमा साल भर पानी रहत अअइ।
- सिंचाई मा बढ़ोत्तरी: ग्राम पंचायत निही चिरइया अउर आसपास के गाँव के किसानों का अब रबी फसल बरे भरपूर पानी मिलि रहा अअइ। साल 2024-25 मा 338 हेक्टेयर जमीन मा सिंचाई पक्की कीन गई, जउन पहिले मुमकिन नाहीं रहा।
- भूजल स्तर मा सुधार: तालाब मा पानी रुकइ से आसपास के हैंडपंप अउर कुआँ के जल स्तर भी बढ़ि गवा अअइ। अब गर्मी मा भी गाँव मा पानी के किल्लत नाहीं रहत।
सतत जल प्रबंधन के सुघर मिसाल:
जरेरा टैंक के ई कामयाबी खाली एक सरकारी काम नाहीं अअइ, बल्कि ई सतत जल प्रबंधन के एक बहुत बड़ी मिसाल अअइ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के देख-रेख मा भवा ई छोटा सा प्रयास अब हजारों लोगन बरे खुशहाली के जरिया बनि गवा अअइ। ई मॉडल न खाली कम खरचा मा जादा फायदा देय वाला अअइ, बल्कि दूसर पथरीले इलाकन बरे भी एक सीख अअइ।
आज जरेरा टैंक फिर से एक भरोसा बनिके खड़ा अअइ, जउन ई सिखावत है कि अगर सही तकनीक अउर नीक नियत होय, तौ पुरान अउर बेकार ढांचन मा भी जान फूँकी जाइ सकत अअइ।




