उत्तरप्रदेशराज्य

‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ मा उत्तर प्रदेश के डंका—जाँच अउर इलाज मा बना देस के अग्रणी मॉडल

उत्तर प्रदेश मा चलि रहे 100 दिन के खास अभियान मा पिछले 42 दिनन मा 15 लाख से ज्यादा लोगन के स्क्रीनिंग भई अअइ, अउर रियल-टाइम डेटा बरे 'निक्षय पोर्टल' के इस्तेमाल कीन जाइ रहा अअइ।

उत्तर प्रदेश मा चलि रहा 100 दिवसीय ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ अपने 42 दिनन मा बहुत बड़ी कामयाबी हासिल कीनिस अअइ। टीबी का जड़ से खतम करइ बरे सूबे मा जिस तना से जाँच, इलाज अउर लोगन का जागरूक करइ के काम होय रहा अअइ, ऊ अब देस बरे एक मिसाल बनि चुका अअइ। गाँव-गाँव अउर गली-गली मा स्वास्थ्य सुविधायन पहुँचावै के ई मुहिम अब एक बड़े आंदोलन के रूप लेइ चुकी अअइ।

अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) श्री अमित कुमार घोष ने अभियान के समीक्षा करत भए कहिन कि उत्तर प्रदेश, प्रधानमंत्री जी के “टीबी मुक्त भारत” के सपन का पूरा करइ बरे बहुत तेज रफ्तार से आगे बढ़ि रहा अअइ।

42 दिनन के बड़े आँकड़े:

  • स्क्रीनिंग: 24 मार्च 2026 का केंद्रीय स्वास्थ्य मन्त्री श्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा शुरू कीन गइन एही अभियान मा अब तक 15,03,112 लोगन के स्क्रीनिंग कीन जाइ चुकी अअइ। खाली 04 मई का ही 45,810 लोगन के जाँच भई।
  • एक्स-रे जाँच: प्रदेश मा मौजूद 989 एक्स-रे मशीनों के जरिया अब तक 10,17,992 एक्स-रे कीन गइन अहैं, जउन तय लक्ष्य के 46 प्रतिशत अअइ।
  • मशीनी जाँच (CBNAAT): 2,578 आधुनिक मशीनों के जरिया 2,76,446 जाँच भई अहैं, जेहमा से 2,21,698 जाँच पूरी तना प्रभावी पायी गई अहैं।

इलाज अउर बचाव पर जोर:

टीबी के मरीजन के पहिचान मा भी बहुत तेजी आई अअइ। अब तक 68,273 नए टीबी मरीज ढूँढे गइन अहैं अउर उनका इलाज शुरू कइ दीन गवा अअइ। एकरे अलावा, टीबी के खतरा वाले 72,285 लोगन का ‘टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट’ (बचाव वाला इलाज) दीन जाइ रहा अअइ, ताकि बीमारी अउर न फइले।

आयुष्मान आरोग्य शिविर के कमाल:

अभियान के तहत अब तक 7,359 आयुष्मान आरोग्य शिविर लगाए गइन अहैं। इन कैंपन मा खाली टीबी नाहीं, बल्कि खून के कमी (हीमोग्लोबिन), बीपी अउर सुगर जइसन बीमारियन के भी जाँच एक साथे कीन जाइ रही अअइ। प्रदेश मा अइसन 26,722 जगह के पहिचान कीन गई अअइ जहाँ टीबी के खतरा ज्यादा अअइ, हुवां खास ध्यान दीन जाइ रहा अअइ।

जनभागीदारी अउर तकनीक:

अपर मुख्य सचिव ने साफ़ हुक्म दिहिन अअइ कि जाँच अउर स्क्रीनिंग के सब डेटा तुरंतै (Real-time) ‘निक्षय पोर्टल’ पर अपलोड कीन जाय, जेहसे काम मा पूरी सफाई रहे अउर हर मरीज पर नजर रखी जाइ सके। एही अभियान मा प्राइवेट कम्पनियन, स्वयंसेवकों अउर ‘टीबी चैंपियंस’ के भी मदद लीन जाइ रही अअइ। सोशल मीडिया अउर गाँव-गाँव मुनादी (माइकिंग) कइके लोगन का जागरूक कीन जाइ रहा अअइ।

अपर मुख्य सचिव ने मण्डलायुक्तों अउर जिलाधिकारियों (DM) से कहिन कि एही अभियान का एक ‘जनआंदोलन’ बनावा जाय। जनप्रतिनिधियन अउर आम जनता का जोड़ा जाय ताकि कौनों भी टीबी मरीज बिना जाँच अउर इलाज के न छूटइ। ऊ भरोसा जताइन कि अगर हम सब मिलिके अइसेन मेहनत करिहैं, त उत्तर प्रदेश तय बखत से पहिले ही टीबी से आजाद होइ जाई।


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