उत्तरप्रदेश

बदरीनाथ-केदारनाथ धाम मा दिव्यांग अउर बुजुर्गन का अलग से होइहें दरसन

बदरीनाथ-केदारनाथ धाम मा दिव्यांग अउर बुजुर्गन का लैकै बीकेटीसी (BKTC) एक नई व्यवस्था बनाई है। सबेरे अउर साँझ के बखत आधा-आधा घंटा का समय दरसन बदे तय कीन जई। 70 साल अउर ओसे जादा उमर के बुजुर्गन का आपन आधार कार्ड दिखावै का परी। चारधाम जात्रा के दौरान बदरीनाथ अउर केदारनाथ धाम मा दिव्यांग अउर बुजुर्गन का दरसन बदे अब लाइन मा ठाढ़ नाहीं होइ का परी। पहिली बार बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) दिव्यांग अउर बुजुर्गन बदे अलग से दरसन कै इंतजाम कर रही है। एकरे बदे एसओपी (SOP) भी तइयार कइ लीन गई है।

बदरीनाथ अउर केदारनाथ मा अबहीं तक दिव्यांग अउर बुजुर्गन बदे दरसन कै कोनो अलग से व्यवस्था नाहीं रही। ओन्हूँ का आम सरधालुन की नाईं लाइन मा लगिकै दरसन करै का परत रहा। बीकेटीसी अब दिव्यांग अउर 70 साल या ओसे जादा उमर के बुजुर्गन बदे सुगम दरसन कै व्यवस्था बनाई है। एसे धामन मा दिव्यांग अउर बुजुर्गन का दरसन करै मा बड़ी राहत मिली। बीकेटीसी नई व्यवस्था का लागू करै बदे मानव प्रचालन प्रक्रिया (एसओपी) तइयार कइ लिहिस है। जल्दीय ई नई व्यवस्था धामन मा लागू कइ दीन जाई।

एसओपी के मुताबिक, शारीरिक अउर मानसिक रूप से दिव्यांग अउर बुजुर्ग सरधालुन का दरसन करै से पहिले मंदिर समिति के काउंटर मा पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराउब जरूरी होइ। बुजुर्गन का आधार कार्ड अउर दिव्यांग जनन का दिव्यांगता प्रमाण पत्र दिखावै का परी। बदरीनाथ अउर केदारनाथ धाम मा सबेरे अउर साँझ का आधा घंटा का समय तय कीन जाई।

जल्दीय लागू होइ व्यवस्था

बदरीनाथ अउर केदारनाथ धाम मा आवै वाले दिव्यांग अउर बुजुर्ग सरधालुन के सुगम दरसन बदे बीकेटीसी नई व्यवस्था बनावै कै पहल कीन है। एसे दिव्यांग अउर बुजुर्गन का आम सरधालुन की नाईं दरसन बदे लाइन मा अगोरै (इंतजार) नाहीं करै का परी। ओन्है दरसन करै बदे अलग से समय तय कीन जाई। जल्दीय ई व्यवस्था लागू कइ दीन जाई। – हेमंत द्विवेदी, अध्यक्ष, बीकेटीसी

अब तक चारों धामन मा 13.32 लाख लोग कइ चुके हैं दरसन

चारधाम जात्रा मा अब तक 13.32 लाख से जादा तिरथयात्री दरसन कइ चुके हैं। मौसम कै चुनौती के बावजूद धामन मा सरधालुन कै भारी भीड़ उमड़ रही है। एक दिन मा औसतन 70 से 80 हजार सरधालु दरसन कर रहे हैं। केदारनाथ मा अब तक 5.50 लाख, बदरीनाथ मा अब तक 3.44 लाख, गंगोत्री मा अब तक 2.18 लाख, अउर यमुनोत्री मा अब तक 2.20 लाख सरधालु दरसन कइ चुके हैं।

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