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बस सुर्खियां बटोरवे के काम, नई ग्रामीण योजना पर जयराम रमेश ने केंद्र सरकार के घेरा

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश सोमवार का केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के ऊपर खूब बरसे। मौका था 1 जुलाई से लागू होवे वाले वीबी-जी-आरएएम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 का। रमेश ने मंत्रालय के काम-काज पर सीधा निशाना साधे। उन्होंने इसे “एक और सुस्त और सिरफिरी हेडलाइन बनावे वाली कोशिश” करार दी और इल्जाम लगावा कि योजना कैसे चली, एकर कवनो ब्यौरा अबहिन तक सामने नाहीं आवै पाय है। ई नया कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजीए), 2005 के जगह लेई और ग्रामीण इलाकन में 125 दिन के मजदूरी रोजगार के गारंटी देवे वाला एक नया ढांचा तैयार करी।

एक्स (ट्विटर) पर आपन बात राखत, संचार प्रभारी एआईसीसी महासचिव रमेश केंद्र सरकार पर खूब भड़कलें और कहिन कि ई नया कानून देहात के मजदूरन के हक के कमजोर करी।

रमेश ने कहिन कि ग्रामीण विकास मंत्रालय जो आज VB-G RAM G योजना के बारे में जानकारी जारी कीन है, ओमें कुछ भी नया नाहीं है। ई सरकार बस सुर्खियां बटोरवे में माहिर है, बाकी काम में एकदम आलस है। सिवाय एक बात के कि ‘जल्द जानकारी जारी होइ’, कवनो ठोस ब्यौरा नाहीं दीन गवा है। अगर MGNREGA के जगह ई नई योजना 1 जुलाई, 2026 से लागू करै के है, तो अबहिन तक सारा ब्यौरा सामने होवे के चाही रहै। प्रधानमंत्री के ‘ईंधन बचाओ’ के अपील के एक दिन बाद सरकार ई भरोसा जरूर दियई है कि पेट्रोल-डीजल के कवनो कमी नाहीं है।

कांग्रेस नेता जोर दियें कि योजना लागू करै से पहले राज्य सरकारन से ठीक से बातचीत होवे के चाही और ई चर्चा बस दिखावा नाहीं होवे के चाही। उन्होंने कहिन कि राज्य सरकारन के साथ इन ब्यौरों पर जनता के सामने और सार्थक बातचीत होवे के चाही, न कि बस रस्म अदायगी होवे।

रमेश दाबा ठोंक के कहिन कि एकमें कवनो संदेह नाहीं है। VB-G RAM G योजना बस काम के केंद्रीकरण करे और ग्रामीण मजदूरन के मोल-भाव करै के ताकत के कमजोर करे के काम करी। देहात के परिवारन के जो काम करै के संवैधानिक अधिकार है और मजदूरी पावे के हक है, ऊ छीना जा रहा है।

विक्षित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम 2025 के संसद के शीतकालीन सत्र में पास कीन गवा रहा और ई 100 दिन के रोजगार गारंटी के बदले 125 दिन के गारंटी देवे के बात करत है। हालांकि, विपक्ष इस बिल के बुराई करत कहत है कि ओमें से महात्मा गांधी के नाम हटावा गवा है और केंद्र-राज्य के बीच निधि के 60:40 के अनुपात में भी फेर-बदल कीन गवा है।

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