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बुन्देलखण्ड मा खुशहाली क रस्ता खोलत है बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे

लखनऊ: 05 मई, 2026. कौनों भी इलाका के बढ़वार खातिर सड़कें रीढ़ क हड्डी होति हैं। सड़क बनि जाय तौ उहइ इलाका क विकास बड़ी तेजी से होय लागत है। बुन्देलखण्ड उत्तर प्रदेश क अइसन इलाका रहा है जहाँ आवाजाही क बड़ा अभाव रहा। पथरीला इलाका होय क नाते उहवाँ के रहइय्या मनइन का तमाम तरह क दिक्कत आवत रही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी बुन्देलखण्ड के विकास खातिर खास पैकेज दिहिन अउर सिंचाई खातिर जहाँ बाँध, नलकूप अउर ताल-तलैया बनवायेन, वहीं पानी क पाइप लाइन बिछाय के गाँव-गाँव तक जल पहुँचावे क काम भी पूरा कइ दीन्हा है। बुन्देलखण्ड के चहुँओर तरक्की खातिर प्रदेश सरकार जे बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे बनवाया है, ऊ उहवाँ के मनइन खातिर एक बहुत बड़ा उपहार है, जेका आवे वाली पीढ़ी सदा याद रखी। ई एक्सप्रेस-वे चित्रकूट, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, जालौन से होत भय औरैया अउर इटावा मा लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे से जुड़ जाथै।

बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे तरक्की क पहिया: प्रदेश सरकार बुन्देलखण्ड के विकास खातिर पूरी तरह से कमर कस लिहिस है। उहवाँ के मनइन का हर तरफ से मजबूत बनाब अउर विकास करब सरकार क असली लक्ष्य है। बुन्देलखण्ड पर जितना ध्यान ई सरकार दिहिस है, उतना पहिले कबहूँ नहीं दीन्हा गवा रहा। ई एक्सप्रेस-वे क उद्घाटन परधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी करे रहेन। ई एक्सप्रेस-वे 296 किमी लम्बा है अउर अभी ई चार लेन क है, जेका आगे बढ़ाय के 6 लेन क कीन जाई। एमा चार रेलवे ओवर ब्रिज, 14 बड़े पुल, 268 छोटे पुल अउर 214 अन्डरपास बने हैं। ई एक्सप्रेस-वे टेम पर बनि के तैयार होइ गवा है, जेसे बुन्देलखण्ड के 138 गाँव अउर औरैया-इटावा के 44 गाँव सीधे जुड़ि गये हैं।

किसानन का होत है फायदा: बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे बनय से उहवाँ के किसानन क बड़ी मौज होइ गयी है। फसल मण्डी तक जल्दी पहुँच जाथै। फल, सब्जी, दूध जइसन जल्दी खराब होय वाली चीजें ताजी-ताजी बजार पहुँचति हैं, जेसे किसानन का नीक दाम मिलि जात है। जउ अब किसान बाहर क मण्डियन मा अपनी फसल बेंचै चाहै तौ ऊहूँ मा उहका फायदा मिली। खेती-किसानी खातिर जरूरी खाद-बीज भी अब टेम पर मिलि जाथै।

घूमे-फिरे क बढ़ावा: अपनी पुरानी संस्कृति अउर भाईचारा खातिर बुन्देलखण्ड जग-जाहिर है। इतिहास के नजर से भी ई इलाका बहुतै धनी है। एक्सप्रेस-वे बनय से अब सैलानियन खातिर झाँसी क किला, ओरछा, कालिंजर क किला, चित्रकूट धाम अउर खजुराहो पहुँचब आसान होइ गवा है। एसे बुन्देलखण्ड अब पर्यटन क बड़ा केन्द्र बनत जात है। सैलानियन के आवे से उहवाँ के लोककला, दस्तकारी अउर हाथ से बनी चीजन का बढ़ावा मिली, जेसे मनइन क कमाई बढ़ी।

इलाकाई उत्पाद अउर रोजगार का बढ़ावा: एक्सप्रेस-वे बनय से उहवाँ के मनइन का अपने पैर पर खड़ा होय मा मदद मिलय लाग है। आवाजाही सुलभ होय से जवानन का स्वरोजगार के साथै-साथ पत्थर क मूरति, दस्तकारी अउर माइनिंग जइसन कामन मा बढ़ावा मिलत है। सड़क के किनारे अब होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट, गाड़ी बनावे क दुकान अउर तमाम तरह क दुकान खुली हैं, जेसे मनइन क धन्धा बढ़ि रहा है। अब रोजगार खातिर मनइन का बाहर नहीं जाय क पड़ी। औद्योगिक क्षेत्र मा बड़ी-बड़ी फैक्ट्री लगिहैं तौ कुशल अउर अकुशल मज़दूरन अउर पढ़लिखे लरिका-लरिकिन का उहईं नौकरी मिलि जाई।

तेल क बचत अउर प्रदुषण मा कमी: एक्सप्रेस-वे बनय से गाड़ियाँ अब फर्राटा भरत हैं अउर टेम क बड़ी बचत होत है। रास्ता कम होय से तेल कम खर्च होत है अउर पैसा बचथै। अच्छी सड़क होय के नाते गाड़ियाँ कम तेल खाति हैं। जाम न लगय से धुँआ भी कम होत है, जेसे प्रदुषण घटि रहा है। साथै मा सड़क के किनारे पेड़-पौधे भी लगाये जा रहे हैं, जेसे हरियाली बढ़ी अउर प्रदुषण कम होई।

देस-परदेस क एक्सप्रेस-वे से जुड़ाव: बुन्देलखण्ड अब देस अउर परदेस क राजधानी सहित बड़े सहरन से सीधे जुड़ि गवा है। चित्रकूट से दिल्ली पहुँचय मा जहाँ 10-12 घण्टा लागत रहा, अब सिर्फ 6-8 घण्टा लागत है। ई एक्सप्रेस-वे लखनऊ-आगरा, पूर्वांचल, आगरा-नोएडा अउर गंगा एक्सप्रेस-वे से भी जुड़ा है, साथै मा ई प्रदेश के तमाम एयरपोर्टन से भी जुड़ि गवा है।

कारखाना, तकनीक अउर पढ़ाई-लिखाई क इन्तजाम: एक्सप्रेस-वे के किनारे अब बड़े-बड़े उद्योग लगि रहे हैं। सरकार ‘बीडा’ (BIDA) क गठन करे है, जेसे नोएडा क तर्ज पर नई टाउनशिप बसी। एसे लाखों मनइन का काम मिली। साथै मा मेडिकल कॉलेज अउर इंजीनियरिंग कॉलेज जइसन शिक्षण संस्थान भी खुलिहैं, जेसे अब लरिकन का पढ़ाई खातिर दूर नहीं जाय क पड़ी अउर महतारी-बाप क पैसा भी बची। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी क ई प्रयास बुन्देलखण्ड मा खुशहाली लई के आई।

– सरिता वर्मा, सूचना अधिकारी

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