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मद्रास हाईकोर्ट के बड़ा सवाल: मन्दिरन में वीआईपी दरसन काहे? चर्च-मसजिद में तौ ऐसा नाहीं होत है

मद्रास हाईकोर्ट ने जुम्मा के दिन साफ-साफ कहा कि मन्दिरन में वीआईपी दरसन गलत अउर भेदभाव पैदा करे वाला है, अउर ई भी कहे कि चर्च अउर मसजिद में ऐसी कउनो व्यवस्था नाहीं होत है। मामला के सुनत भये, जस्टिस जी आर स्वामीनाथन अउर जस्टिस वी लक्ष्मीनारायणन के वेकेशन बेंच कहे कि मन्त्री अउर विधायक लोगन के ई कतई नाहीं सोचे चाही कि ऊ जब चाहैं मन्दिर में पहुँच जाइहें अउर भगवान उनके इन्तजार करत होइहें। आखिर हमका वीआईपी दरसन के जरूरत ही काहे है? भगवान के सामने तौ सब बराबर हैं। मद्रास हाईकोर्ट के बेंच राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल पी.वी. बालासुब्रमण्यम के ई दलील भी खारिज कर दिहिन कि पैसा ले के वीआईपी दरसन बन्द करे से मन्दिरन के आमदनी का नुकसान होइ।

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बेंच एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करत रही, जवने में बुजुर्गन, दिव्यांगजन अउर संवैधानिक पद पर बैठे लोगन के छोड़ के मन्दिरन में वीआईपी दरसन अउर स्पेशल दरसन के पूरी तरह से खत्म करे के माँग की गई रही। विश्व हिन्दू परिषद के पदाधिकारी पी. चोकलिंगम के दाखिल ई जनहित याचिका में एचआर एंड सीई (HR&CE) विभाग के कंट्रोल में आवइ वाले मन्दिरन में वीआईपी दरसन के रिवाज के खत्म करे के माँग उठाई गई रही। उनके वकील बी. जगन्नाथ बताइन कि सुप्रीम कोर्ट बांके बिहारी मन्दिर मामला में कहे रहा कि स्पेशल दरसन अउर वीआईपी लाइन वाली सिस्टम के खत्म करे खातिर एक कमेटी बनावै चाही। एह मामला में कमेटी पिछला हफ्ता सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट जमा कीन है।

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हाईकोर्ट ई जाने के कोसिस कीन कि का मन्दिर के अफसर लोग कउनो नियम के उल्लंघन कइहें हैं। पिछला सुनवाई के दौरान, बेंच ई जाने के कोसिस कीन रही कि का तिरुप्पारनकुंड्रम मन्दिर के अफसर लोग नया मन्त्री आर निर्मलकुमार अउर उनके साथिन के दरसन करावै खातिर मन्दिर के तय समय से जादा देर तक खोल के नियम तोड़े हैं। राज्य सरकार बताइ कि मन्त्री जी के दौरा के दौरान कउनो आगम नियम के उल्लंघन नाहीं भवा रहा। ई बात के दर्ज करत भये, बेंच टिप्पणी कीन कि मन्त्री लोगन के ई नाहीं सोचे चाही कि ऊ कानून से ऊपर हैं अउर भगवान उनके इन्तजार में बैठे हैं। एकरे बाद अदालत ई मामला के अगली सुनवाई खातिर छह हफ्ता खातिर टाल दिहिस।

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