
माता लक्ष्मी क धन, वैभव, सुख अउर समृद्धि क देवी मानि जात है। हर आदमी चाहत है कि मां लक्ष्मी क कृपा उनकर घर अउर परिवार पै बनी रहै। लेकिन, का आप कबहूँ सोचे हैं कि मां लक्ष्मी क “चंचला” काहे कहा जात है? धार्मिक ग्रंथन अउर मान्यतावन में एकर पाछे एक खास कारण बतावा गवा है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, जेह घर में साफ-सफाई, मेहनत, दान-पुण्य अउर धरम क पालन होत है, मां लक्ष्मी ओतई रहत हैं। जेह घर में झगड़ा-लड़ाई, घमंड, आलस अउर गलत काम बढ़ जात हैं, ओका लक्ष्मी क स्थायी ठिकाना नाहीं माना जात। इहई वजह से ओन्हैं चंचला कहा गवा है।
आदमी क चंचल मन से काहे कइ गय है मां लक्ष्मी क तुलना?
संस्कृत भाषा में “चंचला” क मतलब होत है, जवन एक जगह स्थिर न रहै, जइसन कि हमार मन। आप अक्सर सुने होब कि मन बहुत चंचल होत है। हमेशा चलत रहत है। माता लक्ष्मी क इ नाम देवे क पाछे क वजह इ है कि धन अउर संपत्ति क कबो स्थायी नाहीं माना गवा है। जीवन में धन क आवा अउर जावा एक स्वाभाविक बात है। आज जवन आदमी धनवान है, ओकरो भविष्य में आर्थिक तंगी झेले क पड़ि सकत है। वहीं, कठिन परिस्थिति में रहै वाला आदमी भी समय के साथ अमीर बन सकत है।
अगर पुराणन क बात करीं तौ ओमा भी इ उल्लेख मिलत है कि समुद्र मंथन क दौरान माता लक्ष्मी प्रगट भई रहीं। ओन्हैं भगवान विष्णु क आपन पति चुना अउर क्षीर सागर में रहै लागीं। भगवान विष्णु सृष्टि क पालनकर्ता मानि जात हैं अउर संतुलन बनाए राखे क काम करत हैं। एहसे इ मान्यता है कि लक्ष्मी भी ओतई जियादा समय तक रहत हैं जहवां संतुलन, अनुशासन अउर अच्छा गुण मौजूद होयं।
लक्ष्मी पावे क सुनहरा सूत्र
नियमित रूप से घर क पहली रोटी गाय क अउर आखिरी रोटी कुकुर क देब तौ आपक भाग्य क दरवाजा खुले से केउ नाहीं रोक सकत। नियमित रूप से हर शुक्रवार क श्रीसूक्त या लक्ष्मी सूक्त क पाठ कइैं तौ ओतई मां लक्ष्मी क स्थायी रूप से वास होत है। रोज सबेरे उठि क सबसे पहिले घर क मालकिन अगर मुख्य दरवाजा पै एक लोटा जल डारैं तौ मां लक्ष्मी क आवे क रस्ता साफ होत है। आर्थिक संपन्नता बरे नियमित रूप से पीपल क पेड़ में जल जरूर देवैं। घर में पूजा करत समय जवन घी क दीपक बारल जात है, ओमा रुई क बाती क जगह मौली (लाल धागा) क इस्तेमाल करैं काहे से मां लक्ष्मी क लाल रंग बहुत पसंद है।




