
जब माई के साथ होय, तौ कतयौ कठिनाई काहे न आवैं, रस्ता आसान लागै लागै। अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के साथ भी अइसन ही रहा है। चार जून कय नेटफ्लिक्स पर रिलीज होय वाली फिल्म ‘मां बहन’ में माधुरी दुइ बिटियन कय सिंगल मां कय रोल में हैं। हालाँकि फिल्म कय ट्रेलर देखिकय लागत है कि ऊ अपनी बिटियन खतिन मुसीबत खड़ी कर दिहिन हैं, पर असल जिंदगी में जब ऊ अभिनय कय पेशा में आईं, तौ उनकी माई उनकी सबसे बड़हन सहारा बनी रहीं।
माई के दीन्ह सलाह आइ काम
उनकी दीन्ह सलाह माधुरी कय बहुत काम आइ रही। माधुरी कहत हैं कि मोर माई बहुत ही स्ट्रान्ग मेहरारू रहीं। ऊ मोर बैकबोन (रीढ़) रहीं। मैं जब इ पेशा में आए रहेन, तौ बहुत छोट रहेन। लोग कुछ कहि देत रहेन, तौ मैं घबराय जात रहेन कि मम्मी ऊ तौ अइसन बोलत हैं। ऊ कहत रहीं कि तू चिंता न कर, तवका काम करब, नाचब, एक्टिंग करब नीक लागत है न? मैं ‘हाँ’ कहत रहेन, तौ ऊ कहत रहीं कि तौ फिर तू कर। अपना काम अउर मेहनत बस करत रहा, खुद का बेहतर बनावा। एक बार सफलता मिलि गई न, तौ हर कउनो बदल जइहै।
मेहरारू कय करियर माइंडेड होय चाही
माधुरी आज जइसन हैं, जउन हैं, ऊ उनके व्यक्तित्व कय एक बहुत बड़हन हिस्सा हैं। फिल्म में माधुरी कय पात्र बिजनेसवुमन है, जउन ढेर सारा बिजनेस करय के बाद आख़िरी में अपना वाइन शाप चलावत है। इ फिल्म कय ट्रेलर लांच में माधुरी कहत रहीन कि मेहरारू कय करियर माइंडेड होय चाही। उनके खतिन करियर माइंडेड होब कतना जरूरी रहा है? इ पर ऊ कहत हैं कि इ शब्द सुनय में बहुत निगेटिव लागत है, खासकर अगर कउनो मेहरारू कहै। मवका लागत है काहे न करियर माइंडेड होय चाही। जब मरद अपना करियर बनावय कय बात करत हैं, तौ उनके करियर माइंडेड नइखे, बल्कि महत्वाकांक्षी कहा जात है। मेहरारू भी तौ महत्वाकांक्षी होइ सकत हैं। फिर उनके करियर माइंडेड काहे कहब, उनका भी करियर होय चाही। मेहरारू आज इतना पढ़ल-लिखल हैं, अगर करियर न बना पावय, तौ इतना पढ़-लिखिकय का फायदा। मैं जब पिछली सदी कय नब्बे कय दशक में काम करत रहेन, तौ सेट पर मेहरारू में सिर्फ अभिनेत्री अउर हेयरड्रेसर्स होत रहीं। आज सेट पर जब जात हैं, तौ लेखन, निर्देशन, असिस्टेंट डायरेक्शन से लइकय लाइटिंग डिपार्टमेंट तक में मेहरारू देखात हैं।
ब्याह करय के बाद लोग सुनाइन ताना
मवका तौ इ बात बहुत कमाल कय लागत है। अइसन न होइ पात अगर ऊ अपना करियर में दिलचस्पी न लेति। मवका लागत है कि मेहरारू कय करियर होय चाही। उनके ऊ करय कय आजादी होय चाही, जउन करय में उनके मज़ा आवत है। अगर उनके लागत है कि मवका घर पर रहय है, बचवन कय देख-रेख करय है, करियर नइखे चाहत, बाहेर काम नइखे करय है, तौ ऊ भी ठीक है। घर पर भी इतना काम होत है। घर कय मेहरारू भी बड़हन जिम्मेदारी निभावत हैं। जब मोर ब्याह भवा रहा, तब भी लोग कहत रहेन ‘अरे आप तौ शिखर पर रहीन, आप ब्याह करिकय चलि गईन, अपना करियर कय न सोचीन।’
माधुरी कय अपने ऊपर रहा आत्मविश्वास
मैं कउनो से कुछ न कहेन, काहेकि मैं जानत रहेन कि मवका अपनी जिंदगी में सही इंसान (माधुरी कय पति डाक्टर श्रीराम नेने) मिलि गय है अउर वही सही समय है, मवका उसी इंसान से ब्याह करय है। जब मैं अमेरिका गई, ब्याह कय जिंदगी जियन, तौ मैं अपना सपना जीयत रहेन। जउन कुछ भी ऊ दौरान होत रहा, ऊ मोर सपना कय हिस्सा रहा कि मवका घर, बच्चा, पति सब चाहि। मैं अपना ऊ सपना खुलिकय जियन। मवका कभी न लाग कि अब मोर करियर कय का होइ। करियर तौ हमेशा होत है। मैं जानत रहेन कि लौटिकय काम करि सकत हैं। ऊ आत्मविश्वास खुद होय चाही।
ज्यादातर शिखर पर रहय वाली माधुरी, असुरक्षा वाली भावना कय दौर से भी गुजरी हैं?
ऊ कहत हैं कि एक्टर कय जिंदगी में उतार-चढ़ाव तौ आवत ही हैं। कभी आप सफल होब, कभी नइखे। कभी फिल्म चलिहै, कभी नइखे। आज तौ इंटरनेट मीडिया पर कई तरह कय कमेंट्स होत हैं, जउन परेशान करि सकत हैं। मैं तौ हमेशा से इहे मानत आइ हैं कि आप जउन भी करत अहा, खुद खतिन करा। तवका खुशी उसी में मिलिहै, जउन करब तवका पसंद है, आपका जुनून है। लोग तौ बोलत ही रहिहैं कि आप कुछ करा न करा। अपनी जिंदगी जिया।
इंटरनेट मीडिया कय दौर में जहाँ स्टारडम पावय अउर उसका खोय जाब आसान है, वहाँ इतनय बरिसन से स्टारडम का मेंटेन रख पाना कइसे संभव होय पावत है?
इ पर माधुरी कहत हैं कि मैं जउन भी कय है, ऊ पूरा मन से दृढ़ता कय साथ कय है। मैं कभी कउनो चीज आधय मन से नइखे कय है, फिर चाहे ऊ इ इंडस्ट्री में काम करब होय या मोर जीवन से जुड़ल कउनो फैसला होय। ब्याह कय, बचवा भवा, इ देश से दूर चलि गई, फिर वापस आई, हर चीज मैं दृढ़ता कय साथ कय है। टिकय रहय खतिन मोर ख्याल से अपने फैसला पर दृढ़ रहब बहुत जरूरी है।




