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गंगा एक्सप्रेस-वे: विकास, समृद्धि और विरासत का भव्य संगम
 लखनऊ: 09 मई, 2026

उत्तर प्रदेश, जो कभी अपनी विशाल जनसंख्या, सीमित संसाधनों और विकास की चुनौतियों के कारण चर्चा में रहता था, आज तेजी से बदलते भारत की विकासगाथा का एक सशक्त अध्याय बन चुका है। बीते कुछ वर्षों में राज्य ने आधारभूत संरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के क्षेत्र में जिस गति और दृष्टि के साथ कार्य किया है, उससे न केवल प्रदेश की तस्वीर बदली है, बल्कि देश के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसी परिवर्तनकारी यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव है गंगा एक्सप्रेस-वे, जो विकास, समृद्धि और विरासत का अद्भुत संगम बनकर उभरा है।
29 अप्रैल 2026 का दिन उत्तर प्रदेश के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो चुका है, जब हरदोई जनपद की धरती से देश के मा0 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 36,230 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेस-वे (मेरठ से प्रयागराज) का लोकार्पण किया। यह केवल एक सड़क परियोजना का उद्घाटन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के भविष्य की नई दिशा और दशा का उद्घोष है। यह परियोजना प्रदेश की विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित होने जा रही है।
गंगा एक्सप्रेस-वे को केवल एक परिवहन परियोजना के रूप में देखना इसकी महत्ता को सीमित करना होगा। यह एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और पूर्वी हिस्सों को एक मजबूत आर्थिक और सामाजिक सूत्र में पिरोने का कार्य करेगा। मेरठ से शुरू होकर यह एक्सप्रेस-वे हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ होते हुए प्रयागराज तक पहुंचा है। इस प्रकार यह एक्सप्रेस-वे 12 प्रमुख जनपदों को जोड़ते हुए एक सशक्त विकास कॉरिडोर का निर्माण करता है।
इस एक्सप्रेस-वे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल दूरी को कम नहीं करता, बल्कि समय और अवसरों के अंतराल को भी घटाता है। पहले जहां मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा में लंबा समय लगता था, वही 11 घंटे की यात्रा अब केवल 6 घंटे में पूरी हो सकेगी, इससे लगभग 30 फीसदी तक ईंधन भी बचेगा। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण से व्यापार, उद्योग और आम नागरिकों के जीवन में अभूतपूर्व परिवर्तन आएगा। तेज और सुरक्षित आवागमन से आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। एक्सप्रेसवे के साथ 11 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, जो इन जिलों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेंगे।
गंगा एक्सप्रेस-वे के किनारे विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक हब उत्तर प्रदेश को औद्योगिक क्रांति की ओर अग्रसर कर रहे हैं। फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, एमएसएमई, हैंडलूम और लेदर उद्योग जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल प्रदेश में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास होगा, बल्कि लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। यह परियोजना “लोकल से ग्लोबल” की अवधारणा को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादित वस्तुएं, जो अब तक सीमित बाजारों तक ही पहुंच पाती थीं, अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगी। मेरठ के खेल उत्पाद, उन्नाव का लेदर उद्योग, प्रतापगढ़ का आंवला और हरदोई का हैंडलूम इस एक्सप्रेस-वे के माध्यम से नई ऊंचाइयों को छू सकेंगे। इससे न केवल स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को लाभ होगा, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था भी सशक्त होगी।
कृषि के क्षेत्र में भी गंगा एक्सप्रेस-वे एक क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रहा है। गंगा के मैदानी क्षेत्रों की उपजाऊ भूमि से जुड़े किसान इस परियोजना के सबसे बड़े लाभार्थियों में से एक होंगे। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण किसान अपने उत्पादों को कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंचा सकेंगे, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। इसके साथ ही, कृषि आधारित उद्योगों के विकास से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
एक समय था जब उत्तर प्रदेश की पहचान पिछड़ेपन और पलायन से जुड़ी होती थी, लेकिन आज वही प्रदेश देश में सबसे अधिक एक्सप्रेस-वे नेटवर्क वाला राज्य बनकर उभरा है। सड़कों का विस्तृत जाल, मेट्रो रेल, रैपिड रेल और आधुनिक हवाई अड्डों का विकास सभी मिलकर प्रदेश को कनेक्टिविटी की एक नई पहचान दे रहे हैं। यह परिवर्तन केवल भौतिक ढांचे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक बदलाव का भी प्रतीक है।
गंगा एक्सप्रेस-वे, उत्तर प्रदेश के “वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” बनने के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट जैसी योजनाओं ने राज्य के युवाओं और उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है। बढ़ते निवेश, औद्योगिक विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण प्रदेश तेजी से आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू इसकी सामरिक उपयोगिता भी है। उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा डिफेंस कॉरिडोर देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बना रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे इस कॉरिडोर को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा, जिससे रक्षा उत्पादन और सैन्य आपूर्ति में तेजी आएगी। इस प्रकार यह परियोजना न केवल आर्थिक, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रदेश के मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने गंगा एक्सप्रेस-वे को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की “रीढ़” बताया है। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने विकास की जो गति पकड़ी है, वह इस परियोजना में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह एक्सप्रेस-वे “स्पष्ट नीति और साफ नीयत” के साथ समयबद्ध तरीके से पूर्ण किया गया है, जो सुशासन और पारदर्शिता का प्रतीक है।
गंगा एक्सप्रेस-वे केवल कंक्रीट और डामर से बनी एक सड़क नहीं है, बल्कि यह उम्मीदों, संभावनाओं और समृद्धि का मार्ग है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करती है। गंगा नदी, जो सदियों से इस प्रदेश की जीवनरेखा रही है, उसी के नाम पर बना यह एक्सप्रेस-वे विकास की एक नई धारा का प्रतीक बन गया है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अनाज, आलू, गन्ना और मध्य उत्तर प्रदेश का धान व खाद्य प्रसंस्करण उद्योग अब सीधे बड़े बाजारों और प्रसंस्करण केंद्रों से जुड़ सकेगा और किसानों को उनके उत्पादों के लिए बेहतर मूल्य मिलेगा। गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेला देवी से लेकर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम तक पहुंचना आसान होगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को ताकत मिलेगी।
आने वाले वर्षों में गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह परियोजना न केवल प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगी, बल्कि पूरे भारत के विकास मॉडल के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बनेगी। यह “नए भारत के नए उत्तर प्रदेश” की वह तस्वीर प्रस्तुत करता है, जिसमें विकास की रफ्तार ही पहचान बन चुकी है।
 गंगा एक्सप्रेस-वे केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी पहल है, जो उत्तर प्रदेश को प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर कर रही है। यह विकास और विश्वास का ऐसा संगम है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और समृद्ध भविष्य की नींव रखेगा। गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विकास की नई पहचान बनकर उभरा है। यह न केवल एक सड़क परियोजना है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास, आर्थिक समृद्धि और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी है। आने वाले वर्षों में यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

                                           -सरिता वर्मा, सूचना अधिकारी


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उद्यान विभाग
‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ से लहलहाये बस्ती के किसानों के खेत, आधुनिक कृषि से आया नया सवेरा

लखनऊ: 09 मई, 2026

भारतीय कृषि का हृदय कहे जाने वाले उत्तर प्रदेश में खेती-किसानी आज अपने सबसे सुनहरे और परिवर्तनकारी दौर से गुजर रही है। दशकों से जिस खेती को मौसम की दया और अंधाधुंध सिंचाई के भरोसे छोड़ दिया गया था, उसे अब आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों का मजबूत संबल मिल रहा है। राज्य का उद्यान विभाग ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ (च्मत क्तवच डवतम ब्तवच) के तहत सूक्ष्म सिंचाई को घर-घर पहुँचाकर जल संरक्षण और बेहतर उत्पादन का एक अनूठा कीर्तिमान रच रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का यह अहम घटक इस मूल मंत्र पर काम करता है कि पानी की हर एक बूंद का सटीक और अधिकतम उपयोग हो। इस तकनीक ने खेती के उस पुराने और भ्रामक मिथक को जड़ से समाप्त कर दिया है जिसमें माना जाता था कि खेतों को लबालब पानी से भरने पर ही अच्छी फसल प्राप्त होती है। आज उत्तर प्रदेश में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों की बदौलत गन्ने और बागवानी जैसी नकदी फसलों में 25 से 50 प्रतिशत तक पानी की भारी बचत हो रही है। योजना की व्यापकता और सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि प्रदेश के 82 हजार से अधिक किसान ड्रिप तकनीक को पूरी आत्मीयता के साथ अपना चुके हैं। सरकार इस दिशा में लघु और सीमांत किसानों (2 हेक्टेयर तक की भूमि वाले) को ड्रिप सिस्टम लगाने पर 90 प्रतिशत तक का भारी-भरकम अनुदान दे रही है, जिससे यह महंगी तकनीक आम किसान की पहुँच में आ गई है। इस योजना का एक और क्रांतिकारी पहलू ‘फर्टीगेशन’ है, जिसमें पानी के साथ ही खाद सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचती है। इससे उर्वरक की बर्बादी रुकती है और उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक की शानदार वृद्धि होती है। गन्ना विभाग इसी तकनीक से 73,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में सिंचाई कर रहा है और ऊबड़-खाबड़, रेतीली या क्षारीय जमीनों पर भी आम और अमरूद के बाग लहलहा रहे हैं।
सरकारी योजनाओं की इसी संजीवनी ने जमीनी स्तर पर कैसा चमत्कार किया है, इसकी सबसे जीवंत मिसाल उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद के विकासखण्ड हरैया के ग्राम कसैला में देखने को मिलती है। यहाँ के निवासी श्री विजय प्रकाश शुक्ला आज महज एक किसान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए आधुनिक कृषि के एक सशक्त हस्ताक्षर बन चुके हैं। श्री राम फेर के पुत्र विजय प्रकाश एक बेहद साधारण और सीमित संसाधनों वाले कृषक परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका जीवन उन लाखों भारतीय किसानों का प्रतिबिंब था जो पीढ़ियों से चली आ रही पारंपरिक खेती के चक्रव्यूह में फंसे हुए थे। विजय प्रकाश जी दिन-रात अपने खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत करते थे, लेकिन पारंपरिक तरीके से खेत में पानी भरने में न केवल भारी मात्रा में भूजल बर्बाद होता था, बल्कि ट्यूबवेल चलाने के लिए डीजल और बिजली का खर्च उनकी कमर तोड़ देता था। इसके अलावा, खुले पानी के साथ डाली गई महंगी खाद या तो बह जाती थी या जमीन के बहुत नीचे चली जाती थी, जिससे पौधों को पूरा पोषण नहीं मिल पाता था। मौसम की अनिश्चितता, खरपतवार की भरमार और हर साल बढ़ती कृषि लागत के कारण उनकी आमदनी नगण्य रह जाती थी। अक्सर उनके मन में यह निराशा घर कर जाती थी कि क्या कभी किसानी के पेशे से परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर सकती है।
इसी घोर निराशा के बीच उद्यान विभाग की एक पहल उनके जीवन में आशा की नई किरण बनकर आई। विभाग के अधिकारियों और उद्यान निरीक्षकों ने ग्राम स्तर पर संपर्क करते हुए विजय प्रकाश शुक्ला को प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) प्रणाली के बारे में विस्तार से जागरूक किया। शुरुआत में किसी भी आम किसान की तरह उनके मन में भी इस नई तकनीक को लेकर कई आशंकाएं थीं। उन्हें लगता था कि पाइपों से बूंद-बूंद पानी गिरने से भला खेत कैसे सींचे जाएंगे। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने पूरी संवेदनशीलता के साथ उन्हें ड्रिप सिंचाई के वैज्ञानिक पहलू समझाए। उन्हें बताया गया कि कैसे यह तकनीक केवल पौधों की जड़ों को नमी देती है, अनावश्यक घास-फूस को पनपने से रोकती है और सबसे बड़ी बात, इस पूरी प्रणाली को उनके खेत में स्थापित करने के लिए सरकार 90 प्रतिशत का अनुदान देगी। सरकारी सहायता के इस भरोसे ने विजय प्रकाश जी की सारी झिझक खत्म कर दी।
तकनीक और सरकारी प्रोत्साहन से लैस होकर श्री शुक्ला ने अपने 0.80 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले खेत में एक बड़ा जोखिम उठाते हुए पारंपरिक फसलों की जगह शिमला मिर्च की खेती करने का साहसिक निर्णय लिया। उनके खेत में जब ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित हुई, तो बदलाव के बीज उसी दिन बो दिए गए। 90 प्रतिशत की भारी सब्सिडी मिलने के कारण इस आधुनिक संयंत्र का आर्थिक बोझ उनके कंधों पर बिल्कुल नहीं पड़ा। ड्रिप प्रणाली चालू होते ही उन्होंने महसूस किया कि उनके खेत में पानी की खपत में 40 प्रतिशत तक की भारी कमी आ गई है। जहां पहले सिंचाई करने में कई दिन और रातें ट्यूबवेल के पानी को क्यारियों में मोड़ने में गुजर जाती थीं, वहीं अब वाल्व खोलते ही पूरे खेत के हर एक पौधे को एक समान पानी मिलने लगा। फर्टीगेशन के माध्यम से खाद सीधे जड़ों तक पहुंचने लगी, जिससे श्रम की भारी बचत हुई और फसल पूरी तरह से निरोगी और पुष्ट होकर बड़ी होने लगी।
इस आधुनिक प्रयोग ने श्री शुक्ला की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। पारंपरिक खेती में जहां प्रति एकड़ लागत लगभग 30,000 रुपये तक पहुंच जाती थी और मुनाफा अनिश्चित रहता था, वहीं ड्रिप सिंचाई ने लागत को काफी हद तक सिकोड़ दिया। शिमला मिर्च की फसल जब तैयार हुई, तो उत्पादन और गुणवत्ता देखकर हर कोई दंग रह गया। उत्पादन में सीधे तौर पर 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने अपने इसी छोटे से खेत से लगभग 32 कुंतल उच्च गुणवत्ता वाली शिमला मिर्च का उत्पादन किया। बाजार में इस शानदार फसल को हाथों-हाथ लिया गया और उन्हें 35 से 40 रुपये प्रति किलोग्राम का बेहतरीन भाव मिला। फसल का चक्र आगे भी लाभ देता रहा और बाद में भी उन्होंने लगभग 10 कुंतल शिमला मिर्च 20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची। इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें प्रति एकड़ लगभग 60,000 रुपये तक की शुद्ध आय प्राप्त हुई। इस आय ने उनके परिवार को एक नया आर्थिक संबल दिया, पुरानी देनदारियों से मुक्त किया और उनके जीवन स्तर को पूरी तरह से ऊंचा उठा दिया।

आज विजय प्रकाश शुक्ला का खेत आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों के लिए एक ‘ओपन एयर लेबोरेटरी’ (खुली प्रयोगशाला) बन गया है। जो किसान कल तक खेती को घाटे का सौदा मानकर पलायन की सोच रहे थे, वे आज श्री शुक्ला के लहलहाते खेतों और उनके आर्थिक उत्थान को देखकर प्रेरित हो रहे हैं। श्री शुक्ला भी अपने अनुभव सीमित नहीं रखते, बल्कि उद्यान विभाग के एक अनौपचारिक ब्रांड एंबेसडर की तरह हर किसान को ड्रिप सिंचाई और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने की राह दिखाते हैं। उद्यान विभाग के निरंतर मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता ने उन्हें यह विश्वास दिला दिया है कि यदि सरकार और किसान कदम से कदम मिलाकर चलें, तो मिट्टी से सोना उगाया जा सकता है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ का विजन खेतों की प्यास बुझाने के साथ-साथ कृषक समाज की आर्थिक समृद्धि का एक बेहद सफल और दूरगामी मॉडल बन चुका है। बूंद-बूंद जल के सदुपयोग से लिखी जा रही यह विकास गाथा भारतीय कृषि व्यवस्था के उस सुखद भविष्य का दस्तावेज है, जहाँ किसान अभावों में नहीं जीता, बल्कि अपनी मेहनत, सरकारी योजनाओं के साथ और आधुनिक तकनीक के बल पर विकास के नए शिखर तय करता है। खेत की माटी में नवाचार के जो बीज आज बोए जा रहे हैं, वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक मजबूत, स्वावलंबी और उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाने का सबसे प्रामाणिक मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
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जनपद बस्ती

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