
हिंदू कैलेंडर कय हिसाब से, जब सूरज देव वृषभ राशि मा जात हैं, तब ओका वृषभ संक्रांति कहा जाथै। ई दिन सूरज देव कइ खास किरपा पावै कय नीक मौका अहै। धरम-करम कय मान्यता के हिसाब से, संक्रांति के दिन कीन गवा दान, असनान अउर खास कइके आरती कय फल कई गुना बढ़िके मिलत है।
जउ आप आपन पूजा कय पूर फल पावै चाहत अहैं अउर जिनगी मा सफलता, नीक सेहत अउर मान-सनमान कइ आस रखत अहैं, तौ वृषभ संक्रांति पर सूरज देव कइ ई आरती मन लगाइके जरूर करौ, जे कुछ इहै तराह अहै –
।।भगवान सूर्य देव कइ आरती।।
(Bhagwan Surya Dev Ji Ki Aarti)
ॐ जय सूरज भगवान, जय होय दिनकर भगवान।
जग कय नयन सरूपा, तुम हौ त्रिगुन सरूपा।
धरिहैं सबइ तुम्हार ध्यान, ॐ जय सूरज भगवान।।
।।ॐ जय सूरज भगवान…।।
सारथी अरुन हैं प्रभू तुम, सेत कमलधारी।
तुम चार भुजाधारी।।
घोडवा हैं सात तुम्हारे, करोडौ किरन पसारे।
तुम हौ देव महान।।
।।ॐ जय सूरज भगवान…।।
ऊषाकाल मा जब तुम, उदयाचल आवत हौ।
सब तब दरसन पावत हैं।।
फइलावत हौ उजियारा, जागै तब जग सारा।
करै सब तब गुनगान।।
।।ॐ जय सूरज भगवान…।।
सँझिया मा भुवनसर अस्ताचल जात हौ।
गइया तब घर आवत हैं।।
गोधूरि बेला मा, हर घर हर अँगना मा।
होइ तुम्हार महिमा गान।।
।।ॐ जय सूरज भगवान…।।
देव-दनुज नर-नारी, रिसि-मुनिवर भजत हैं।
आदित्य हिरदय जपत हैं।।
स्तोत्र ई मंगलकारी, एकर बनावट अहै न्यारी।
देउ नवा जीवनदान।।
।।ॐ जय सूरज भगवान…।।
तुम हौ त्रिकाल रचयिता, तुम जग कय अधार।
महिमा तुम्हार अपरम्पार।।
प्रानन कय सींचन कइके भक्तन का आपन देत हौ।
बल, बुधि अउर गियान।।
।।ॐ जय सूरज भगवान…।।
भूचर जलचर खेचर, सबके प्रान तुम्हीं हौ।
सब जीवन कय प्रान तुम्हीं हौ।।
वेद-पुरान बखानै, धरम सबइ तुमका मानै।
तुम ही हौ सर्बशक्तिमान।।
।।ॐ जय सूरज भगवान…।।
पूजन करति हैं दिसान, पूजैं दसो दिक्पाल।
तुम भुवनन कय प्रतिपाल।।
रितुयें तुम्हार दासी, तुम सास्वत अबिनासी।
सुभकारी अंसुमान।।
।।ॐ जय सूरज भगवान…।।
ॐ जय सूरज भगवान, जय होय दिनकर भगवान।
जग कय नयन सरूपा, तुम हौ त्रिगुन सरूपा।
धरिहैं सबइ तुम्हार ध्यान, ॐ जय सूरज भगवान।।




