
मुख्यमंत्री ने कहिन कि सोमनाथ मन्दिर का इतिहास भारत के शौर्य गाथा का इतिहास रहा है। इतिहास गवाह है कि जब-जब सोमनाथ मन्दिर पर हमला भवा तब पूरे देश के मन-प्राण दुखाए गय। प्रदेश से श्रद्धालुअन के बड़े जत्था का लेके सोमनाथ दरसन खातिर अठारह जून का बिसेस ट्रेन रवाना होई, एकरे खातिर तैयारी पूरी कीन जा रही है। एहि दरसन खातिर श्रद्धालुअन में बहुत उत्साह देखा जा रहा है। ई बात मुख्यमंत्री नायब सैनी कहिन। ऊ आज कुरुक्षेत्र पहुँचे रहिन, जहवाँ सबसे पहिले गीता स्थली ज्योतिसर तीर्थ पर मत्था टेकिन अउर देखरेख कीन। एकरे बाद मुख्यमंत्री पिहोवा के अरूणाय स्थित श्री संगमेश्वर महादेव मन्दिर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में पहुँचे, जहवाँ कलश यात्रा का रवाना कीन अउर पूजा-पाठ भी कीन। एहि बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम का लाइव भी देखावा गवा।
मुख्यमंत्री कहिन कि आज का दिन हम सबके लिए गर्व के दिन है। सोमनाथ मन्दिर के पुनर्रचना के 75 बिसु पूरा हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सोमनाथ मन्दिर से जुड़के हम सब का एकर इतिहास बताइन है। अलग-अलग प्रदेशन से भक्तन के जत्था सोमनाथ मन्दिर पहुँच रहे हैं। ऊ कहिन कि आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुअन का तीरथ करावए खातिर मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना चलई जा रही है, जेकर तहत हाल ही में करीब 850 श्रद्धालुअन के जत्था पाँच दिन के धार्मिक यात्रा कइके वापस आवा है। ऊ कहिन कि आज देश अलग-अलग योजनाअन के जरिए अपनी सांस्कृतिक जड़न से जुड़ रहा है।
मुख्यमंत्री कहिन कि सोमनाथ मन्दिर का इतिहास भारत के शौर्य गाथा का इतिहास रहा है। इतिहास गवाह है कि जब-जब सोमनाथ मन्दिर पर हमला भवा तब पूरे देश का मन दुखाए गय। सरदार वल्लभभाई पटेल सोमनाथ मन्दिर के पुनर्रचना के संकल्प लिहे रहिन अउर साल 1951 में देश के पहिले राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सोमनाथ मन्दिर के उद्घाटन कीन रहिन। ई खाली बीते कल के याद ना है, बल्कि भविष्य के भारत के एक संकल्प भी है। ऊ कहिन कि स्वदेश दर्शन योजना के तहत कुरुक्षेत्र का साल 2015 में श्री कृष्णा सर्किट में सामिल कीन गवा रहा।



