धर्म/अध्यात्म

सुरुज देव का तांबा क लोटा सेहे अरघ काहे देवल जाला?

वैदिक पंचांग के हिसाब से, एह बार जेठ के महीना में सुरुज देव 15 मई का वृषभ राशि में आवे जाइथें। इहे वजह से इ दिन वृषभ संक्रांति मनावा जाई। इ दिन सुरुज देव क कृपा पावे खातिर बहुत नीक मानल जाला। धार्मिक मान्यता क हिसाब से, सुरुज देव क पूजा करे से कारबार में सफलता मिलत है अउरी सुख-समृद्धि बढ़त है। इ दिन सुरुज देव का तांबा क लोटा से अरघ देवे क बिधान है, बाकिर का रउआ जानत हईं कि सुरुज देव का तांबा क लोटा सेहे अरघ काहे देवल जाला। अगर नाहीं पता, त आईं हम रउआ का एकर बारे में बिस्तार से बतावत अही।

का है वजह? सुरुज क प्रिय धातु है तांबा

हर धातु क नाता कवनो न कवनो ग्रह से होत है। ज्योतिष शास्त्र क हिसाब से, सुरुज देव क प्रिय धातु तांबा होखेला। इहे नाते उनका का खुश करे अउरी अरघ देवे खातिर तांबा क लोटा क इस्तेमाल होखेला। अगर रउआ कुंडली में सुरुज क स्थिति कमजोर है, त रोज सुरुज देव का तांबा क लोटा से अरघ दईं। अइसन मानल जाला कि इ उपाय करे से कुंडली में सुरुज क स्थिति मजबूत हो जाला। साथ ही मान-सम्मान बढ़त है अउरी जिनगी में सफलता मिलत है।

वृषभ संक्रांति 2026 शुभ मूरत

वैदिक पंचांग क हिसाब से, 15 मई का वृषभ संक्रांति मनावा जाई।

पुण्य काल- 15 मई का भिन्सारे 05 बज के 57 मिनट से ले के दुपहरिया 12 बज के 18 मिनट तक।

महा पुण्य काल- भिन्सारे 05 बज के 30 मिनट से ले के भिन्सारे 07 बज के 46 मिनट तक।

सुरुज देव का अरघ देवे के बखत इ बातन क धियान राखीं

सुरुज देव का अरघ देवे के बखत ‘ॐ सूर्याय नम:’ या ‘ॐ घृणि सूर्याय नम:’ मंत्र क जाप जरूर करे के चाही। धार्मिक मान्यता क हिसाब से, मंत्रन क जाप करे से मन में सकारातमकता आवत है अउरी सुरुज देव क कृपा बरसत है। सुरुज देव का अरघ देवे से पहिले नहाय के साफ कपड़ा पहिनें। अइसन मानल जाला कि बिना नहइले सुरुज देव का अरघ देवे से पूजा क पूरा फल नाहीं मिलत है। अरघ देवे के बखत जूता या चप्पल नाहीं पहिरे के चाही। इ गलती करे से सुरुज देव नाराज हो सके लें। एकर अलावा मन में कवनो के बारे में गलत नाहीं सोचे के चाही अउरी कवनो से वाद-बिबाद नाहीं करे के चाही।

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