सुप्रीम कोर्ट सुक्करवार का हवाई जहाज वाली कंपनिन कय टिकटन मा मनमानी अउर बहुत जादा दामन पर गहिर चिंता जताइस अउर केंद्र सरकार का ई हिदायत दीहिस कि यात्रीन कय बोझ कम करइ बरे उपाय खोजा जाय। जस्टिस विक्रम नाथ अउर संदीप मेहता कय बेंच एकै दिन एकै रस्ता पर किराया मा भारी अंतर का देखात भए सवाल उठाएस कि काहे एक हवाई जहाज कंपनी इकोनॉमी सीट बरे ८००० रुपिया लेति है, जबकि दूसरी १८,००० रुपिया माँगति है।
सुनवाई कय दौरान, जजन ने ई बात पर जोर दीहिस कि “कछू तुक अउर कायदा होय चाही”, काहे से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत का बताइन कि २०२४ मा पास भा नवा बिमानन कानून अब लागू होइ चुका है अउर ओकरे नियमन पर अभी भी बातचीत चल रही है। उई आगे कहिन कि सरकार ई समस्या का मानति है अउर मामले का सही मानत भए समाधानन पर बिचार कर रही है।
याचिकाकर्ता कइ कड़े नियमन कय माँग
ई मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन कय दाइर याचिका से जुड़ा है, जेहिमा उई हवाई किराया मा सफाई (पारदर्शिता) पक्की करइ अउर अचानक होय वाली बढ़ती अउर फालतू के खरचवन पर रोक लगावइ बरे एक आजाद नियामक (रेगुलेटर) बनावे कय विनती कीन रहेन। याचिकाकर्ता कय तरफ से बोलत भए सीनियर वकील रविंद्र श्रीवास्तव दलील दीहिन कि भले ही १९३७ कय विमान अधिनियम मा नियम मौजूद हैं, मुला ओकर ठीक से पालन नाहीं कीन जात है। उई बताइन कि नागरिक उड्डयन महानिदेशक के लगे किराया गलत होय की दसा मा दखल देय कय हक है, फिर भी ई बारे मा कउनो हुकुम जारी नाहीं कीन गवा है।
नवा विमानन नियम तैयार कीन जात हैं
सॉलिसिटर जनरल कहिन कि पुराने नियम अभी भी लागू हैं, जबकि २०२४ के भारतीय वायुयान अधिनियम के तहत नये नियम-कायदे बनावे जात हैं। बेंच याचिकाकर्ता का केंद्र कय हलफनामा पर जबाब देय कय हुकुम दीहिस अउर अगली सुनवाई १३ जुलाई का तय कीन।
सुप्रीम कोर्ट सुक्करवार का हवाई जहाज वाली कंपनिन कय टिकटन मा मनमानी अउर बहुत जादा दामन पर गहिर चिंता जताइस अउर केंद्र सरकार का ई हिदायत दीहिस कि यात्रीन कय बोझ कम करइ बरे उपाय खोजा जाय। जस्टिस विक्रम नाथ अउर संदीप मेहता कय बेंच एकै दिन एकै रस्ता पर किराया मा भारी अंतर का देखात भए सवाल उठाएस कि काहे एक हवाई जहाज कंपनी इकोनॉमी सीट बरे ८००० रुपिया लेति है, जबकि दूसरी १८,००० रुपिया माँगति है।
सुनवाई कय दौरान, जजन ने ई बात पर जोर दीहिस कि “कछू तुक अउर कायदा होय चाही”, काहे से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत का बताइन कि २०२४ मा पास भा नवा बिमानन कानून अब लागू होइ चुका है अउर ओकरे नियमन पर अभी भी बातचीत चल रही है। उई आगे कहिन कि सरकार ई समस्या का मानति है अउर मामले का सही मानत भए समाधानन पर बिचार कर रही है।
याचिकाकर्ता कइ कड़े नियमन कय माँग
ई मामला सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायणन कय दाइर याचिका से जुड़ा है, जेहिमा उई हवाई किराया मा सफाई (पारदर्शिता) पक्की करइ अउर अचानक होय वाली बढ़ती अउर फालतू के खरचवन पर रोक लगावइ बरे एक आजाद नियामक (रेगुलेटर) बनावे कय विनती कीन रहेन। याचिकाकर्ता कय तरफ से बोलत भए सीनियर वकील रविंद्र श्रीवास्तव दलील दीहिन कि भले ही १९३७ कय विमान अधिनियम मा नियम मौजूद हैं, मुला ओकर ठीक से पालन नाहीं कीन जात है। उई बताइन कि नागरिक उड्डयन महानिदेशक के लगे किराया गलत होय की दसा मा दखल देय कय हक है, फिर भी ई बारे मा कउनो हुकुम जारी नाहीं कीन गवा है।
नवा विमानन नियम तैयार कीन जात हैं
सॉलिसिटर जनरल कहिन कि पुराने नियम अभी भी लागू हैं, जबकि २०२४ के भारतीय वायुयान अधिनियम के तहत नये नियम-कायदे बनावे जात हैं। बेंच याचिकाकर्ता का केंद्र कय हलफनामा पर जबाब देय कय हुकुम दीहिस अउर अगली सुनवाई १३ जुलाई का तय कीन।