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सरकार निकालिस पराली के समस्या क काट, किसानन का मुफ्त मा बांटत अहै ब्रशकटर

देश मा पराली (Stubble Burning) एक बड़ी भारी समस्या अहै। दिल्ली अउर ओकरे आस-पास के इलाकन मा प्रदूषण खातिर सबसे ज्यादा पराली का ही जिम्मेदार माना जात है। ई समस्या से छुटकारा पावै खातिर सरकार कइ कोति से एक खास पहल कीन गयी है। यूपी के औरैया मा किसानन का सौर या बिजली से चलै वाले ई-ब्रशकटर मुहैया करावा गवा है। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय अउर उत्तर प्रदेश सरकार ई परियोजना का मंजूरी दिहिन है। ई परियोजना खास तौर पर किसानन खातिर बनावा गवा है।

किसानन का का फायदा होइ?

सरकार कइ कोति से चलायी गयी ई खास योजना क सीधा लाभ किसानन का मिली। बैटरी से चलै वाला ई ब्रशकटर जड़ से फसल क कटाई करत है जेसे खेत मा बहुत कम अवशेष बचतेन, अउर ओका भी चारा मा बदलै वाले सौर थ्रेशर लाए गये हैं, जेसे पराली जरावै क एक सस्ता अउर पर्यावरण के अनुकूल विकल्प मिलत है। एकरे अलावा खेती क खर्चा भी कम होइ जात है। किसानन न्यूज एजेंसी ANI का बताइन कि ई भारत क पहिला बैटरी से चलै वाला ब्रश कटर अहै। इससे पहिले भी अइसन कटर आवत रहेन मुला ओ सब पेट्रोल से चलत रहेन। पेट्रोल से चलै वाले कटर मा खर्चा बहुत ज्यादा आवत है। किसानन के मुताबिक पेट्रोल वाली मशीन मा करीब 100 रुपया घंटा क खर्चा आवत रहा, बैटरी वाली ब्रशकटर मशीन बहुतै फायदेमंद अहै।

समय क होइ बचत

किसानन बताइन कि बैटरी से चलै वाली ब्रश कटर मशीन से किसानन का बड़ा फायदा (benefit to farmers) देखै का मिलत है। किसानन कहेन कि ई मशीन से 10 मजूरन के बराबर काम होत है। ई मशीन फसल का एकदम जड़ से काटि देत है, जो कइ बार हाथ से कटाई मा भी आसान नाहीं होत। वहीं खर्चा के बात कीन जाय तौ किसानन बताइन कि पेट्रोल वाले ब्रश कटर मा जहां 100 रुपया घंटा लागत रहा, वहीं बैटरी वाले ब्रश कटर मा खाली 5 रुपया क खर्चा आवत है।

पर्यावरण का फायदा

सौर या बिजली से चलै वाले ई ब्रश कटर का खास तौर पर पराली जरावै की समस्या से निपटै खातिर बनावा गवा है। ई मशीन फसलन का जड़ से काटि देत है, अउर बचा हुआ हिस्सा खेतै मा सड़ि जात है। ई तरह से न आग लगावौ क जरूरत परत है अउर न धुआं फैलत है जेसे हवा का भी नुकसान नाहीं होत, अउर साथै मा माटी क गुणवत्ता मा भी सुधार होत है।

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