उत्तरप्रदेशराज्य

गन्ना मूल्य के बखत पर भुगतान अउर सरकारी सुविधायन से गन्ना किसानन के कमाई मा भई बढ़ोत्तरी

उत्तर प्रदेश मा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगुवाई मा गन्न्ाा किसानन का 3,20,461 करोड़ रुपिया से ज्यादा के रिकॉर्ड भुगतान कीन गवा अअइ, जेहसे किसानन के आय मा भारी बढ़ोत्तरी भई अअइ।


गन्ना के खेती हमार देस के सबसे जरूरी व्यापारिक फसलन मा से एक अअइ अउर एकर नगदी फसल के रूप मा बहुत बड़ा स्थान अअइ। चीनी के मुख्य जरिया गन्ना ही अअइ। पूरी दुनिया मा भारत चीनी बनावै वाला दूसरा सबसे बड़ा देस अअइ। गन्न्ाा के खेती से बहुत भारी संख्या मा लोगन का काम-धंधा मिलत है अउर एसे विदेशी रुपिया भी आवत है। उत्तर प्रदेश मा 29.66 लाख हेक्टेयर से ज्यादा के जमीन पर गन्न्ाा बोवा जात है। प्रदेश के 45 से ज्यादा जिला मा लगभग 48 लाख किसान गन्न्ाा के खेती करत अहैं। नगदी फसल होय के नाते गन्न्ाा किसान खूब मेहनत कइके पैदावार बढ़ा रहे अहैं अउर अमीर होय रहे अहैं।

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के बढ़िया अगुवाई मा प्रदेश मा गन्न्ाा किसानन का हर कदम पर मदद दीन जाइ रही अअइ। नई तकनीक अउर नई पैदावार वाले बीया का वैज्ञानिक तरीका से इस्तेमाल कइके किसान गन्न्ाा के पैदावार बढ़ा रहे अहैं। पिछले नौ बरिसन मा 48 लाख गन्न्ाा किसानन का अब तक ₹3,20,461 करोड़ से ज्यादा के गन्न्ाा मूल्य के भुगतान कीन गवा अअइ। ई भुगतान साल 1995 से 15 मार्च 2017 तक के (22 साल) कुल भुगतान से ₹66,703 करोड़ ज्यादा अअइ। सही बखत पर गन्न्ाा के पइसा मिलइ से किसानन के कमाई मा बढ़ोत्तरी होय रही अअइ। प्रदेश मा साल 2016-17 मा गन्न्ाा के रकबा 20.54 लाख हेक्टेयर रहा, जउन साल 2025-26 मा बढ़ि के 29.66 लाख हेक्टेयर से ज्यादा होय गवा अअइ। गन्न्ाा के खेत बढ़इ से किसानन के कमाई मा औसतन ₹400 प्रति कुन्तल के हिसाब से ₹46,880 प्रति हेक्टेयर के बढ़ोत्तरी भई अअइ।

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानन का दीन्हे गए ट्रेनिंग अउर नई तकनीक के ही नतीजा अअइ कि साल 2016-17 से पहिले जहाँ गन्न्ाा के पैदावार 72 टन प्रति हेक्टेयर रही, वहीं साल 2025-26 मा गन्न्ाा के पैदावार 84 टन प्रति हेक्टेयर होय गई अअइ। प्रदेश मा किसानन का क्षेत्रीय स्तर पर गन्न्ाा चीनी मिलन तक पहुँचावै बरे बढ़िया इंतजाम अअइ। किसानन का दीन्हे गए पर्ची के हिसाब से चीनी मिल गन्न्ाा लेइत हैं। प्रदेश मा आज के बखत मा 125 चीनी मिल चलि रही अहैं। चीनी मिलन के रोज के गन्न्ाा पेरइ के ताकत जउन साल 2017 से पहिले 7.50 लाख टीसीडी (TCD) रही, ऊ अब बढ़ि के 8.36 लाख टीसीडी होय गई अअइ। मुख्यमंत्री जी के हुक्म पर प्रदेश मा बंद पड़ी चीनी मिलन का भी चालू कीन गवा अअइ। मार्च 2017 से अब तक 03 नई चीनी मिल लगाई गई अहैं, 06 चीनी मिलन का फिर से चालू कीन गवा अअइ अउर 38 चीनी मिलन के ताकत बढ़ाई गई अअइ। इन चीनी मिलन मा लगभग 1.25 लाख लोगन का सीधे अउर अप्रत्यक्ष रूप से काम-धंधा मिला अअइ।

प्रदेश सरकार बंद पिपराईच चीनी मिल मा 60 केएलपीडी (KLPD) क्षमता के आसवनी (डिस्टिलरी) अउर बंद पड़ी छाता चीनी मिल मा 2000 टीसीडी क्षमता के नई चीनी मिल व लॉजिस्टिक हब वेयर हाउसिंग कॉम्प्लेक्स बनाय रही अअइ। प्रदेश मा पेराई सत्र 2018-19 मा नई खाण्डसारी लाइसेन्सिंग नीति लाई गई। नई खाण्डसारी यूनिट के लाइसेंस बरे चीनी मिल से दूरी का 15 किलोमीटर से घटाके 7.5 किलोमीटर कइ दीन गवा। पिछले 25 बरिसन मा पहिली बार अब तक कुल 285 नई खाण्डसारी यूनिटन बरे लाइसेंस जारी कीन गइन अहैं, जेहमा से 176 इकाइयाँ चालू होय चुकी अहैं। 285 यूनिटन के बनइ के बाद 73,700 टीसीडी के अतिरिक्त पेराई क्षमता तैयार भई अअइ, जेहसे प्रदेश के गाँव-गिरावं मा लगभग ₹1241.25 करोड़ के पइसा के निवेश भवा अअइ अउर लगभग 42,000 लोगन का काम-धंधा मिलि रहा अअइ।

प्रदेश मा साल 2017 तक एथेनॉल के कुल पैदावार 42 करोड़ लीटर रही, जउन सत्र 2023-24 मा बढ़ि के 180 करोड़ लीटर होय गई अअइ। साल 2024-25 मा ई आँकड़ा बढ़ि के 223 करोड़ लीटर पर पहुँचि गवा अअइ। पूरे देस मा एथेनॉल बनावै मा उत्तर प्रदेश पहिले स्थान पर अअइ। प्रदेश के किसानन का गन्न्ाा के खेत मा पिछले 9 बरिसन मा 36.34 लाख हेक्टेयर मा गन्न्ाा के साथे दूसर फसल (अंतःफसली खेती) करइ से 25 प्रतिशत के अतिरिक्त कमाई भई अअइ। गाँव के मेहरारुन का अपने गोड़ पर खड़ा करइ बरे प्रदेश के 37 जिला मा 3,208 महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन होय चुका अअइ, जेहमा गाँव के 60,092 मेहरारू व्यापारी के रूप मा नाम लिखवाई अहैं। महिला स्वयं सहायता समूहों का अब तक ₹6622.92 लाख के अनुदान भी बांटा गवा अअइ। प्रदेश सरकार द्वारा गन्न्ाा किसानन का दीन जाइ रही कइयौ सुविधायन के ही नतीजा अअइ कि प्रदेश के किसान गन्न्ाा पैदा कइके आर्थिक रूप से मजबूत होय रहे अहैं।

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