धर्म/अध्यात्म

शिव-पार्वती पूजा के जतन: सोमार का करीं ई छोटा सा उपाय, मिली मनचाहा बर

हिंदू धरम मा सोमार का दिन भगवान शिव अउर माता पारबती की पूजा बदे बहुत सुभ माना जात है। अइसा मानब है कि जउन कुंवारी बिटिया ई दिन पूर सरधा के साथ शिव-सक्ति कै पूजा करती हैं, उनका मनचाहा जीवनसाथी मिलत है अउर बियाह मा आवय वाली सब बाधा दूर होइ जाली। जउं आपहूँ अपने जीवन मा सुखद बियाह कै इच्छा रखत अही, तउ सोमार कै सबेरे शिव-पारबती कै नीक जतन से पूजा करीं। आवो इहाँ पूजन कै सही नियम जानित है।

सोमार पूजा कै बिधि

सोमार का सुरुज ऊगे से पहिले उठि कय नहाइ-धोइ लीं। साफ कपड़ा पहिरीं अउर मंदिर कै सफाई करीं। सबले पहिले सिबलिंग पर गंगाजल चढ़ावा जाय। ओकरे बाद पंचामृत (दूध, दहि, घीउ, सहद अउर चीनी) से अभिषेक करीं। महादेउ का 21 दूबि कै गाँठि अउर बेलपत्तर चढ़ावा जाय। ई धियान रहे कि बेलपत्तर कहूँ से कटा-फटा न होय।

माता पारबती का लाल चुनरी अउर सुहाग कै सामान चढ़ावा जाय। ई देखि कय माता पारबती खुश होइके अखंड सौभाग कै बरदान देती हैं। चंदन अउर कुमकुम चढ़ावा जाय। सफेद चीजिन कै भोग लगाईं अउर आरती से पूजा पूरी करीं। आखिर मा पूजा मा भई कौनों भी गलती बदे माफी माँगि लीं।

मनचाहा बर पाय कै खास उपाय

पूजा के बखत कुंवारी बिटियन का ‘ॐ गौरीशंकराय नमः’ मन्तर कै 108 बार जप करय का चाही। एकरे अलावा, सोमार के दिन मंदिर जाय कय माता पारबती कै गोदी मा हरदी कै गाँठि धरि देइ अउर अपनी मनौती माँगे से बियाह कै योग जल्दी बनत है।

शिव पूजा मन्तर

ॐ नमः शिवाय॥
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात॥
वंदे देव उमापतिं सुरगुरुं वंदे जगत्कारणं, वंदे पन्नगभूषणं मृधरं वंदे पशूनां पतिम्॥
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

ई बातन कै धियान राखीं

पूजा करत बखत आपन मूँह उत्तर या पूरब दिसा की ओर राखीं। शिव पूजा मा कबहूँ तुलसी कै परयोग न करीं अउर न ही शंख से जल चढ़ावा जाय। पूरी पूजा के बखत मन मा नीक बिचार राखीं अउर महादेउ से अपने सुखी जीवन कै पराथना करीं। ई दिन तामसिक चीजिन से दूर रहीं।

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