
गौशालाओं का बनाएँ आत्मनिर्भर उत्पादन केंद्र – पशुपालन मन्त्री धरमपाल सिंह
जैविक खेती का बल देइ, गोबर खाद से माटी के ताकत बढ़ावै पर जोर
प्रदेश भर मा सफल बायोगैस मॉडलों के फइलाव के तैयारी, किसानन का होई दोहरा लाभ
गोबर खाद के मानकीकरण अउर मजबूत मार्केटिंग सिस्टम पर सरकार के पूरा ध्यान
प्रदेश के पशुपालन मन्त्री श्री धरमपाल सिंह सोमवार का विधानसभा मा बने ‘समिति कक्ष 44 ख’ मा पशुपालन विभाग अउर कृषि विभाग के साथे बड़ी बइठक कीनिन। ऊ गोबर से कम्पोस्ट, बायोगैस, जीवामृत अउर घनामृत बनावै, ओकर इस्तेमाल करइ अउर बाजार मा बेचइ बरे एक बहुत बड़ी योजना तैयार करइ के हुक्म दिहिन।
बइठक मा मन्त्री सिंह कहिन कि योगी सरकार के सबसे बड़ी प्राथमिकता किसानन के कमाई बढ़ावै के साथे-साथे माटी के ताकत (उर्वरता) का फिर से बढ़ाउब अअइ। ऊ कहिन कि प्रदेश मा मौजूद गोबर के सही अउर वैज्ञानिक इस्तेमाल कइके बहुत बड़े स्तर पर जैविक खाद बनाई जाइ सकत अअइ, अउर एसे रासायनिक खाद (यूरिया, डीएपी) पर निर्भरता कम कीन जाइ सकत अअइ। ऊ अधिकारिन का हुक्म दिहिन कि प्रदेश के गौशालाओं का ‘उत्पादन केंद्र’ के रूप मा तैयार कीन जाय अउर उनका कम्पोस्ट, जीवामृत अउर दूसर जैविक सामान बनाय के अपने गोड़ पर खड़ा (आत्मनिर्भर) बनावा जाय।
मन्त्री सिंह कहिन कि प्रदेश मा लाखन मीट्रिक टन कम्पोस्ट बनावै के ताकत मौजूद अअइ, जेकरे बरे गौशालाओं, डेयरी यूनिटन अउर किसानन का मिलिके काम करब बहुत जरूरी अअइ। ऊ झाँसी, चन्दौली, फर्रुखाबाद, कानपुर अउर बाराबंकी जइसन जिला मा चलि रहे सफल बायोगैस अउर जैविक खाद के मॉडलों के बारे मा बताइन अउर हुक्म दिहिन कि इन मॉडलों के पढ़ाई (अध्ययन) कइके एका पूरे प्रदेश मा लागू कीन जाय।
बइठक मा कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांटन का बढ़ावै, गोबर गैस प्लांट लगावै अउर खेती के कचरा के सही इस्तेमाल पर भी विस्तार से बातचीत भई। मन्त्री जी कहिन कि बायोगैस से न खाली गैस अउर ऊर्जा मिली, बल्कि ओसे निकलइ वाली स्लरी (गीली जैविक खाद) खेतन बरे बहुत काम के होई, जेहसे किसानन का दोहरा फायदा मिली।
मन्त्री धरमपाल सिंह अधिकारिन का हुक्म दिहिन कि गोबर से बनी खाद के क्वालिटी पक्की करइ बरे ओकर ‘मानकीकरण’ (Standardization) कीन जाय। ऊ कहिन कि खाद के पैकिंग, ओमा नमी के स्तर अउर क्वालिटी के पक्के नियम बनाए जाइँ, ताकि किसानन का बढ़िया अउर भरोसेमंद सामान मिलि सके। एकरे साथे सहकारी समितियन के जरिया गोबर खाद गाँव-गाँव पहुँचावै अउर यूरिया के साथे एकर इस्तेमाल करइ बरे लोगन का समझावै के सम्भावना पर भी विचार कीन जाय। ऊ ई बात भी कहिन कि गोबर के खाद माटी मा ‘ऑर्गेनिक कार्बन’ बढ़ावत है, जेहसे खेत के पैदावार लम्बे बखत बरे मजबूत होत है। एही दिशा मा वैज्ञानिकन, कृषि विश्वविद्यालयन अउर कृषि विज्ञान केंद्रन का जोड़िके आसान अउर कम खरचा वाले नए तरीके तैयार करइ के हुक्म दीन गइन।
बइठक मा ई फैसला भी लिया गवा कि गोबर गैस प्लांट लगावै का बढ़ावा देइ बरे नई योजना बनाई जाय, जेहसे ज्यादा से ज्यादा किसान एसे जुड़ि सकइँ। साथे-साथे जैविक खाद बनावै के साथे ओका बाजार मा सही से बेचइ के इंतजाम करइ पर भी जोर दीन गवा, ताकि सामान किसानन तक आसानी से पहुँचे अउर उनका बढ़िया दाम मिलि सके।
मन्त्री सिंह कहिन कि योगी सरकार खेती-किसानी अउर पशुपालन का एक साथे जोड़िके प्रदेश मा जैविक खेती का एक नई दिशा देइ बरे पूरी तना तैयार अअइ। गोबर से बने सामानन के इस्तेमाल से जहाँ पर्यावरण के बचाव होई, वहीं गाँव के अर्थव्यवस्था का भी मजबूती मिली अउर किसानन के कमाई मा हमेशा बरे बढ़ोत्तरी पक्की होई।




